एयर फ्रायर से कैंसर का डर कितना सही? डॉक्टर ने बताई पूरी हकीकत एयर फ्रायर अब हर घर की पसंद बनता जा रहा है, लेकिन इससे कैंसर होने की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने इस दावे की असलियत साफ की है। सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता ने लोगों की रसोई की आदतें बदल दी हैं। तली-भुनी चीजों का शौक तो कम नहीं हुआ, पर अब उन्हें कम तेल में बनाने का तरीका लोग खोजने लगे हैं और यहीं एयर फ्रायर ने जगह बना ली है। चूंकि इसमें तेल लगभग न के बराबर लगता है, इसलिए मिडिल क्लास परिवारों में इसका चलन तेजी से बढ़ा है। मगर इसी लोकप्रियता के साथ एक सवाल भी फैल गया कि क्या एयर फ्रायर का इस्तेमाल कैंसर का खतरा बढ़ा रहा है। इसी उलझन को दूर करने के लिए कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने अपने YouTube वीडियो में पूरी बात रखी है। आखिर एयर फ्रायर काम कैसे करता है दरअसल एयर फ्रायर एक छोटा कन्वेक्शन ओवन ही है। यह गर्म हवा को तेजी से घुमाता है और खाने के चारों ओर समान रूप से फैलाता है, जिससे चीजें बाहर से कुरकुरी और अंदर से पकी हुई बनती हैं। डॉक्टर के मुताबिक इसमें न कोई रेडिएशन होता है और न ही कोई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंग, यह सिर्फ हीट पर काम करता है। खास बात यह है कि डीप फ्रायर के मुकाबले इसमें 80 प्रतिशत से भी कम तेल लगता है। क्या इसमें बना खाना सुरक्षित है डॉ. तरंग कृष्णा का साफ कहना है कि एयर फ्रायर में पकाया गया खाना सुरक्षित है, क्योंकि इसमें किसी तरह का रेडिएशन नहीं निकलता और पकाते समय तेल की भी जरूरत नहीं पड़ती। कम तेल का सीधा मतलब है कम कैलोरी, और कम कैलोरी यानी मोटापे का खतरा घटना। चूंकि मोटापा खुद कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता है, इसलिए एक तरह से एयर फ्रायर में बना खाना सेहत के पक्ष में जाता है। फिर कैंसर वाली बात कहां से आई अगर खाना सुरक्षित है तो कैंसर की अफवाह की वजह क्या है। दरअसल इसकी जड़ एक केमिकल में छिपी है जिसका नाम है एक्रिलामाइड। आलू, ब्रेड या चिप्स जैसे स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ जब बहुत ऊंचे तापमान पर पकते हैं, तो एक केमिकल रिएक्शन होता है और उसी दौरान एक्रिलामाइड बनता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर द्वारा जानवरों पर की गई स्टडी में इस केमिकल को कैंसर पैदा करने वाला कारक माना गया है। लेकिन यहां एक अहम बात समझनी जरूरी है कि इंसानों में खाने के जरिए पहुंचने वाले एक्रिलामाइड और कैंसर के बीच अब तक कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है। साल 2024 में एक लाख से ज्यादा लोगों पर एयर फ्रायर को लेकर हुई एक स्टडी में भी लोगों में कैंसर का कोई जोखिम नहीं पाया गया। तो सावधानी किस बात की खतरा एयर फ्रायर से नहीं, बल्कि गलत तरीके से पकाने से है। जब खाने को जरूरत से ज्यादा देर तक पकाया जाता है, तभी एक्रिलामाइड बनना शुरू होता है और यही सेहत के लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह है कि एयर फ्रायर में कुछ भी बनाते समय उसे न ओवर कुक करें और न ही जरूरत से ज्यादा ब्राउन होने दें, वरना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। इसका आप पर असर आपके लिए इसका मतलब: • अगर आप घर में एयर फ्रायर इस्तेमाल करते हैं तो डरने की जरूरत नहीं, यह रेडिएशन रहित है और कम तेल से कैलोरी घटाकर मोटापे का खतरा कम करता है। • खाने को ज्यादा देर तक पकाने या ज्यादा ब्राउन करने से बचें, क्योंकि तभी नुकसानदायक एक्रिलामाइड बनता है। • स्टार्च वाली चीजें जैसे आलू और चिप्स को बहुत ऊंचे तापमान पर ओवर कुक न करें। सवाल-जवाब 1. क्या एयर फ्रायर में बना खाना कैंसर का कारण बनता है? डॉ. तरंग कृष्णा के मुताबिक इंसानों में खाने से मिलने वाले एक्रिलामाइड और कैंसर के बीच अब तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है, इसलिए इसे सुरक्षित माना जाता है। 2. एयर फ्रायर में एक्रिलामाइड कब बनता है? जब आलू, ब्रेड या चिप्स जैसी स्टार्च वाली चीजें बहुत ऊंचे तापमान पर या जरूरत से ज्यादा देर तक पकाई जाती हैं, तब यह केमिकल बनता है। 3. एयर फ्रायर डीप फ्रायर से कितना कम तेल इस्तेमाल करता है? डीप फ्रायर की तुलना में एयर फ्रायर में 80 प्रतिशत से भी कम तेल लगता है। 4. 2024 की स्टडी में क्या पाया गया? साल 2024 में एक लाख से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी में एयर फ्रायर के इस्तेमाल से कैंसर का कोई जोखिम नहीं मिला। https://trendkia.com/health/eyara-phrayara-se-kainsara-ka-dara-kitana-sahi-doktara-ne-batai-puri-hakikata-1440 TrendKia — Har trend, sabse pehle.