खांसी और खराश में मुलेठी चबाने की आदत पड़ सकती है भारी, रोज खाने से पहले समझें इसके खतरे गले की तकलीफ दूर करने के लिए पहचानी जाने वाली मुलेठी का रोजाना और ज्यादा मात्रा में सेवन सेहत बिगाड़ सकता है। इसमें मौजूद ग्लाइसीराइज़िन शरीर में सोडियम बढ़ाकर ब्लड प्रेशर और दिल की मुश्किलें बढ़ा सकता है। मौसम बदलते ही जब खांसी या गले की खराश परेशान करती है, तो अधिकांश घरों में सबसे पहले मुलेठी का नुस्खा ही याद आता है। पारंपरिक चिकित्सा और दादी-नानी के बटुए में मुलेठी को हमेशा एक अचूक उपाय माना गया है। लोग इसका एक छोटा सा टुकड़ा मुंह में दबाकर चूसते रहते हैं या फिर पानी में उबालकर इसकी हर्बल चाय पीना पसंद करते हैं। गले की राहत के अलावा पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कतों में भी इसे बेहद गुणकारी माना जाता है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब राहत देने वाली इस जड़ी-बूटी को बिना सोचे-समझे रोज की डाइट का हिस्सा बना लिया जाता है। हर प्राकृतिक चीज सुरक्षित नहीं, अधिक मात्रा से उल्टा असर आमतौर पर लोगों के मन में यह पक्की धारणा बैठी होती है कि प्राकृतिक या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का शरीर पर कोई दुष्परिणाम नहीं होता। इसी भरोसे के चलते कई लोग बिना किसी नियम या सीमा के हफ्तों और महीनों तक मुलेठी खाते रहते हैं। सच्चाई यह है कि किसी भी औषधीय तत्व का लाभ तभी तक मिलता है जब उसे सही अनुपात और सीमित समय के लिए इस्तेमाल किया जाए। अगर इसका सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए, तो यह गुणकारी जड़ी-बूटी शरीर के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। खासकर वे लोग जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह आदत गंभीर खतरे पैदा कर सकती है। ग्लाइसीराइज़िन यौगिक और शरीर पर इसके प्रभाव आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार, मुलेठी के भीतर ग्लाइसीराइज़िन नाम का एक खास सक्रिय यौगिक मौजूद होता है। मुलेठी के औषधीय गुणों के पीछे यही तत्व मुख्य वजह होता है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा मात्रा में शरीर में पहुंचता है तो कई तरह की शारीरिक गड़बड़ियों को जन्म देता है। जब कोई व्यक्ति लगातार और भारी मात्रा में इसका सेवन करता है, तो यह यौगिक शरीर के आंतरिक तंत्र को प्रभावित करता है। इसके असर से शरीर में सोडियम और पानी का अनावश्यक संचय होने लगता है, जो धीरे-धीरे कई अन्य अंगों पर दबाव डालता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने और सूजन का गंभीर खतरा शरीर में सोडियम और तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ने का सीधा असर रक्त संचार पर पड़ता है। जब शरीर पानी को रोकने लगता है, तो रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर चढ़ सकता है। जो लोग पहले से ही उच्च रक्तचाप की समस्या का सामना कर रहे हैं, उनके लिए बिना चिकित्सकीय परामर्श के लंबे समय तक मुलेठी चबाना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में पानी जमा होने की वजह से पैरों, पंजों और अन्य हिस्सों में भारी सूजन आ सकती है, साथ ही तेज सिरदर्द की शिकायत भी हो सकती है। पोटैशियम की कमी और मांसपेशियों में कमजोरी लंबे समय तक मुलेठी लेने का एक और बड़ा दुष्प्रभाव पोटैशियम के स्तर में गिरावट के रूप में सामने आता है। पोटैशियम हमारे शरीर के सुचारू संचालन, मांसपेशियों की मजबूती और नसों के सामान्य कामकाज के लिए अनिवार्य मिनरल है। जब शरीर में इसका स्तर नीचे गिरता है, तो व्यक्ति को हर समय अत्यधिक थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और अजीब सी बेचैनी महसूस होने लगती है। यह स्थिति शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को धीमा कर देती है और रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी खड़ी कर देती है। किडनी, दिल के मरीज और दवा लेने वाले बरतें सावधानी किडनी या दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अपनी मर्जी से मुलेठी का नियमित सेवन कभी नहीं करना चाहिए। दिल और गुर्दे पहले से ही शरीर में तरल और लवण के संतुलन को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं, ऐसे में मुलेठी का प्रभाव इन अंगों पर अतिरिक्त भार डाल देता है। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से किसी अन्य बीमारी की दवाएं खा रहे हैं, उनमें मुलेठी दवाओं के प्रभाव को बदल सकती है या उनके साथ विपरीत प्रतिक्रिया कर सकती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने का विचार कर रहा है, तो किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से अपनी शारीरिक स्थिति की जांच कराकर सलाह लेना ही सुरक्षित रास्ता है। इसका आप पर असर मुलेठी को हानिरहित मानकर रोज चबाने वालों को अपनी इस आदत की तुरंत समीक्षा करनी चाहिए ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके। • दैनिक उपयोग पर: रोजाना मुलेठी चबाने या इसकी चाय पीने की आदत को तुरंत सीमित करें। अगर गले या पेट की राहत के लिए इसे ले भी रहे हैं, तो कुछ दिनों के बाद इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। • रक्तचाप की निगरानी: हाई बीपी की समस्या वाले लोग मुलेठी का नियमित सेवन तुरंत रोकें। बिना सोचे-समझे इसे लेने से रक्तचाप अनियंत्रित होकर दवाओं के असर को भी बेअसर कर सकता है। • शारीरिक लक्षणों पर ध्यान: यदि पैरों में अकारण सूजन, तेज सिरदर्द या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो रही हो, तो मुलेठी का सेवन बंद करें। शरीर में पोटैशियम और सोडियम के स्तर की जांच के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। • दवाओं के साथ सावधानी: नियमित रूप से अंग्रेजी या अन्य दवाएं लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह के बिना मुलेठी न लें। यह जड़ी-बूटी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया करके स्वास्थ्य को जटिल बना सकती है। ऐसा क्यों हुआ मुलेठी के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान का मुख्य कारण इसमें मौजूद सक्रिय रासायनिक यौगिक और शरीर के मिनरल संतुलन पर पड़ने वाला असर है। • ग्लाइसीराइज़िन का प्रभाव: मुलेठी में पाया जाने वाला सक्रिय यौगिक ग्लाइसीराइज़िन शरीर के हार्मोनल और मिनरल संतुलन को बाधित करता है। जब यह तत्व अत्यधिक मात्रा में शरीर में जाता है, तो शरीर पानी और सोडियम को बाहर निकालने के बजाय रोकने लगता है। • सोडियम और जल संचय: शरीर में सोडियम और तरल पदार्थों का स्तर बढ़ने से नसों में खून का दबाव बढ़ जाता है। यही प्रक्रिया रक्तचाप को अचानक बढ़ा देती है और शरीर के निचले अंगों में सूजन पैदा करती है। • पोटैशियम का क्षरण: सोडियम बढ़ने के साथ-साथ शरीर से जरूरी पोटैशियम तेजी से कम होने लगता है। इस आवश्यक मिनरल की कमी होने से मांसपेशियों में शिथिलता, गंभीर थकान और कमजोरी की स्थिति पैदा हो जाती है। • अंगों पर दोहरा दबाव: जिन लोगों की किडनी या हृदय पहले से कमजोर हैं, उनके लिए यह असंतुलन घातक हो जाता है। यही कारण है कि चिकित्सीय विशेषज्ञ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों को भी दवा की तरह सीमित मात्रा में लेने की सलाह देते हैं। सवाल-जवाब 1. मुलेठी का नियमित या अधिक सेवन करने से क्या नुकसान हो सकते हैं? अधिक मात्रा में मुलेठी लेने से शरीर में सोडियम और पानी जमा होने लगता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और पोटैशियम का स्तर गिर सकता है। 2. मुलेठी में ऐसा कौन सा तत्व होता है जो शरीर को प्रभावित करता है? मुलेठी में ग्लाइसीराइज़िन नाम का एक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जो इसके औषधीय असर और अधिक मात्रा में लेने पर होने वाले दुष्प्रभावों के लिए जिम्मेदार है। 3. हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को मुलेठी खाने से क्यों बचना चाहिए? मुलेठी शरीर में पानी और सोडियम को रोकती है, जिससे रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है और ब्लड प्रेशर और अधिक बढ़ सकता है। 4. शरीर में पोटैशियम का स्तर कम होने पर कौन से लक्षण दिखाई देते हैं? पोटैशियम कम होने पर अत्यधिक थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, बेचैनी और पैरों में सूजन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। 5. किन बीमारियों से पीड़ित लोगों को मुलेठी लेने से पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है? हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और किडनी की समस्या से ग्रस्त लोगों के साथ-साथ नियमित दवा लेने वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। https://trendkia.com/health/khansi-aura-kharasha-men-mulethi-chabane-ki-adata-para-sakati-hai-bhari-roja-khane-se-pahale-samajhen-isake-khatare-42720 TrendKia — Har trend, sabse pehle.