गोंडा के आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार शुगर के मरीजों को किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान डायबिटीज के नियंत्रण के लिए आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मरीजों को दवा लेने और खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। डायबिटीज यानी शुगर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खान-पान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य माना जाता है। समय पर भोजन ग्रहण करना, संतुलित आहार लेना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और चिकित्सीय परामर्श के अनुसार दवाइयों का सेवन करना ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में सहायक होता है। इस बीमारी में थोड़ी सी भी लापरवाही लंबे समय में बड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों का पारंपरिक उपयोग गोंडा के वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, आयुर्वेद में डायबिटीज की स्थिति से निपटने के लिए पारंपरिक रूप से कई प्रकार की जड़ी-बूटियों और औषधियों का उपयोग किया जाता है। इनमें चंद्रप्रभा वटी, जामुन की गुठली का पाउडर, मामेजवा, गुड़मार और एलोवेरा जैसी चीजें प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि, इन पारंपरिक उपायों को कभी भी डॉक्टर द्वारा दी जा रही मुख्य दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। जड़ से खत्म करने के दावों से रहें दूर डायबिटीज होने के बाद इसे पूरी तरह जड़ से खत्म करने का दावा करने वाले विज्ञापनों या बातों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर इस तरह के दावे अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन मरीजों को अपने उपचार के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह को ही सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। नियमित जांच और अंगों की सुरक्षा का महत्व ब्लड शुगर को खान-पान पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, समय पर जांच और डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार दवाओं के माध्यम से काबू में रखा जा सकता है। इसके अलावा, HbA1c टेस्ट के जरिए पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर का सही अनुमान लगाया जाता है, जिसकी रिपोर्ट को डॉक्टर की सलाह के साथ ही समझना बेहतर रहता है। लंबे समय तक शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने पर शरीर के कई अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे आंखों, किडनी और पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मरीजों को नियमित रूप से अपनी जांच करानी चाहिए। दवा लेने वाले मरीजों के लिए विशेष सावधानी जो मरीज पहले से ही शुगर की दवा या इंसुलिन ले रहे हैं, उन्हें बिना किसी योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के कोई भी नई जड़ी-बूटी या औषधि शुरू नहीं करनी चाहिए। कई बार कुछ चीजों का असर ब्लड शुगर पर सीधा पड़ता है और उन्हें अंग्रेजी दवाओं के साथ लेने से शुगर का स्तर जरूरत से ज्यादा नीचे गिरने का जोखिम रहता है। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने के साथ-साथ नियमित ब्लड शुगर की जांच करना बेहद आवश्यक है। इसका आप पर असर डायबिटीज के मरीजों को अपनी दिनचर्या और दवाइयों में किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए ताकि स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सके। • भारत में: डायबिटीज के सभी मरीजों को सोशल मीडिया पर मिलने वाले झूठे दावों से सावधान रहने और नियमित जांच कराने की आवश्यकता है। • गोंडा में: स्थानीय निवासियों और मरीजों को किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को अपनी मौजूदा दवा के साथ शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। सवाल-जवाब 1. डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए क्या जरूरी है? समय पर भोजन, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना जरूरी है। 2. आयुर्वेद में कौन सी औषधियां इस्तेमाल होती हैं? आयुर्वेद में चंद्रप्रभा वटी, जामुन की गुठली का पाउडर, मामेजवा, गुड़मार और एलोवेरा का पारंपरिक उपयोग होता है। 3. HbA1c टेस्ट क्या बताता है? यह टेस्ट पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है। 4. शुगर की दवा लेने वालों को क्या सावधानी रखनी चाहिए? उन्हें बिना डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी नई जड़ी-बूटी शुरू नहीं करनी चाहिए। https://trendkia.com/health/gonda-ke-ayurved-visheshagyon-ke-anusar-sugar-ke-marizon-ko-kin-baton-ka-rakhna-chahiye-vishesh-dhyan-27700 TrendKia — Har trend, sabse pehle.