अलसी के बीजों से आंखों की रोशनी बढ़ने का दावा कितना सच, जानिए नेत्र रोग विशेषज्ञ की राय अलसी के बीजों में ओमेगा-3 और जरूरी पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इसे आंखों की रोशनी तेज करने या चश्मा हटाने का सीधा इलाज मानना वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है। आंखों की सुरक्षा और नजर को दुरुस्त बनाए रखने में पोषक तत्वों से भरपूर खानपान और संतुलित जीवनशैली की भूमिका हमेशा अहम मानी जाती है। इसी संदर्भ में अलसी के बीजों को लेकर अक्सर कई तरह के दावे किए जाते हैं। अलसी में उच्च मात्रा में फाइबर, लाभकारी वनस्पति यौगिक और ओमेगा-3 फैटी एसिड की एक श्रेणी अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) पाई जाती है। बागेश्वर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कल्पना पांडे के मुताबिक, एएलए शरीर के लिए एक आवश्यक फैटी एसिड है जिसे भोजन के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। इसके बावजूद, हमारा शरीर एएलए को ओमेगा-3 के अन्य सक्रिय रूपों जैसे ईपीए और डीएचए में बेहद सीमित मात्रा में ही परिवर्तित कर पाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड और नजर की सेहत का वैज्ञानिक सच नेत्र स्वास्थ्य पर ओमेगा-3 फैटी एसिड के असर को समझने के लिए कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। कुछ प्राथमिक शोधों में ओमेगा-3 और आंखों के सूखेपन यानी ड्राई आई के लक्षणों के बीच राहत का एक संभावित संबंध जरूर देखा गया है, लेकिन इस विषय पर अब तक के वैज्ञानिक प्रमाण पूरी तरह एकमत नहीं हैं। व्यापक स्तर पर हुए कई बड़े अध्ययनों में यह भी पाया गया कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स के इस्तेमाल से ड्राई आई की दिक्कत में कोई ठोस या स्पष्ट अतिरिक्त फायदा नहीं मिलता है। चश्मे का नंबर हटने और कमजोर नजर पर सच्चाई यही वजह है कि अलसी के नियमित सेवन से नजर तेज होने या चश्मे का नंबर कम होने की उम्मीद लगाना चिकित्सीय दृष्टि से उचित नहीं है। कमजोर पड़ चुकी दृष्टि को दोबारा सामान्य बनाने में अलसी के बीज कारगर साबित होते हैं, इसका कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। इसके अलावा, उम्र के साथ होने वाली मैक्युलर डिजनरेशन की बीमारी में भी ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेने से रोग के विस्तार को थामने या नजर को कमजोर होने से बचाने में कोई स्पष्ट अतिरिक्त लाभ दर्ज नहीं हुआ है। अलसी को खाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां अलसी के बीजों को अपनी दैनिक डाइट में शामिल करने के लिए उन्हें हल्का भूनकर या बारीक पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है। पिसी हुई अलसी को साबुत बीजों के मुकाबले पचाना और इस्तेमाल करना ज्यादा आसान होता है। इसे दही, दलिया, ताजे सलाद या पकी हुई सब्जियों के ऊपर छिड़ककर खाया जा सकता है। हालांकि, इसे हमेशा संतुलित मात्रा में ही लेना चाहिए। जरूरत से ज्यादा अलसी खाने से कुछ लोगों में पेट में भारीपन, गैस, पेट फूलने या दस्त की समस्या हो सकती है। अलसी का सेवन करते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है, और कच्चे या अधपके बीजों को सीधे खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। आंखों की पूरी देखभाल के लिए क्या है जरूरी दृष्टि को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ किसी एक खास सुपरफूड पर निर्भर रहना कभी पर्याप्त नहीं हो सकता। इसके लिए संपूर्ण संतुलित आहार, रोजाना पर्याप्त नींद और समय-समय पर आंखों की डॉक्टरी जांच करवाना अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार धुंधला दिखाई दे रहा हो, आंखों में चुभन, दर्द या लाली बनी रहे, अचानक नजर कमजोर होने लगे या तेज रोशनी में असहजता महसूस हो, तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। अलसी एक पौष्टिक आहार का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह दृष्टि की समस्याओं का इलाज या नजर बढ़ाने की दवा बिल्कुल नहीं है। इसका आप पर असर अलसी के बीजों को नजर तेज करने का चमत्कारी इलाज मानकर डॉक्टर की सलाह या जरूरी चश्मे को नजरअंदाज करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। • खानपान की योजना: अलसी को केवल एक पौष्टिक आहार के तौर पर सीमित मात्रा में शामिल करें। इसे आंखों की रोशनी बढ़ाने या चश्मा हटाने का नुस्खा मानकर अधिक मात्रा में न खाएं। • पाचन पर असर: अलसी का ज्यादा सेवन पेट फूलने, गैस और दस्त का कारण बन सकता है। इसे खाते समय भरपूर पानी पिएं और कच्चे बीजों के इस्तेमाल से पूरी तरह बचें। • जांच और इलाज: नजर कमजोर होने या धुंधलापन दिखने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं। घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने से बीमारी के बढ़ने का खतरा रहता है। • सेवन की सही विधि: अलसी को साबुत खाने के बजाय हल्का भूनकर या पीसकर दही, दलिया या सलाद में मिलाएं। इससे शरीर इसके पोषक तत्वों को आसानी से ग्रहण कर पाता है। ऐसा क्यों हुआ अलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों और ओमेगा-3 फैटी एसिड की वजह से लोग इसे आंखों के लिए असरदार मान लेते हैं, लेकिन इसके चिकित्सीय प्रभाव सीमित हैं। • सीमित फैटी एसिड रूपांतरण: अलसी में मौजूद अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) को मानव शरीर ईपीए और डीएचए जैसे सक्रिय रूपों में बहुत कम मात्रा में बदल पाता है। इस वजह से यह आंखों के ऊतकों को सीधा बड़ा लाभ नहीं पहुंचा पाता। • वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजे: बड़े स्तर पर किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों में ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेने से ड्राई आई या मैक्युलर डिजनरेशन में कोई ठोस अतिरिक्त फायदा नहीं पाया गया है। यही कारण है कि चिकित्सा विज्ञान इसे नजर सुधारने का उपाय नहीं मानता। • खानपान से जुड़ी भ्रांतियां: कई लोग पौष्टिक तत्वों से भरपूर सुपरफूड्स को बीमारियों का इलाज समझ लेते हैं। इस वजह से अलसी को दृष्टि दोष ठीक करने वाला उपाय मान लिया गया। सवाल-जवाब 1. क्या अलसी खाने से आंखों की रोशनी तेज होती है? नहीं, अलसी के बीजों से नजर तेज होने या चश्मे का नंबर कम होने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। 2. अलसी में कौन सा ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है? अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक प्रकार अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) मौजूद होता है। 3. अलसी के बीजों को किस तरह खाना सबसे अच्छा है? अलसी को हल्का भूनकर या बारीक पीसकर दही, दलिया, सलाद या पकी सब्जियों में मिलाकर खाना चाहिए। 4. ज्यादा मात्रा में अलसी खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं? अधिक मात्रा में अलसी खाने से पेट में भारीपन, पेट फूलना और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। 5. आंखों में किन लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए? धुंधलापन, आंखों में दर्द, लाली, अचानक नजर कम होना या रोशनी से परेशानी होने पर नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। https://trendkia.com/health/flax-seeds-ke-bijon-se-ankhon-ki-roshani-barhane-ka-dava-kitana-sacha-janie-netra-roga-visheshajna-ki-raya-45601 TrendKia — Har trend, sabse pehle.