जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर दी चेतावनी मुंह में दो हफ्ते से अधिक रहने वाले छाले, सफेद या लाल धब्बे और मुंह खुलने में कमी ओरल कैंसर का संकेत हो सकते हैं, जिनकी समय पर जांच जीवन बचा सकती है। मुंह में साधारण छाले होना एक बेहद आम समस्या है जो अमूमन कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन जब कोई घाव लंबे समय तक बना रहे तो वह किसी गंभीर खतरे की घंटी हो सकता है। गुटखा, खैनी, सिगरेट और शराब का लगातार इस्तेमाल करने वाले लोगों के मुंह में दिखने वाले असामान्य बदलाव किसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा कर सकते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला के मुताबिक समय रहते चिकित्सकीय जांच करवाने से मुंह के कैंसर का प्रारंभिक स्तर पर ही पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार के परिणाम काफी बेहतर और प्रभावी साबित होते हैं। छाले का दो सप्ताह से अधिक टिकना खतरे का संकेत डॉ. संजय काला का कहना है कि मुंह अथवा जीभ पर निकलने वाले सामान्य छाले अमूमन कुछ दिनों के भीतर स्वतः भर जाते हैं। इसके विपरीत यदि कोई घाव या छाला दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न हो, बार-बार ठीक होकर उसी स्थान पर दोबारा उभर आए, अथवा धीरे-धीरे उसका आकार फैलने लगे, तो फौरन विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। खासतौर पर तंबाकू उत्पादों का उपभोग करने वाले व्यक्तियों को इस प्रकार की शारीरिक चेतावनियों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गुटखा और सुपारी से मुंह का खुलना हो सकता है सीमित गुटखा और सुपारी का निरंतर चबाना मुंह के भीतर मौजूद नाजुक ऊतकों को अत्यधिक सख्त और कड़ा बना देता है। इस चिकित्सकीय स्थिति को ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के नाम से जाना जाता है। इस विकार के विकसित होने पर व्यक्ति का मुंह धीरे-धीरे पूरा खुलना बंद हो जाता है। प्रारंभिक चरण में पान अथवा गुटखा चबाने के दौरान असुविधा का अहसास होता है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ सामान्य भोजन ग्रहण करने, निगलने और यहां तक कि साफ बोलने में भी गंभीर कठिनाई पेश आने लगती है। सफेद और लाल धब्बों पर चिकित्सीय निगरानी जरूरी डॉ. संजय काला ने रेखांकित किया कि गालों के आंतरिक हिस्से, जीभ की सतह अथवा मसूड़ों पर असामान्य सफेद या चटख लाल रंग के चकत्ते नजर आना भी पूर्व-चेतावनी हो सकते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इन धब्बों को क्रमशः ल्यूकोप्लाकिया और एरिथ्रोप्लाकिया के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। हालांकि मुंह में दिखने वाला प्रत्येक सफेद या लाल धब्बा सीधे कैंसर का रूप नहीं होता, फिर भी ऐसे किसी भी टिशू बदलाव की विशेषज्ञ द्वारा जांच कराया जाना बेहद आवश्यक है। इसके अतिरिक्त यदि तीखे या चटपटे खान-पान से मुंह में असहनीय जलन होने लगे, लगातार दर्द की स्थिति बनी रहे या किसी खास हिस्से की संवेदनशीलता अचानक अत्यधिक बढ़ जाए, तो डॉक्टरी राय लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। तंबाकू की लत त्यागने के पश्चात भी यदि यह समस्या बरकरार रहे, तो डॉक्टर को इसकी पूरी जानकारी अवश्य देनी चाहिए। गंभीर लक्षण और स्वयं जांच करने का सही तरीका डॉ. काला के अनुसार मुंह से अकारण खून का रिसाव होना, मसूड़ों या जीभ में निरंतर बना रहने वाला दर्द, आवाज का भारी या बदल जाना, निगलने में बाधा उत्पन्न होना, गर्दन के क्षेत्र में किसी गांठ का उभरना अथवा मुंह के किसी हिस्से का सुन्न पड़ जाना ऐसे लक्षण हैं जिन पर तत्काल चिकित्सकीय मार्गदर्शन अपेक्षित है। तंबाकू और मदिरा का सेवन करने वालों को नियमित अंतराल पर आईने के सामने खड़े होकर अपने मुंह की स्वयं जांच करनी चाहिए। गालों की भीतरी परत, जीभ के ऊपरी व निचले भाग, मसूड़ों और तालू का सूक्ष्मता से मुआयना करें। यदि कोई भी घाव, चकत्ता अथवा सूजन दो हफ्ते से अधिक समय तक बनी रहे, तो कैंसर रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। स्थिति को स्पष्ट करने हेतु चिकित्सक बायोप्सी या अन्य परीक्षणों का सहारा ले सकते हैं, क्योंकि हर छाला कैंसर भले न हो, लेकिन लंबे समय तक न भरने वाले घाव की पड़ताल जान बचा सकती है। इसका आप पर असर यह चिकित्सकीय सलाह मुंह में होने वाले साधारण दिखने वाले बदलावों को पहचानकर समय पर जानलेवा कैंसर से बचाव करने का व्यावहारिक मार्गदर्शन देती है। • तंबाकू और शराब उपभोक्ताओं के लिए: यदि आप गुटखा, खैनी, सिगरेट या मदिरा का सेवन करते हैं, तो नियमित रूप से आईने में अपने पूरे मुंह की आंतरिक जांच अवश्य करें। दो सप्ताह से अधिक रहने वाले किसी भी छाले, लाल-सफेद चकत्ते या सूजन को अनदेखा न करके तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं। • खान-पान और बोलने में परेशानी होने पर: यदि तीखा खाने पर तेज जलन महसूस हो या मुंह पूरा खुलने में रुकावट आने लगे, तो यह ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस का संकेत हो सकता है। समय रहते आदतों में बदलाव और चिकित्सकीय परामर्श लेने से ऊतकों को स्थायी रूप से सख्त होने से रोका जा सकता है। • जांच और बायोप्सी का महत्व: मुंह में बार-बार होने वाले घाव या गर्दन में किसी गांठ के उभरने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार बायोप्सी जांच कराने में संकोच न करें। शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने से उपचार सरल, कम खर्चीला और जीवन रक्षक सिद्ध होता है। • लत छोड़ने के बाद भी सतर्कता: यदि आपने तंबाकू या सिगरेट का सेवन बंद कर दिया है और फिर भी संवेदनशीलता या छाले बने हुए हैं, तो जांच जारी रखें। शरीर के पूर्व ऊतक परिवर्तनों की डॉक्टरी निगरानी बनाए रखना पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है। ऐसा क्यों हुआ मुंह के कैंसर और पूर्व-कैंसर विकारों का मुख्य कारण गुटखा, सुपारी, तंबाकू और शराब का निरंतर सेवन है, जिससे मुंह के कोमल ऊतक क्षतिग्रस्त होकर सख्त हो जाते हैं। इन हानिकारक पदार्थों के लंबे संपर्क से कोशिकाओं की सामान्य संरचना बदलने लगती है। • तंबाकू और सुपारी का निरंतर प्रभाव: गुटखा और सुपारी को लगातार चबाने से मुंह के भीतर के कोमल ऊतक कठोर होने लगते हैं। इसी स्थिति को ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहा जाता है, जिसके कारण मुंह का सामान्य फैलाव कम हो जाता है। • कोशिकाओं में असामान्य परिवर्तन: हानिकारक रासायनिक पदार्थों के लगातार संपर्क में आने से गालों और जीभ पर ल्यूकोप्लाकिया (सफेद) और एरिथ्रोप्लाकिया (लाल) जैसे चकत्ते विकसित हो जाते हैं। यद्यपि ये सभी चकत्ते कैंसर नहीं होते, परंतु ये संभावित घातक बदलावों के अग्रदूत बन सकते हैं। • उपेक्षा और जांच में देरी: सामान्य छाले अमूमन कुछ दिनों में स्वतः भर जाते हैं, लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाले घावों को अनदेखा करने से रोग गंभीर रूप धारण कर लेता है। प्रारंभिक लक्षणों पर ध्यान न देने के कारण बीमारी का पता बाद के जटिल चरणों में चल पाता है। सवाल-जवाब 1. मुंह का सामान्य छाला कितने दिनों में ठीक हो जाता है? सामान्य छाले आमतौर पर कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। यदि कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। 2. ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस क्या है और इसके क्या लक्षण हैं? गुटखा और सुपारी के लगातार सेवन से मुंह के ऊतक सख्त हो जाते हैं, जिसे ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहते हैं। इसमें मुंह कम खुलने लगता है तथा खाने और बोलने में दिक्कत होती है। 3. मुंह में सफेद या लाल चकत्तों को क्या कहा जाता है? मुंह के अंदर दिखने वाले सफेद चकत्तों को ल्यूकोप्लाकिया और लाल चकत्तों को एरिथ्रोप्लाकिया कहा जाता है, जिनकी चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। 4. मुंह के कैंसर से बचने के लिए स्वयं जांच कैसे करें? आईने के सामने खड़े होकर गालों के अंदर, जीभ के ऊपर व नीचे, मसूड़ों और तालू की जांच करें तथा दो हफ्ते से अधिक पुराने घाव या सूजन पर डॉक्टर से संपर्क करें। 5. किन अन्य लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए? मुंह से अकारण खून आना, लगातार दर्द, आवाज बदलना, निगलने में कठिनाई, गर्दन में गांठ या मुंह में सुन्नपन रहने पर फौरन जांच करानी चाहिए। https://trendkia.com/health/gsvm-medical-college-ke-principal-dr-sanjay-kala-ne-munha-ke-kainsara-ke-shuruati-lakshanon-para-di-chetavani-37966 TrendKia — Har trend, sabse pehle.