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  "type": "article",
  "title": "कैंसर के जोखिम को घटाने और मजबूत इम्यूनिटी के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णा तरंग ने बताए जरूरी सुपरफूड्स",
  "summary": "कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. कृष्णा तरंग के अनुसार, अपनी दैनिक खुराक में क्रूसिफेरस सब्जियों, एंटी-ऑक्सीडेंट युक्त फलों, साबुत अनाजों, हेल्दी फैट्स और भारतीय मसालों को जगह देकर बीमारियों से बचा जा सकता है।",
  "content": "लंबे समय तक निरोगी जीवन जीने और गंभीर बीमारियों से दूरी बनाए रखने के लिए सही खान-पान का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे दैनिक आहार का असर सीधे तौर पर कोशिका संरचना और प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ता है। डॉ. कृष्णा तरंग, जो कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर और प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट हैं, के मुताबिक रोजमर्रा के भोजन में थोड़े समझदारी भरे बदलाव करके कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे प्रमुख खाद्य पदार्थों और पोषक तत्वों पर प्रकाश डाला है जो शरीर को अंदरूनी रूप से मजबूत और रोगमुक्त रखने में मदद करते हैं।\n\nक्रूसिफेरस सब्जियां और इम्यूनिटी का संबंध\nऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, हरी और पत्तेदार सब्जियों की खास श्रेणी, जिन्हें क्रूसिफेरस परिवार माना जाता है, को रोज की थाली में प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। इनमें ब्रोकोली, शलगम, मूली, सरसों का साग, फूल गोभी और पत्ता गोभी जैसी सब्जियां प्रमुख हैं। ये सब्जियां विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ए, फोलेट, पोटेशियम और कैल्शियम जैसे अति-आवश्यक विटामिन और खनिजों का भंडार होती हैं।\n\nये पोषक तत्व न केवल हमारे इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी तेजी से घटाते हैं। कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव क्षति को रोककर ये सब्जियां कैंसर कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को बाधित करने में बेहद कारगर साबित होती हैं।\n\nफ्री रेडिकल्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी आहार का महत्व\nशरीर में जमा होने वाले फ्री रेडिकल्स ऐसे अस्थिर मॉलिक्यूल होते हैं जो स्वस्थ कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। डीएनए में होने वाली यही टूट-फूट आगे चलकर कैंसर सेल्स को सक्रिय कर सकती है। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए भोजन में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी जाती है।\n\nगहरे रंग वाले ताजे फल और बेरीज इस मामले में सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं। अपनी दैनिक खुराक में आंवला, जामुन, अनार, कच्चा टमाटर और ब्लू बेरीज को नियमित रूप से जोड़ना चाहिए। ये फल शरीर के भीतर सूजन यानी इंफ्लेमेशन को शांत करते हैं और कोशिकाओं की रक्षा करते हैं।\n\nसाबुत अनाज, हेल्दी फैट्स और भारतीय मसाले\nपाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और शरीर को टिकाऊ ऊर्जा प्रदान करने के लिए साबुत अनाज का सेवन अनिवार्य है। आहार में अरहर दाल, राजमा, काला चना, लोबिया, चना दाल और ब्राउन राइस जैसी चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा सामान्य मैदे या रिफाइंड आटे की जगह मल्टीग्रेन आटे की रोटियां खाना सेहत के लिए अधिक गुणकारी होता है।\n\nवजन या कोलेस्ट्रॉल के डर से आहार से वसा को पूरी तरह हटाना नुकसानदेह हो सकता है। रिफाइंड तेल नुकसान पहुंचाते हैं, परंतु नट्स और सीड्स से मिलने वाले हेल्दी फैट्स शरीर के लिए आवश्यक हैं। इसके लिए अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और कद्दू यानी पम्पकिन सीड्स का संतुलित सेवन करना चाहिए।\n\nइसके साथ ही, पारंपारिक भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले सेहत के लिए प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं। हल्दी, अदरक, लहसुन, काली मिर्च और दालचीनी में प्रचुर मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर के आंतरिक अंगों को संक्रमण और क्षति से बचाए रखते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nदैनिक आहार में इन पांच प्रमुख खाद्य समूहों को शामिल करने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी और कई पुरानी बीमारियों का खतरा कम होगा।\n\n• सभी पाठकों के लिए: अपनी दैनिक थाली में बदलाव करके आप ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन को कम कर सकते हैं। इससे पाचन दुरुस्त रहता है और शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली मजबूत होती है।\n• कैंसर जोखिम न्यूनीकरण: एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल और क्रूसिफेरस सब्जियां कोशिकाओं के डीएनए की रक्षा करती हैं, जिससे लंबी अवधि में कैंसर का खतरा घटता है।\n• हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य: रिफाइंड तेल छोड़कर अखरोट, बादाम और अलसी जैसे हेल्दी फैट्स अपनाने से कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है।\n• सुलभ रसोई सामग्री: हल्दी, अदरक और लहसुन जैसे रसोई के मसालों का नियमित उपयोग बिना किसी अतिरिक्त लागत के दैनिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डॉ. कृष्णा तरंग कौन हैं और उन्होंने डाइट के संबंध में क्या सुझाव दिया है?\nडॉ. कृष्णा तरंग ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर हैं। उन्होंने कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए क्रूसिफेरस सब्जियों, एंटी-ऑक्सीडेंट फलों, साबुत अनाज, हेल्दी फैट्स और भारतीय मसालों को दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी है।\n\n2. कैंसर के जोखिम को कम करने में क्रूसिफेरस सब्जियां कैसे मदद करती हैं?\nब्रोकोली, शलगम, मूली, सरसों का साग और गोभी जैसी सब्जियां विटामिन सी, के, ए, फोलेट और मिनरल्स से भरपूर होती हैं। ये शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को घटाकर कैंसर के खतरे को कम करती हैं।\n\n3. फ्री रेडिकल्स क्या हैं और उनसे बचाव क्यों जरूरी है?\nफ्री रेडिकल्स ऐसे मॉलिक्यूल हैं जो स्वस्थ कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर सेल्स ट्रिगर हो सकते हैं। आंवला, जामुन और ब्लूबेरी जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट फल इन्हें बेअसर करते हैं।\n\n4. हेल्दी फैट्स पाने के लिए किन चीजों का सेवन करना चाहिए?\nरिफाइंड फैट की जगह अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और कद्दू (पम्पकिन) के बीजों का सेवन करना चाहिए, जो शरीर के लिए आवश्यक और फायदेमंद फैट प्रदान करते हैं।\n\n5. सूजन कम करने और बीमारियों से बचाने में कौन से मसाले सहायक हैं?\nहल्दी, अदरक, लहसुन, काली मिर्च और दालचीनी में शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर में सूजन कम करने और आंतरिक अंगों की रक्षा करने में मदद करते हैं।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "कैंसर बचाव डाइट",
    "ऑन्कोलॉजिस्ट टिप्स",
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