खुशहाल दांपत्य जीवन के साथ बुरी आदतें शरीर को कर सकती हैं समय से पहले बूढ़ा, शोध में हुआ बड़ा खुलासा शोधकर्ताओं ने पाया है कि अच्छे तालमेल वाले खुशहाल जोड़ों में बायलॉजिकल उम्र धीमी हो सकती है, बशर्ते उनकी जीवनशैली और खान-पान भी स्वस्थ हों। पति-पत्नी के बीच बेहतर तालमेल और खुशी भरा रिश्ता शारीरिक सेहत पर गहरा असर डालता है। अगर किसी जोड़े के बीच आपसी समझ अच्छी है और उनका जीवन तनावमुक्त है, तो उनके शरीर की अंदरूनी ताकत और अंग वास्तविक उम्र से अधिक युवा बने रह सकते हैं। हालांकि, यह सकारात्मक प्रभाव तभी देखने को मिलता है जब ऐसे जोड़े अपनी सेहत, खान-पान और दिनचर्या को लेकर भी पूरी तरह सतर्क रहते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा एट बर्मिंघम के शोधकर्ताओं ने इस बात की गहराई से पड़ताल की है कि क्या खुशहाल वैवाहिक जीवन का असर इंसानी सेहत पर भी पड़ता है। इस अध्ययन के दौरान जोड़ों के आपसी रिश्ते, उनकी लाइफस्टाइल, खान-पान की आदतें, नींद की गुणवत्ता और तनाव के स्तर जैसे विभिन्न पैमानों का बारीकी से आकलन किया गया। इसके बाद यह तथ्य सामने आया कि जिन पति-पत्नी के बीच आपसी समझ गहरी होती है, उनमें बायलॉजिकल एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, बशर्ते वे सेहतमंद आदतों को भी अपनाएं। इस वैज्ञानिक अध्ययन में 40 से 87 वर्ष की आयु के कुल 107 विवाहित या साथ रहने वाले जोड़ों को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने उनके रिश्तों की गुणवत्ता के साथ-साथ उनकी नींद, डाइट और शारीरिक गतिविधियों की पूरी जांच की। इसके अलावा बायलॉजिकल एजिंग की सही स्थिति का पता लगाने के लिए इन सभी प्रतिभागियों के खून के सैंपल लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच की गई। रक्त नमूनों की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिन जोड़ों के जीवन की गुणवत्ता उच्च स्तर की थी, उनमें डीएनए मेथिलरेशन आधारित एजिंग क्लॉक काफी बेहतर थी। उनकी कोशिकाओं के भीतर p16INK4a मार्कर अधिक मात्रा में पाए गए, जिसका सीधा अर्थ यह है कि उनकी कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी नहीं होती हैं। इसके साथ ही उनके डीएनए के टेलोमेयर की लंबाई भी बहुत धीमी गति से कम होती पाई गई, जो लंबी और स्वस्थ आयु का संकेत है। रिश्ते की खुशहाली का एक दूसरा पहलू भी इस अध्ययन में उजागर हुआ है। कई ऐसे जोड़े भी थे जो आपस में बेहद खुश रहते थे और उनके बीच अच्छी समझ थी, लेकिन उनकी दैनिक जीवनशैली बेहद खराब थी। ऐसे लोग अपने खान-पान पर ध्यान नहीं देते थे और शारीरिक व्यायाम या कसरत को अपने जीवन में कोई खास जगह नहीं देते थे। इन जोड़ों की बायलॉजिकल उम्र में किसी भी तरह का कोई खास सकारात्मक बदलाव देखने को नहीं मिला। इस स्थिति को इस तरह से समझा जा सकता है कि कई बार पति-पत्नी की आपसी ट्यूनिंग तो शानदार होती है, लेकिन उनकी आदतें बिगड़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, वे पूरा-पूरा दिन घर के अंदर बैठे रहते हैं और साथ मिलकर स्क्रीन देखने की आदत बढ़ा लेते हैं। इसके अलावा वे अक्सर बाहर का या अनहेल्दी खाना जैसे पिज्जा और बर्गर ऑर्डर करके खाते हैं। हमेशा साथ समय बिताने के बावजूद वे शारीरिक श्रम या एक्सरसाइज से दूरी बना लेते हैं। शादी के बाद इस तरह की अनहेल्दी आदतें और अधिक बढ़ जाती हैं। इन सभी गलत और अस्वस्थ आदतों के कारण उन जोड़ों में क्रोनिक बीमारियों का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरुप उनकी बायलॉजिकल उम्र भी घटने लगती है। यही वजह है कि शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि ये तमाम निष्कर्ष अभी शुरुआती चरण के हैं। यह अध्ययन मुख्य रूप से केवल संबंधों और सेहत के बीच के आपसी जुड़ाव को दर्शाता है, लेकिन यह इस बात का पूर्ण प्रमाण नहीं है कि केवल एक खुशहाल शादी या कोई विशेष आदत सीधे तौर पर बायलॉजिकल बदलावों की एकमात्र वजह बनती है। शोधकर्ताओं ने ऐसे सभी खुशहाल जोड़ों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए तीन प्रमुख सलाह दी हैं। उन्हें अपनी दैनिक शारीरिक गतिविधियों को लगातार बढ़ाने, अपनी डाइट को पूरी तरह संतुलित रखने और हर रात पर्याप्त मात्रा में नींद लेने की हिदायत दी गई है। अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि पति-पत्नी नियमित रूप से टहलने जा सकते हैं, एक साथ साइकिल चला सकते हैं या फिर ऐसी किसी गतिविधि को चुन सकते हैं जिसका वे दोनों मिलकर आनंद उठा सकें। इसके अलावा सोने के लिए एक निश्चित और सुसंगत समय तय किया जाना चाहिए, रात के वक्त देर तक स्क्रीन के इस्तेमाल को कम किया जाना चाहिए और ऐसी किसी भी दिनचर्या से बचना चाहिए जो बार-बार नींद में खलल डालती हो। जोड़ों को साथ बैठकर अपने भोजन की योजना बनानी चाहिए, पौष्टिक और ताजे खाद्य पदार्थों की खरीदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए और घर पर ही ज्यादा समय खाना पकाने पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कभी-कभार अपनी पसंद की चीजें खाना पूरी तरह बंद कर दिया जाए, बस इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी अनहेल्दी आदतें समय के साथ स्थायी रूप से न जुड़ जाएं। इसका आप पर असर इस शोध के निष्कर्ष पाठकों के दैनिक जीवन, खान-पान और स्वास्थ्य पर सीधा असर डालते हैं। • भारत में: देश भर के उन दंपतियों को अपनी जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए जो घर पर रहकर सुस्त जीवन जीते हैं। खान-पान में लापरवाही और जंक फूड का सेवन बढ़ाने से क्रोनिक बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ सकता है। • दैनिक आदतें: पति-पत्नी को साथ में मिलकर नियमित रूप से टहलना या एक्सरसाइज करनी चाहिए ताकि सेहत दुरुस्त रहे। शारीरिक सक्रियता बनाए रखने से कोशिकाओं की उम्र लंबी होती है और बुढ़ापा देर से आता है। • खान-पान: बाहर का अनहेल्दी खाना जैसे पिज्जा और बर्गर अक्सर ऑर्डर करने की आदत से बचना चाहिए। घर का बना पौष्टिक भोजन प्राथमिकता में होना चाहिए ताकि बायलॉजिकल उम्र पर बुरा असर न पड़े। • नींद और स्क्रीन टाइम: रात के समय देर तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने से नींद में खलल पड़ता है। सोने का एक निश्चित समय तय करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। • तनाव मुक्त जीवन: रिश्ते में तालमेल और आपसी समझ अच्छी होने से मानसिक तनाव कम होता है। यह सकारात्मक माहौल शरीर की अंदरूनी ताकत को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। ऐसा क्यों हुआ इस शोध के पीछे मुख्य कारण जोड़ों की जीवनशैली, आपसी संबंधों की गुणवत्ता और खान-पान की आदतों का उनके शरीर पर पड़ने वाला जैविक प्रभाव है। • जैविक प्रक्रिया: शोधकर्ताओं ने यह जांचने के लिए रक्त के नमूनों का अध्ययन किया कि रिश्ते की खुशी और तनाव मुक्त जीवन कोशिकाओं की उम्र को कैसे प्रभावित करते हैं। • कोशिका मार्कर: उच्च जीवन गुणवत्ता वाले लोगों में p16INK4a मार्कर और टेलोमेयर की लंबाई का परीक्षण किया गया ताकि यह पता चल सके कि कोशिकाएं कितनी धीमी गति से बूढ़ी होती हैं। • खराब लाइफस्टाइल: आपसी समझ अच्छी होने के बावजूद यदि जोड़े व्यायाम नहीं करते और अनहेल्दी डाइट लेते हैं, तो उनके शरीर में क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। • प्रारंभिक निष्कर्ष: यह अध्ययन केवल संबंधों और जैविक उम्र के बीच के संबंध को दर्शाता है, और शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह सीधे तौर पर कारण होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। सवाल-जवाब 1. इस अध्ययन में कितने जोड़ों को शामिल किया गया था? इस अध्ययन में 40 से 87 वर्ष की आयु के कुल 107 विवाहित या साथ रहने वाले जोड़ों को शामिल किया गया था। 2. शोध किस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है? यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा एट बर्मिंघम के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। 3. बायलॉजिकल एजिंग मापने के लिए किस चीज की जांच की गई? बायलॉजिकल एजिंग मापने के लिए प्रतिभागियों के खून के सैंपल लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच की गई। 4. कोशिकाओं की उम्र से जुड़ा कौन सा मार्कर अध्ययन में देखा गया? अध्ययन में कोशिकाओं के भीतर p16INK4a मार्कर और डीएनए के टेलोमेयर की लंबाई का आकलन किया गया। 5. खुशहाल जोड़ों को शोधकर्ताओं ने क्या मुख्य सलाह दी है? शोधकर्ताओं ने जोड़ों को शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने, संतुलित डाइट अपनाने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी है। 6. क्या केवल खुशहाल रिश्ता ही बायलॉजिकल उम्र बढ़ा सकता है? नहीं, खुशहाल रिश्ते के साथ-साथ स्वस्थ खान-पान और अच्छी लाइफस्टाइल होना भी जरूरी है। 7. खराब आदतों का जोड़ों की सेहत पर क्या असर पड़ता है? अनहेल्दी खान-पान और एक्सरसाइज न करने से क्रोनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। https://trendkia.com/health/khushahala-danpatya-jivana-ke-satha-buri-adaten-sharira-ko-kara-sakati-hain-samaya-se-pahale-burha-shodha-men-hua-bara-khulasa-50900 TrendKia — Har trend, sabse pehle.