# होम्योपैथिक दवाओं का नहीं दिख रहा असर? अंबाला की डॉ. रजिता ने बताए परहेज और दवा रखने के सही नियम

> होम्योपैथिक इलाज के दौरान कई बार मरीज शिकायत करते हैं कि उन्हें दवाओं का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। अंबाला नागरिक अस्पताल की चिकित्सक डॉ. रजिता ने बताया कि गलत खान-पान, अनियमित समय और दवाओं के रखरखाव में लापरवाही के कारण अक्सर ऐसा होता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/homyopaithika-davaon-ka-nahin-dikha-raha-asara-ambala-ki-dr-rajita-ne-batae-paraheja-aura-dava-rakhane-ke-sahi-niyama-31968 · **Language:** Hindi
**Tags:** होम्योपैथी, होम्योपैथिक दवाएं, स्वास्थ्य टिप्स, अंबाला नागरिक अस्पताल, डॉ. रजिता, सेल्फ मेडिकेशन

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति अपनाने वाले कई लोग अक्सर यह शिकायत करते नजर आते हैं कि नियमित रूप से दवाएं लेने के बावजूद उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता का कारण हमेशा दवा या बीमारी नहीं होती, बल्कि दवा लेने का गलत तरीका, खान-पान की लापरवाही और रखरखाव से जुड़ी गलतियां भी हो सकती हैं। अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में स्थित होम्योपैथिक ओपीडी में भी अक्सर मरीज डॉक्टरों से यही सवाल पूछते हैं कि आखिर लगातार दवा खाने के बाद भी उन्हें आराम क्यों नहीं मिल रहा है। इसी अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने इस विषय पर बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों कुछ मरीजों पर होम्योपैथिक दवाएं असर नहीं करतीं और इलाज को सफल बनाने के लिए किन जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

 

## समय और परहेज का रखें विशेष ध्यान

डॉ. रजिता के अनुसार, होम्योपैथिक इलाज के असरदार न होने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि मरीज दवा लेने के समय और बताए गए परहेज का ठीक से पालन नहीं करते हैं। कई बार मरीज समय पर दवा तो खा लेते हैं, लेकिन भोजन और दवा के बीच रखे जाने वाले जरूरी अंतराल को भूल जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि डॉक्टर ने कोई दवा भोजन करने से 20 मिनट पहले या भोजन के 20 मिनट बाद लेने की सलाह दी है, तो इस समय सीमा का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। यह अंतराल इसलिए जरूरी है क्योंकि होम्योपैथिक दवाएं मुंह की लार ग्रंथियों के माध्यम से शरीर में अवशोषित होती हैं, और मुंह में भोजन के अंश रहने से दवा का अवशोषण प्रभावित हो सकता है।

इसके साथ ही, दवा के सेवन के दौरान पानी पीने को लेकर भी डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। डॉ. रजिता का कहना है कि हर होम्योपैथिक दवा के नियम एक समान नहीं होते हैं, इसलिए मरीजों को सामान्य धारणा बनाने के बजाय अपने डॉक्टर द्वारा दी गई व्यक्तिगत सलाह पर ही भरोसा करना चाहिए। आमतौर पर होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल के समय कच्चा प्याज, इलायची, तुलसी और तेज मसालों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह नियम सभी प्रकार की दवाओं पर लागू नहीं होता। इसलिए मरीजों को खुद से किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपने डॉक्टर से इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए और स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, इलाज के दौरान धूम्रपान और तेज खुशबू वाली चीजों के इस्तेमाल से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है।

 

## दवाओं के रखरखाव और इस्तेमाल में न करें ये गलतियां

दवाओं को सुरक्षित रखने का तरीका भी उनके असर को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। डॉ. रजिता बताती हैं कि होम्योपैथिक दवाओं को हमेशा सामान्य तापमान वाले स्थान पर ही रखा जाना चाहिए। इन्हें बहुत अधिक गर्मी वाले स्थानों या फिर फ्रिज जैसे अत्यधिक ठंडे वातावरण में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है। इसके साथ ही, दवा की शीशी का ढक्कन इस्तेमाल के तुरंत बाद कसकर बंद कर देना चाहिए ताकि हवा के संपर्क में आने से दवा खराब न हो। इन दवाओं को तेज गंध वाली चीजों जैसे इत्र, कपूर, अगरबत्ती या रूम फ्रेशनर से दूर रखना चाहिए, क्योंकि तेज खुशबू दवाओं के औषधीय गुणों को निष्क्रिय कर सकती है।

एक और आम गलती जो मरीज अक्सर करते हैं, वह है दवा को हाथ से छूना। डॉ. रजिता के मुताबिक, यदि डॉक्टर ने दवा कागज की पुड़िया में दी है, तो मरीजों को उन मीठी गोलियों को सीधे अपने हाथों से छूने से बचना चाहिए। दवा को सीधे कागज की पुड़िया से ही मुंह में डालना चाहिए। हाथ के संपर्क में आने से त्वचा का पसीना, तेल या अन्य कीटाणु उन संवेदनशील गोलियों पर लग सकते हैं, जिससे दवा का असर काफी हद तक कम हो जाता है।

 

## गूगल देखकर खुद दवा लेना पड़ सकता है भारी

आज के डिजिटल युग में कई लोग इंटरनेट या गूगल पर अपनी बीमारियों के लक्षण खोजकर खुद ही होम्योपैथिक दवाएं खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं। डॉ. रजिता ने इस तरह के स्व-उपचार के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होम्योपैथी में सभी मरीजों के लिए एक जैसी दवा का नियम काम नहीं करता। इस चिकित्सा पद्धति में मरीज की उम्र, उसकी शारीरिक स्थिति, मानसिक लक्षण और पूरी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर ही दवा का निर्धारण किया जाता है। एक जैसे लक्षण दिखने पर भी दो अलग-अलग मरीजों की दवाएं पूरी तरह भिन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से युवाओं में आजकल बालों के झड़ने और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए खुद दवाएं लेने का चलन बढ़ा है। जबकि ऐसी समस्याएं हार्मोनल असंतुलन और खान-पान से जुड़ी होती हैं, जिनका इलाज केवल एक विशेषज्ञ डॉक्टर ही सही जांच के बाद कर सकता है। बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई दवाएं शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।

 

## बीमारी ठीक होने की अवधि और मरीजों की जिम्मेदारी

डॉ. रजिता का कहना है कि किसी भी बीमारी में इलाज की अवधि और दवा का असर मरीज की अपनी शारीरिक प्रतिक्रिया और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। मरीजों को केवल दवा खाने पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उसके समय, रखरखाव और जरूरी परहेज को भी गंभीरता से समझना चाहिए। जब मरीज इन सभी नियमों का सही तरीके से पालन करेंगे, तो इलाज को लेकर उनके मन में कोई गलतफहमी नहीं रहेगी और वे अपनी स्वास्थ्य समस्याओं से जल्दी और पूरी तरह छुटकारा पा सकेंगे।

## इसका आप पर असर
इस समाचार से होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को अपने इलाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

- **भारत में:** भोजन के 20 मिनट पहले या बाद में दवा लेने के नियम का पालन करने से मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे। यह अनुशासन मुंह की लार ग्रंथियों के माध्यम से दवा के सही अवशोषण को सुनिश्चित करेगा।
- **अंबाला में:** नागरिक अस्पताल जाने वाले स्थानीय निवासी सीधे होम्योपैथिक ओपीडी में डॉ. रजिता से संपर्क कर सही सलाह ले सकते हैं। इससे उन्हें दवाओं के रखरखाव में होने वाली गलतियों से बचने और सही इलाज पाने में मदद मिलेगी।
- **रखरखाव के नियम:** दवाओं को सामान्य तापमान पर रखने और तेज गंध से दूर रखने से उनकी प्रभावशीलता बनी रहेगी। गलत जगह रखने से दवाएं निष्प्रभावी हो सकती हैं, जिससे मरीजों का पैसा और समय दोनों बर्बाद होंगे।
- **इस्तेमाल का तरीका:** गोलियों को सीधे हाथ से न छूकर कागज की पुड़िया से सीधे मुंह में लेना दूषित कणों को रोकेगा। यह छोटी सी सावधानी दवा के औषधीय गुणों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
- **विशेषज्ञ की सलाह:** इंटरनेट पर खुद से इलाज ढूंढना बंद करने से लोग गंभीर शारीरिक नुकसान से बच सकेंगे। डॉक्टर से परामर्श लेने पर मरीज की उम्र और हार्मोनल स्थिति के अनुसार सही और सुरक्षित उपचार मिल सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति अत्यंत संवेदनशील तत्वों और सूक्ष्म खुराकों पर काम करती है, जिसके कारण बाहरी प्रभाव इस पर जल्दी पड़ता है। अक्सर मरीज इलाज में देरी या नाकामी का दोष दवाओं को देते हैं, जबकि असल कारण उनके गलत इस्तेमाल में छिपा होता है। इसी जागरूकता की कमी और गलतफहमियों को दूर करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों को यह महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी करने पड़े हैं।

- **मौखिक अवशोषण की प्रक्रिया:** होम्योपैथिक गोलियों का असर मुंह के भीतर की संवेदनशील त्वचा के संपर्क में आने से शुरू होता है। भोजन करने के तुरंत बाद दवा लेने से मुंह में भोजन के कण मौजूद रहते हैं जो दवा के अवशोषण में बाधा बनते हैं। इसी वजह से भोजन और दवा के बीच 20 मिनट का अंतर अनिवार्य माना गया है।
- **अत्यधिक संवेदनशीलता:** ये दवाएं तेज गंध और अनुचित तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं। कपूर, इत्र या अत्यधिक गर्मी दवाओं के सूक्ष्म औषधीय प्रभाव को नष्ट कर देती है, जिससे वे केवल सादे मीठे दाने बनकर रह जाते हैं।
- **स्व-उपचार की बढ़ती प्रवृत्ति:** इंटरनेट पर आसानी से जानकारी उपलब्ध होने के कारण लोग बिना डॉक्टर की सलाह के खुद दवाएं चुनने लगे हैं। वे इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि होम्योपैथी में इलाज केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के पूरे शारीरिक और मानसिक संतुलन पर आधारित होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. होम्योपैथिक दवा लेते समय भोजन के बीच कितना अंतर होना चाहिए?
होम्योपैथिक दवा भोजन करने से कम से कम 20 मिनट पहले या भोजन करने के 20 मिनट बाद लेनी चाहिए। यह अंतराल मुंह को साफ रखने और दवा के सही अवशोषण में मदद करता है।

### 2. क्या होम्योपैथिक दवाओं को सीधे हाथ से छूकर खा सकते हैं?
नहीं, दवाओं को हाथ से छूने से बचना चाहिए और उन्हें सीधे कागज की पुड़िया या ढक्कन से ही मुंह में डालना चाहिए। हाथ के पसीने या तेल से दवा का असर कम हो सकता है।

### 3. दवाओं को किस तापमान पर और कहाँ रखना चाहिए?
इन दवाओं को सामान्य कमरे के तापमान पर रखना चाहिए और अत्यधिक गर्मी या फ्रिज जैसे ठंडे वातावरण से दूर रखना चाहिए। इन्हें तेज गंध वाली चीजों जैसे इत्र या कपूर से भी दूर रखें।

### 4. क्या हर होम्योपैथिक दवा के साथ प्याज या लहसुन का परहेज जरूरी है?
नहीं, प्याज, तुलसी या इलायची जैसी चीजों का परहेज सभी दवाओं पर लागू नहीं होता है। इसके बारे में अपने डॉक्टर से स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए कि आपकी दवा के साथ क्या परहेज जरूरी है।

### 5. इंटरनेट या गूगल देखकर होम्योपैथिक दवा लेना क्यों नुकसानदेह है?
होम्योपैथी में हर मरीज की उम्र, शारीरिक स्थिति और लक्षणों के अनुसार अलग दवा दी जाती है। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद दवा लेने से बीमारी ठीक नहीं होती और सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

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