# फरीदाबाद में 44 वर्षीय महिला के पेट से निकला सात किलो का ट्यूमर, साधारण मोटापा समझने की हुई थी भारी भूल

> फरीदाबाद की एक 44 वर्षीय महिला ने लगातार बढ़ते पेट और कब्ज को सामान्य मोटापा समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जांच में उसके पेट के अंदर 7 किलो का विशाल ट्यूमर निकला। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के सात डॉक्टरों की टीम ने चार घंटे की जटिल सर्जरी के बाद इस 41 सेंटीमीटर लंबी गांठ को सुरक्षित रूप से बाहर निकालकर महिला को नई जिंदगी दी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/faridabad-men-44-varshiya-mahila-ke-peta-se-nikala-sata-kilo-ka-tyumara-sadharana-motapa-samajhane-ki-hui-thi-bhari-bhula-9477 · **Language:** Hindi
**Tags:** हेल्थ न्यूज, ट्यूमर सर्जरी, फरीदाबाद अस्पताल, महिलाओं का स्वास्थ्य, मोटापा और बीमारी, ओवेरियन सिस्ट

हरियाणा के फरीदाबाद शहर में रहने वाली एक 44 वर्षीय महिला को अपनी सेहत के प्रति बरती गई एक बड़ी लापरवाही का बेहद चौंकाने वाला परिणाम भुगतना पड़ा। वह पिछले कई महीनों से अपने लगातार बढ़ते हुए पेट के आकार और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही थी। महिला को यह लगता था कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर के वजन का बढ़ना और पेट का बाहर निकलना एक बहुत ही आम बात है। लेकिन जब उसकी शारीरिक परेशानी धीरे-धीरे इस हद तक बढ़ गई कि उसका अपने पैरों पर चलना-फिरना भी दूभर हो गया, तब जाकर उसने एक बड़े अस्पताल में जाकर अपनी चिकित्सीय जांच कराने का अंतिम फैसला किया। उसकी इस जांच ने शरीर के अंदर छिपी एक ऐसी चौंकाने वाली सच्चाई को सामने ला दिया, जिसने वहां मौजूद डॉक्टरों को भी गहरी हैरत में डाल दिया।

## शरीर के अंदर पनप रहा था विशाल खतरा
फरीदाबाद स्थित मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में जब महिला पहली बार अपनी स्वास्थ्य जांच कराने के लिए पहुंची, तो शुरुआत में डॉक्टरों को भी बाहरी तौर पर यही लगा कि यह केवल सामान्य रूप से बढ़ा हुआ वजन है। लेकिन जब शरीर के अंदरूनी हिस्सों की गहराई से जांच की गई और स्कैन किए गए, तो पूरी तस्वीर ही बदल गई। जांच रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ कि महिला के गर्भाशय और अंडाशय के ठीक बीचों-बीच एक बहुत बड़ा ट्यूमर मौजूद है। इस खतरनाक गांठ का आकार लगभग 41 सेंटीमीटर तक फैल चुका था और इसका कुल वजन सात किलो के करीब पहुंच गया था। यह विशाल ट्यूमर महिला के पूरे पेट की गुहा में अपनी जगह बना चुका था और उसकी आंतों के साथ-साथ शरीर के अन्य बेहद जरूरी अंगों पर बहुत ही भारी दबाव डाल रहा था।

## विशेषज्ञों की सात सदस्यीय टीम का गठन
मरीज की बिगड़ती हालत, मामले की गंभीरता और ट्यूमर के इस विशाल आकार को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बिना कोई देरी किए तुरंत एक विशेष चिकित्सा बोर्ड का गठन कर दिया। इस बेहद जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सात अनुभवी डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई। इस खास टीम में रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक जनरल सर्जरी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. बीरबल कुमार, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की निदेशक डॉ. निशा कपूर और डॉ. सचिन मित्तल जैसे नामी विशेषज्ञ मुख्य रूप से शामिल थे। यह विशाल ट्यूमर शरीर के बेहद संवेदनशील और जरूरी हिस्सों से बहुत करीब से जुड़ा हुआ था, इसलिए इस पूरे मामले में अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों का एक साथ मिलकर काम करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया था।

## चार घंटे चला बेहद जटिल ऑपरेशन
इस सात किलो भारी ट्यूमर को महिला के शरीर से बाहर निकालना मेडिकल टीम के लिए किसी बड़ी और मुश्किल चुनौती से कम नहीं था। इस पूरी सर्जरी का सबसे अहम और जोखिम भरा लक्ष्य इस विशाल गांठ को बिना फटे पूरी तरह से सुरक्षित रूप से बाहर निकालना था। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर ऑपरेशन के दौरान यह ट्यूमर पेट के अंदर कहीं भी फट जाता, तो इससे पूरे शरीर में खतरनाक संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता और आगे की जांच व इलाज की प्रक्रिया में भारी मुश्किलें आ सकती थीं। इसी बड़े खतरे को पहले से भांपते हुए पूरी मेडिकल टीम ने ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले सर्जरी की एक बहुत ही विस्तृत और सटीक योजना तैयार की।

यह जटिल और नाजुक सर्जरी पूरे चार घंटे तक लगातार चली। डॉक्टरों ने अपने हाथों से बेहद सावधानी बरतते हुए इस विशाल गांठ को आंतों और आस-पास के अन्य जरूरी अंगों से बहुत ही धीरे-धीरे अलग किया, ताकि किसी भी स्वस्थ अंग को कोई नुकसान न पहुंचे। पूरी टीम के बेहतरीन सर्जिकल तालमेल की वजह से इतने बड़े ऑपरेशन के दौरान मरीज का खून भी बहुत ही कम मात्रा में बहा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महिला की स्थिति पूरी तरह से डॉक्टरों के नियंत्रण में बनी रही और आखिरकार उस भारी-भरकम ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से शरीर से बाहर निकाल लिया गया।

## सामान्य लक्षणों के पीछे छिपी थी गंभीर बीमारी
इस पूरे मेडिकल मामले का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू यह था कि पीड़ित महिला को अपने ही शरीर में पनप रहे इतने बड़े खतरे का दूर-दूर तक कोई आभास ही नहीं हुआ। वह अपने पेट के लगातार बढ़ते भारीपन को सिर्फ और सिर्फ आम मोटापा मानकर गलती करती रही। उसे अक्सर गंभीर कब्ज की शिकायत रहती थी और शौच जाने में भी काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता था, लेकिन उसने इन सभी शुरुआती और अहम संकेतों को उम्र की मामूली दिक्कत समझकर लंबे समय तक टाल दिया।

डॉ. निशा कपूर ने महिला की इस लापरवाही का मुख्य चिकित्सीय कारण बताते हुए कहा कि अंडाशय के आस-पास होने वाली गांठें अक्सर बिना किसी बड़े और स्पष्ट लक्षण के शांति से बढ़ती रहती हैं। कई बार इन ट्यूमर की वजह से महिलाओं के मासिक धर्म के चक्र पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है, जिससे उन्हें अपने भीतर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का शक ही नहीं हो पाता। इस विशेष मामले में भी महिला के पीरियड्स बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रहे थे, इसलिए उसने अस्पताल जाकर अपनी जांच कराने की कोई जरूरत ही महसूस नहीं की। जब उस विशाल ट्यूमर के भारीपन के कारण उसका सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो गया, तब जाकर उसे अपनी स्वास्थ्य समस्या की असल गंभीरता का अहसास हुआ।

## रिकवरी और खान-पान में बदलाव की सलाह
इस सफल और बड़ी सर्जरी के बाद अब महिला की रिकवरी बहुत ही तेजी से हो रही है। ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद डॉक्टरों से दोबारा मुलाकात के दौरान उसने मुस्कुराते हुए बताया कि अब वह अपने शरीर को बेहद हल्का महसूस कर रही है। अब वह बिना किसी रुकावट या दर्द के आराम से चल-फिर पा रही है और उसने अपना सामान्य भोजन भी पूरी तरह से खाना शुरू कर दिया है। फिलहाल, शरीर से निकाले गए उस बड़े ट्यूमर को आगे की बायोप्सी जांच के लिए लैब में भेजा गया है। मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो पाएगी कि उस गांठ में कैंसर के कोई खतरनाक लक्षण मौजूद हैं या नहीं।

भविष्य में मरीज का पाचन तंत्र पूरी तरह से दुरुस्त रहे और वह एक स्वस्थ जीवन जी सके, इसके लिए डॉक्टरों ने उसे एक सख्त आहार योजना सौंप दी है। डॉ. बीरबल कुमार ने महिला को रोजाना दो से तीन लीटर पानी अनिवार्य रूप से पीने की खास हिदायत दी है। इसके अलावा, उसे अपने खान-पान में उच्च फाइबर से भरपूर चीजें, हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा और पपीता अधिक मात्रा में शामिल करने को कहा गया है। साथ ही, आंतों को सुरक्षित रखने के लिए मैदे से बनी चीजों और बाजार के फास्ट फूड से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सख्त सलाह दी गई है।

## महिलाओं के लिए रूटीन चेकअप की अहमियत
डॉ. निशा कपूर का कहना है कि भले ही इतने बड़े आकार के ट्यूमर के मामले अस्पतालों में रोज देखने को नहीं मिलते, लेकिन फिर भी हर साल या डेढ़ साल में ऐसे एक-दो गंभीर मरीज उनके पास पहुंच ही जाते हैं। उन्होंने इस घटना का उदाहरण देते हुए समाज की सभी महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति बहुत ज्यादा जागरूक रहने की जरूरी सलाह दी है। उन्होंने अपील की है कि महिलाएं केवल बीमारी के लक्षणों का इंतजार न करें, बल्कि साल में कम से कम एक बार अपनी पूर्ण और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं। अगर समय रहते ऐसी खतरनाक बीमारियों की सही पहचान हो जाए, तो ट्यूमर को इतना विशाल होने से पहले ही आसानी से रोका जा सकता है और इस तरह की बड़ी सर्जरी के जानलेवा जोखिम से पूरी तरह बचा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि लंबे समय तक रहने वाली कब्ज और बढ़ते पेट को सिर्फ उम्र या मोटापे का असर मानकर नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
- **फरीदाबाद में:** स्थानीय निवासियों के लिए यह राहत की बात है कि शहर के मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में अब जटिल रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए गंभीर बीमारियों का सफल इलाज मौजूद है।

## सवाल-जवाब

### 1. फरीदाबाद में महिला के पेट से कितने किलो का ट्यूमर निकाला गया?
फरीदाबाद के मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में डॉक्टरों ने महिला के पेट से सात किलो वजन का और 41 सेंटीमीटर बड़ा ट्यूमर निकाला।

### 2. महिला ने अपने लक्षणों को क्यों नजरअंदाज किया?
महिला को लगा कि उसका पेट उम्र बढ़ने और सामान्य मोटापे की वजह से निकल रहा है, और उसके पीरियड्स भी सामान्य थे, इसलिए उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

### 3. सात किलो का ट्यूमर निकालने में कितना समय लगा?
सात विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगातार चार घंटे तक एक बेहद जटिल सर्जरी करके इस भारी ट्यूमर को शरीर से सुरक्षित बाहर निकाला।

### 4. डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद महिला को क्या डाइट प्लान दिया है?
डॉक्टरों ने उसे रोज 2-3 लीटर पानी पीने, फाइबर वाली हरी सब्जियां और पपीता खाने, तथा मैदे व फास्ट फूड से दूर रहने की सलाह दी है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._