जानवरों से इंसानों में फैलती ये 5 बीमारियां बन सकती हैं जानलेवा, जानिए कैसे करें बचाव हर साल 6 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व जूनोसिस दिवस पर जानिए रेबीज, निपाह वायरस और बर्ड फ्लू जैसी जानवरों से फैलने वाली जानलेवा बीमारियों और उनसे बचाव के आसान तरीकों के बारे में। हर साल 6 जुलाई को दुनियाभर में विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है, यानी उन बीमारियों को याद करने और उनके प्रति जागरूकता फैलाने का दिन जो जानवरों से इंसानों में पहुंचती हैं। बीते कुछ वर्षों में कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को यह सिखा दिया कि किसी संक्रमण को शुरुआत में हल्के में लेना कितना भारी पड़ सकता है। यही वजह है कि हर साल इस मौके पर डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को जानवरों से फैलने वाली बीमारियों के प्रति सतर्क रहने और समय पर एहतियात बरतने की सलाह देते हैं। जानवरों से इंसानों तक कैसे पहुंचता है संक्रमण जिन बीमारियों की शुरुआत जानवरों से होती है और बाद में वे इंसानों में फैल जाती हैं, उन्हें जूनोटिक बीमारी कहा जाता है। इनके फैलने के कई रास्ते होते हैं। किसी संक्रमित जानवर के सीधे संपर्क में आने से, उसके काटने या खरोंचने से, मच्छर और टिक जैसे कीटों के जरिए, दूषित भोजन या पानी के सेवन से और संक्रमित वातावरण के संपर्क में आने से भी व्यक्ति इन बीमारियों की चपेट में आ सकता है। यही कारण है कि इंसानों और जानवरों की सेहत को अलग-अलग खांचों में बांटकर नहीं देखा जा सकता, दोनों आपस में गहरे जुड़े होते हैं। 6 जुलाई 1885 से जुड़ी है इस दिन की कहानी इस तारीख को चुनने के पीछे एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि छिपी है। 6 जुलाई 1885 को मशहूर वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने पहली बार रेबीज से संक्रमित एक बच्चे को सफलतापूर्वक वैक्सीन देकर उसकी जान बचाई थी। चिकित्सा जगत की इस उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए ही हर साल इसी तारीख को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को टीकाकरण के महत्व और संक्रमण से बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके। ये 5 बीमारियां जानवरों से फैलकर बन सकती हैं जानलेवा जूनोटिक बीमारियों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम रेबीज का है, जो संक्रमित कुत्तों और दूसरे जानवरों के काटने से इंसानों तक पहुंचता है। इसके अलावा बर्ड फ्लू, निपाह वायरस, इबोला और लासा फीवर जैसी बीमारियां भी इसी श्रेणी में आती हैं, जो गंभीर बुखार से लेकर जानलेवा संक्रमण तक का कारण बन सकती हैं। पशुओं में पाई जाने वाली बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस भी जूनोटिक बीमारियों की इसी सूची का हिस्सा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनियाभर में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों में बड़ी संख्या ऐसी बीमारियों की है जो जानवरों से ही जुड़ी होती हैं। इनमें से कई बीमारियां अगर समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा साबित हो सकती हैं, इसलिए इनके प्रति जागरूक रहना और सतर्कता बरतना बेहद जरूरी माना जाता है। बचाव के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान विशेषज्ञ इन बीमारियों से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। • पालतू जानवरों का समय-समय पर टीकाकरण जरूर कराएं। • किसी जानवर के काटने या खरोंचने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। • मांस, अंडे और दूध जैसी चीजों का सेवन अच्छी तरह पकाकर ही करें। • जानवरों को छूने या उनकी देखभाल करने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। • बीमार या मृत जंगली जानवरों से दूरी बनाकर रखें। • बुखार, कमजोरी या किसी असामान्य संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसका आप पर असर • पालतू जानवर रखने वालों के लिए: समय पर टीकाकरण कराने और जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत डॉक्टर से मिलने की आदत से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव किया जा सकता है। • आम लोगों के लिए: मांस, अंडे और दूध को अच्छी तरह पकाकर खाने और जानवरों को छूने के बाद हाथ धोने जैसी छोटी आदतें बर्ड फ्लू और निपाह वायरस जैसे संक्रमणों का खतरा काफी हद तक कम कर सकती हैं। सवाल-जवाब 1. विश्व जूनोसिस दिवस कब मनाया जाता है? हर साल 6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है। 2. यह दिन 6 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है? 6 जुलाई 1885 को वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने पहली बार रेबीज से संक्रमित एक बच्चे को सफलतापूर्वक वैक्सीन दी थी, इसी उपलब्धि की याद में यह दिन मनाया जाता है। 3. जूनोटिक बीमारी किसे कहते हैं? वे बीमारियां जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं, जैसे संक्रमित जानवर के सीधे संपर्क, काटने-खरोंचने, मच्छर-टिक जैसे कीटों, दूषित भोजन-पानी या संक्रमित वातावरण के जरिए। 4. कौन सी बीमारियां जूनोटिक श्रेणी में आती हैं? रेबीज, बर्ड फ्लू, निपाह वायरस, इबोला, लासा फीवर और बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस इस श्रेणी में आती हैं। 5. जानवर के काटने या खरोंचने पर क्या करना चाहिए? बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 6. इन बीमारियों से बचाव के क्या तरीके हैं? पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराएं, मांस-अंडे-दूध अच्छी तरह पकाकर खाएं, जानवरों को छूने के बाद हाथ धोएं और बीमार या मृत जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखें। https://trendkia.com/health/janavaron-se-insanon-men-phailati-ye-5-bimariyan-bana-sakati-hain-janaleva-janie-kaise-karen-bachava-5089 TrendKia — Har trend, sabse pehle.