ग्लूकोज पर लगाम लगाने के लिए रोज कितनी देर टहलना जरूरी है? जानिए डॉक्टर का फॉर्मूला खून में शर्करा की मात्रा को संतुलित रखने के लिए हफ्ते में 150 मिनट की कसरत जरूरी है। जानिए भोजन के बाद कितने मिनट की चहलकदमी सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाती है। हाइपरग्लाइसीमिया के नाम से जानी जाने वाली हाई ब्लड शुगर की स्थिति तब पैदा होती है, जब अग्न्याशय या पैंक्रियाज से निकलने वाला इंसुलिन हार्मोन ठीक ढंग से काम करना बंद कर देता है। सामान्य स्थिति में यह हार्मोन हमारे खान-पान से तैयार होने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा बनाने का जिम्मा संभालता है। जब शरीर में इस हार्मोन की मात्रा घटने लगती है या फिर शारीरिक कोशिकाएं इसका असरदार उपयोग करने में नाकाम रहती हैं, तो ग्लूकोज सीधे खून के प्रवाह में इकट्ठा होने लगता है। इस मेडिकल स्थिति को काबू में करने के लिए रोजाना की शारीरिक सक्रियता बेहद कारगर उपाय मानी जाती है, जिसमें सबसे सरल और सुलभ तरीका टहलना है। डॉ. दिनेश कुमार, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा ने इस संदर्भ में टहलने के सही समय और इसके तौर-तरीकों का विस्तृत ब्योरा साझा किया है। शारीरिक सक्रियता और शुगर नियंत्रण का सीधा संबंध शारीरिक गतिविधियों का नियमित अभ्यास खून में शर्करा को संतुलित रखने में सबसे बुनियादी भूमिका अदा करता है। जब कोई व्यक्ति कदमताल शुरू करता है, तो शरीर की मांसपेशियां ईंधन के रूप में खून में मौजूद ग्लूकोज को तेजी से खींचने लगती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया की बदौलत शर्करा का स्तर बिना किसी अतिरिक्त दबाव के नीचे आने लगता है। सामान्य रूप से फिट वयस्क व्यक्तियों को हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम करने का सुझाव दिया जाता है। इस साप्ताहिक लक्ष्य को सप्ताह भर में बांटकर रोज तकरीबन 30 मिनट तेज गति से पैदल चलकर बहुत आसानी से हासिल किया जा सकता है। जिन लोगों के लिए एक बार में लगातार आधा घंटा चलना कठिन लगता हो, वे पूरे दिन में 10-10 मिनट के तीन छोटे राउंड बनाकर भी समान स्वास्थ्य लाभ उठा सकते हैं। भोजन के तुरंत बाद की चहलकदमी के खास फायदे मधुमेह के रोगियों अथवा बढ़े हुए शर्करा स्तर से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए भोजन करने के उपरांत की जाने वाली चहलकदमी चमत्कारिक प्रभाव दिखाती है। भोजन समाप्त करने के बाद 10 से 15 मिनट की धीमी या मध्यम गति की सैर शरीर को भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को तत्काल खपाने में सक्षम बनाती है। इससे भोजन के फौरन बाद शुगर लेवल में आने वाले अचानक उछाल को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत एक जैसी नहीं होती। किसी भी इंसान के लिए टहलने की सटीक अवधि और उसकी चाल की तेजी उसकी उम्र, मौजूदा शारीरिक दशा, वजन, फिटनेस स्तर और खून में शर्करा की वास्तविक रीडिंग के आधार पर तय की जानी चाहिए। सावधानियां और संपूर्ण जीवनशैली का संतुलन कसरत के दौरान अपने शरीर के संकेतों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि पैदल चलते वक्त अत्यधिक थकावट, चक्कर आना, कमजोरी या किसी भी तरह की शारीरिक असहजता महसूस हो, तो व्यक्ति को तुरंत रुक जाना चाहिए। विशेष रूप से जो मरीज इंसुलिन के इंजेक्शन या शुगर घटाने की दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें चलते समय शुगर के अचानक अत्यधिक नीचे गिर जाने के खतरे का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे मरीजों को हमेशा अपने चिकित्सक से व्यक्तिगत चर्चा करके ही अपनी दैनिक कसरत की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। यह समझना भी अनिवार्य है कि सिर्फ पैदल चलने से इस बीमारी का पूर्ण समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए पौष्टिक व संतुलित भोजन, भरपूर नींद, वजन पर नियंत्रण, डॉक्टरी दवाओं का सही समय पर सेवन और नियमित जांच का होना भी उतना ही आवश्यक है। इसका आप पर असर नियमित टहलने की आदत आपके शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाकर दवाओं पर आपकी निर्भरता को कम कर सकती है। • दैनिक दिनचर्या पर असर: हर भोजन के बाद केवल 10 से 15 मिनट की सैर करने की आदत डालें। यह छोटा सा बदलाव दोपहर और रात के खाने के बाद ब्लड शुगर में आने वाले अचानक उछाल को रोक देता है। • साप्ताहिक फिटनेस लक्ष्य: हफ्ते भर में कम से कम 150 मिनट तेज चाल से चलने का नियम बनाएं। यदि समय की कमी हो तो दिनभर में 10-10 मिनट के तीन चक्र पूरे करके भी लक्ष्य पा सकते हैं। • दवाइयों के साथ सावधानी: इंसुलिन या शुगर की गोलियां लेने वाले मरीज टहलते समय अपने साथ ग्लूकोज या मीठी चीज जरूर रखें। कसरत के दौरान शुगर लेवल बहुत ज्यादा नीचे गिर जाने पर तुरंत टहलना बंद करके डॉक्टर से संपर्क करें। • समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन: केवल पैदल चलने को इलाज न मानें बल्कि खान-पान, पर्याप्त नींद और समय पर दवा लेने का संतुलन बनाएं। अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार डॉक्टर से परामर्श लेकर ही अपनी चाल और समय तय करें। ऐसा क्यों हुआ शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी या कोशिकाओं की निष्क्रियता के कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है। जब शरीर प्राकृतिक रूप से शर्करा को ऊर्जा में तब्दील नहीं कर पाता, तब शारीरिक गतिशीलता इसे नियंत्रित करने का सबसे प्राथमिक जरिया बनती है। • हार्मोनल असंतुलन: अग्न्याशय द्वारा पर्याप्त इंसुलिन न बना पाना या कोशिकाओं द्वारा इसका सही इस्तेमाल न करना इस समस्या का मूल कारण है। इसके परिणामस्वरूप भोजन से मिलने वाला ग्लूकोज कोशिकाओं में जाने के बजाय सीधे खून में जमा होने लगता है। • मांसपेशियों की सक्रियता: चलने-फिरने से शरीर की मांसपेशियां हरकत में आती हैं और उन्हें तुरंत अतिरिक्त ईंधन की आवश्यकता पड़ती है। गतिशीलता के दौरान मांसपेशियां रक्त में मौजूद अतिरिक्त शुगर को सोखकर उसे ऊर्जा के रूप में उपयोग कर लेती हैं। • आहार के बाद का प्रवाह: भोजन करने के तुरंत बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर सबसे तेजी से बढ़ता है। ऐसे में भोजन के उपरांत की गई हल्की वॉक शरीर को उस बढ़ते हुए ग्लूकोज को तुरंत खपाने का अवसर प्रदान करती है। सवाल-जवाब 1. हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या शरीर में क्यों होती है? यह समस्या तब होती है जब अग्न्याशय में इंसुलिन कम बनता है या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। 2. वयस्कों को हर सप्ताह कितनी देर शारीरिक व्यायाम करने की सलाह दी जाती है? एक स्वस्थ वयस्क को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की फिजिकल एक्टिविटी या रोजाना 30 मिनट तेज वॉक करनी चाहिए। 3. क्या 30 मिनट की वॉक को टुकड़ों में बांटा जा सकता है? हां, यदि लगातार 30 मिनट चलना संभव न हो तो 10-10 मिनट के छोटे सेशन में इसे पूरा किया जा सकता है। 4. भोजन के बाद कितनी देर टहलना फायदेमंद रहता है? भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की से मध्यम गति की वॉक करना ग्लूकोज को नियंत्रित करने के लिए काफी लाभकारी होता है। 5. पैदल चलते समय चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में तुरंत वॉक रोक देनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी कसरत का स्तर तय करना चाहिए। 6. क्या केवल वॉकिंग करने से डायबिटीज ठीक हो सकती है? नहीं, वॉकिंग के साथ-साथ संतुलित खान-पान, वजन नियंत्रण, सही नींद और नियमित दवाइयों का सेवन भी जरूरी है। https://trendkia.com/health/glukoja-para-lagama-lagane-ke-lie-roja-kitani-dera-tahalana-jaruri-hai-janie-doktara-ka-phormula-42372 TrendKia — Har trend, sabse pehle.