गुस्से में आपा खोने से दिल पर अचानक बढ़ता है ढाई गुना तक दबाव, जानिए क्यों खतरनाक है यह स्थिति अत्यधिक क्रोध शरीर में हार्मोनल उथल-पुथल मचाकर रक्तचाप और हृदय गति को अचानक बढ़ा देता है, जिससे दिल के दौरे का खतरा ढाई गुना तक बढ़ सकता है. अक्सर लोग अचानक भड़कने या बेकाबू क्रोध को केवल स्वभाव, व्यवहार या मानसिक तनाव से जुड़ा मामला मानकर अनदेखा कर देते हैं. सच यह है कि अत्यधिक उत्तेजना और अनियंत्रित गुस्सा सीधे तौर पर इंसान के दिल और पूरी रक्त परिसंचरण प्रणाली पर भारी दबाव डालता है. जब कोई व्यक्ति अचानक आगबबूला होता है, तो उसका शरीर तुरंत एक ऐसी आपात स्थिति में चला जाता है मानो वह किसी बड़े खतरे का सामना कर रहा हो या उससे बचने के लिए भागने की तैयारी में हो. इस दौरान रक्तचाप में तेजी से उछाल आता है और हृदय की धड़कनें असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं. फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गौतम सिंघल के अनुसार, गुस्से की स्थिति में होने वाले जैविक बदलाव कुछ मामलों में हृदय के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं. शरीर में सक्रिय होने वाली जैविक प्रणाली और हार्मोन का स्राव डॉ. गौतम सिंघल समझाते हैं कि गुस्सा मूल रूप से एक तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया है. किसी भी खतरे, विवाद या तनावपूर्ण परिस्थिति में शरीर प्राकृतिक रूप से मुकाबला करने या बच निकलने के तंत्र को सक्रिय कर देता है. इसे वैज्ञानिक भाषा में रक्षात्मक प्रतिक्रिया कहा जाता है. इस प्रक्रिया के शुरू होते ही शरीर में एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे शक्तिशाली हार्मोन तेजी से और अधिक मात्रा में स्रावित होने लगते हैं. इन रासायनिक संदेशवाहकों के प्रवाह से हृदय तेजी से पंप करने लगता है, जिससे धड़कन की रफ्तार काफी बढ़ जाती है. इसी के साथ रक्तचाप के स्तर को बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाओं में अचानक संकुचन यानी खिंचाव आने लगता है. इस संकुचन के कारण महत्वपूर्ण मांसपेशियों तक खून का प्रवाह तेज हो जाता है, ताकि शरीर खुद को किसी भी तात्कालिक खतरे से निपटने के लिए तैयार रख सके. क्रोध शांत होने के बाद भी धमनियों पर बना रहता है असर बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर गुस्सा कुछ ही मिनटों में उतर गया और इंसान सामान्य दिखने लगा, तो खतरा टल गया. डॉ. गौतम सिंघल इस बात को बिल्कुल गलत बताते हैं. उनके अनुसार, भले ही मानसिक तौर पर व्यक्ति शांत हो जाए, लेकिन रक्त वाहिकाओं में जो खिंचाव और संकुचन पैदा होता है, उसका जैविक असर 40 से 70 मिनट तक बना रह सकता है. इसका सीधा अर्थ यह है कि गुस्सा शांत होने के एक घंटे बाद तक भी दिल और धमनियों पर अतिरिक्त कार्यभार रहता है. हर बार गुस्सा आने का मतलब यह नहीं होता कि दिल का दौरा पड़ ही जाएगा, लेकिन यदि क्रोध चरम सीमा पर पहुंच जाए, तो हृदय गति रुकने या मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन का जोखिम अचानक कई गुना बढ़ जाता है. अध्ययनों में सामने आया खतरे का सीधा संबंध हार्ट अटैक के विभिन्न जोखिमों पर किए गए व्यापक इंटरहार्ट अध्ययन और उसके उप-अध्ययन में कई अहम तथ्य दर्ज किए गए हैं. इस शोध में पाया गया कि कई मरीजों को हार्ट अटैक आने से ठीक एक घंटे पहले या तो अत्यधिक क्रोध का सामना करना पड़ा था, या फिर उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं अधिक कठिन शारीरिक श्रम किया था. डॉ. गौतम सिंघल के अनुसार, गंभीर और बेकाबू गुस्से की स्थिति में दिल का दौरा पड़ने का खतरा सामान्य से लगभग ढाई गुना तक बढ़ जाता है. यह जोखिम कारक कुछ व्यक्तियों में करीब एक घंटे या उससे भी अधिक समय तक लगातार बना रह सकता है. इसलिए अत्यधिक भावनात्मक उत्तेजना को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. किन लोगों को रहता है सबसे ज्यादा जोखिम यद्यपि अत्यधिक क्रोध हर सामान्य व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, लेकिन कुछ संवेदनशील वर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है. डॉ. गौतम सिंघल के मुताबिक, जिन लोगों को पहले से हृदय से जुड़ी कोई बीमारी है, जो पूर्व में कभी दिल के दौरे का शिकार हो चुके हैं, या फिर जो हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और सांस फूलने की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें सबसे ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, जिन व्यक्तियों के पैरों की नसों में ब्लॉकेज या संकुचन की समस्या है, या जिनके परिवार में पहले किसी करीबी सदस्य को हार्ट अटैक की समस्या रही हो, उनके लिए अतिरिक्त तनाव और भी खतरनाक बन जाता है. हालांकि, शरीर की बनावट और प्रतिक्रिया हर इंसान में अलग होती है. कई चिकित्सा मामलों में ऐसे लोग भी सामने आए हैं जिन्हें पहले से हृदय रोग का कोई ज्ञात इतिहास नहीं था, फिर भी अचानक आए तीव्र गुस्से के बाद उन्हें गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा. सामान्य उत्तेजना और खतरे के लक्षणों में अंतर समझना जरूरी क्रोध आने पर अलग-अलग लोगों का शरीर अलग तरीके से प्रतिक्रिया देता है. कुछ लोग उत्तेजित होकर भी सामान्य आवाज में बात कर सकते हैं, जबकि कुछ लोगों का चेहरा एकदम लाल पड़ जाता है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं और सांस तेजी से फूलने लगती है. ये सभी बातें गुस्से की सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं. चिंता की बात यह है कि यही लक्षण कई बार दिल के दौरे के शुरुआती संकेत भी होते हैं. डॉ. गौतम सिंघल स्पष्ट सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति का गुस्सा शांत हो जाने के बाद भी सीने में भारीपन बना रहे, अत्यधिक पसीना आए, सांस लेने में तकलीफ हो या बेचैनी की स्थिति लगभग 5 मिनट तक सामान्य न हो और लगातार बढ़ती रहे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे हालात में बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाकर आवश्यक चिकित्सीय जांच करवानी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर दिल के दौरे का आपात संकेत हो सकता है. इसका आप पर असर अत्यधिक गुस्से से होने वाले शारीरिक तनाव और दिल के दौरे के जोखिम को ध्यान में रखकर दैनिक जीवन में सावधानी बरतना जरूरी है. • सीने के लक्षणों पर तुरंत नजर रखें: गुस्सा शांत होने के बाद भी यदि 5 मिनट तक भारीपन या घबराहट बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. यह देरी किसी गंभीर हृदय संकट को टालने में मददगार साबित हो सकती है. • पहले से बीमार लोग तनाव से बचें: ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों को अत्यधिक मानसिक उत्तेजना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. अचानक आने वाला तीव्र क्रोध आपकी धमनियों में 70 मिनट तक संकुचन बनाए रख सकता है. • पारिवारिक इतिहास वाले रहें सतर्क: जिन परिवारों में पहले हार्ट अटैक के मामले रहे हैं, उन्हें नियमित हृदय जांच करवानी चाहिए. गुस्सा आने पर अपने शारीरिक बदलावों को हल्के में न लें. • अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचें: अत्यधिक क्रोध के साथ-साथ क्षमता से अधिक भारी काम करने से भी दिल पर अचानक दबाव बढ़ता है. अपनी शारीरिक क्षमता का हमेशा ध्यान रखें. ऐसा क्यों हुआ तीव्र क्रोध के दौरान शरीर में तेजी से होने वाले रासायनिक और हार्मोनल परिवर्तन धमनियों को सिकोड़कर हृदय पर अत्यधिक दबाव पैदा करते हैं. • हार्मोन का अनियंत्रित स्राव: गुस्सा आते ही शरीर में एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन हार्मोन अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं. ये रसायन हृदय गति को बहुत तेज कर देते हैं और रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं. • धमनियों में संकुचन का बना रहना: गुस्से की भावनात्मक प्रतिक्रिया भले ही कुछ मिनटों में समाप्त हो जाए, लेकिन धमनियों का खिंचाव 40 से 70 मिनट तक बना रहता है. इस अवधि में रक्त परिसंचरण प्रणाली पर अतिरिक्त तनाव रहता है. • अध्ययनों में साबित हुआ संबंध: इंटरहार्ट अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, हार्ट अटैक आने से एक घंटे पहले मरीजों में तीव्र क्रोध या अत्यधिक शारीरिक तनाव देखा गया था. इसी कारण कुछ स्थितियों में दिल के दौरे की संभावना ढाई गुना तक बढ़ जाती है. सवाल-जवाब 1. क्या तेज गुस्सा आने से सीधे हार्ट अटैक आ सकता है? हर बार गुस्सा आने से हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन अत्यधिक गुस्से की स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा सामान्य से लगभग ढाई गुना तक बढ़ सकता है. 2. गुस्सा शांत होने के बाद भी शरीर पर इसका असर कितने समय तक रहता है? गुस्सा शांत हो जाने के बावजूद रक्त वाहिकाओं में हुआ संकुचन करीब 40 से 70 मिनट तक बना रह सकता है. 3. गुस्से के दौरान शरीर में कौन से हार्मोन सक्रिय होते हैं? गुस्सा आने पर शरीर में एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे हार्मोन तेजी से और अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं. 4. गुस्से के बाद किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? यदि गुस्सा शांत होने के बाद भी सीने में भारीपन, पसीना, सांस फूलना या बेचैनी 5 मिनट तक ठीक न हो, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए. 5. किन लोगों को गुस्से के दौरान दिल का दौरा पड़ने का अधिक जोखिम रहता है? जिन्हें पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, सांस फूलने या पैरों की नसों में रुकावट की दिक्कत हो, उन्हें ज्यादा जोखिम रहता है. https://trendkia.com/health/gusse-men-apa-khone-se-dila-para-achanaka-barhata-hai-dhai-guna-taka-dabava-janie-kyon-khataranaka-hai-yaha-sthiti-41817 TrendKia — Har trend, sabse pehle.