बर्गर-पिज्जा से पेट तो भर रहा है लेकिन बच्चों की ताकत हो रही कम, जान लीजिए ये नुकसान बच्चों में फास्ट फूड खाने की आदत से भले ही पेट भर जाता है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलने से उनका विकास रुक सकता है और बीमारियां घेर सकती हैं। गाजियाबाद में बच्चों की खानपान की आदतों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। आजकल पिज्जा, बर्गर, चिप्स, मोमोज और चाउमीन जैसे जंक फूड बच्चों की पहली पसंद बन चुके हैं। स्वाद के फेर में बच्चे इन्हें रोजाना खाने की जिद करते हैं, लेकिन यही लापरवाही उनके स्वास्थ्य पर बहुत भारी पड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के खानपान से भले ही पेट भरा हुआ महसूस हो, मगर शरीर को बढ़ने के लिए आवश्यक प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इससे बच्चों का शारीरिक विकास बाधित होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होने लगती है। कुपोषण और शारीरिक विकास पर असर गाजियाबाद एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विपिन उपाध्याय ने जानकारी दी कि इस स्थिति को प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन यानी कुपोषण कहा जाता है। इसमें बच्चों के शरीर को न तो पर्याप्त प्रोटीन मिलता है और न ही जरूरी ऊर्जा। स्वस्थ विकास के लिए बच्चों को प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट का संतुलित आहार मिलना बहुत आवश्यक है। इनकी कमी होने पर बच्चों की लंबाई और वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम रह जाते हैं। ऐसे बच्चों की इम्युनिटी इतनी कमजोर हो जाती है कि वे आए दिन किसी न किसी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव डॉक्टर विपिन ने बताया कि हालांकि जंक फूड खाने में स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन इनमें पोषण के नाम पर कुछ नहीं होता। उल्टे इनमें जरूरत से ज्यादा वसा, नमक और कई ऐसे हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं जो पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। लगातार इस तरह का खाना खाने से बच्चों को पेट दर्द, गैस, डायरिया और बार-बार संक्रमण जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जंक फूड खाने के बाद बच्चे का पेट भर जाता है और वह घर पर बना पौष्टिक भोजन खाने से कतराने लगता है, जिससे लंबे समय तक शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी बनी रहती है। बच्चों की थाली में क्या शामिल करें विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दाल, दूध, दही, अंडे और अन्य घर का बना पौष्टिक खाना जरूर होना चाहिए। मौसमी फलों से शरीर को जरूरी विटामिन्स मिलते हैं, जबकि हरी सब्जियों और सलाद में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। इसके अलावा गुड़ भी आयरन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है जिसे संतुलित आहार के साथ दिया जा सकता है। छह महीने तक के शिशुओं के लिए मां का दूध ही सबसे बड़ा आहार है। इस उम्र तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए और सामान्य परिस्थितियों में उन्हें पानी की भी आवश्यकता नहीं होती है। मां के दूध में मौजूद तत्व बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं, और इसके बाद ही उम्र के अनुसार अन्य पौष्टिक चीजें शुरू करनी चाहिए। किन बातों का रखें खास ख्याल डॉक्टर विपिन की सलाह है कि बच्चों को फास्ट फूड की लत बिल्कुल न लगने दें। कभी-कभार बच्चों की खुशी के लिए थोड़ा-बहुत जंक फूड दिया जा सकता है, लेकिन इसे कभी भी उनकी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा न बनाएं। पौष्टिक खानपान के साथ-साथ बच्चों को आउटडोर गेम्स और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना भी बेहद जरूरी है। आज के समय में मोबाइल और टीवी का स्क्रीन टाइम कम करके बच्चों को खेलकूद से जोड़ना चाहिए। यदि किसी बच्चे का वजन या लंबाई बढ़ना अचानक रुक जाए, वह बार-बार बीमार पड़ने लगे, पेट की समस्याओं से परेशान रहे या खाने में आनाकानी करे, तो तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इसका आप पर असर बच्चों में जंक फूड की आदत के कारण उनके शारीरिक विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सीधा और गंभीर असर पड़ता है, जिससे वे भविष्य में कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। • भारत में: देश भर के शहरी इलाकों में बच्चों के बीच लगातार बढ़ता फास्ट फूड का चलन उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है, जिससे कम उम्र में ही कुपोषण और मोटापे जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। • गाजियाबाद में: स्थानीय स्तर पर बच्चों में पेट दर्द, डायरिया और बार-बार होने वाले संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर असंतुलित खानपान और जंक फूड के अत्यधिक सेवन से जुड़े हैं। • खानपान में बदलाव: अभिभावकों को तुरंत बच्चों की डाइट से जंक फूड हटाकर मौसमी फल, हरी सब्जियां, दाल और दूध जैसी पौष्टिक चीजें शामिल करनी चाहिए। • शारीरिक गतिविधियां: बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखकर आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करना आवश्यक है ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके। • समय पर जांच: यदि बच्चे का वजन या लंबाई बढ़ना रुक जाए या वह बार-बार बीमार पड़े, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। सवाल-जवाब 1. बच्चों में कुपोषण की स्थिति को क्या कहा जाता है? डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में कुपोषण की इस स्थिति को प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन कहा जाता है जिसमें शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और ऊर्जा नहीं मिलती। 2. गाजियाबाद एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ कौन हैं? गाजियाबाद एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विपिन उपाध्याय हैं। 3. छह महीने तक के शिशुओं को क्या खिलाना चाहिए? छह महीने तक के शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे जरूरी है और इस अवधि में बच्चे को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। 4. जंक फूड खाने से बच्चों को कौन सी समस्याएं हो सकती हैं? लगातार जंक फूड खाने से बच्चों को गैस, पेट दर्द, डायरिया और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 5. बच्चों की डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए? बच्चों की डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दाल, दूध, दही और अंडे शामिल करने चाहिए। 6. अभिभावकों को डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए? यदि बच्चे का वजन या लंबाई बढ़ना रुक जाए, वह बार-बार बीमार पड़े या लगातार पेट की समस्या से परेशान रहे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। https://trendkia.com/health/fast-food-fills-stomachs-but-drains-children-energy-29125 TrendKia — Har trend, sabse pehle.