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  "type": "article",
  "title": "फरीदाबाद के विशेषज्ञ डॉक्टर चेतन शर्मा से जानिए हाथ-पैर सुन्न होने के कारण और आयुर्वेदिक उपाय",
  "summary": "हाथ और पैरों में बार-बार सुन्नपन महसूस होना शरीर में विटामिन की कमी या नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है। फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर चेतन शर्मा ने इसके कारण, तिल के तेल की मालिश और मानसून के दौरान खान-पान से जुड़ी जरूरी सलाह दी है।",
  "content": "अक्सर देखा जाता है कि लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने या पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने के बाद अचानक हाथ या पैर सुन्न पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित अंग की संवेदना काफी हद तक खत्म हो जाती है और उसे हिलाना-डुलाना भी कठिन लगने लगता है। यदि पैर सुन्न हो जाए तो व्यक्ति के लिए संतुलन बनाकर खड़े होना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे जमीन पर गिरने या चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। अधिकांश लोग इस स्थिति को मामूली मानकर टाल देते हैं, लेकिन यदि हाथ और पैरों में बार-बार सुन्नपन आ रहा है तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। तंत्रिका तंत्र से जुड़ी इस समस्या के पीछे कई शारीरिक और पोषण संबंधी कारण छिपे हो सकते हैं, जिनकी सही समय पर पहचान करना बेहद आवश्यक है।\n\nशरीर में पोषण और नसों पर दबाव से जुड़ी मुख्य वजहें\nफरीदाबाद स्थित सर्वोदय अस्पताल के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर चेतन शर्मा के अनुसार, हाथ और पैरों में सुन्नपन आने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों, विशेषकर विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी के कारण नसों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे झनझनाहट और सुन्नता की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा जब किसी वजह से नसों पर भौतिक दबाव पड़ता है या नर्व कंप्रेशन की स्थिति बनती है, तब भी प्रभावित हिस्से तक मस्तिष्क के संदेश सुचारू रूप से नहीं पहुंच पाते। इन चिकित्सीय कारणों को समझे बिना केवल सतही उपायों पर निर्भर रहना भविष्य में नसों की कमजोरी को बढ़ा सकता है। इसलिए बार-बार होने वाले सुन्नपन के मूल कारण का पता लगाना उपचार की दिशा में पहला कदम है।\n\nआयुर्वेदिक मालिश और सिकाई का प्रभावकारी तरीका\nसुन्नपन की समस्या से राहत पाने के लिए आयुर्वेद में प्राकृतिक तेलों की मालिश और हल्की सिकाई को काफी असरदार माना गया है। डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि इस समस्या में घर पर ही काले तिल के तेल का प्रयोग करना बेहद फायदेमंद सिद्ध होता है। यदि किसी कारणवश काले तिल का तेल उपलब्ध न हो पाए, तो विकल्प के तौर पर शुद्ध सरसों के तेल का भी उपयोग किया जा सकता है। प्रभावित अंग पर इस तेल को हल्का गुनगुना करके हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए और उसके बाद कपड़े या गर्म पानी की थैली से सिकाई करनी चाहिए। यह प्रक्रिया प्रभावित हिस्से में गर्माहट पैदा करती है और वहां के रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है।\n\nनसों को सक्रिय करने में प्राकृतिक तेलों की भूमिका\nतेल से नियमित मालिश और सिकाई करने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इससे सुप्त पड़ी नसों को दोबारा सक्रिय करने में मदद मिलती है। मालिश की हल्की मालिश से नसों के आसपास का तनाव कम होता है और सुन्नपन के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। यह एक ऐसा सरल और सुलभ उपाय है जिसे बिना किसी जटिल उपकरण के घर पर आसानी से अपनाया जा सकता है। हालांकि डॉक्टर शर्मा यह भी स्पष्ट करते हैं कि यदि सुन्नपन की समस्या बार-बार हो रही हो या लगातार बनी रहती हो, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श और चिकित्सकीय जांच कराना अनिवार्य हो जाता है।\n\nउम्र की सीमा नहीं: सुन्नपन को सामान्य मानने की भूल न करें\nआम तौर पर लोगों में यह धारणा होती है कि हाथ-पैर सुन्न होने की समस्या केवल बुजुर्गों या ढलती उम्र के व्यक्तियों को ही होती है। डॉक्टर चेतन शर्मा इस धारणा को खारिज करते हुए कहते हैं कि यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। युवाओं, वयस्कों और बुजुर्गों में इसके पीछे अलग-अलग शारीरिक या आहार संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए उम्र का हवाला देकर इसे स्वाभाविक मान लेना और डॉक्टरी सलाह न लेना जोखिम भरा हो सकता है। यद्यपि घरेलू मालिश और सिकाई का तरीका सामान्य स्थितियों में सुरक्षित और असरदार है, फिर भी यदि लक्षण बने रहते हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर सही कारण का निवारण करना चाहिए।\n\nबरसात के मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान और वात-पित्त दोष\nखान-पान की आदतें भी नसों के स्वास्थ्य और शरीर के दोषों को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। डॉक्टर चेतन शर्मा के मुताबिक, खासकर बारिश के मौसम में आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मानसून में बहुत से लोग रेफ्रिजरेटर में रखा बासी या पुराना भोजन दोबारा गर्म करके खाने की आदत बना लेते हैं। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, बासी और पुन: गर्म किया गया खाना शरीर में वात और पित्त दोष को बढ़ाने वाला माना जाता है। शरीर में वात दोष का असंतुलन नसों में दर्द, अकड़न और सुन्नता का प्रमुख कारण बनता है। इसीलिए वर्षा ऋतु में हमेशा ताजा, गर्म और अच्छी तरह से पकाया गया भोजन करने की सलाह दी जाती है।\n\nताजा भोजन अपनाएं और गंभीर लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें\nबरसात के दिनों में ऐसा सुपाच्य आहार ग्रहण करना चाहिए जिसे पाचन तंत्र आसानी से पचा सके। लंबे समय तक रखे हुए खाद्य पदार्थों का सेवन पाचन तंत्र के साथ-साथ शरीर के समग्र संतुलन को बिगाड़ता है। यदि हाथ या पैर सुन्न होने की समस्या कभी-कभार लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से होती है, तो स्थिति बदलकर थोड़ा टहल लेने या अंगों को हल्का-फुल्का हिलाने से आराम मिल जाता है। परंतु यदि सुन्नपन बार-बार लौटकर आता है, लंबे समय तक बना रहता है या इसके साथ ही अंगों में कमजोरी, भारीपन और चलने में संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें महसूस होती हैं, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपूर्ण जांच करानी चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nहाथ-पैर सुन्न होने की समस्या को शुरुआती दौर में समझकर सही कदम उठाने से गंभीर तंत्रिका संबंधी दिक्कतों से बचा जा सकता है।\n\n• भारत में: यदि आपको अक्सर झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है तो डॉक्टर से जांच करवाकर विटामिन बी12 और विटामिन डी के स्तर का पता लगाएं। सही समय पर पोषण का ध्यान रखने से नसों की कमजोरी दूर होती है।\n• फरीदाबाद में: फरीदाबाद और आसपास के निवासी नसों की पुरानी समस्या होने पर सर्वोदय अस्पताल के आयुर्वेदिक विभाग में विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। डॉक्टर की देखरेख में कराया गया इलाज त्वरित राहत प्रदान करता है।\n• दैनिक घरेलू देखभाल: काले तिल या सरसों के तेल की हल्की मालिश और गुनगुनी सिकाई को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। इससे नसों में रक्त प्रवाह सुधरता है और सुन्नपन में तुरंत आराम मिलता है।\n• खान-पान में बदलाव: बरसात के मौसम में फ्रिज का बासी खाना खाने से बचें और हमेशा ताजा व सुपाच्य भोजन ग्रहण करें। आहार में यह सतर्कता शरीर में वात और पित्त दोष को संतुलित रखती है।\n• गंभीर लक्षणों पर ध्यान: यदि सुन्नपन के साथ चलने में परेशानी या शरीर में कमजोरी महसूस हो तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। तुरंत योग्य चिकित्सक से जांच कराएं ताकि नर्व कंप्रेशन का इलाज समय पर हो सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हाथ-पैर सुन्न होने के मुख्य कारण क्या हैं?\nमुख्य कारणों में शरीर में विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी, नसों पर दबाव यानी नर्व कंप्रेशन तथा लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना शामिल है।\n\n2. सुन्नपन से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय में किस तेल का उपयोग करना चाहिए?\nसुन्नपन से राहत के लिए काले तिल के तेल से हल्की मालिश और सिकाई करने की सलाह दी जाती है। यदि काला तिल का तेल न हो तो सरसों के तेल का प्रयोग भी किया जा सकता है।\n\n3. मालिश और सिकाई से सुन्न अंगों में कैसे सुधार होता है?\nतेल से मालिश और सिकाई करने से प्रभावित हिस्से में गर्माहट आती है, जिससे नसों को सक्रिय करने और रक्त संचार सुधारने में मदद मिलती है।\n\n4. बारिश के मौसम में किस तरह के खान-पान से बचना चाहिए?\nबरसात के मौसम में फ्रिज में रखे बासी या पुराने खाने को दोबारा गर्म करके खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में वात और पित्त दोष को बढ़ाता है।\n\n5. डॉक्टर से जांच कब करानी चाहिए?\nयदि सुन्नपन बार-बार हो रहा हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ शरीर में कमजोरी और चलने में परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "हाथ पैर सुन्न होना",
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    "तिल का तेल मालिश"
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