# हृदय रोगियों के लिए मसूड़ों की ब्लीडिंग हो सकती है खतरनाक, डेंटिस्ट ने दी तुरंत ओरल चेकअप कराने की सलाह

> दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए दांतों और मसूड़ों की समस्याओं को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है, क्योंकि खराब ओरल हाइजीन सीधे तौर पर दिल की सेहत को प्रभावित करती है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/heart-rogiyon-ke-lie-masuron-ki-blidinga-ho-sakati-hai-khataranaka-dentist-ne-di-turnta-orala-chekaapa-karane-ki-salaha-31654 · **Language:** Hindi
**Tags:** हार्ट हेल्थ, मसूड़ों से खून आना, ओरल हाइजीन, डेंटल चेकअप, डॉ मोईन खान, पेरियोडोंटाइटिस

हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना सबसे जरूरी होता है, लेकिन अक्सर वे दांतों और मसूड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को बहुत सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस तरह की लापरवाही मरीजों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है क्योंकि ओरल हाइजीन यानी मुंह के स्वास्थ्य का सीधा संबंध हृदय रोग के बढ़ते खतरों से होता है। इसी वजह से दिल के मरीजों को अपने मुंह की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। डेंटिस्ट डॉ. मोईन खान ने दिल की बीमारी और कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं से पीड़ित मरीजों को समय-समय पर अपने दांतों की जांच कराने की विशेष सलाह दी है।

## हृदय स्वास्थ्य और मसूड़ों की बीमारी का जैविक संबंध
कोरोनरी आर्टरी डिजीज और अन्य विभिन्न कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में मसूड़ों की गंभीर बीमारी यानी पेरियोडोंटाइटिस होने की संभावना काफी ज्यादा देखी जाती है। यह जोखिम उन लोगों के लिए और भी बढ़ जाता है जिनकी दिल की दवाएं चल रही हैं, या जिनकी हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी अथवा एंजियोप्लास्टी हुई है। ऐसे मरीजों को नियमित तौर पर डेंटिस्ट के पास जाकर अपने दांतों और मसूड़ों की विस्तृत जांच करानी चाहिए। डॉ. मोईन खान के अनुसार, मसूड़ों में होने वाली किसी भी तरह की खराबी या संक्रमण को शुरुआत में ही पकड़कर उसका इलाज करना आवश्यक है ताकि दिल की सेहत पर इसका कोई बुरा असर न पड़े।

## मसूड़ों की बीमारियों का उपचार और शरीर में सूजन का खतरा
यदि किसी मरीज के मुंह में पेरियोडोंटाइटिस या जिंजिवाइटिस जैसी सूजन संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं, तो डेंटिस्ट के परामर्श से समय पर इसका इलाज शुरू किया जा सकता है। मरीजों की जरूरत के हिसाब से डेंटिस्ट स्केलिंग, डीप क्लीनिंग और रूट प्लेनिंग जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं, जिससे मसूड़ों के भीतर जमी गंदगी और बैक्टीरिया को साफ किया जाता है। मसूड़ों के संक्रमण को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से न केवल दांतों की पकड़ कमजोर होती है, बल्कि इससे पूरे शरीर में सूजन से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इसलिए शरीर में सूजन को नियंत्रित रखने के लिए मुंह के संक्रमण का इलाज कराना बेहद जरूरी है।

## मसूड़ों से जुड़े इन चेतावनी भरे लक्षणों को पहचानें
मसूड़ों से जुड़ी कुछ ऐसी परेशानियां होती हैं जिन्हें किसी भी स्थिति में सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. मोईन खान के अनुसार, अगर रोजाना ब्रश करते समय मसूड़ों से अचानक खून आने लगे, या सुबह सोकर उठने के बाद थूकने पर लार में खून या मटमैला पदार्थ दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। मसूड़ों से बार-बार होने वाली ब्लीडिंग भी एक गंभीर लक्षण है जिसके लिए तुरंत डेंटिस्ट के क्लिनिक पर जाकर जांच करानी चाहिए। डॉ. मोईन खान कहते हैं, "मसूड़ों से खून आने को लोग आम मान लेते हैं, लेकिन यह लापरवाही बाद में परेशानी बढ़ा सकती है।" समय पर जांच होने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

## दैनिक बचाव के तरीके और विशेष सावधानियां
मुंह को बैक्टीरिया और संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए रोजाना दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना और नियमित रूप से जीभ व मसूड़ों की सफाई करना अनिवार्य है। अपनी जरूरत के अनुसार डेंटिस्ट की सलाह पर माउथवॉश का इस्तेमाल करना भी ओरल हाइजीन को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन तरीका है। डॉ. मोईन खान ने दिल के मरीजों को विशेष चेतावनी दी है कि वे दांत या मसूड़ों की समस्या होने पर अपने आप कोई भी दर्द निवारक दवा या एंटीबायोटिक लेने की गलती न करें। खुद से दवा लेने के बजाय डेंटिस्ट से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका है ताकि हृदय के इलाज में इस्तेमाल हो रही दवाओं के साथ इसका कोई विपरित असर न हो।

## इसका आप पर असर
ओरल इन्फेक्शन और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के बीच का गहरा संबंध यह स्पष्ट करता है कि हृदय रोगियों को जानलेवा जटिलताओं से बचने के लिए नियमित डेंटल केयर को प्राथमिकता देनी चाहिए।

- **नियमित चेकअप:** साल में कम से कम दो बार डेंटिस्ट के पास जाना अब एक अनिवार्य मेडिकल रूटीन बन जाएगा। इससे मसूड़ों की समस्याओं का समय पर पता चलेगा और आपके दिल के इलाज में कोई बाधा नहीं आएगी।
- **स्व-दवा पर पूर्ण रोक:** दिल के मरीजों को दांत के दर्द के लिए खुद से कोई भी पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना तुरंत बंद करना होगा। केवल डेंटिस्ट द्वारा लिखी गई दवाएं ही लें ताकि वे आपके दिल की दवाओं के साथ कोई खतरनाक रिएक्शन न करें।
- **लक्षणों की निगरानी:** सुबह उठने के बाद लार में खून या मटमैले पदार्थ की जांच करना आपकी दैनिक आदत का हिस्सा होना चाहिए। इन लक्षणों की पहचान समय पर होने से आप शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने से पहले डॉक्टर से संपर्क कर सकेंगे।
- **हाइजीन की बेहतर आदतें:** दिन में दो बार ब्रश करने और माउथवॉश का उपयोग करने की आदत को सख्ती से अपनाना होगा। यह दैनिक दिनचर्या आपके मुंह में बैक्टीरिया के स्तर को कम रखेगी, जिससे वे रक्तप्रवाह के जरिए आपके दिल तक नहीं पहुंच पाएंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
खराब ओरल हेल्थ और दिल की बीमारियों के बीच का गहरा संबंध मसूड़ों की सूजन और शरीर की आंतरिक प्रणालियों के आपस में जुड़े होने के कारण होता है। जब मुंह में पनपने वाले संक्रमण को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह हानिकारक बैक्टीरिया को शरीर के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से दिल को प्रभावित करने का रास्ता देता है।

- **क्रॉनिक मसूड़ों का संक्रमण:** पेरियोडोंटाइटिस और जिंजिवाइटिस जैसी बीमारियां शरीर के भीतर एक निरंतर सूजन की स्थिति पैदा करती हैं। यदि इनका इलाज नहीं किया जाता है, तो यह सूजन सीधे तौर पर धमनियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है और दिल की स्थिति को खराब करती है।
- **हृदय रोगियों की संवेदनशीलता:** दिल की दवाएं लेने वाले या एंजियोप्लास्टी और ओपन-हार्ट सर्जरी कराने वाले मरीजों का कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम बेहद संवेदनशील होता है। इस नाजुक स्थिति के कारण वे मसूड़ों के संक्रमण से होने वाले नुकसान के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
- **लक्षणों की अनदेखी:** आम तौर पर लोग मसूड़ों से खून आने को बहुत छोटी समस्या मान लेते हैं और इस पर ध्यान नहीं देते हैं। इसके परिणामस्वरूप संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और अंततः शरीर की मुख्य प्रणालियों को प्रभावित करने लगता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हृदय रोगियों के लिए दांतों का स्वास्थ्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
खराब ओरल हेल्थ, विशेष रूप से मसूड़ों की बीमारी, दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है। मसूड़ों के संक्रमण का इलाज कराने से शरीर के भीतर सूजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

### 2. किन हृदय रोगियों को मसूड़ों की बीमारी का खतरा अधिक होता है?
कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित लोगों, दिल की दवाएं लेने वाले मरीजों, या जिनकी ओपन-हार्ट सर्जरी या एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।

### 3. हृदय रोगी को मसूड़ों के किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना, बार-बार ब्लीडिंग होना या सुबह उठकर थूकने पर लार में खून या मटमैला पदार्थ दिखना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

### 4. डेंटिस्ट पेरियोडोंटाइटिस या जिंजिवाइटिस जैसी मसूड़ों की बीमारियों का इलाज कैसे करते हैं?
मरीज की स्थिति की गंभीरता के आधार पर डेंटिस्ट मसूड़ों के इलाज के लिए स्केलिंग, डीप क्लीनिंग और रूट प्लेनिंग जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं।

### 5. क्या दिल के मरीज दांत के दर्द के लिए खुद से कोई दवा ले सकते हैं?
नहीं, दिल के मरीजों को दांत दर्द के लिए खुद से दवा लेने से बचना चाहिए और किसी भी दवा का सेवन करने से पहले हमेशा डेंटिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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