खानपान की लापरवाही और देर से शादी बन रही महिलाओं में बांझपन की बड़ी वजह, डॉक्टर शाहीन खान ने बताए बचाव के उपाय मऊ की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शाहीन खान के अनुसार अनियंत्रित वजन, देर से विवाह और हार्मोनल असंतुलन बांझपन का मुख्य कारण बनते हैं, लेकिन समय पर जांच और इलाज से मातृत्व संभव है। वर्तमान दौर में अस्वस्थ दिनचर्या, खानपान में लापरवाही और देर से विवाह करने की आदत महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। कई बार शुरुआत में छोटी दिखने वाली शारीरिक परेशानियां आगे चलकर बांझपन जैसी जटिल चुनौती का रूप ले लेती हैं। मऊ स्थित शाहीन क्लिनिक की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शाहीन खान के अनुसार, आजकल महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका एक बहुत बड़ा कारण सही उम्र में शादी न करना तथा अपने रहन-सहन और पोषण पर उचित ध्यान न देना है। महिलाएं अपनी जीवनशैली में लगातार ऐसे बदलाव करती हैं जो उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं होते और शारीरिक सक्रियता की कमी के चलते उनका वजन अनियंत्रित होकर मोटापे में बदल जाता है, जो बाद में बांझपन की एक बड़ी वजह साबित होता है। फास्ट फूड का अधिक सेवन और हार्मोनल असंतुलन का खतरा कम उम्र में लड़कियां अक्सर अपने स्वास्थ्य और खानपान के प्रति सतर्क नहीं रहती हैं। अधिक मात्रा में जंक फूड, फास्ट फूड और तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर के आंतरिक तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्रिय न रहने और दैनिक कामकाज में नियमित व्यायाम या हलचल की कमी से शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। डॉक्टर शाहीन खान स्पष्ट करती हैं कि जब खानपान असंतुलित होता है, तो प्रजनन अंगों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि अंडाशय यानी ओवरी में छोटा सिस्ट या फाइब्रॉयड पनपने लगे, तो महिलाओं के लिए गर्भधारण करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शुरुआत में ध्यान न देने पर यही छोटी-छोटी गांठे और सिस्ट आगे चलकर बड़ी समस्याओं का आधार बन जाते हैं। पीसीओडी, थायराइड और सिस्ट बढ़ने से आती हैं रुकावटें यदि ओवरी में मौजूद सिस्ट का आकार बड़ा हो जाए, तो शरीर में गंभीर हार्मोनल असंतुलन शुरू हो जाता है। यह स्थिति गर्भधारण की संभावना को बहुत कम कर देती है। यदि किसी महिला को हार्मोनल समस्याएं, पीसीओडी या थायराइड की शिकायत हो, तो उसे बिना किसी देरी के तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। योग्य महिला रोग विशेषज्ञ की देखरेख में यदि तुरंत सही उपचार शुरू कर दिया जाए, तो महिलाएं सफलतापूर्वक कंसीव कर सकती हैं। इसके विपरीत, यदि लक्षणों को नजरअंदाज करते हुए लापरवाही बरती गई, तो यह स्थिति समय के साथ और अधिक बिगड़ सकती है तथा बांझपन का स्थायी कारण भी बन सकती है। 35 वर्ष की आयु के बाद गर्भधारण में आती हैं जटिलताएं विवाह की उम्र का सीधा संबंध महिला की प्रजनन क्षमता से जुड़ा होता है। डॉक्टर शाहीन खान के मुताबिक, यदि कोई महिला 35 वर्ष की उम्र पार करने के बाद शादी करती है, तो उसके शरीर में ओवुलेशन की प्रक्रिया धीमी और कम होने लगती है। ओवुलेशन कम होने की वजह से प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि महिलाओं को बहुत अधिक उम्र तक विवाह टालने से बचना चाहिए और सही व उपयुक्त उम्र में ही शादी कर लेनी चाहिए, क्योंकि अधिक उम्र में विवाह करना बांझपन के सबसे बड़े कारणों में से एक बन चुका है। मोटापा और वजन पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी महिलाओं में अत्यधिक मोटापा हार्मोनल असंतुलन को जन्म देता है, जिससे गर्भधारण की प्रक्रिया में रुकावटें पैदा होने लगती हैं। जब तक वजन को नियंत्रित नहीं किया जाता और अतिरिक्त चर्बी को कम करने की दिशा में कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह समस्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जाती है। डॉक्टर शाहीन खान का कहना है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर और भोजन में सुधार करके ही मोटापे पर लगाम लगाई जा सकती है, जिससे हार्मोन का स्तर सामान्य बना रहता है और प्रजनन क्षमता प्रभावित नहीं होती। उचित समय पर सही जांच और उपचार से संभव है मातृत्व यदि कोई महिला गर्भधारण न हो पाने की समस्या से जूझ रही है, तो उसे सबसे पहले जरूरी चिकित्सीय परीक्षण कराने चाहिए। गहन जांच के जरिए यह स्पष्ट हो जाता है कि शरीर में किस पोषक तत्व, हार्मोन या अंग के स्तर पर कमी या विकार मौजूद है। उस कमी के आधार पर यदि सटीक और व्यवस्थित इलाज शुरू किया जाए, तो समस्या का पूरी तरह समाधान संभव है। इसके साथ ही महिलाओं को अपनी जीवनशैली सुधारने और खानपान को पौष्टिक बनाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बहुत ही दुर्लभ मामलों में ऐसा होता है जब बांझपन का स्थायी असर रह जाए। यदि सही समय पर उचित जांच कराकर इलाज प्रारंभ कर दिया जाए, तो महिलाएं मातृत्व का सुख आसानी से प्राप्त कर सकती हैं। इसका आप पर असर यह जानकारी महिलाओं को अपने प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर समय पर सही चिकित्सीय कदम उठाने में मदद करती है। • जीवनशैली में सुधार: फास्ट फूड और तैलीय आहार छोड़कर पौष्टिक भोजन अपनाने से शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। दैनिक जीवन में शारीरिक सक्रियता बढ़ाने से अनावश्यक वजन और मोटापे की समस्या से बचाव होता है। • समय पर जांच: यदि मासिक चक्र में अनियमितता, पीसीओडी या थायराइड के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते जांच कराने से ओवरी के सिस्ट या फाइब्रॉयड का सटीक इलाज संभव हो जाता है। • उम्र का ध्यान: 35 वर्ष की आयु के बाद ओवुलेशन दर में गिरावट आने लगती है, इसलिए परिवार नियोजन में देरी से बचना चाहिए। सही समय पर शादी और गर्भधारण का फैसला बांझपन की जटिलताओं को काफी हद तक कम कर देता है। • इलाज से समाधान: बांझपन स्थायी नहीं होता और समय पर उचित चिकित्सीय मार्गदर्शन लेने से अधिकांश महिलाएं मां बन सकती हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार इलाज लेने से प्रजनन क्षमता को पुनः सामान्य किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ महिलाओं में बांझपन के मामलों में वृद्धि के पीछे आधुनिक जीवनशैली, खानपान की खराब आदतें और देर से विवाह जैसे मुख्य कारण शामिल हैं। • अस्वस्थ आहार और मोटापा: कम उम्र में अत्यधिक जंक फूड और तैलीय खाना खाने से शरीर में वसा बढ़ती है और शारीरिक गतिविधि की कमी मोटापे को जन्म देती है। यह अतिरिक्त वजन शरीर के हार्मोनल चक्र को असंतुलित कर देता है। • ओवरी में सिस्ट और फाइब्रॉयड: असंतुलित दिनचर्या के कारण अंडाशय में सिस्ट या फाइब्रॉयड बनने लगते हैं। जब इन सिस्ट का आकार बढ़ जाता है, तो पीसीओडी और थायराइड जैसी समस्याएं गर्भधारण की प्रक्रिया को बाधित करती हैं। • बढ़ती उम्र में विवाह: 35 साल की उम्र के बाद महिलाओं में प्राकृतिक रूप से ओवुलेशन की प्रक्रिया घटने लगती है। देर से शादी करने के कारण गर्भधारण में प्राकृतिक रूप से शारीरिक बाधाएं बढ़ जाती हैं। सवाल-जवाब 1. महिलाओं में बांझपन का मुख्य कारण क्या है? डॉक्टर शाहीन खान के अनुसार देर से शादी करना, बढ़ता मोटापा, फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन और हार्मोनल असंतुलन बांझपन के मुख्य कारण हैं। 2. 35 साल की उम्र के बाद गर्भधारण में क्या परेशानी आती है? 35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में ओवुलेशन की प्रक्रिया कम होने लगती है, जिससे गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। 3. क्या पीसीओडी या थायराइड होने पर महिलाएं कंसीव कर सकती हैं? हां, यदि समय पर जांच कराकर योग्य महिला चिकित्सक से सही इलाज शुरू किया जाए, तो महिलाएं आसानी से कंसीव कर सकती हैं। 4. ओवरी में सिस्ट होने से क्या नुकसान होता है? ओवरी में सिस्ट का आकार बढ़ने से गंभीर हार्मोनल समस्याएं शुरू हो जाती हैं, जिससे गर्भधारण में भारी रुकावट आती है। 5. बांझपन की समस्या से बचने के लिए क्या करना चाहिए? महिलाओं को अपने खानपान में सुधार करना चाहिए, वजन नियंत्रित रखना चाहिए और किसी भी परेशानी पर तुरंत चिकित्सीय जांच करानी चाहिए। https://trendkia.com/health/khanapana-ki-laparavahi-aura-dera-se-shadi-bana-rahi-mahilaon-men-banjhapana-ki-bari-vajaha-doktara-shaheen-khan-ne-batae-bachava--33981 TrendKia — Har trend, sabse pehle.