कानपुर में युवाओं को जकड़ रहा ओरल कैंसर, पान मसाला और तंबाकू के अलग पाउच ने बढ़ाई चिंता कानपुर में मुंह के कैंसर के मामले 20 से 35 साल के युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। जेके कैंसर संस्थान और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने गुटखा, सुपारी और गैर-कानूनी बिक्री के तौर-तरीकों को इसके पीछे मुख्य वजह बताया है। औद्योगिक नगरी कानपुर में मुंह के कैंसर का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है, जहां पहले यह घातक बीमारी आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखी जाती थी, वहीं अब 20 से 35 वर्ष के युवा बड़ी तादाद में इसकी चपेट में आ रहे हैं। जेके कैंसर संस्थान में जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों में युवा वर्ग की बढ़ती संख्या ने चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। तंबाकू, सुपारी और पान मसाले के लंबे समय तक सेवन से होने वाले रासायनिक प्रभाव युवाओं के ओरल स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। युवा आबादी में संक्रमण और जेके कैंसर संस्थान के आंकड़े जेके कैंसर संस्थान में पिछले 13 वर्षों से सेवारत वरिष्ठ ओंकोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र वर्मा के अनुसार, पहले अस्पताल में 40 से 60 साल के मरीज मुंह के कैंसर की शिकायत लेकर आते थे, लेकिन वर्तमान समय में 20 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या में अप्रत्याशित उछाल आया है। सुपारी, गुटखा और पान मसाला को मुंह में दबाकर घंटों तक रखने से हानिकारक रसायन निकलते हैं, जो गाल और जीभ की अंदरूनी त्वचा को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं। शुरुआत में यह समस्या छोटे छालों और घावों के रूप में सामने आती है, जो आगे चलकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में बदल जाती है। डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि अगर मुंह में कोई छाला या घाव 15 दिन में ठीक नहीं होता, तो उसे सामान्य समझकर बिल्कुल अनदेखा न करें और तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श लें। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की चेतावनी और सबम्यूकस फाइब्रोसिस का खतरा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने स्पष्ट किया है कि गुटखा मुंह के कैंसर का सबसे प्रमुख कारक है। इसके साथ ही खैनी, सुपारी और लंबे समय तक शराब का सेवन भी बीमारी के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। गुटखे का लगातार इस्तेमाल करने से मुंह के भीतर सबम्यूकस फाइब्रोसिस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे गालों के किनारों और जीभ की सतह पर लाल और सफेद पैच उभरने लगते हैं। इसके अतिरिक्त, कई बार नुकीले दांतों से जीभ पर लगातार लगने वाली चोट भी स्थाई घाव बना देती है, जो समय के साथ कैंसर का रूप धारण कर सकती है। प्राचार्य ने परामर्श दिया है कि मुंह के अंदर किसी भी तरह का असामान्य घाव, खिंचाव या बदलाव महसूस होने पर अविलंब चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। कानून की खामियां और पनकी से सचेंडी तक जमीनी हकीकत साल 2012 में गुटखे पर आधिकारिक प्रतिबंध लागू किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई देती है। पनकी और सचेंडी समेत ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पान मसाला और तंबाकू के अलग-अलग पाउच खुलेआम बेचे जा रहे हैं। पनकी जवाहरपुरम के एक दुकानदार आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि थोक विक्रेताओं से पूरा माल आसानी से प्राप्त हो जाता है और जब ग्राहक मांगते हैं तो उन्हें यह उत्पाद थमा दिए जाते हैं। उनका कहना है कि अगर थोक स्तर पर सख्त रोक लगे तभी पूरी बिक्री बंद होगी। वहीं गड़रियन पुरवा के दुकानदार रमेश का कहना है कि छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए परिवार का गुजारा चलाने की खातिर पान मसाला बेचना मजबूरी बन चुका है। प्रशासनिक निगरानी और छह महीने की सैंपलिंग बाजार में बिक रहे इन उत्पादों पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय संजय प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि विभाग समय-समय पर पान मसाला के नमूनों की जांच करता रहता है। पिछले छह महीनों के दौरान शहर भर के 50 अलग-अलग स्थानों से नमूनों का संग्रह कराया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि सीधे तौर पर केवल गुटखे के संयुक्त स्वरूप पर तकनीकी प्रतिबंध है और पान मसाले की बिक्री पूर्णतया प्रतिबंधित नहीं है, इसलिए निर्माता व विक्रेता पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पाउच में तैयार कर आसानी से बेच रहे हैं। इसी लूपहोल के चलते प्रतिबंध के बावजूद इसका उपभोग निर्बाध गति से जारी है। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर उन लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी है जो पान मसाला, सुपारी या तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं या जिनके मुंह में घाव रहते हैं। • भारत में: यदि आप या आपके परिचित किसी भी प्रकार के तंबाकू या सुपारी का सेवन करते हैं, तो 15 दिनों से अधिक पुराने किसी भी छाले की तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं। शुरुआती चरण में पकड़े जाने पर ओरल कैंसर का उपचार काफी सरल और प्रभावी हो जाता है। • कानपुर में: शहर के जेके कैंसर संस्थान और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में विशेष जांच की सुविधा उपलब्ध है जहां असामान्य सफेद या लाल पैच दिखने पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे सैंपलिंग अभियान के कारण खुदरा दुकानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। • युवाओं के लिए: 20 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों को यह गलतफहमी छोड़नी होगी कि कैंसर केवल बुजुर्गों की बीमारी है। मुंह में सुपारी या पान मसाला दबाकर रखने की आदत को तुरंत छोड़ना ही बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय है। • छोटे व्यापारियों के लिए: खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन द्वारा शहर के 50 से अधिक स्थानों पर सैंपलिंग की गई है। प्रतिबंधित तंबाकू और पान मसाले के भंडारण पर कानूनी कार्रवाई की संभावना को देखते हुए खुदरा विक्रेताओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसा क्यों हुआ कानपुर में युवाओं के बीच ओरल कैंसर के मामलों में वृद्धि तंबाकू उत्पादों के लंबे संपर्क और कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में उनकी खुली उपलब्धता के कारण हुई है। • रासायनिक क्षरण का असर: तंबाकू, सुपारी और पान मसाले को घंटों मुंह में दबाए रखने से निकलने वाले विषैले रसायन गालों और जीभ की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं। यही निरंतर रासायनिक चोट अंततः सबम्यूकस फाइब्रोसिस और ट्यूमर में बदल जाती है। • दोहरे पाउच की कानूनी खामी: साल 2012 में गुटखे पर प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पैकेट में बेचना शुरू कर दिया। इस विभाजन के कारण कानून का उल्लंघन सीधे नहीं दिखता और दोनों को एक साथ मिलाकर खाना बदस्तूर जारी है। • शुरुआती लक्षणों की अनदेखी: युवा वर्ग मुंह के छालों को सामान्य पेट की खराबी मानकर हफ्तों तक नजरअंदाज कर देता है। समय पर डॉक्टर को न दिखाने से साधारण घाव गंभीर कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं। सवाल-जवाब 1. कानपुर में मुंह के कैंसर के मरीजों में क्या नया बदलाव देखा जा रहा है? पहले 40 से 60 वर्ष की आयु वाले लोग इसके शिकार होते थे, लेकिन अब 20 से 35 वर्ष के युवा भी बड़ी संख्या में ओरल कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। 2. मुंह में छाला होने पर कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि मुंह का कोई छाला या घाव 15 दिन के भीतर ठीक नहीं होता है, तो तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। 3. सबम्यूकस फाइब्रोसिस के मुख्य लक्षण क्या हैं? गुटखा और सुपारी के सेवन से गालों के किनारों और जीभ पर लाल या सफेद पैच दिखाई देने लगते हैं और मुंह खुलने में दिक्कत हो सकती है। 4. गुटखा बैन होने के बावजूद बाजार में कैसे बिक रहा है? साल 2012 के प्रतिबंध के बाद कंपनियां पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पाउच में बेचती हैं, जिन्हें ग्राहक खरीदकर खुद मिला लेते हैं। 5. खाद्य सुरक्षा विभाग ने कानपुर में क्या कार्रवाई की है? सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय के अनुसार पिछले छह महीनों में शहर के 50 अलग-अलग स्थानों से पान मसाले के नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। https://trendkia.com/health/kanpur-men-yuvaon-ko-jakara-raha-orala-kainsara-pana-masala-aura-tnbaku-ke-alaga-paucha-ne-barhai-chinta-34546 TrendKia — Har trend, sabse pehle.