खराब पाचन और पेट की जलन से पाना है छुटकारा तो अपनाएं ये घरेलू उपाय अनियमित खानपान और बाजार के तले-भुने भोजन से बच्चों और बड़ों में बढ़ रही पाचन संबंधी समस्याओं पर चिकित्सा विशेषज्ञ ने आहार सुधार और घरेलू सावधानियों के जरूरी सुझाव दिए हैं। दैनिक जीवन की आपाधापी और खानपान की अनियंत्रित दिनचर्या के कारण पेट से जुड़ी दिक्कतें लोगों की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही हैं। बाजार के तले-भुने पकवान, अतिरिक्त मिर्च-मसालेदार भोजन, पैक्ड खाद्य सामग्री, पिज्जा, बर्गर और कार्बोनेटेड शीतल पेय पदार्थों का बढ़ता उपयोग पाचन तंत्र की स्वाभाविक कार्यप्रणाली को बिगाड़ रहा है। इसके चलते अब किसी भी उम्र के व्यक्ति, चाहे वे छोटे बच्चे हों या बुजुर्ग, भारी पेट, सीने में जलन, खट्टी डकार, गैस और पेट फूलने की समस्या का निरंतर सामना कर रहे हैं। भोजन के तुरंत बाद अगर पेट में भारीपन या अपच परेशान करने लगे, तो रोजमर्रा की कुछ बुनियादी आदतों में समय रहते सुधार लाकर इन तकलीफों से सुरक्षित रहा जा सकता है। अनियमित दिनचर्या और मसालेदार खानपान से बिगड़ता हाजमा पेट के विकारों की प्रमुख वजह भोजन का गलत चुनाव और समय पर न खाने की आदत है। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने इस विषय में जानकारी साझा करते हुए बताया कि बाजार में खुले में बिकने वाले तले-भुने पकवान और मिर्च-मसाले से भरे व्यंजन लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं। रेहड़ी-पटरी या भोजनालयों में जाकर अत्यधिक चिकनाई और तेल वाले भोजन का सेवन करने से आंतों पर सीधा दबाव पड़ता है। बहुत ज्यादा तीखा और मसालेदार भोजन पेट की अंदरूनी सतह को उत्तेजित कर देता है, जिससे अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है और एसिडिटी तथा अपच की परेशानी शुरू हो जाती है। कम उम्र के बच्चों में भी पैर पसारती पेट की बीमारियां पहले के दौर में गैस और अपच की शिकायतें ज्यादातर ढलती उम्र के बुजुर्गों में ही देखी जाती थीं, लेकिन वर्तमान में स्थिति तेजी से बदली है। आठ से दस वर्ष की उम्र के स्कूली बच्चे भी अब लगातार पेट दर्द और भारीपन की चपेट में आ रहे हैं। इस उम्र के बच्चों में चिप्स, पैकेट बंद स्नैक्स, फास्ट फूड और ठंडे पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन का चलन बढ़ा है। यह अस्वास्थ्यकर भोजन बच्चों के पोषण और उनकी पाचन क्षमता पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। इसके अलावा पढ़ाई और खेलकूद के चक्कर में समय पर भोजन न करना और दिनभर में जरूरी मात्रा में सादा पानी न पीना भी बच्चों के पाचन तंत्र को कमजोर बना रहा है। घर से निकलते वक्त पानी और ताजे फल साथ रखने की आदत बाजार में खरीदारी करते समय या त्योहारों के दिनों में जब लोग लंबे समय तक घरों से बाहर रहते हैं, तो खानपान का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक हो जाता है। डॉ. रजिता के अनुसार, घर से बाहर कदम रखते ही अपने साथ पीने के पानी की एक बोतल और कुछ ताजे फल अवश्य रखने चाहिए। इससे बाहर रहने के दौरान अस्वास्थ्यकर भोजन खाने की मजबूरी से बचा जा सकता है। व्यक्ति को लंबे वक्त तक खाली पेट रहने की आदत छोड़नी चाहिए, क्योंकि पेट लंबे समय तक खाली रहने पर पाचक रस एसिडिटी को भड़काते हैं। साथ ही एक बार में बहुत अधिक मात्रा में भोजन ठूंसने से भी बचना चाहिए। थाली में सलाद, मौसमी फल और हरी सब्जियों को दें प्राथमिकता आंतों को स्वस्थ रखने और कब्ज या गैस से बचने के लिए दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजा सलाद और मौसम के अनुसार उपलब्ध फलों को पर्याप्त स्थान देना अनिवार्य है। शरीर में पानी का पर्याप्त स्तर बनाए रखना भी पाचन क्रिया को सुगम बनाता है। भोजन के उपरांत सौंफ चबाने से पेट में बनने वाली अनावश्यक गैस और भारीपन से राहत महसूस की जा सकती है। इसके अलावा घरों में बनने वाली दालों और सब्जियों में स्वाद और पाचन संतुलन के लिए थोड़ी मात्रा में पिसी काली मिर्च का प्रयोग करना एक बेहतर विकल्प साबित होता है। जीरा, अजवाइन और सौंफ के पारंपरिक नुस्खों का सही उपयोग भारतीय रसोई में उपयोग होने वाले अजवाइन और जीरे को पारंपरिक रूप से पेट की गड़बड़ियों को शांत करने के लिए जाना जाता है। डॉ. रजिता का कहना है कि जीरा और अजवाइन को तवे पर हल्का भूनकर पीस लें और जरूरत पड़ने पर इस चूर्ण की सीमित मात्रा गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं। हालांकि, इन पारंपरिक घरेलू उपचारों को किसी भी बीमारी का स्थायी या पूर्ण इलाज मानकर नहीं बैठना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से लगातार गैस, पेट में ऐंठन या बदहजमी की शिकायत बनी हुई है, तो बिना देरी किए किसी योग्य चिकित्सक की निगरानी में जांच कराना बेहद आवश्यक है। सर्दियों में गुड़ का सेवन करते समय बरतें आवश्यक एहतियात शीत ऋतु की शुरुआत होते ही खानपान में गुड़ का उपयोग काफी बढ़ जाता है। पारंपरिक रीति-रिवाजों में भोजन संपन्न करने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाने की पुरानी परंपरा रही है। गुड़ भी प्राकृतिक रूप से शर्करा यानी चीनी का ही एक माध्यम है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सीमित और संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। जिन व्यक्तियों को मधुमेह अथवा रक्त शर्करा के असंतुलन की समस्या है, उन्हें गुड़ का सेवन करने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि ब्लड शुगर अचानक अनियंत्रित न हो। समयबद्ध भोजन और भरपूर पानी का सेवन है पेट का सुरक्षा कवच पाचन क्रिया को दीर्घकालिक रूप से दुरुस्त रखने के लिए केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली और खाने-पीने की दिनचर्या में अनुशासन लाना सबसे जरूरी कदम है। रेस्तरां और ठेलों के तले-भुने भोजन से दूरी बनाएं, निर्धारित समय पर सुपाच्य भोजन ग्रहण करें, नियमित रूप से पर्याप्त पानी पिएं और प्लेट में पौष्टिक साग-सब्जियों को शामिल करें। जीवनशैली में किए गए ये छोटे-छोटे सुधार पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर व्यक्ति को गैस और एसिडिटी के कष्ट से लंबे समय तक दूर रख सकते हैं। इसका आप पर असर गलत खानपान और असंतुलित जीवनशैली से पैदा होने वाली पेट की बीमारियों से बचने के लिए दैनिक दिनचर्या में अनुशासन अपनाना बेहद जरूरी है। • दैनिक खानपान में: बाहर के तले-भुने फास्ट फूड, पैकेट बंद स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक की जगह मौसमी फल और हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें। इससे पेट में भारीपन और एसिडिटी की समस्या से बचा जा सकता है। • बच्चों की दिनचर्या में: 8 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों को पैक्ड चिप्स और जंक फूड से दूर रखकर समय पर खाना खाने की आदत डालें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाने से बच्चों का पाचन तंत्र स्वस्थ रहेगा। • बाजार या यात्रा के दौरान: घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल और ताजे फल साथ रखने का नियम बनाएं। लंबे समय तक खाली पेट रहने या बाहर का अस्वास्थ्यकर भोजन खाने से आंतों पर बुरा असर पड़ता है। • घरेलू उपचार के उपयोग में: खाना खाने के बाद सौंफ चबाएं या भुने जीरे व अजवाइन का सीमित मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। यह पेट की गैस को शांत करने में सहायक होता है, लेकिन लगातार दर्द होने पर डॉक्टर से जांच कराएं। • मधुमेह के मरीजों के लिए: सर्दियों के मौसम में भोजन के बाद अत्यधिक मात्रा में गुड़ खाने से परहेज करें। गुड़ भी शुगर का स्रोत है, इसलिए ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए इसका सीमित उपयोग ही करें। ऐसा क्यों हुआ पाचन से जुड़ी बीमारियों और अत्यधिक गैस का मुख्य कारण असंतुलित भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और अनियमित दिनचर्या का बढ़ता चलन है। • अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन: बाजार में मिलने वाले तले-भुने पकवान और ज्यादा मिर्च-मसाले पेट की अंदरूनी परत को उत्तेजित कर गैस्ट्रिक एसिड के स्राव को अत्यधिक बढ़ा देते हैं। इसके कारण खाना ठीक से पच नहीं पाता और सीने में जलन व खट्टी डकारें शुरू हो जाती हैं। • बच्चों में बढ़ता पैक्ड फूड का चलन: 8 से 10 साल के बच्चों में पोषक आहार के स्थान पर चिप्स, बर्गर और कोल्ड ड्रिंक का अनियंत्रित उपभोग उनकी आंतों की सक्रियता को शिथिल कर रहा है। समय पर भोजन न करने और कम पानी पीने से समस्या और गंभीर हो जाती है। • लंबे समय तक खाली पेट रहना: कामकाज या यात्रा के दौरान लंबे समय तक भूखे रहने से पेट में बनने वाला पाचक रस खाली आंतों में जलन और गैस पैदा करने लगता है। इसके बाद अचानक एक साथ भारी भोजन करने से पाचन तंत्र पूरी तरह लड़खड़ा जाता है। • अनियमित दिनचर्या और पानी की कमी: दिनभर में शरीर की आवश्यकता के अनुसार सादा पानी न पीने से अपचित भोजन आंतों में ठहरने लगता है। पर्याप्त जलयोजन न मिलने से भोजन का अवशोषण रुकता है और पेट फूलने की समस्या जन्म ले लेती है। सवाल-जवाब 1. खाना खाने के बाद पेट में गैस और भारीपन क्यों महसूस होता है? बाजार का तला-भुना भोजन, ज्यादा मिर्च-मसालेदार चीजें खाने और समय पर पानी न पीने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे गैस और भारीपन की समस्या होती है। 2. छोटे बच्चों में पेट की समस्याएं बढ़ने का क्या कारण है? 8 से 10 साल के बच्चों में पैक्ड फूड, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड का अत्यधिक सेवन तथा कम पानी पीना पेट की दिक्कतों का मुख्य कारण है। 3. पाचन को दुरुस्त रखने के लिए डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए? खानपान में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजा सलाद, मौसमी फल शामिल करने चाहिए और सब्जियों व दाल में थोड़ी काली मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। 4. गैस और एसिडिटी से राहत पाने के लिए कौन से घरेलू नुस्खे मददगार हैं? भोजन के बाद सौंफ चबाना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा भुने हुए जीरे और अजवाइन के चूर्ण को सीमित मात्रा में गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। 5. सर्दियों में गुड़ खाते समय किन लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए? डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या से जूझ रहे लोगों को गुड़ का सेवन बहुत सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि गुड़ भी चीनी का ही एक स्रोत है। 6. घरेलू उपायों के बावजूद पेट दर्द या गैस ठीक न हो तो क्या करें? घरेलू नुस्खों को बीमारी का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए। लगातार पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या होने पर तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। https://trendkia.com/health/kharaba-pachana-aura-peta-ki-jalana-se-pana-hai-chhutakara-to-apanaen-ye-gharelu-upaya-54230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.