# डायबिटीज और मोटापे पर लगेगी लगाम, फरीदाबाद की न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया 50:25:25 थाली का फॉर्मूला

> अमृता अस्पताल फरीदाबाद की चीफ क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. चारु दुआ ने बताया कि कैसे संतुलित थाली और सही जीवनशैली से डायबिटीज, मोटापे और हाई BP से बचाव किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/faridabad-ki-dr-charu-dua-ne-bataya-50-25-25-thali-ka-phormula-22274 · **Language:** Hindi
**Tags:** राष्ट्रीय पोषण माह, संतुलित थाली, मोटापा, डायबिटीज, डॉ चारु दुआ, अमृता अस्पताल फरीदाबाद

भारत इस समय एक अनोखी स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ पोषण की उलझी हुई तस्वीर कहते हैं। देश में एक ओर जहां छोटे बच्चों और महिलाओं के बीच कुपोषण और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण इलाकों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हाई BP जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन करके अपना पेट तो भर लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके शरीर को आवश्यक मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाते। इस स्थिति की मुख्य वजह दैनिक खान-पान की आदतों में आया बदलाव है। आज हमारी दैनिक थाली में अत्यधिक तेल, नमक, चीनी और डिब्बाबंद पैकेज्ड फूड की मात्रा बढ़ती जा रही है, जबकि मौसमी फल, हरी सब्जियां और दालों का सेवन लगातार घट रहा है। इसके साथ ही दैनिक जीवन में शारीरिक मेहनत और चहल-पहल भी पहले के मुकाबले बेहद कम हो गई है।

## न्यूट्रिशन का सही अर्थ: पेट भरने से आगे की समझ
फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल में चीफ क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और क्लिनिकल न्यूट्रिशन विभाग की प्रमुख डॉ. चारु दुआ के अनुसार, पोषण के महत्व को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि न्यूट्रिशन वास्तव में क्या होता है। समाज में आमतौर पर लोग पेट भरकर भोजन कर लेने को ही सही पोषण मान बैठते हैं, लेकिन डॉक्टरी दृष्टिकोण से यह धारणा पूरी तरह गलत है। केवल भूख मिटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन के माध्यम से शरीर को सही अनुपात में सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलना अनिवार्य होता है। बच्चों के संदर्भ में बात करें तो सही पोषण उनकी शारीरिक वृद्धि और मानसिक विकास की बुनियादी जरूरत है। वहीं वयस्कों और बुजुर्गों के लिए संतुलित पोषण शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने और जीवनशैली से जुड़ी तमाम बीमारियों से बचाव के लिए रक्षा कवच का काम करता है।

## राष्ट्रीय पोषण माह का इतिहास और जन आंदोलन की सोच
राष्ट्रीय पोषण माह की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. चारु दुआ ने बताया कि पोषण जागरूकता अभियान की शुरुआत बहुत शुरुआती दौर में केवल एक दिन के कार्यक्रम के रूप में हुई थी। इसके बाद 1 सितंबर 1982 को पहली बार इसे पोषण सप्ताह के रूप में आयोजित किया जाने लगा। वर्षों बाद साल 2018 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस पहल को व्यापक रूप देते हुए एक सप्ताह के कार्यक्रम से बढ़ाकर पूरे सितंबर महीने का राष्ट्रीय अभियान बना दिया गया। तभी से हर साल सितंबर में राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य केवल कुपोषण के पारंपरिक मुद्दों पर चर्चा करना ही नहीं है, बल्कि बढ़ते वजन, मोटापे और असंतुलित खान-पान से उपजने वाली आधुनिक बीमारियों के प्रति लोगों को सचेत करना भी है। सरकार की कोशिश यह है कि पोषण का मुद्दा सिर्फ एक सरकारी योजना तक सीमित न रहे, बल्कि यह हर परिवार के रसोईघर से जुड़ा एक सशक्त जन आंदोलन बन सके।

## भरपेट भोजन के बाद भी कुपोषण: हिडन हंगरी का खतरा
डॉ. चारु दुआ स्पष्ट करती हैं कि भरपेट खाना खाने के बाद भी कोई व्यक्ति पोषक तत्वों की कमी यानी हिडन हंगरी का शिकार हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपनी दैनिक खुराक में कार्बोहाइड्रेट का सेवन तो बहुत अधिक कर रहा है, लेकिन उसकी थाली में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल नगण्य हैं, तो उसका शरीर आंतरिक रूप से कुपोषित ही रहेगा। बच्चों की बढ़ती उम्र में प्रोटीन और अन्य सूक्ष्म तत्वों का न मिलना उनके शारीरिक गठन और दिमागी विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, यदि आहार में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और खाली कैलोरी शामिल होगी, तो वह सीधे तौर पर शरीर का वजन बढ़ाएगी। अतिरिक्त वजन बढ़ने के साथ ही व्यक्ति में हाई BP, डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्याओं के पनपने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

## खान-पान और जीवनशैली के वे बदलाव जिनसे बढ़ रहीं बीमारियां
भारत में मोटापे और डायबिटीज के मामलों में आई अचानक तेजी के पीछे जीवनशैली और खान-पान में आए गहरे बदलाव जिम्मेदार हैं। डॉ. चारु दुआ के विश्लेषण के अनुसार, पहले के समय में लोग घर में तैयार ताजा और पारंपरिक भोजन करना पसंद करते थे। लेकिन आधुनिक दौर में बाहर का खाना खाने और मोबाइल ऐप से ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने का चलन बेहद तेजी से बढ़ा है। व्यावसायिक रूप से तैयार इन पकवानों में फैट और कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जबकि इनमें स्वास्थ्यवर्धक फल और सब्जियों का अनुपात बहुत कम होता है। इसके साथ ही हमारी दैनिक शारीरिक गतिविधियों में भारी गिरावट आई है। पुराने समय में लोग नजदीकी बाजार या गंतव्य तक जाने के लिए पैदल चलना पसंद करते थे, परंतु अब बहुत छोटी दूरी तय करने के लिए भी दोपहिया या चौपहिया वाहनों का उपयोग किया जाता है। खान-पान और शारीरिक गतिहीनता का यही मिला-जुला बदलाव आज बीमारियों का प्रमुख कारण बन चुका है।

## संतुलित थाली का 50:25:25 फॉर्मूला: क्या और कितना खाएं
शरीर को निरोगी रखने के लिए डॉ. चारु दुआ एक आदर्श और संतुलित थाली की रूपरेखा साझा करती हैं। उनके अनुसार, हमारी रोजाना की थाली को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। थाली का लगभग आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) ताजे मौसमी फलों और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों से भरा होना चाहिए। इसके बाद थाली के एक चौथाई हिस्से (25 प्रतिशत) में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन शामिल होना चाहिए, जिसके लिए दालें, चना, राजमा, पनीर और अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोतों का चुनाव किया जा सकता है। बाकी बचे एक चौथाई हिस्से (25 प्रतिशत) में कार्बोहाइड्रेट यानी गेहूं की रोटी, चावल या अन्य साबुत अनाज रखे जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, दैनिक आहार में प्रतिदिन एक मुट्ठी सूखे मेवे (नट्स) को भी शामिल करने की सलाह दी जाती है। साथ ही दूध और दही को भी अपनी रोजाना की डाइट का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए।

## तेल की मात्रा पर नियंत्रण और जंक फूड से दूरी
खान-पान में सुधार के लिए पकाने के तेल की खपत को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है। डॉ. चारु दुआ के अनुसार, सामान्य स्थिति में एक व्यक्ति के लिए एक महीने में लगभग आधा किलो (0.5 kg) कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल पर्याप्त माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा जीवनशैली में तत्काल बड़ा बदलाव नहीं कर सकता, तो वह केवल अपने रोजमर्रा के खाने में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करके भी एक बेहतरीन शुरुआत कर सकता है। इसके साथ ही बाजार में मिलने वाले जंक फूड, अत्यधिक चीनी वाले कार्बोनेटेड सोडा और अति-मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन पर कड़ी लगाम लगाना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर जोर देती हैं कि सही पोषण का मतलब भोजन त्यागना या भूखे रहना बिल्कुल नहीं है, बल्कि सही समय पर सही मात्रा में पौष्टिक चीजें खाना ही सच्चा पोषण है।

## निरोगी जीवन के लिए दैनिक आदतों में सुधार
राष्ट्रीय पोषण माह का मुख्य और बुनियादी संदेश यही है कि भोजन को केवल पेट भरने का साधन न मानकर शरीर को ऊर्जावान और निरोगी बनाए रखने की औषधि के रूप में देखा जाना चाहिए। हमारी दैनिक थाली में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, आवश्यक विटामिन और मिनरल का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है। यदि हम आज से ही अपनी थाली की बनावट पर ध्यान देना शुरू करें, रोजाना कम से कम कुछ समय पैदल चलने या हल्का व्यायाम करने की आदत डालें और घर के बने संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें, तो हम बिना किसी महंगी दवा के भी मोटापा, डायबिटीज और हाई BP जैसी कई गंभीर जीवनशैली संबंधी बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सही पोषण संतुलन अपनाकर देश के नागरिक डायबिटीज, मोटापे और हाई BP जैसी गंभीर जीवनशैली जन्य बीमारियों से बच सकते हैं।

**फरीदाबाद और एनसीआर में:** अमृता अस्पताल की इस सलाह से स्थानीय निवासी बाहर के जंक फूड पर निर्भरता घटाकर अपनी दैनिक थाली को पोषित बना सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. राष्ट्रीय पोषण माह कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कुपोषण, मोटापे और असंतुलित खान-पान से होने वाली बीमारियों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।

### 2. पोषण माह की शुरुआत का इतिहास क्या है?
इसकी शुरुआत एक दिवसीय कार्यक्रम से हुई थी, जो 1 सितंबर 1982 को पोषण सप्ताह बना। साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे पूरे महीने का राष्ट्रीय पोषण माह बना दिया गया।

### 3. संतुलित थाली का 50:25:25 फॉर्मूला क्या है?
इस फॉर्मूले के तहत थाली का 50 प्रतिशत हिस्सा फल और सब्जियों, 25 प्रतिशत प्रोटीन (दाल, पनीर) और 25 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट (रोटी, चावल) का होना चाहिए।

### 4. एक व्यक्ति को महीने में कितना तेल इस्तेमाल करना चाहिए?
अमृता अस्पताल की विशेषज्ञ डॉ. चारु दुआ के अनुसार एक व्यक्ति के लिए महीने में लगभग आधा किलो (0.5 kg) तेल का सेवन पर्याप्त होता है।

### 5. पेट भरा होने पर भी शरीर में पोषण की कमी क्यों हो सकती है?
यदि खाने में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा हो लेकिन प्रोटीन, विटामिन और मिनरल कम हों, तो पेट भरने के बावजूद शरीर आंतरिक रूप से कुपोषित रह जाता है।

### 6. रोजाना के खाने में तेल 10 प्रतिशत कम करने से क्या लाभ होता है?
खाने में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत घटाने से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन कम होता है, जिससे वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

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