ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखकर चुनें फल, फरीदाबाद के डॉक्टर चेतन शर्मा ने बताए डायबिटीज में मीठा खाने के सही नियम डायबिटीज में फलों के सेवन और मीठे से जुड़े भ्रम को दूर करते हुए सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉक्टर चेतन शर्मा ने ग्लाइसेमिक इंडेक्स, फल खाने के सही समय और शहद-गुड़ से बचाव के जरूरी नियम साझा किए हैं। डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खान-पान का चुनाव हमेशा एक बड़ी चुनौती बना रहता है। विशेष रूप से फलों के सेवन और मीठे की तलब को लेकर अक्सर यह उलझन रहती है कि कौन से फल सुरक्षित हैं और किनसे रक्त में शर्करा का स्तर अचानक बढ़ सकता है। फरीदाबाद स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉक्टर चेतन शर्मा के अनुसार, फलों को पूरी तरह छोड़ देने के बजाय उनके सही चयन और सेवन के वैज्ञानिक तरीकों को समझना जरूरी है। क्या अधिक मीठा खाने से ही हो जाती है डायबिटीज अक्सर यह माना जाता है कि अधिक मीठा खाने से सीधे तौर पर डायबिटीज हो जाती है, जिसे डॉक्टर चेतन शर्मा एक बड़ा मिथक करार देते हैं। उनके अनुसार मीठा खाना केवल एक जोखिम कारक यानी रिस्क फैक्टर है। जो व्यक्ति नॉन-डायबिटिक हैं अथवा जिन्हें प्री-डायबिटीज की समस्या नहीं है, वे सामान्य रूप से मीठा खा सकते हैं। हालांकि, जो लोग प्री-डायबिटिक श्रेणी में आते हैं, उन्हें मीठा खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। डायबिटीज होने या न होने के पीछे कई अन्य शारीरिक और आनुवंशिक कारण जिम्मेदार होते हैं। इसमें सबसे पहला मुख्य पहलू डीएनए में मौजूद जेनेटिक फैक्टर है, जो आगे चलकर इस बीमारी की वजह बन सकता है। दूसरा अहम कारण व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म है; यदि मेटाबॉलिज्म धीमा है, तो डायबिटीज की चपेट में आने की आशंका काफी बढ़ जाती है। तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु शारीरिक व्यायाम की आदत है। नियमित तौर पर फिजिकल एक्सरसाइज न करना और शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना भी डायबिटीज के खतरे को बढ़ा देता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स का फॉर्मूला और सही फलों का चयन डायबिटीज के मरीज फल खा सकते हैं या नहीं, इस पर स्पष्ट करते हुए डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि मरीज बिल्कुल फल खा सकते हैं, बशर्ते वे ग्लाइसेमिक इंडेक्स के नियम का पालन करें। किसी भी फल को खाने से पहले मरीज इंटरनेट पर उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स देख सकते हैं, जैसे कि सेब खाने से पहले उसका इंडेक्स जांचा जा सकता है। यदि किसी फल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 से अधिक है, तो वह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाएगा। इसके विपरीत, जिस फल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 से नीचे है, उसका सेवन आराम से किया जा सकता है। विशेष तौर पर उन फलों को सुरक्षित माना गया है जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से कम होता है। ऐसे फलों की श्रेणी में अमरूद, नाशपाती, अंगूर और स्ट्रॉबेरी शामिल हैं। इन फलों को मरीज बिना किसी परेशानी के अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। डॉक्टर शर्मा का कहना है कि यदि किसी मरीज का ब्लड शुगर नियंत्रण में चल रहा है, तो उसे मीठे फलों को अपनी थाली से पूरी तरह हटाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। फल खाने का सही समय और जूस से बचने की सलाह फलों के सेवन के सही समय को लेकर भी खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दिन के समय फल खाना सबसे उत्तम माना गया है। आयुर्वेद के सिद्धांतों का हवाला देते हुए डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद फल खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा दिन के किसी भी समय फल का सेवन सुरक्षित माना जाता है। फलों के रूप को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। डायबिटीज के मरीजों को फलों का जूस पीने से बचना चाहिए। तरल रूप में होने के कारण फलों का जूस खून में बहुत तेजी से अवशोषित हो जाता है और शुगर लेवल को अचानक स्पाइक कर देता है। इसके मुकाबले साबुत फल खाना अधिक लाभकारी होता है, क्योंकि साबुत फल चबाने से शरीर को भरपूर फाइबर मिलता है जो शुगर के अवशोषण को नियंत्रित रखता है। शहद और गुड़ का सेवन कितना सुरक्षित आमतौर पर लोग चीनी के विकल्प के तौर पर शहद और गुड़ को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल दृष्टिकोण से यह धारणा गलत है। डॉक्टर चेतन शर्मा का कहना है कि शहद में प्राकृतिक रूप से शर्करा का स्तर काफी ज्यादा होता है। इसलिए बेहतर यही है कि डायबिटीज के मरीज शहद का इस्तेमाल न करें। ठीक यही नियम गुड़ के सेवन पर भी लागू होता है। जिस तरह शहद में उच्च मात्रा में शुगर पाई जाती है, उसी तरह गुड़ में भी हाई लेवल शुगर मौजूद रहती है। इस वजह से गुड़ खाने से भी ब्लड शुगर पर सीधा और तीव्र असर पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे इन दोनों ही चीजों से दूरी बनाकर रखें। मीठा खाने की तलब को कैसे करें नियंत्रित डायबिटीज के मरीजों में अक्सर मीठा खाने की तीव्र इच्छा यानी क्रेविंग देखने को मिलती है। इस पर काबू पाने के लिए डॉक्टर चेतन शर्मा आहार में बदलाव का सुझाव देते हैं। मरीजों को अपने दैनिक भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। साथ ही सुरक्षित श्रेणी के साबुत फलों का सेवन करना चाहिए। भोजन में पर्याप्त फाइबर और प्रोटीन शामिल रहने से पेट भरा रहता है और मीठा खाने की तलब अपने आप नियंत्रित हो जाती है। इसका आप पर असर डायबिटीज के मरीजों और प्री-डायबिटिक व्यक्तियों के लिए इस सलाह का सीधा असर उनकी दैनिक डाइट और फल चुनने के तरीकों पर पड़ता है। • ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच: फल खरीदने या खाने से पहले उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 से नीचे होना सुनिश्चित करें। 70 से कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले अमरूद, नाशपाती, अंगूर और स्ट्रॉबेरी सबसे सुरक्षित विकल्प हैं। • साबुत फल बनाम जूस: फलों का जूस पीने के बजाय हमेशा साबुत फल चबाकर खाने की आदत डालें। जूस से ब्लड शुगर तेजी से स्पाइक होता है, जबकि साबुत फल का फाइबर शुगर को नियंत्रित रखता है। • शहद और गुड़ से परहेज: चीनी के बदले गुड़ या शहद का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। इनमें अत्यधिक मात्रा में शुगर होती है जो रक्त शर्करा को तुरंत बढ़ा देती है। • खाने का सही समय: फलों का सेवन केवल सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले करें। रात के समय या सूर्योदय से पूर्व फल खाने से परहेज करना चाहिए। • क्रेविंग पर नियंत्रण: मीठा खाने की इच्छा होने पर भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। इससे बार-बार लगने वाली भूख और शुगर क्रेविंग शांत होती है। ऐसा क्यों हुआ डायबिटीज और खान-पान को लेकर बने मिथकों और गलत आदतों के कारण अक्सर मरीजों का ब्लड शुगर अनियंत्रित हो जाता है। फरीदाबाद के डॉक्टर ने इसके पीछे के वैज्ञानिक और मेटाबॉलिक कारणों को स्पष्ट किया है। • मिथक और जोखिम कारक: अधिक मीठा खाना अकेले डायबिटीज की सीधी वजह नहीं है, बल्कि यह केवल एक जोखिम कारक है। बीमारी का मुख्य आधार आनुवंशिक बनावट, धीमा मेटाबॉलिज्म और व्यायाम की कमी जैसे बहुआयामी कारणों पर निर्भर करता है। • फलों के जूस का प्रभाव: फलों को पीसकर जूस बनाने से उनका प्राकृतिक फाइबर नष्ट हो जाता है। इसके चलते तरल शुगर सीधे और तेजी से खून में मिलकर शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देती है। • प्राकृतिक मिठास का भ्रम: लोग अक्सर गुड़ और शहद को रासायनिक रूप से सुरक्षित मानकर अधिक मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि, इनमें शर्करा की सांद्रता बहुत अधिक होती है, जो सामान्य चीनी की तरह ही नुकसान पहुंचाती है। सवाल-जवाब 1. क्या ज्यादा मीठा खाने से ही डायबिटीज होती है? नहीं, अधिक मीठा खाना सिर्फ एक रिस्क फैक्टर है। डायबिटीज मुख्य रूप से जेनेटिक कारणों, सुस्त मेटाबॉलिज्म और एक्सरसाइज की कमी पर निर्भर करती है। 2. डायबिटीज के मरीज कौन से फल सुरक्षित रूप से खा सकते हैं? वे सभी फल खाए जा सकते हैं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 से नीचे हो। 70 से कम इंडेक्स वाले अमरूद, नाशपाती, अंगूर और स्ट्रॉबेरी सबसे सुरक्षित हैं। 3. फल खाने का सबसे सही समय कौन सा बताया गया है? फलों का सेवन दिन के समय करना चाहिए। सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद फल खाने से बचना चाहिए। 4. डायबिटीज में फलों का जूस पीने से क्यों मना किया जाता है? जूस में फाइबर नहीं होता और यह खून में बहुत तेजी से घुलकर ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देता है। 5. क्या चीनी की जगह शहद या गुड़ का सेवन सुरक्षित है? नहीं, शहद और गुड़ दोनों में काफी उच्च स्तर की शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इनसे बचना चाहिए। 6. डायबिटीज में मीठा खाने की तलब को कैसे कम करें? अपने दैनिक भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाकर तथा सुरक्षित फल खाकर मीठे की तलब को नियंत्रित किया जा सकता है। https://trendkia.com/health/glaisemika-indeksa-dekhakara-chunen-phala-faridabad-ke-doktara-chetan-sharma-ne-batae-diabetes-men-mitha-khane-ke-sahi-niyama-36142 TrendKia — Har trend, sabse pehle.