गर्भावस्था में करवा चौथ का उपवास रखने की सोच रही हैं तो पहले जान लें डॉक्टर की ये जरूरी हिदायतें करवा चौथ पर निर्जला उपवास गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अंबाला के नागरिक अस्पताल की डॉ. रजिता ने गर्भवती महिलाओं को खानपान, सरगी और सतर्कता को लेकर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया है। करवा चौथ का पर्व दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना के साथ मनाया जाता है। पारंपरिक तौर पर इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए निर्जला उपवास रखती हैं। हालांकि, जब बात गर्भवती महिलाओं की आती है, तो यह पारंपरिक नियम उनकी शारीरिक स्थिति के अनुकूल नहीं बैठता। गर्भावस्था के दौरान शरीर की पोषण और जल संबंधी जरूरतें सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे संवेदनशील दौर में पूरे दिन भूखे और प्यासे रहने से मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि आस्था और परंपरा का सम्मान करते हुए भी सेहत को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्त्री रोग विशेषज्ञ से पूर्व परामर्श है सबसे पहला कदम नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता का कहना है कि किसी भी गर्भवती महिला को करवा चौथ का उपवास रखने का फैसला अपनी मर्जी से अकेले नहीं लेना चाहिए। उपवास शुरू करने से पहले अपनी निजी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के चरण को समझना बेहद जरूरी है। यदि किसी महिला की गर्भावस्था पूरी तरह सामान्य चल रही है और उसमें कोई चिकित्सीय समस्या नहीं है, तब भी उसे व्रत का संकल्प लेने से पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। दूसरी तरफ, जिन महिलाओं की गर्भावस्था में पहले से कोई जटिलता है, उन्हें बिना चिकित्सकीय मंजूरी के व्रत रखने का जोखिम बिल्कुल नहीं उठाना चाहिए। डॉ. रजिता स्पष्ट करती हैं कि गर्भावस्था के दौरान शरीर को लगातार ऊर्जा, आवश्यक पोषक तत्वों और भरपूर पानी की दरकार होती है। ऐसे में महिलाओं को कड़े निर्जला उपवास से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके स्थान पर वे अपनी व्यक्तिगत शारीरिक क्षमता, डॉक्टर के सुझाव और सुविधा के अनुसार दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, तरल पेय और सुपाच्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करते हुए पूजा-अर्चना कर सकती हैं। सरगी की थाली में शामिल करें पौष्टिक और ऊर्जावान आहार करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाने वाली सरगी का विशेष महत्व होता है। सामान्य दिनों में लोग सरगी में कई तरह के पारंपरिक पकवान खाते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को अपनी सरगी के चयन में काफी समझदारी दिखानी चाहिए। डॉ. रजिता सलाह देती हैं कि सरगी की थाली ऐसी होनी चाहिए जो दिनभर शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखे और आवश्यक पोषण की कमी न होने दे। इसके लिए सुबह के समय ताजे मौसमी फल, दूध, सूखे मेवे और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अपनी सामान्य खुराक और भूख के अनुसार महिलाएं सादी रोटी और कम तेल-मसाले वाली हल्की हरी सब्जी का सेवन भी कर सकती हैं। यह आहार पाचन तंत्र पर भारी पड़े बिना लंबे समय तक शरीर को ताकत प्रदान करता है। चिकनाई, तली-भुनी और मसालेदार चीजों से बनाएं दूरी उपवास के दौरान अक्सर लोग सरगी में तली-भुनी पूरियां या भारी मिठाइयां खा लेते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए ऐसा करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। डॉ. रजिता के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे सीने में जलन, गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में बहुत अधिक तेल, घी और तीखे मसालों से तैयार भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके विपरीत, हल्का, सादा और संतुलित भोजन लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए नारियल पानी का सेवन भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि नारियल पानी एक अतिरिक्त पेय पदार्थ है और इसे सादे पानी के पूर्ण विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नियमित अंतराल पर सादा पानी पीते रहना बेहद जरूरी है। थकान या कमजोरी होते ही तोड़ें उपवास, जबरदस्ती से बचें उपवास के दौरान महिलाओं को अपने शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों के प्रति लगातार सचेत रहना चाहिए। यदि दिन में किसी भी समय तेज भूख लगे, अत्यधिक थकावट महसूस हो या कमजोरी लगने लगे, तो धार्मिक हठ के चलते जबरदस्ती उपवास जारी रखने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐसे मौकों पर अपनी सेहत और बच्चे की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना चाहिए। यदि असहजता महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के बताए अनुसार ताजे फल, गुनगुना दूध या अन्य पौष्टिक हल्के खाद्य पदार्थ खाकर शरीर को आवश्यक पोषण देना चाहिए। मातृत्व के दौरान शरीर की मांग की अनदेखी करना बच्चे के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के मामलों में विशेष सतर्कता जिन गर्भवती महिलाओं को हाई या लो ब्लड प्रेशर अथवा गर्भकालीन मधुमेह यानी जेस्टेशनल डायबिटीज की शिकायत है, उनके लिए उपवास के नियम और भी कड़े हो जाते हैं। डॉ. रजिता रेखांकित करती हैं कि लंबे समय तक खाली पेट रहने से ब्लड शुगर का स्तर अचानक गिर सकता है, जो हाइपोग्लाइसीमिया का कारण बन सकता है। इसी तरह ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी चक्कर आने और बेहोशी का जोखिम पैदा करता है। ऐसी जटिलताओं से जूझ रही महिलाओं को बिना अपने डॉक्टर की स्पष्ट अनुमति के व्रत करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ना चाहिए। यदि डॉक्टर अनुमति दें भी, तो दवाइयों के समय और खानपान के तय शेड्यूल में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। पूजा के दौरान लंबे समय तक खड़े रहने से बचें शाम के समय करवा चौथ की पूजा और कथा के दौरान भी गर्भवती महिलाओं को शारीरिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। डॉ. रजिता के मुताबिक, पूजा की रस्मों के दौरान लगातार देर तक खड़े रहने या थका देने वाली शारीरिक गतिविधियां करने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में सूजन, कमर दर्द और चक्कर आने की संभावना बढ़ जाती है। यदि किसी महिला को जमीन पर पालथी मारकर बैठने में कठिनाई या पेट पर दबाव महसूस होता है, तो उसे जमीन पर बैठने के बजाय एक आरामदायक कुर्सी पर बैठकर पूजा संपन्न करनी चाहिए। पूरे दिन के दौरान भी पर्याप्त शारीरिक आराम करना और अनावश्यक भागदौड़ से दूर रहना बहुत आवश्यक है। चक्कर, धुंधलापन या जी मिचलाने के संकेतों की न करें अनदेखी उपवास के समय कुछ शारीरिक लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज करना गंभीर भूल हो सकती है। यदि अचानक सिर चकराने लगे, आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे या धुंधला दिखाई दे, तेज सिरदर्द शुरू हो जाए, अत्यधिक घबराहट हो या लगातार जी मिचलाने की शिकायत हो, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। ऐसे लक्षण सामने आते ही तुरंत व्रत को समाप्त कर देना चाहिए। महिला को तुरंत सुपाच्य भोजन, ग्लूकोज अथवा तरल पेय दिया जाना चाहिए और बिना किसी देरी के नजदीकी चिकित्सक अथवा अस्पताल से संपर्क कर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। परंपरा से ऊपर है मां और बच्चे का स्वस्थ जीवन अंततः डॉ. रजिता यही सुझाव देती हैं कि परंपरा और आस्था का अपना स्थान है, लेकिन किसी भी स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु की सेहत के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। त्योहार का असली आनंद तभी है जब मां और बच्चा दोनों सुरक्षित और स्वस्थ रहें। यदि आपके चिकित्सक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उपवास रखने से मना करते हैं, तो उनकी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह का पूरी तरह सम्मान करना और उसका पालन करना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है। इसका आप पर असर गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के लिए करवा चौथ पर उपवास के पारंपरिक नियमों को स्वास्थ्य की दृष्टि से समझना और संशोधित करना अत्यंत आवश्यक है। • गर्भवती महिलाओं के लिए: निर्जला उपवास रखने से बचें और डॉक्टर की सलाह से पानी, नारियल पानी, फल व दूध का नियमित सेवन करें। यदि किसी भी समय चक्कर, कमजोरी या जी मिचलाने की समस्या हो तो तुरंत उपवास समाप्त कर चिकित्सकीय सहायता लें। • खानपान की योजना: सरगी में तली-भुनी पूरियों और अत्यधिक मसालों के स्थान पर बादाम, अखरोट, दूध और दलिया जैसे पोषक खाद्य पदार्थ चुनें। यह शरीर में ऊर्जा बनाए रखने और एसिडिटी व गैस की परेशानी से बचने के लिए आवश्यक है। • पूजा की व्यवस्था: शाम की पूजा के दौरान जमीन पर बैठने या लगातार देर तक खड़े रहने के बजाय आरामदायक कुर्सी का उपयोग करें। परिवार के सदस्यों को गर्भवती महिला पर घरेलू कामकाज और अनुष्ठान का अतिरिक्त शारीरिक दबाव नहीं डालना चाहिए। • चिकित्सीय निगरानी: ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की समस्या से ग्रस्त महिलाओं को बिना डॉक्टर की लिखित अनुमति के उपवास बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। अपनी नियमित दवाइयों के समय में किसी भी तरह का बदलाव न करें। ऐसा क्यों हुआ गर्भावस्था के दौरान बिना अन्न-जल के उपवास रखने से शरीर में कई जैविक और शारीरिक असंतुलन पैदा हो सकते हैं, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए खतरा उत्पन्न होता है। • बढ़ी हुई पोषण आवश्यकता: गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से मां के रक्त प्रवाह और पोषण पर निर्भर करता है। जब मां दिनभर भूखी-प्यासी रहती है, तो रक्त शर्करा का स्तर तेजी से गिर सकता है और गर्भस्थ शिशु तक पहुंचने वाले पोषण में बाधा आती है। • निर्जलीकरण का खतरा: गर्भावस्था में एमनियोटिक द्रव और रक्त की मात्रा को बनाए रखने के लिए शरीर को सामान्य से अधिक तरल की आवश्यकता होती है। निर्जला रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और समय पूर्व प्रसव पीड़ा का जोखिम उत्पन्न हो सकता है। • पाचन एवं हार्मोनल बदलाव: इस अवस्था में पाचन तंत्र की गति धीमी होती है, जिससे लंबे समय तक खाली पेट रहने पर गंभीर एसिडिटी और पेट में तेज जलन हो सकती है। • चिकित्सीय स्पष्टता का अभाव: प्रत्येक महिला की गर्भावस्था की स्थिति भिन्न होती है, इसलिए बिना व्यक्तिगत जांच के उपवास करने से पहले से मौजूद अज्ञात जटिलताएं अचानक गंभीर रूप ले सकती हैं। सवाल-जवाब 1. क्या गर्भवती महिलाएं करवा चौथ पर पूरी तरह निर्जला व्रत रख सकती हैं? नहीं, डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए क्योंकि शरीर को निरंतर पानी और पोषण की सख्त आवश्यकता होती है। 2. गर्भवती महिला को व्रत रखने से पहले किससे सलाह लेनी चाहिए? गर्भवती महिला को उपवास शुरू करने से पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से अनिवार्य रूप से परामर्श लेना चाहिए। 3. सरगी में गर्भवती महिलाओं को कौन से खाद्य पदार्थ खाने चाहिए? सरगी में ताजे फल, दूध, मेवे, प्रोटीन युक्त आहार तथा सादी रोटी और हल्की हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए। 4. सरगी के समय किन चीजों के सेवन से बचना चाहिए? सुबह के समय बहुत अधिक तली-भुनी, चिकनाई वाली और तेज मसालेदार चीजों को खाने से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि एसिडिटी न हो। 5. क्या नारियल पानी सामान्य पानी का पूर्ण विकल्प हो सकता है? नारियल पानी तरल पदार्थ का एक अच्छा पूरक हो सकता है, लेकिन इसे सादे पानी का संपूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता। 6. व्रत के दौरान चक्कर आने या जी मिचलाने पर क्या करना चाहिए? ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत व्रत समाप्त कर भोजन और तरल पदार्थ लेना चाहिए तथा नजदीकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। 7. पूजा के समय गर्भवती महिलाओं को बैठने या खड़े होने को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए? पूजा के दौरान बहुत देर तक लगातार खड़े रहने से बचना चाहिए और जमीन पर बैठने में परेशानी होने पर कुर्सी का इस्तेमाल करना चाहिए। 8. ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए क्या नियम हैं? ऐसी महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और बिना अपने डॉक्टर की स्पष्ट अनुमति के व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। https://trendkia.com/health/garbhavastha-men-karwa-chauth-ka-upavasa-rakhane-ki-socha-rahi-hain-to-pahale-jana-len-doktara-ki-ye-jaruri-hidayaten-52465 TrendKia — Har trend, sabse pehle.