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  "type": "article",
  "title": "कैंसर और अल्जाइमर में भी कारगर, पूसा के वैज्ञानिकों ने खोले मशरूम की 3 किस्मों के राज़",
  "summary": "समस्तीपुर के पूसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. दया राम सिंह ने बताया कि मशरूम की तीन किस्में होती हैं और सिटाके, किंग ऑयस्टर जैसे औषधीय मशरूम कैंसर, अल्जाइमर और ट्यूमर जैसी बीमारियों में फायदेमंद पाए गए हैं।",
  "content": "बिहार में मशरूम अब सिर्फ सब्जी की थाली तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि आने वाले समय में यह दवा बनाने के काम भी आएगा। समस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मशरूम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. दया राम सिंह ने इसकी अलग-अलग किस्मों और उनके इस्तेमाल को लेकर अहम जानकारी दी है।\n\nजापान और फ्रांस में पहले से चलन में\nडॉ. सिंह के मुताबिक जापान और फ्रांस जैसे देशों में मशरूम से बनी दवाइयों का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है। भारत में भी कुछ कंपनियों ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। बिहार की जलवायु भी मशरूम की खेती के लिए मुफीद मानी जाती है। इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि इसे सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे इसका इस्तेमाल और आसान हो जाता है।\n\nमशरूम की तीन किस्में, पहचान क्यों जरूरी\nवैज्ञानिक डॉ. दया राम सिंह के अनुसार मशरूम मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं। पहली किस्म सामान्य खाद्य मशरूम की है, जिसे लोग रोजमर्रा में सब्जी और दूसरे खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल करते हैं। दूसरी किस्म ऐसी होती है जो खाने लायक नहीं होती और कई बार सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। तीसरी किस्म मेडिसिनल यानी औषधीय मशरूम की है, जिसे सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद माना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तीनों किस्मों को सही तरीके से पहचानना और उनके इस्तेमाल को समझना बेहद जरूरी है, वरना गलत मशरूम खाने से नुकसान हो सकता है।\n\nसिटाके और किंग ऑयस्टर जैसे मशरूम से मिलेगा फायदा\nडॉ. दया राम सिंह ने बताया कि सिटाके और किंग ऑयस्टर जैसे औषधीय मशरूम कई गंभीर बीमारियों में लाभकारी माने जाते हैं। इनके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कैंसर, अल्जाइमर और ट्यूमर जैसी गंभीर समस्याओं में भी यह मशरूम फायदेमंद पाए गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: अगर औषधीय मशरूम पर यह काम आगे बढ़ता है तो देशभर में सस्ती और प्राकृतिक दवाओं का नया विकल्प मिल सकता है, लेकिन आम, जहरीले और औषधीय मशरूम की सही पहचान न होने पर सेहत को नुकसान भी हो सकता है।\n• बिहार में: यहां की जलवायु मशरूम की खेती के लिए अनुकूल बताई गई है, इसलिए किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए औषधीय मशरूम की खेती आय का नया जरिया बन सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह जानकारी किसने दी है?\nसमस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मशरूम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. दया राम सिंह ने यह जानकारी दी है।\n\n2. मशरूम कितने प्रकार के होते हैं?\nवैज्ञानिकों के अनुसार मशरूम मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, सामान्य खाद्य मशरूम, न खाने योग्य मशरूम और औषधीय मशरूम।\n\n3. कौन से मशरूम औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं?\nसिटाके और किंग ऑयस्टर जैसे मशरूम औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं।\n\n4. औषधीय मशरूम किन बीमारियों में फायदेमंद पाए गए हैं?\nकैंसर, अल्जाइमर और ट्यूमर जैसी बीमारियों में यह फायदेमंद पाए गए हैं।\n\n5. कौन से देश पहले से मशरूम आधारित दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं?\nजापान और फ्रांस जैसे देशों में मशरूम आधारित दवाइयों का इस्तेमाल पहले से हो रहा है।\n\n6. बिहार मशरूम की खेती के लिए क्यों अनुकूल माना जाता है?\nबिहार का वातावरण मशरूम की खेती के लिए अनुकूल बताया गया है और इसे सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/health/kainsara-aura-aljaimara-men-bhi-karagara-pusa-ke-vaijnanikon-ne-khole-masharuma-ki-3-kismon-ke-raza-5265",
  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-07-06",
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    "औषधीय मशरूम",
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