जांघ की नस दबने से जीएसवीएम में पहुंचे 368 मरीज, वजह बनी टाइट जींस-लेगिंग कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की आठ महीने की केस स्टडी में टाइट जींस, लेगिंग और कसी बेल्ट से जांघ की नस दबने के 368 मामले सामने आए हैं, जिनमें ज्यादातर मरीज शुरुआत में इसे कमर दर्द समझ बैठते हैं। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में बीते आठ महीनों के दौरान एक अजीब लेकिन गंभीर बीमारी के मरीजों की तादाद अचानक बढ़ गई है। वजह कोई संक्रमण या मौसम नहीं, बल्कि रोजमर्रा में पहनी जाने वाली टाइट जींस, लेगिंग और कसी हुई बेल्ट है, जिन्हें अब तक सिर्फ स्टाइल और आराम की चीज़ माना जाता रहा है। अस्पताल की एक केस स्टडी में सामने आया है कि तंग कपड़ों की वजह से जांघ की एक अहम नस लगातार दबाव में आ रही है, जिससे मेराल्जिया पैरास्थेटिका नाम की तकलीफ तेजी से फैल रही है। इन आठ महीनों में इस बीमारी के कुल 368 मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। किस उम्र और किन लोगों को ज्यादा खतरा स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि इस बीमारी की चपेट में आए 70 फीसदी मरीजों की उम्र 35 से 48 वर्ष के बीच है, और इनमें से 60 फीसदी महिलाएं हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि यह दिक्कत खासकर उन महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है जो मोटापे की शिकार हैं, क्योंकि ऐसे में तंग कपड़ों का दबाव नस पर और बढ़ जाता है। उनके मुताबिक तंग कपड़े, कसी हुई बेल्ट या पायजामे का बहुत टाइट नाड़ा इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है, और रोजाना इस तरह के कपड़े पहनने वाली महिलाओं में खतरा और बढ़ जाता है। जांघ की नस आखिर दबती कैसे है डॉक्टरों के मुताबिक जांघ के बाहरी हिस्से तक संवेदना पहुंचाने का काम लेटरल क्यूटेनियस नर्व करती है, यानी छूने, दबने या तापमान जैसे एहसास इसी नस के जरिए दिमाग तक पहुंचते हैं। यह नस कमर के पास से शुरू होकर जांघ के बाहरी हिस्से तक फैली होती है। जब जींस, लेगिंग या बेल्ट जरूरत से ज्यादा टाइट पहनी जाती है, तो यही नस लगातार दबाव झेलती रहती है, जिससे धीरे-धीरे इसका सामान्य कामकाज बिगड़ने लगता है। नतीजा यह होता है कि त्वचा पर कोई बाहरी चोट न होने के बावजूद घुटने के ऊपर और कमर के दोनों तरफ तेज जलन, चुभन, झनझनाहट और सुन्नपन जैसा एहसास होने लगता है। देर तक खड़े रहने या पैदल चलने पर यह तकलीफ और बढ़ जाती है, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। कमर दर्द समझकर गलत इलाज की भूल इस केस स्टडी की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि करीब 80 फीसदी मरीज शुरुआत के कुछ महीनों तक इसे मामूली कमर दर्द समझकर गलत इलाज कराते रहे। दरअसल तकलीफ का अहसास जांघ के बाहरी हिस्से में होता है और ऐसा लगता है जैसे वहां त्वचा जल रही हो या कोई अंदरूनी चोट लगी हो, इसी वजह से ज्यादातर मरीज सही बीमारी पहचान ही नहीं पाते और महीनों तक इधर-उधर भटकते हुए गलत दवाइयां और गलत थेरेपी लेते रहते हैं, जिससे असली समस्या और गंभीर होती चली जाती है। डॉक्टरों की चेतावनी, बचाव का तरीका डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि लगातार बने रहने वाले सुन्नपन, जलन या चुभन को मामूली दर्द समझकर टालना बाद में भारी पड़ सकता है। अगर समय रहते टाइट कपड़े और कसी बेल्ट पहनना बंद न किया जाए, तो यह तकलीफ और गंभीर रूप ले सकती है और लंबे समय तक बनी रह सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें, कमर पर बेल्ट या नाड़े को जरूरत से ज्यादा कसकर न बांधें, और शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को नजरअंदाज करने की बजाय समय रहते डॉक्टर से सलाह लें। इसका आप पर असर अगर आप रोज टाइट जींस, लेगिंग या कसी बेल्ट पहनते हैं, तो यह खबर सीधे आपकी सेहत से जुड़ी है। • भारत में: देश भर में लाखों लोग रोजाना टाइट जींस और लेगिंग पहनते हैं, खासकर युवा और कामकाजी महिलाएं। इस स्टडी के बाद डॉक्टर सामान्य फिटिंग की जगह ढीले और आरामदायक कपड़े चुनने की सलाह दे रहे हैं, ताकि जांघ की नस पर दबाव न बने। • कानपुर में: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आठ महीनों में 368 मरीज पहुंच चुके हैं, इसलिए कानपुर और आसपास के इलाकों में अगर किसी को जांघ के बाहरी हिस्से में लगातार जलन, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो, तो उसे कमर दर्द समझकर टालने के बजाय तुरंत न्यूरो विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। • महिलाओं के लिए: 60 फीसदी मरीज महिलाएं हैं और मोटापे की शिकार महिलाओं में खतरा ज्यादा है, इसलिए वजन नियंत्रित रखना और टाइट कपड़ों से बचना दोनों जरूरी हैं। • गलत इलाज से बचाव: करीब 80 फीसदी मरीज शुरुआत में इसे कमर दर्द समझ बैठे थे, इसलिए लक्षण दिखते ही सही जांच कराने से महीनों की गलत दवाइयों और परेशानी से बचा जा सकता है। • रोजमर्रा की आदत में बदलाव: बेल्ट, पायजामे का नाड़ा और जींस की फिटिंग को जरूरत से ज्यादा कसकर बांधने से बचें, खासकर अगर देर तक खड़े रहने या चलने वाला काम करते हैं। सवाल-जवाब 1. मेराल्जिया पैरास्थेटिका क्या है? यह एक ऐसी तकलीफ है जिसमें जांघ की लेटरल क्यूटेनियस नर्व पर दबाव पड़ने से घुटने के ऊपर और कमर के दोनों तरफ जलन, चुभन, झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होता है। 2. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में इसके कितने मरीज पहुंचे हैं? आठ महीनों की केस स्टडी में इस बीमारी के कुल 368 मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। 3. यह बीमारी किन लोगों में ज्यादा देखी जा रही है? 70 फीसदी मरीजों की उम्र 35 से 48 वर्ष के बीच है और इनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं, खासकर वे जो मोटापे की शिकार हैं। 4. इस बीमारी की मुख्य वजह क्या है? डॉक्टरों के मुताबिक तंग कपड़े, कसी हुई बेल्ट या पायजामे का बहुत कसा नाड़ा जांघ की नस पर लगातार दबाव डालते हैं, जो इसकी मुख्य वजह है। 5. मरीज शुरुआत में इसे क्या समझ बैठते हैं? करीब 80 फीसदी मरीज शुरुआती महीनों में इसे मामूली कमर दर्द समझकर गलत इलाज कराते रहते हैं। 6. इससे बचाव कैसे किया जा सकता है? डॉक्टरों की सलाह है कि ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें, कपड़े या बेल्ट को जरूरत से ज्यादा कसकर न बांधें और शरीर के असामान्य संकेत दिखते ही डॉक्टर से सलाह लें। https://trendkia.com/health/jangha-ki-nasa-dabane-se-gsvm-men-pahunche-368-marija-vajaha-bani-taita-jinsa-leginga-28603 TrendKia — Har trend, sabse pehle.