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  "title": "हार्ट अटैक के लक्षणों को न समझें केवल गैस: महिलाओं के लिए विशेष सावधानी क्यों जरूरी है?",
  "summary": "छाती में दर्द होने पर अक्सर लोग उसे एसिडिटी समझ लेते हैं, लेकिन अमृता हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार यह हार्ट अटैक भी हो सकता है। महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग होते हैं, जिनमें बिना दर्द वाले संकेत भी शामिल हैं।",
  "content": "फरीदाबाद में हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट अटैक की समस्या के प्रति बरती गई लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। लोग अक्सर सीने में होने वाली बेचैनी को साधारण गैस या एसिडिटी का नाम देकर नजरअंदाज कर देते हैं और घरेलू दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं। अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष कुमार स्पष्ट करते हैं कि हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जिसके संकेतों को पहचानना हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है। अधिकांश मामलों यानी करीब 90 फीसदी मरीजों में छाती में दर्द इसका मुख्य लक्षण होता है, जो कंधे, हाथों या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है। हालांकि, यह दर्द हर मरीज के लिए समान नहीं होता, क्योंकि इसके साथ अत्यधिक पसीना आना, घबराहट महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ और कभी-कभी पैरों में सूजन जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।\n\nमहिलाओं में हार्ट अटैक के संकेत क्यों होते हैं अलग?\nहृदय रोगों के संदर्भ में महिलाओं की स्थिति पुरुषों से काफी अलग होती है। डॉ. आशीष बताते हैं कि महिलाओं और मधुमेह (शुगर) से पीड़ित मरीजों में हार्ट अटैक हमेशा छाती में तेज दर्द के साथ नहीं आता। कई बार इन मरीजों में सीने में दर्द महसूस ही नहीं होता, बल्कि केवल सांस फूलना, पैरों में सूजन आना या अचानक बेहोश होकर गिर जाने जैसी स्थिति सामने आती है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान अक्सर देरी से होती है, क्योंकि वे इन संकेतों को एसिडिटी या सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं। कई मामलों में महिलाएं पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाली हल्की जलन को गैस की दवा से ठीक करने की कोशिश करती हैं, जबकि असल में वे हार्ट अटैक का शिकार हो चुकी होती हैं।\n\nगैस और हार्ट अटैक में अंतर कैसे पहचानें?\nसामान्य एसिडिटी और हार्ट अटैक के बीच का अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है। गैस का दर्द अमूमन पेट के ऊपरी हिस्से तक सीमित रहता है, जबकि हार्ट अटैक का दर्द स्पष्ट रूप से छाती से जुड़ा होता है। कई बार हार्ट अटैक में दर्द के बजाय केवल छाती में जलन महसूस हो सकती है, जिसे लोग बाहरी खान-पान से जोड़कर देखते हैं। यदि कोई व्यक्ति एसिडिटी की दवा लेने के बाद भी राहत महसूस नहीं कर रहा है, तो उसे बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए और तुरंत ईसीजी (ECG) टेस्ट करवाना चाहिए। यदि दर्द के साथ पसीना, घबराहट और सांस लेने में कठिनाई हो रही है, तो ईसीजी और ट्रोपोनिन जैसे आवश्यक ब्लड टेस्ट तुरंत करवाए जाने चाहिए, क्योंकि सही समय पर की गई जांच जान बचाने की कुंजी है।\n\nगोल्डन ऑवर का महत्व और बचाव के उपाय\nहार्ट अटैक के इलाज में गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। डॉ. आशीष के अनुसार, यदि मरीज घटना के तीन घंटे के भीतर अस्पताल पहुँच जाता है और एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, अथवा थ्रोम्बोलाइसिस इंजेक्शन के जरिए नसें खोल दी जाती हैं, तो जान बचने की संभावना 95 फीसदी तक हो जाती है। यह न केवल जीवन की रक्षा करता है, बल्कि हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को भी सीमित करता है। तीन से 12 घंटे के बीच भी उपचार शुरू करना काफी प्रभावी होता है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। फास्ट फूड से परहेज करें, खाना पकाने के लिए बेहतर तेल का चुनाव करें और धूम्रपान या शराब का सेवन बिल्कुल न करें। ताजा घर का बना संतुलित भोजन लेना, घी और चीनी की मात्रा सीमित रखना और कोल्ड ड्रिंक से पूरी तरह दूरी बनाना हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: किसी भी असामान्य सीने में जलन या बेचैनी को साधारण गैस न समझें, विशेषकर यदि इसके साथ पसीना या सांस लेने में परेशानी हो।\n\nफरीदाबाद में: अमृता हॉस्पिटल के विशेषज्ञ के अनुसार, लक्षणों को हल्के में न लें और तुरंत ईसीजी करवाएं क्योंकि समय पर इलाज ही जीवन बचाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या सीने में दर्द हमेशा गैस के कारण होता है?\nनहीं, सीने का दर्द हार्ट अटैक का संकेत भी हो सकता है। यदि दर्द के साथ पसीना, सांस में तकलीफ और घबराहट हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।\n\n2. महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग क्यों होते हैं?\nमहिलाओं और शुगर के मरीजों में अक्सर सीने में दर्द नहीं होता, बल्कि उन्हें सांस फूलना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस होते हैं।\n\n3. गैस की दवा लेने के बाद आराम न मिले तो क्या करें?\nअगर एसिडिटी की दवा से आराम नहीं मिल रहा है, तो बिना देरी किए तुरंत अस्पताल जाकर ईसीजी और ट्रोपोनिन टेस्ट करवाना चाहिए।\n\n4. हार्ट अटैक के मामले में 'गोल्डन ऑवर' क्या है?\nघटना के शुरुआती तीन घंटे का समय गोल्डन ऑवर कहलाता है। इस दौरान इलाज मिलने पर मरीज के बचने की संभावना 95 फीसदी तक होती है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-07-10",
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