गाय-भैंसों में लम्पी वायरस के लक्षण दिखते ही अपनाएं ये उपाय, देवघर के पशु विशेषज्ञ ने दी अहम सलाह दुधारू पशुओं में लम्पी वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है जिससे दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। देवघर के पशु विशेषज्ञ जयकांत राय ने इस बीमारी से बचाव और पारंपरिक घरेलू नुस्खों से पशुओं की देखभाल के तरीके साझा किए हैं। दुधारू पशुओं के लिए लम्पी वायरस वर्तमान समय में एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। विशेष तौर पर ग्रामीण अंचलों में यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और पशुपालकों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है। जब कोई गाय या भैंस इस वायरस की चपेट में आती है, तो उसका दूध उत्पादन बहुत तेजी से नीचे गिर जाता है या फिर पशु पूरी तरह से दूध देना ही बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को काफी बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इसके अलावा कई बार संक्रमण अधिक गंभीर होने पर पशु की जान भी चली जाती है। सरकारी स्तर पर समय-समय पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं ताकि इस घातक बीमारी के प्रसार को रोका जा सके, लेकिन गांवों में स्वच्छता की कमी और जानकारी के अभाव के कारण लम्पी वायरस का खतरा लगातार बना रहता है और मवेशी अक्सर इसका आसान शिकार बन जाते हैं। देवघर के विशेषज्ञ की सलाह और गोशाला की स्वच्छता देवघर के पशु विशेषज्ञ जयकांत राय ने बातचीत के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक अक्सर पारंपरिक घरेलू उपायों के जरिए भी अपने बीमार पशुओं की शुरुआती देखभाल करते हैं। उनका साफ कहना है कि यदि किसी भी दुधारू पशु में लम्पी वायरस के शुरुआती लक्षण नजर आने लगें, तो सबसे पहले गोशाला और उसके आसपास की साफ-सफाई पर विशेष तौर पर ध्यान देना बेहद आवश्यक हो जाता है। पशु को पूरी तरह से साफ और स्वच्छ वातावरण में रखना इस बीमारी से लड़ने का सबसे पहला कदम है। स्वच्छता रहने से वायरस के मवेशियों में फैलने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और पशुओं को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। घाव की सफाई और पारंपरिक घरेलू नुस्खे संक्रमण बढ़ने पर कई बार लम्पी वायरस के कारण पशुओं के शरीर पर गंभीर घाव तक बन जाते हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग उस घाव को नीम की पत्तियों और फिटकरी को पानी में अच्छी तरह उबालकर नियमित रूप से साफ करते हैं। दिन में दो बार इस पानी से घाव की धुलाई करने से संक्रमण के और अधिक फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही नीम के पत्ते, तुलसी के पत्ते, हल्दी और काली मिर्च को मिलाकर एक विशेष मिश्रण के लड्डू तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक तौर पर इन लड्डुओं का उपयोग पशुओं को खिलाने के लिए किया जाता है, जिससे बीमार पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत होने में काफी मदद मिलती है। बीमारी की इस चपेट के दौरान पशुओं को संतरा तथा अन्य विटामिन सी से भरपूर फल भी खिलाने चाहिए ताकि वे जल्दी रिकवर कर सकें। पशुपालकों की चिंताएं और बचाव के उपाय लम्पी वायरस से बचाव और रोकथाम के दौरान साफ-सफाई और खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया है। पशुपालकों के लिए यह बीमारी इसलिए भी बहुत गहरी चिंता का विषय बनती है क्योंकि दुधारू पशु के बीमार होते ही सीधा असर दूध के उत्पादन पर पड़ता है और कई बार बीमारी के बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर पशु की जान बचना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे कठिन समय में ग्रामीण अंचलों के पशुपालक पूरी तरह से अपने स्तर पर इन देसी और घरेलू तरीकों को अपनाकर अपने मवेशियों की संभाल करते हैं और उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश करते हैं। देसी नुस्खों का महत्व और गोशाला प्रबंधन विशेष रूप से नीम की पत्तियों और फिटकरी के उबले हुए पानी से घावों की सफाई करना, नीम के पत्ते, तुलसी, हल्दी और काली मिर्च से बने पोषक लड्डू खिलाना तथा संतरा देना ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अपनाए जाने वाले असरदार घरेलू उपायों में शामिल हैं। लम्पी वायरस के प्रकोप के समय पशुपालकों को सबसे ज्यादा जोर अपनी गोशाला की साफ-सफाई बनाए रखने पर देने की बात कही जा रही है ताकि मवेशियों को इस जानलेवा संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके। इसका आप पर असर यह खबर देश भर के ग्रामीण इलाकों और पशुपालकों के लिए सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा और मवेशियों के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। • भारत में: लम्पी वायरस के प्रकोप से देश के विभिन्न राज्यों में dairy किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि दूध उत्पादन ठप हो जाता है। • ग्रामीण क्षेत्रों में: पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे गोशाला की साफ-सफाई का कड़ाई से पालन करें और संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत घरेलू या चिकित्सीय उपाय शुरू करें। ऐसा क्यों हुआ दुधारू पशुओं में लम्पी वायरस के फैलने और उससे होने वाले नुकसान के पीछे कई पर्यावरणीय तथा स्वच्छता संबंधी कारण जिम्मेदार होते हैं। • स्वच्छता की कमी: ग्रामीण अंचलों में साफ-सफाई का अभाव और जागरूकता की कमी इस वायरस को मवेशियों में तेजी से फैलाने का मुख्य मार्ग तैयार करती है। • कमजोर इम्युनिटी: संक्रमण के कारण मवेशियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अचानक घट जाती है, जिससे दूध उत्पादन रुक जाता है और घाव गंभीर रूप ले लेते हैं। • पारंपरिक देखरेख: सरकारी टीकाकरण अभियानों के अलावा गांवों में लोग नीम, फिटकरी और हल्दी जैसे देसी नुस्खों से इम्युनिटी बढ़ाकर बचाव करते हैं। सवाल-जवाब 1. लम्पी वायरस का दुधारू पशुओं पर क्या असर पड़ता है? लम्पी वायरस की चपेट में आने पर गाय या भैंस का दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है या पूरी तरह बंद हो जाता है। 2. पशुओं में घाव साफ करने के लिए किस घरेलू तरीके का उपयोग होता है? घाव साफ करने के लिए नीम के पत्तों और फिटकरी को पानी में उबालकर नियमित रूप से दिन में दो बार धुलाई की जाती है। 3. पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खिलाया जाता है? नीम पत्ता, तुलसी पत्ता, हल्दी और काली मिर्च से बने मिश्रण के लड्डू पशु को खिलाए जाते हैं। 4. बीमारी के दौरान पशुओं को कौन सा फल देना चाहिए? बीमारी के समय पशुओं को संतरा जैसे विटामिन सी युक्त फल खिलाए जाने की सलाह दी जाती है। 5. लम्पी वायरस के समय सबसे ज्यादा किस बात पर जोर दिया जा रहा है? इस वायरस के समय पशुपालकों को सबसे ज्यादा गोशाला की साफ-सफाई पर ध्यान देने को कहा गया है। https://trendkia.com/health/gaya-bhaison-men-lumpy-virus-ke-lakshana-dikhate-hi-apanaen-ye-upaya-deoghar-ke-pashu-visheshajna-ne-di-ahama-salaha-39602 TrendKia — Har trend, sabse pehle.