{
  "type": "article",
  "title": "हरड़ और गाय के घी से पलामू में तैयार हुआ खास आयुर्वेदिक रसायन, पाचन और खांसी में लाभ का दावा",
  "summary": "पलामू के शिव कुमार पांडे ने पारंपरिक सत्सिद्ध विधि से हरड़ का औषधीय घी तैयार किया है। उन्होंने इसे पाचन विकार, खांसी और त्वचा संबंधी दिक्कतों में असरदार बताते हुए चिकित्सीय परामर्श के साथ सेवन की सलाह दी है।",
  "content": "भारतीय चिकित्सा परंपरा में घी को मात्र भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला घटक नहीं, बल्कि कई रोगों के उपचार में काम आने वाली आधारभूत औषधि माना गया है। आयुर्वेद में औषधीय जड़ी-बूटियों के सत्व को घी के भीतर समाहित कर विशेष रसायन बनाए जाते रहे हैं। इसी क्रम में झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले शिव कुमार पांडे ने हरड़ और शुद्ध गाय के घी के संयोजन से एक खास आयुर्वेदिक घी तैयार किया है। शिव कुमार पांडे पारंपरिक औषधियां तैयार करने का काम करते हैं और उनका कहना है कि इस फार्मूले को प्राचीन ग्रंथों में वर्णित रसकर्म के सिद्धांतों पर विकसित किया गया है।\n\nत्रिफला की प्रमुख जड़ी हरड़ का औषधीय महत्व\nआयुर्वेद की पारंपरिक औषधियों में त्रिफला को बेहद प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है, जिसके तीन प्रमुख अवयवों में हरड़, बहेड़ा और आंवला शामिल रहते हैं। शिव कुमार पांडे के अनुसार, हरड़ को सदियों से अपने अनूठे चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता रहा है। जब इस गुणकारी वनस्पति को गाय के शुद्ध घी के साथ संयोजित किया जाता है, तो यह शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को बल प्रदान करता है। उनका कहना है कि यह योग शारीरिक कमजोरी को दूर करने और जठराग्नि को संतुलित रखते हुए संपूर्ण पाचन तंत्र को सहारा देने में अहम भूमिका निभाता है।\n\nपाचन तंत्र के विकारों में उपयोगी\nइस औषधीय घी का मुख्य उपयोग पेट और आंतों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के निवारण के लिए बताया गया है। शिव कुमार पांडे ने जानकारी दी कि पाचन तंत्र के विकारों से जूझ रहे लोगों के लिए इसका सेवन रात के समय सोने से ठीक पहले करना अनुकूल माना जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस औषधि की खुराक हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और पहले से चल रही अन्य दवाओं पर निर्भर करती है। इसी वजह से किसी भी व्यक्ति को योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना मनमाने तरीके से इसका सेवन शुरू नहीं करना चाहिए।\n\nश्वसन तंत्र की तकलीफों और त्वचा विकारों में प्रयोग\nपाचन क्रिया के अलावा इस घी को श्वसन तंत्र से जुड़े विकारों में भी उपयोगी बताया जा रहा है। शिव कुमार पांडे के अनुसार, पुरानी खांसी और दमा जैसी सांस संबंधी दिक्कतों में इसका पारंपरिक उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही, खुजली और त्वचा से जुड़ी कुछ अन्य परेशानियों में इसे बाह्य लेप के तौर पर त्वचा पर लगाने की बात भी कही गई है। हालांकि उन्होंने यह सतर्कता भी जोड़ी कि दमा, कुष्ठ या किसी भी गंभीर बीमारी के संपूर्ण निवारण के लिए आधुनिक वैज्ञानिक व चिकित्सीय प्रमाणों की आवश्यकता होती है। गंभीर स्थिति में चिकित्सकों द्वारा तय किए गए मूल इलाज को छोड़कर केवल पारंपरिक नुस्खों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।\n\nपारंपरिक सत्सिद्ध पद्धति से निर्माण और मूल्य\nशिव कुमार पांडे ने बताया कि इस घी के निर्माण में सत्सिद्ध पद्धति का कड़ाई से पालन किया जाता है। इस विधि में हरड़ के औषधीय गुणों को गाय के घी के साथ धीमी प्रक्रिया में पकाया जाता है ताकि जड़ी-बूटी के सक्रिय तत्व घी में घुलमिल जाएं। वर्तमान में उनके द्वारा तैयार किए गए इस विशेष हरड़ घी की कीमत 60 ग्राम की शीशी के लिए 800 रुपये निर्धारित की गई है। इस औषधि के संबंध में जानकारी जुटाने या इसे प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्ति सीधे शिव कुमार पांडे से उनके मोबाइल नंबर 8789101495 पर संपर्क कर सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nपारंपरिक औषधियों के उपयोग और खरीदारी से पहले आवश्यक सावधानियों को समझना पाठकों के लिए बेहद जरूरी है।\n\n• पलामू में: स्थानीय निवासी सीधे निर्माता से संपर्क कर पारंपरिक विधि से तैयार हरड़ घी की उपलब्धता और उपयोग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वे 60 ग्राम की खुराक 800 रुपये में हासिल कर सकते हैं।\n• भारत में: देश भर के पाठक जो पाचन संबंधी दिक्कतों या पुरानी खांसी से जूझ रहे हैं, वे इस प्रकार के आयुर्वेदिक नुस्खों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि इसका उपयोग शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख आवश्यक है।\n• बजट और खर्च: 60 ग्राम मात्रा के लिए 800 रुपये की कीमत साधारण घी की तुलना में काफी अधिक है। खरीदारों को अपनी जेब और वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकता का आकलन करके ही निर्णय लेना चाहिए।\n• चिकित्सीय सावधानी: दमा या त्वचा रोग जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित लोगों को अपनी मौजूदा एलोपैथिक दवाएं कभी बंद नहीं करनी चाहिए। किसी भी हर्बल उत्पाद को मुख्य इलाज के विकल्प के रूप में देखना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में पाचन तंत्र को संतुलित करने और श्वसन रोगों में राहत देने के लिए सदियों पुराने ग्रंथों के आधार पर विशेष योग तैयार किए जाते हैं।\n\n• सत्सिद्ध विधि का प्रयोग: हरड़ के चिकित्सीय सत्व को गाय के घी में अवशोषित कराने के लिए धीमी गति वाली सत्सिद्ध प्रक्रिया को अपनाया गया। इस प्रक्रिया से जड़ी-बूटी और घी मिलकर एक रसौषधि का रूप ले लेते हैं।\n• त्रिफला घटकों की महत्ता: आयुर्वेद में हरड़ को शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने और जठराग्नि को मजबूत करने वाला माना जाता है। इसी प्राचीन मान्यता के आधार पर इसे औषधीय घी के रूप में तैयार किया गया।\n• आधुनिक प्रमाणों की अनिवार्यता: गंभीर रोगों जैसे दमा और त्वचा विकारों में पारंपरिक दावों को लेकर स्पष्ट आधुनिक नैदानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इसलिए निर्माता ने भी स्वयं किसी भी उपचार से पहले वैज्ञानिक व चिकित्सीय सलाह लेने की बात कही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हरड़ का घी किसने और कहां तैयार किया है?\nयह औषधीय घी पलामू के रहने वाले शिव कुमार पांडे द्वारा तैयार किया गया है।\n\n2. इस घी को बनाने में किन सामग्रियों का उपयोग किया गया है?\nइसे तैयार करने के लिए हरड़ और गाय के शुद्ध घी का इस्तेमाल पारंपरिक सत्सिद्ध विधि से किया गया है।\n\n3. इस हरड़ घी के प्रमुख फायदे क्या बताए गए हैं?\nइसके उपयोग से पाचन तंत्र के विकारों, पुरानी खांसी और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभ मिलने का दावा किया गया है।\n\n4. हरड़ घी का सेवन किस समय करने की सलाह दी गई है?\nपाचन तंत्र की मजबूती के लिए इसका सेवन सामान्यतः रात में सोने से पहले करने की बात कही गई है।\n\n5. इस घी की कीमत कितनी रखी गई है?\nशिव कुमार पांडे द्वारा तैयार इस घी के 60 ग्राम पैक की कीमत 800 रुपये रखी गई है।\n\n6. निर्माता से संपर्क करने के लिए कौन सा नंबर दिया गया है?\nइच्छुक व्यक्ति शिव कुमार पांडे से उनके मोबाइल नंबर 8789101495 पर संपर्क कर सकते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/health/harara-aura-gaya-ke-ghi-se-palamu-men-taiyara-hua-khasa-ayurvedika-rasayana-pachana-aura-khansi-men-labha-ka-dava-37421",
  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-23",
  "tags": [
    "आयुर्वेद",
    "हरड़ घी",
    "पलामू",
    "शिव कुमार पांडे",
    "पाचन तंत्र",
    "देसी घी",
    "त्रिफला"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}