# गर्मी में बच्चों का दस्त: NHM के तीन आसान उपायों से कैसे बचाएं नन्हे शरीर को बड़े खतरे से

> गर्मी में बच्चों में दस्त आम है, पर लापरवाही जानलेवा बन सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन ने स्तनपान, साफ-सफाई-टीकाकरण और तुरंत उपचार—तीन उपाय बताए हैं जिनसे बड़ा खतरा टल सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-06-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/garmi-men-bachchon-ka-dasta-nhm-ke-tina-asana-upayon-se-kaise-bachaen-nanhe-shar-681 · **Language:** Hindi
**Tags:** बच्चों में दस्त, गर्मी में स्वास्थ्य, नेशनल हेल्थ मिशन, ORS, स्तनपान, बाल स्वास्थ्य, डिहाइड्रेशन, टीकाकरण

चिलचिलाती गर्मी आते ही घर-घर में छोटे बच्चों का पेट गड़बड़ाने लगता है और दस्त की शिकायत बढ़ जाती है। ज्यादातर माता-पिता इसे मामूली पेट खराबी मानकर टाल देते हैं, लेकिन यही अनदेखी बच्चे की जान पर भारी पड़ सकती है। दरअसल तेज तापमान, दूषित पानी, बाहर का खुला खाना और लगातार पसीना—ये सब मिलकर नन्हे शरीर से इतनी तेजी से पानी खींच लेते हैं कि देखते ही देखते डिहाइड्रेशन और कमजोरी हावी हो जाती है।

## क्यों है गर्मी का दस्त इतना जोखिम भरा
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) इस समस्या को नजरअंदाज न करने की अपील करता है। संस्था का कहना है कि दस्त के दौरान बच्चे के शरीर से पानी के साथ-साथ जरूरी पोषक तत्व भी निकल जाते हैं। नतीजा—कमजोरी, निर्जलीकरण और कई दूसरी स्वास्थ्य परेशानियां सिर उठा लेती हैं। इसीलिए इसे हल्के में लेने के बजाय वक्त रहते सही देखभाल और उपचार करना बेहद जरूरी है।

## बचाव के तीन अहम कदम
NHM के मुताबिक गर्मी में दस्त से बचाव की कुंजी तीन उपायों में छिपी है, जिन पर हर अभिभावक को खास ध्यान देना चाहिए।

### 1. छह माह तक सिर्फ मां का दूध
पहला उपाय है स्तनपान। छह माह तक के शिशु को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह दी गई है। यह दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और उसे तरह-तरह के संक्रमणों से बचाने में मददगार साबित होता है।

### 2. साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण
दूसरा उपाय स्वच्छता से जुड़ा है। साफ-सफाई अपनाने भर से संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक थम जाता है। बच्चे को स्वच्छ माहौल देना, हमेशा छांव में रखना, हाथों की नियमित सफाई और सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल—ये सब दस्त रोकने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसके साथ रोटावायरस और खसरा जैसी बीमारियों के खिलाफ समय पर टीकाकरण भी उतना ही जरूरी है। टीके बच्चे को गंभीर रोगों से ढाल की तरह बचाते हैं और उसके स्वस्थ विकास में सहारा बनते हैं।

### 3. दस्त होते ही तुरंत इलाज
तीसरा और सबसे अहम कदम है फौरन उपचार शुरू करना। विशेषज्ञ कहते हैं कि दस्त के दौरान हर बार बच्चे को ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल पिलाना चाहिए, ताकि शरीर में पानी और लवणों की भरपाई होती रहे। इसके अलावा चिकित्सीय सलाह के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की गोली देना भी फायदेमंद माना गया है, क्योंकि जिंक दस्त की अवधि और उसकी गंभीरता दोनों को घटाने में मदद करता है।

## जागरूकता ही सबसे बड़ी ढाल
NHM का संदेश साफ है—स्वच्छता, स्तनपान और नियमित टीकाकरण ही स्वस्थ बचपन की मजबूत बुनियाद हैं। अगर अभिभावक इन उपायों को अपनी आदत बना लें और दस्त होते ही समय पर इलाज कराएं, तो बच्चों को इस गंभीर खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जागरूकता और समय पर देखभाल ही बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने का सबसे असरदार रास्ता है।

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