गंभीर लिवर की बीमारियों से बचने के लिए समय पर करवाएं ये 5 जरूरी स्वास्थ्य जांच लिवर से जुड़ी बीमारियां शुरुआती दौर में अक्सर बिना किसी लक्षण के पनपती हैं। गंभीर नुकसान से बचने के लिए विशेषज्ञ 5 प्रमुख मेडिकल टेस्ट नियमित रूप से कराने की सलाह देते हैं। मानव शरीर का सबसे बड़ा, मजबूत और अत्यंत महत्वपूर्ण आंतरिक अंग लिवर है। यह भोजन पचाने, शरीर से हानिकारक और विषैले तत्वों को बाहर निकालने, ऊर्जा संचित करने और शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन का निर्माण करने जैसी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है। हालांकि, लिवर से जुड़ी अधिकांश बीमारियां अपने शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण प्रदर्शित नहीं करती हैं। आमतौर पर जब किसी व्यक्ति को अत्यधिक थकान, पीलिया, पेट में सूजन या तीव्र दर्द जैसे संकेत महसूस होते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे के चरण में पहुंच चुकी होती है। इसलिए केवल लक्षणों के उभरने की प्रतीक्षा करने के बजाय समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना एक बेहतर विकल्प है। फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर और HOD डॉक्टर रमेश गर्ग के अनुसार, कुछ सामान्य जांचों के जरिए लिवर की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य स्थिति का समय रहते सही आकलन किया जा सकता है। लिवर की सेहत आंकने के लिए 5 महत्वपूर्ण जांच 1. लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT): यह लिवर के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट है। इस जांच के माध्यम से SGOT (AST), SGPT (ALT), बिलीरुबिन और अन्य आवश्यक पैरामीटर्स का आकलन किया जाता है। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि लिवर अपनी सामान्य कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से अंजाम दे पा रहा है या नहीं। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और लिवर में आने वाली किसी भी सूजन के शुरुआती संकेत इस जांच से आसानी से मिल जाते हैं। 2. हेपेटाइटिस बी और सी की जांच: हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के वायरस शरीर के भीतर प्रवेश करने के बाद बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते रहते हैं। जब तक इनका पता चलता है, तब तक लिवर में गंभीर क्षति हो चुकी होती है। समय पर ब्लड स्क्रीनिंग करवाकर इन वायरसों की पहचान की जा सकती है, जिससे सही समय पर इलाज शुरू करके भविष्य की जटिलताओं को रोका जा सकता है। 3. फैटी लिवर की स्क्रीनिंग: आधुनिक जीवनशैली में गलत खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और डायबिटीज के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। चिकित्सक की सलाह पर कराए जाने वाले ब्लड टेस्ट और पेट के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) से लिवर में वसा के जमाव की सटीक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। 4. लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर टेस्ट: शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर का असंतुलन भी सीधे तौर पर लिवर की सेहत को प्रभावित करता है। यदि किसी व्यक्ति के रक्त में शर्करा और वसा का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, तो इससे फैटी लिवर और अन्य मेटाबॉलिक विकारों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए लिवर को सुरक्षित रखने के लिए इनकी नियमित निगरानी जरूरी है। 5. फाइब्रोसिस या लिवर डैमेज की विशेष जांच: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या अत्यधिक शराब के सेवन से जूझ रहा है, तो लिवर में स्थायी नुकसान या फाइब्रोसिस (लिवर में घाव बनना) का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ विशेष जांचों की सलाह देते हैं, जिससे लिवर के ऊतकों को पहुंचे नुकसान का सटीक आंकलन किया जा सके। समय पर जांच कराना क्यों आवश्यक है? लिवर की खासियत है कि यह शुरुआती डैमेज के बावजूद अपने काम को जारी रखता है, जिस कारण व्यक्ति को बीमारी का अहसास नहीं होता। जब तक लक्षण जैसे कि पीलिया या पेट में पानी भरना शुरू होता है, तब तक लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। नियमित मेडिकल स्क्रीनिंग से इन बीमारियों को शुरुआती दौर में ही पकड़कर पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। लिवर को हमेशा स्वस्थ रखने के अचूक उपाय लिवर की देखभाल केवल नियमित जांच तक ही सीमित नहीं है। दैनिक जीवन में सही आदतों को शामिल करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पौष्टिक एवं संतुलित आहार लें, नियमित रूप से व्यायाम करें, वजन को नियंत्रित रखें, शराब के सेवन से पूरी तरह परहेज करें या सीमित रखें, और बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी प्रकार की दवाओं का सेवन करने से बचें। इसका आप पर असर • भारत में: तेजी से बढ़ते फैटी लिवर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के बीच नियमित जांच कराने से गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज के जोखिम से बचा जा सकता है। • व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए: शुरुआती चरण में ही लिवर डैमेज का पता चलने पर सही खानपान और जीवनशैली में बदलाव कर लिवर को पूरी तरह स्वस्थ बनाया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. लिवर खराब होने के शुरुआती संकेत क्या होते हैं? लिवर की बीमारियां अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती हैं। गंभीर स्थिति होने पर अत्यधिक थकान, पीलिया, पेट में सूजन और तेज दर्द महसूस हो सकता है। 2. लिवर की कार्यप्रणाली जांचने के लिए कौन सा ब्लड टेस्ट कराया जाता है? लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) सबसे मुख्य ब्लड टेस्ट है, जिसके माध्यम से SGOT, SGPT और बिलीरुबिन के स्तर की जांच की जाती है। 3. फैटी लिवर का पता लगाने के लिए कौन सी जांच जरूरी है? फैटी लिवर का पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर टेस्ट और पेट का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। 4. हेपेटाइटिस बी और सी की जांच क्यों महत्वपूर्ण है? हेपेटाइटिस बी और सी के वायरस बिना किसी लक्षण के लिवर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए समय पर जांच कराने से स्थायी डैमेज से बचा जा सकता है। 5. लिवर को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में क्या सुधार करने चाहिए? संतुलित आहार लें, रोजाना व्यायाम करें, स्वस्थ वजन बनाए रखें, शराब का सेवन न करें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें। https://trendkia.com/health/gnbhira-livara-ki-bimariyon-se-bachane-ke-lie-samaya-para-karavaen-ye-5-jaruri-svasthya-jancha-11641 TrendKia — Har trend, sabse pehle.