# कम उम्र में बच्चों में दिख रहे प्यूबर्टी के लक्षण, डॉक्टर प्रशांत त्यागी से जानें इसके संकेत और पेरेंट्स की जिम्मेदारियां

> बच्चों में उम्र से पहले प्यूबर्टी के लक्षण तेजी से सामने आ रहे हैं। डॉक्टर प्रशांत त्यागी के अनुसार, लड़कियों में 8 साल और लड़कों में 9 साल से पहले बदलाव दिखने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/kama-umra-men-bachchon-men-dikha-rahe-pyubarti-ke-lakshana-dr-prashant-tyagi-se-janen-isake-snketa-aura-perentsa-ki-jimmedariyan-25539 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रिकॉशियस प्यूबर्टी, बच्चों का स्वास्थ्य, बाल रोग विशेषज्ञ, प्यूबर्टी के लक्षण, डॉ प्रशांत त्यागी, पैरेंटिंग टिप्स

आजकल के दौर में बच्चों की शारीरिक और मानसिक बढ़त में काफी तेजी देखी जा रही है। कई बार माता-पिता यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि उनका छोटा बच्चा उम्र से काफी पहले ही बड़ा नजर आने लगा है और उसके शरीर में किशोरावस्था यानी प्यूबर्टी के संकेत उभरने लगे हैं। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को प्रिकॉशियस प्यूबर्टी कहा जाता है, जिसका अर्थ है तय उम्र से बहुत पहले किशोरावस्था का आरंभ होना। मायो क्लिनिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्थिति तब पैदा होती है जब बच्चों के शरीर में किशोरावस्था से जुड़े शारीरिक बदलाव सामान्य आयु सीमा से काफी पहले ही शुरू हो जाते हैं।

अधिकतर मामलों में समय से पहले प्यूबर्टी के उभरने की कोई साफ वजह सामने नहीं आ पाती है। इसके बावजूद, कुछ विशेष और जटिल स्थितियों में दिमाग या हार्मोनल प्रणाली से जुड़ी दिक्कतें, रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क में किसी तरह की चोट या ट्यूमर, कुछ खास जेनेटिक बीमारियां अथवा शरीर में हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी इसकी मुख्य वजह बन सकती हैं। इसके अलावा, कई बार ओवरी, टेस्टिकल या एड्रिनल ग्लैंड से हार्मोन का तय समय से पहले अधिक मात्रा में स्राव होना और एस्ट्रोजन या टेस्टोस्टेरोन तत्वों वाली क्रीम या दवाइयों के संपर्क में आना भी इसका कारण बन सकता है।

इस पूरे मामले पर सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च, दिल्ली के सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ एवं एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत त्यागी से विस्तार से बातचीत की गई। उनके अनुसार, यदि बालकों में 9 वर्ष की आयु से पहले और बालिकाओं में 8 वर्ष की आयु से पहले प्यूबर्टी के लक्षण प्रगट होने लगें, तो इसे प्रिकॉशियस प्यूबर्टी की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी अवस्था में अभिभावकों को इन बदलावों को सामान्य मानकर बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि बिना देर किए किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

## लड़कियों में समय से पहले प्यूबर्टी के शुरुआती लक्षण
डॉ. प्रशांत त्यागी का कहना है कि बालकों और बालिकाओं दोनों के शरीर में इस स्थिति के शुरुआती संकेत बिल्कुल अलग-अलग रूपों में सामने आते हैं। बात अगर लड़कियों की की जाए, तो 8 साल की उम्र से पहले उनके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें स्तनों का विकास होना या छाती के हिस्से में हल्का सा उभार आना शामिल है। इसके अलावा, कांख और प्यूबिक एरिया यानी गुप्त अंगों के आसपास बालों का उगना भी एक प्रमुख संकेत है। कई मामलों में वेजाइनल ब्लीडिंग होना या माहवारी का तय समय से बहुत पहले ही शुरू हो जाना भी देखा जाता है। इसके साथ ही, बच्ची की लंबाई में अचानक से बहुत तेज उछाल आना, चेहरे पर पिंपल्स निकलना और पसीने में बड़ों जैसी तीव्र गंध महसूस होना भी इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल है।

## लड़कों में उम्र से पहले किशोरावस्था के संकेत
दूसरी तरफ, लड़कों में 9 साल की उम्र से पहले दिखने वाले लक्षण थोड़े अलग होते हैं। डॉ. प्रशांत त्यागी बताते हैं कि लड़कों में अंडकोष का आकार बढ़ना इस स्थिति का सबसे पहला और मुख्य लक्षण माना जाता है। इसके साथ ही, उनके गुप्त अंगों और कांख के आसपास बालों का उगना शुरू हो जाता है। बच्चे की आवाज में बदलाव आना और उसकी आवाज का अचानक भारी होना भी इसी का एक हिस्सा है। कम समय के भीतर ही लंबाई का बहुत तेजी से बढ़ना, चेहरे पर कील-मुंहासे निकलना और शरीर से पसीने की तेज गंध आना भी लड़कों में प्रिकॉशियस प्यूबर्टी के स्पष्ट संकेत होते हैं।

## समय पर डॉक्टर से जांच कराना क्यों है आवश्यक
लक्षणों को समय रहते पहचान कर डॉक्टर के पास जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर बच्चे के आने वाले भविष्य और सेहत पर पड़ता है। जो बच्चे बहुत कम उम्र में अचानक तेजी से लंबे होने लगते हैं, उनकी हड्डियों का विकास भी समय से पहले ही थम जाता है। यदि सही वक्त पर उचित इलाज मिल जाए, तो बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से पूरी और सही लंबाई हासिल कर पाता है। इसके अलावा, यह मानसिक तनाव से बचाने में भी मदद करता है। जब कोई बच्चा अपनी उम्र के बाकी साथियों से शारीरिक रूप से अलग नजर आने लगता है, तो वह हीन भावना या शर्मिंदगी महसूस करने लगता है। उचित मार्गदर्शन मिलने से बच्चा मानसिक रूप से मजबूत बना रहता है। समय रहते डॉक्टर से मिलने से बीमारी की सही पहचान होती है और जरूरत पड़ने पर सटीक ट्रीटमेंट दिया जा सकता है, जिससे बच्चे का शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों बेहतरीन स्थिति में रहते हैं।

## स्वस्थ जीवनशैली और माता-पिता की भूमिका
डॉ. प्रशांत त्यागी का यह भी कहना है कि हर बच्चा अपनी प्राकृतिक गति से बढ़ता है, लेकिन समय से पहले नजर आने वाले किसी भी बदलाव को कभी भी अनदेखा न करें। ऐसी परिस्थितियों में बच्चे के शरीर में चल रहे घटनाक्रम को समझें, बिल्कुल न घबराएं और डॉक्टर से खुलकर अपनी बात कहें। बच्चों को हमेशा पौष्टिक और संतुलित आहार दें, उन्हें घर से बाहर जाकर खेलकूद गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें, पूरी नींद लेने का मौका दें और मोबाइल या टीवी जैसे उपकरणों का स्क्रीन टाइम कम से कम रखें। एक अच्छी और अनुशासित जीवनशैली ही सही शारीरिक विकास की असली नींव होती है। यदि आपको अपने बच्चे में इनमें से किसी भी प्रकार का लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत अपने नजदीकी पीडियाट्रिशियन से संपर्क करें। बच्चों के बढ़ते शरीर और उम्र के बदलावों पर पैनी नजर रखना हर माता-पिता का कर्तव्य है और सही समय पर सतर्कता बरतकर आप अपने बच्चे को एक स्वस्थ और खुशहाल भविष्य दे सकते हैं।

## इसका आप पर असर
बच्चों में समय से पहले किशोरावस्था के लक्षणों की अनदेखी उनके शारीरिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है।

- **भारत में:** देश भर के अभिभावकों को बच्चों के शारीरिक बदलावों पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जाती है ताकि हड्डियों के विकास रुकने जैसी समस्याओं से बचा जा सके। समय पर डॉक्टर से मिलने से बच्चों की पूरी लंबाई और मानसिक मजबूती सुनिश्चित होती है।
- **दिल्ली में:** स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार, यदि तय उम्र से पहले लक्षण दिखें तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए ताकि उचित चिकित्सीय परामर्श मिल सके।

## ऐसा क्यों हुआ
कम उम्र में प्यूबर्टी के लक्षण उभरने के पीछे कई चिकित्सीय और जैविक कारण हो सकते हैं, जिनकी पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद करते हैं।

- **हार्मोनल असंतुलन:** ओवरी, टेस्टिकल या एड्रिनल ग्लैंड से हार्मोन का समय से पहले अत्यधिक मात्रा में स्राव होना इस स्थिति का एक मुख्य कारण बनता है।
- **तंत्रिका तंत्र की समस्याएं:** कुछ दुर्लभ मामलों में मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में चोट, ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें प्रिकॉशियस प्यूबर्टी को जन्म देती हैं।
- **आनुवंशिक और बाहरी कारक:** कुछ जेनेटिक स्थितियां और एस्ट्रोजन या टेस्टोस्टेरोन तत्वों वाली क्रीम या दवाइयों का संपर्क भी इसकी वजह बन सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रिकॉशियस प्यूबर्टी किसे कहते हैं?
मेडिकल भाषा में प्रिकॉशियस प्यूबर्टी का अर्थ बच्चों में सामान्य उम्र से बहुत पहले किशोरावस्था के लक्षणों का उभरना है।

### 2. लड़कियों में प्रिकॉशियस प्यूबर्टी की आयु सीमा क्या है?
लड़कियों में 8 साल की उम्र से पहले प्यूबर्टी के लक्षण दिखने पर इसे प्रिकॉशियस प्यूबर्टी माना जाता है।

### 3. लड़कों में समय से पहले प्यूबर्टी का मुख्य लक्षण क्या है?
ल लड़कों में अंडकोष का आकार बढ़ना इस स्थिति का सबसे पहला और मुख्य लक्षण माना जाता है।

### 4. डॉ. प्रशांत त्यागी किस संस्थान से जुड़े हैं?
डॉ. प्रशांत त्यागी दिल्ली स्थित सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च में सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ एवं एलर्जी विशेषज्ञ हैं।

### 5. समय पर डॉक्टर के पास जाना क्यों जरूरी है?
समय पर जांच कराने से बच्चों की हड्डियों का विकास रुकने से बचता है और वे अपनी पूरी लंबाई व बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर पाते हैं।

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