# आईआईटी दिल्ली और एम्स का नया कारनामा, संगीत के जरिए स्ट्रोक मरीजों की बोलती बंद होने की बीमारी का निकाला इलाज

> आईआईटी दिल्ली, एम्स और इहबास के शोधकर्ताओं ने स्ट्रोक मरीजों के लिए हिंदी भाषा पर आधारित मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी विकसित की है। इस संगीत आधारित पद्धति से बोलने की क्षमता खो चुके मरीज फिर से आसानी से संवाद कर सकेंगे।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-07-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/iit-delhi-aura-aiims-ka-naya-karanama-sngita-ke-jarie-stroka-marijon-ki-bolati-bnda-hone-ki-bimari-ka-nikala-ilaja-11581 · **Language:** Hindi
**Tags:** आईआईटी दिल्ली, एम्स, स्ट्रोक थेरेपी, मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी, न्यूरोप्लास्टिसिटी, स्वास्थ्य समाचार, इहबास

स्ट्रोक के बाद बोलने की क्षमता गंवा चुके मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक राहत सामने आई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी दिल्ली, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स और इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज इहबास के शोधकर्ताओं ने मिलकर मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी का एक विशेष हिंदी संस्करण विकसित किया है। यह संगीतमय पद्धति उन मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर आई है जो स्ट्रोक अटैक के बाद अफेजिया नाम की बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं और सही ढंग से बातचीत नहीं कर पाते हैं। पश्चिमी देशों में यह तकनीक काफी समय से इस्तेमाल में है, लेकिन भारत में पहली बार वैज्ञानिकों ने इसे हिंदी भाषा की विशेष लय, उच्चारण शैली और ध्वन्यात्मक बनावट के हिसाब से तैयार किया है।

## स्ट्रोक और बोलने की समस्या (अफेजिया) को समझना
मस्तिष्क में किसी रुकावट की वजह से जब रक्त संचार अथवा ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक रुक जाती है, तो व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो जाता है। यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति होती है। जो मरीज स्ट्रोक के हमले से बच भी जाते हैं, उन्हें अक्सर कई तरह की शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक मुख्य समस्या है बोलने की क्षमता का प्रभावित होना। स्ट्रोक के कारण कई मरीज बहुत हकलाकर बोलने लगते हैं, या फिर उनके शब्द पूरी तरह टूट जाते हैं और वे बहुत देर से बोल पाते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अफेजिया कहा जाता है, जहां व्यक्ति अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए सही शब्द नहीं ढूंढ पाता। ऐसे मरीजों के पुनर्वास के लिए मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी एक अत्यधिक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।

## हिंदी भाषा और संगीत की लय का अनोखा संगम
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान एक दिलचस्प बात पर ध्यान दिया। स्ट्रोक से पीड़ित मरीज सामान्य बोलचाल के शब्द नहीं बोल पाते थे, लेकिन अपनी पसंद के पुराने और रटे-रटाए गानों की धुन को आसानी से गुनगुना लेते थे। इसी वैज्ञानिक तथ्य को आधार बनाकर इस चिकित्सा पद्धति को तैयार किया गया है। आईआईटी दिल्ली, एम्स और इहबास के विशेषज्ञों ने अंग्रेजी शब्दों का सीधा अनुवाद करने के बजाय हिंदी बोलने के प्राकृतिक तरीके, उतार-चढ़ाव और लयबद्धता का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद हिंदी भाषा के अनुकूल विशेष अभ्यास क्रम तैयार किए गए। थेरेपी के दौरान थेरेपिस्ट मरीज के सामने बैठकर खास लय में गाता है। मरीज के दिमाग में मौजूद मिरर न्यूरॉन्स देखकर और सुनकर उस क्रिया की नकल करते हैं, जिससे बोलने की प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है।

## मस्तिष्क विज्ञान और न्यूरोप्लास्टिसिटी का सिद्धांत
यह पूरी थेरेपी न्यूरोप्लास्टिसिटी के सिद्धांत पर काम करती है। मानव मस्तिष्क का बायां हिस्सा यानी लेफ्ट हेमिस्फेयर भाषा और सामान्य बोलचाल को नियंत्रित करता है। जब स्ट्रोक होता है, तो मस्तिष्क के इसी बाएं हिस्से की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिसके कारण मरीज की बोलने की क्षमता खत्म हो जाती है। दूसरी ओर, मस्तिष्क का दायां हिस्सा यानी राइट हेमिस्फेयर सुरक्षित रहता है। दिमाग का यही दायां भाग संगीत, धुन, ताल और पिच को समझने और प्रोसेस करने का काम करता है। मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी में शुरुआती दौर में शब्दों को संगीत की धुन से जोड़ा जाता है। इससे मस्तिष्क का दायां भाग सक्रिय होता है और वोकल कॉर्ड्स को सिग्नल भेजने लगता है। धीरे-धीरे वैज्ञानिक विधि से संगीत की धुन को कम कर दिया जाता है और केवल बातचीत की स्वाभाविक लय को बनाए रखा जाता है। अंततः भाषा का नियंत्रण दिमाग के दाएं हिस्से और वहां बने नए न्यूरोनल नेटवर्क में स्थानांतरित हो जाता है, जिससे मरीज बिना गाए सामान्य रूप से बोलने में सक्षम हो जाता है।

## नैदानिक परीक्षण के नतीजे और भविष्य की डिजिटल योजनाएं
इस नई हिंदी थेरेपी का शुरुआती परीक्षण स्ट्रोक से उबरे 6 हिंदी भाषी मरीजों पर किया गया। विशेषज्ञों ने इन मरीजों को 45 से 60 मिनट की अवधि वाले कुल 40 थेरेपी सेशन दिए। थेरेपी का कोर्स पूरा होने के बाद सभी मरीजों में आश्चर्यजनक और सकारात्मक सुधार देखा गया। जो मरीज पहले एक-एक शब्द बोलने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वे थेरेपी के बाद लंबे वाक्य बोलने और दूसरों के साथ आसानी से संवाद करने में सफल रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी मरीज पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। इस महत्वपूर्ण शोध को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल एफैसियोलॉजी में भी प्रकाशित किया गया है। अब वैज्ञानिकों की यह टीम ऐसे डिजिटल और मोबाइल एप्लिकेशन बनाने पर काम कर रही है, जिससे बड़े अस्पतालों से दूर रहने वाले मरीज भी घर बैठे इस मेलोडिक थेरेपी का लाभ ले सकें।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** स्ट्रोक से प्रभावित हिंदी भाषी मरीजों और उनके परिवारों को अब भाषा के अनुकूल तैयार की गई एक वैज्ञानिक स्पीच रिकवरी थेरेपी का लाभ मिल सकेगा।

**दूर-दराज क्षेत्रों में:** भविष्य में डिजिटल और मोबाइल ऐप्स विकसित होने के बाद ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीज भी अपने घर पर ही इस चिकित्सा पद्धति का अभ्यास कर सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी क्या है?
यह संगीत, धुन और लय पर आधारित एक विशेष वैज्ञानिक थेरेपी है, जो स्ट्रोक के कारण बोलने की क्षमता गंवा चुके मरीजों को दोबारा बोलना सिखाती है।

### 2. इस नई थेरेपी को किन संस्थानों ने तैयार किया है?
इसे आईआईटी दिल्ली, एम्स (AIIMS) और इहबास (IHBAS) के वैज्ञानिकों ने मिलकर हिंदी भाषा की उच्चारण लय के हिसाब से विकसित किया है।

### 3. नैदानिक परीक्षण में इसके कैसे नतीजे सामने आए?
परीक्षण में शामिल 6 हिंदी भाषी मरीजों को 45 से 60 मिनट के 40 सेशन दिए गए, जिसके बाद सभी मरीजों के संवाद करने की क्षमता में बड़ा और सकारात्मक सुधार देखा गया।

### 4. यह थेरेपी दिमाग पर किस तरह काम करती है?
यह न्यूरोप्लास्टिसिटी पर आधारित है। स्ट्रोक से दिमाग का बायां हिस्सा प्रभावित होने पर दायां हिस्सा संगीत और लय की मदद से भाषा नियंत्रण का नया नेटवर्क विकसित करता है।

### 5. छोटे शहरों और गांवों के मरीजों तक यह थेरेपी कैसे पहुंचेगी?
शोधकर्ता इस समय मोबाइल और डिजिटल टूल्स तैयार कर रहे हैं, ताकि मरीज घर बैठे ही इस थेरेपी का लाभ प्राप्त कर सकें।

## प्रेरणा और सबक
**अनुसंधान और नवाचार के सबक:**

- **स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालना:** पश्चिमी चिकित्सा पद्धतियों का सीधा अनुवाद करने के बजाय उन्हें अपनी भाषा की लय और संस्कृति के अनुसार अनुकूलित करना बेहतर परिणाम देता है।
- **मस्तिष्क की असीम क्षमता:** न्यूरोप्लास्टिसिटी यह सिद्ध करती है कि दिमाग का स्वस्थ हिस्सा अभ्यास के माध्यम से क्षतिग्रस्त हिस्से के कार्यों की जिम्मेदारी संभाल सकता है।
- **डिजिटल माध्यमों से सुलभता:** प्रयोगशाला अनुसंधान को मोबाइल टूल्स में बदलकर दूर-दराज के आम लोगों तक पहुंचाना ही वास्तविक नवाचार है।

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