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  "type": "article",
  "title": "कान में दवा डालने के तुरंत बाद भूलकर भी न लगाएं रुई, डॉक्टर ने दी चेतावनी",
  "summary": "मानसून के मौसम में कान के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टर सुमित उपाध्याय ने सलाह दी है कि कान में खुद से दवा डालने और उसके बाद रुई लगाने की आदत सुनने की क्षमता को कमजोर कर सकती है।",
  "content": "मानसून के दौरान मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी भारी उमस और नमी आम जनजीवन के साथ-साथ सेहत पर भी बुरा असर डाल रही है। इस बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम और वायरल के मरीजों के साथ-साथ कान के संक्रमण यानी ईयर इंफेक्शन के मामलों में भी काफी उछाल आया है। ऐसे में थोड़ी सी भी तकलीफ होने पर लोग अक्सर खुद ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं या फिर घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं। लेकिन यह लापरवाही सुनने की ताकत के लिए भारी पड़ सकती है। इसी विषय पर नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित उपाध्याय ने कान की सेहत से जुड़ी जरूरी बातें साझा की हैं।\n\nकान में दर्द या खुजली होने पर खुद न करें इलाज\nडॉ. सुमित उपाध्याय का कहना है कि मौजूदा मौसम में नमी का स्तर बढ़ने की वजह से कानों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। बहुत से लोग कान में हल्का दर्द, खुजली या सूजन महसूस होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाते हैं और बिना डॉक्टर की पर्ची के ड्रॉप या दवा ले आते हैं। ऐसा करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। हर मरीज के कान के संक्रमण की वजह अलग होती है और उसी के अनुसार इलाज तय किया जाता है। यदि कान में किसी भी प्रकार की असहजता या परेशानी महसूस हो, तो सबसे पहले किसी योग्य चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा का इस्तेमाल करने से समस्या ठीक होने के बजाय और अधिक गंभीर हो सकती है।\n\nदवा डालने के बाद रुई क्यों है नुकसानदायक\nडॉ. उपाध्याय के अनुसार, आम लोगों में एक बहुत आम आदत यह होती है कि वे कान में ड्रॉप डालने के बाद वहां रुई का टुकड़ा अटका लेते हैं, ताकि दवा बाहर न बहे। हालांकि, यह तरीका पूरी तरह से गलत और नुकसानदायक है। ऐसा करने से कान के भीतर हवा का प्राकृतिक संचार रुक जाता है। इसके अलावा, रुई दवा के अधिकांश हिस्से को खुद ही सोख लेती है, जिसकी वजह से वह दवा संक्रमण वाली मुख्य जगह तक प्रभावी रूप से पहुंच नहीं पाती है। कान के अंदर वेंटिलेशन बंद होने से बैक्टीरिया या फंगस पनपने का माहौल मिल जाता है जिससे इंफेक्शन और ज्यादा फैल सकता है। इसलिए बिना चिकित्सीय निर्देश के कान में कभी भी रुई का इस्तेमाल न करें।\n\nहेडफोन, ईयरबड और तेज आवाज का बढ़ता खतरा\nविशेषज्ञ ने चेताया है कि आज के दौर में सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा भी ईयरबड और हेडफोन के अत्यधिक इस्तेमाल की चपेट में हैं। लंबे समय तक और अत्यधिक तेज आवाज में गाने सुनने या कॉल्स पर रहने से सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके अलावा, ईयरबड को लगातार कान के भीतर ठूंसकर रखने से कान का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह बंद रहता है, जिससे हवा अंदर नहीं जा पाती। यही वजह है कि इन गैजेट्स का उपयोग हमेशा सीमित समय के लिए और कम वॉल्यूम पर ही किया जाना चाहिए।\n\nबदलते मौसम में बरती गई जरा सी सावधानी बचाएगी कान\nडॉ. सुमित उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि कान से जुड़ी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मौसम में बदलाव के दौरान कान की किसी भी समस्या को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यदि किसी को लगातार कान में दर्द, खुजली, सूजन या सुनने में कोई भी कठिनाई महसूस हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कान के मामले में कभी भी खुद डॉक्टर न बनें और किसी भी तरह की दवा या रुई डालने से पूरी तरह परहेज करें।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: मौसम बदलने पर कान में होने वाली समस्याओं को नजरअंदाज न करें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी ड्राप या रुई का इस्तेमाल न करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कान में दर्द या खुजली होने पर क्या करना चाहिए?\nकान में किसी भी तरह की परेशानी होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।\n\n2. कान में दवा डालने के बाद रुई क्यों नहीं लगानी चाहिए?\nरुई लगाने से कान के अंदर हवा का रास्ता रुक जाता है और रुई दवा को सोख लेती है जिससे संक्रमण बढ़ सकता है।\n\n3. कान के संक्रमण के मामले किस मौसम में ज्यादा बढ़ते हैं?\nमानसून के मौसम में नमी और उमस के कारण कान के संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।\n\n4. ईयरबड का इस्तेमाल करने से क्या नुकसान हो सकता है?\nलंबे समय तक और तेज आवाज में ईयरबड का उपयोग करने से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-24",
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    "कान का संक्रमण",
    "ईयर इंफेक्शन",
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    "कान की देखभाल",
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