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  "type": "article",
  "title": "किचन और घर की आम चीजों में छुपे हैं खतरनाक केमिकल्स, जानिए सेहतमंद विकल्प",
  "summary": "घरों में रोज काम आने वाले कटिंग बोर्ड, नॉन-स्टिक पैन और प्लास्टिक बोतलों से माइक्रोप्लास्टिक्स और नुकसानदेह केमिकल्स शरीर में पहुंच सकते हैं, जिनसे बचाव के लिए सुरक्षित विकल्प अपनाना जरूरी है।",
  "content": "घरों और रसोइयों में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले कई आम बर्तनों और सामानों को लेकर वैज्ञानिक अनुसंधानों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि आम घरों में पाए जाने वाले इन सामानों में फ्थैलेट्स और पीएफएएस जैसे हानिकारक तत्व शामिल हो सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि इन चीजों का इस्तेमाल करने से तुरंत ही कोई गंभीर हार्मोनल बीमारी हो जाए, लेकिन लंबे समय तक इनके सीधे संपर्क में रहने से स्वास्थ्य जोखिम लगातार बढ़ता जाता है। दैनिक जीवन की आदतों में थोड़ा बदलाव करके और इनके सुरक्षित विकल्प अपनाकर शरीर को इन विषैले तत्वों से बचाया जा सकता है।\n\nसब्जियां काटने वाला प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड\nबाजार में प्लास्टिक के कटिंग बोर्ड बेहद सस्ती कीमत पर आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए अधिकांश घरों में इनका उपयोग धड़ल्ले से होता है। हालांकि सेहत के लिहाज से यह आदत बिल्कुल सुरक्षित नहीं मानी जा सकती है। जब चाकू की धार से प्लास्टिक बोर्ड पर सब्जियां या फल काटे जाते हैं, तो सतह पर गहरे खरोंच और कट के निशान बन जाते हैं। इस घिसाव के कारण प्लास्टिक के अतिसूक्ष्म टुकड़े कटकर सीधे खाने में मिल जाते हैं। एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में साल 2023 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि प्लास्टिक बोर्ड पर सब्जियां काटने से भोजन में माइक्रोप्लास्टिक के बारीक कण मिल जाते हैं।\n\nयदि आपके घर में मौजूद प्लास्टिक बोर्ड पर गहरे कट या खरोंच के निशान बन चुके हैं, तो उसे तत्काल रसोई से हटा देना चाहिए। इसके सुरक्षित विकल्प के रूप में अच्छी गुणवत्ता वाली लकड़ी से बना बोर्ड इस्तेमाल किया जा सकता है। लकड़ी के बोर्ड को फफूंद और कीटाणुओं से सुरक्षित रखने के लिए उसे नियमित रूप से धोकर अच्छी तरह सुखाना आवश्यक होता है।\n\nसिंथेटिक बर्तन धोने वाले स्पंज और स्क्रबर\nरसोई के बर्तनों को साफ और चमकदार बनाने के लिए घरों में सिंथेटिक स्पंज और स्क्रबर का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। लगातार रगड़ खाने और घिसने के दौरान ये स्पंज प्लास्टिक के बेहद बारीक रेशे और कण छोड़ते हैं। साल 2026 में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में पाया गया कि बर्तन धोते वक्त इन स्पंजों से प्लास्टिक के कण निकलकर बहते पानी में मिल जाते हैं। यह स्थिति न केवल इंसानी शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है, बल्कि जलस्रोतों और समूचे पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।\n\nइस जोखिम से बचने के लिए प्राकृतिक नारियल के रेशों से बने कॉयर स्क्रबर या बिना प्लास्टिक वाले सेलुलोज स्पंज का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। ऐसे उत्पादों को खरीदते समय पैकेट पर लिखी सामग्री को ध्यानपूर्वक जांच लेना चाहिए, क्योंकि बाजार में प्राकृतिक दिखने वाले कई विकल्पों में भी अंदरूनी तौर पर सिंथेटिक फाइबर मिले हो सकते हैं।\n\nकमरे महकाने वाले एयर फ्रेशनर और खुशबूदार मोमबत्तियां\nकमरों की हवा को ताजगी देने वाले कई एयर फ्रेशनर और सेंटेड कैंडल में फ्थैलेट्स पाए जाते हैं। यह एक ऐसा केमिकल घटक है जो शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। हालांकि बाजार में मिलने वाले हर एयर फ्रेशनर या सुगंधित मोमबत्ती में यह हानिकारक केमिकल मौजूद हो, ऐसा जरूरी नहीं है।\n\nघरों को केमिकल के असर से मुक्त रखने का सबसे आसान उपाय यह है कि खिड़कियां खोलकर ताजी हवा को अंदर आने दिया जाए और कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखा जाए। सिंथेटिक और तेज गंध वाले केमिकल उत्पादों के स्थान पर शुद्ध एसेंशियल ऑयल का छिड़काव किया जा सकता है। यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि बिना खुशबू वाले कई उत्पाद भी पूरी तरह केमिकल मुक्त नहीं होते, इसलिए उनके निर्माण घटकों की जांच करना जरूरी है।\n\nप्लास्टिक कोटिंग वाले टी बैग\nगर्म चाय तैयार करने के लिए बाजार में मिलने वाले कुछ टी-बैग सीधे प्लास्टिक से बनाए जाते हैं या फिर उनके कागज पर प्लास्टिक की पतली परत चढ़ी होती है। एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में साल 2019 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, जब प्लास्टिक से बने एक टी-बैग को 95 डिग्री सेल्सियस के खौलते पानी में डुबोया जाता है, तो उससे एक कप में अरबों की तादाद में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के कण घुल जाते हैं।\n\nइस हानिकारक असर से बचने के लिए खुली चाय पत्ती को छलनी से छानकर बनाना सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके अलावा पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त शुद्ध पेपर टी-बैग का चयन भी किया जा सकता है। पेपर टी-बैग चुनते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके निर्माण में किसी भी तरह की प्लास्टिक कोटिंग न की गई हो।\n\nखराब कोटिंग वाले नॉन-स्टिक कुकवेयर\nकम तेल में झटपट खाना पकाने की सुविधा के चलते नॉन-स्टिक बर्तन हर आधुनिक रसोई का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन जब इन बर्तनों की ऊपरी टेफ्लॉन कोटिंग घिसने या उखड़ने लगती है, तो ये स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग में पीएफएएस मिला होता है, जो तेज आंच पर गर्म होने पर सीधे भोजन में रिसने लगता है।\n\nजैसे ही नॉन-स्टिक पैन की सतह पर खरोंच दिखे या परत उखड़ने लगे, उसे तुरंत बदल देना चाहिए। स्थायी और सुरक्षित खाना पकाने के लिए स्टेनलेस स्टील और शुद्ध कास्ट आयरन के पारंपरिक बर्तनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो लंबे समय तक टिकते हैं और भोजन को जहरीले केमिकल से सुरक्षित रखते हैं।\n\nप्लास्टिक की पानी की बोतलें\nसाल 2024 में पीएनएएस में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया कि पैकेज्ड बोतलबंद पानी के प्रति लीटर में औसतन लगभग 2.4 लाख माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण तैर रहे होते हैं। लगातार प्लास्टिक बोतलों से पानी पीने पर ये बारीक कण शरीर में जमा होकर बीमारियों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकते हैं।\n\nरोजाना पानी पीने के लिए सुरक्षित और टिकाऊ स्टेनलेस स्टील अथवा कांच की बोतलों का इस्तेमाल करना चाहिए। कांच या स्टील की बोतलों का उपयोग करते समय भी इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि उनकी नियमित और सही ढंग से सफाई की जाए ताकि उनमें किसी प्रकार के बैक्टीरिया न पनपें।\n\nइसका आप पर असर\nघर की इन छह बुनियादी चीजों को सुरक्षित विकल्पों से बदलकर आप अपने भोजन और पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स व नुकसानदेह केमिकल्स के सीधे प्रवेश को काफी हद तक कम कर सकते हैं।\n\n• दैनिक उपयोग में बदलाव: प्लास्टिक कटिंग बोर्ड और खराब नॉन-स्टिक बर्तनों को हटाकर लकड़ी, स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन का उपयोग शुरू करें। ऐसा करने से भोजन पकाते और काटते समय उसमें प्लास्टिक या पीएफएएस कणों का घुलना तुरंत बंद हो जाएगा।\n• पीने के पानी की सुरक्षा: प्लास्टिक की पैकेज्ड या दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतलों की जगह कांच या स्टील की बोतलों को प्राथमिकता दें। इससे शरीर में रोजाना जाने वाले लाखों नैनोप्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक कणों के खतरे से सीधे बचाव मिलेगा।\n• साफ-सफाई और खरीदारी: बर्तन धोने के लिए नारियल के छिलके वाले स्क्रबर और कमरे में ताजी हवा के प्राकृतिक वेंटिलेशन को अपनाएं। बाजार से कोई भी उत्पाद खरीदते समय उसके लेबल और सामग्री की जांच अवश्य करें ताकि छिपे हुए सिंथेटिक तत्वों से बचा जा सके।\n• चाय पीने की आदत: प्लास्टिक कोटिंग वाले टी-बैग के बजाय खुली चाय पत्ती या शुद्ध पेपर टी-बैग का इस्तेमाल करें। इससे गर्म पानी में घुलने वाले अरबों हानिकारक नैनोप्लास्टिक्स शरीर के भीतर जाने से बच जाएंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरसोई और घरों में प्लास्टिक और सिंथेटिक केमिकल से बनी चीजों का अत्यधिक उपयोग तापमान और घर्षण के संपर्क में आने पर माइक्रोप्लास्टिक और टॉक्सिक रसायन छोड़ने लगता है। शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि लगातार खरोंच लगने, खौलते पानी में उबलने और तेज आंच के कारण इन सामग्रियों की रासायनिक संरचना टूटने लगती है।\n\n• घर्षण और भौतिक खिंचाव: प्लास्टिक कटिंग बोर्ड पर चाकू चलने और बर्तनों पर स्पंज घिसने से उनकी सतह के बारीक रेशे टूट जाते हैं। यह भौतिक घर्षण प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों को सीधे खाने और अपशिष्ट जल में पहुंचा देता है।\n• उच्च तापमान का प्रभाव: 95 डिग्री सेल्सियस के गर्म पानी में प्लास्टिक टी-बैग डालने या नॉन-स्टिक पैन को तेज आंच पर चढ़ाने से कोटिंग पिघलने लगती है। गर्मी के कारण पीएफएएस और नैनोप्लास्टिक्स आसानी से तरल पदार्थ व खाने में घुल जाते हैं।\n• कृत्रिम रसायनों का फैलाव: एयर फ्रेशनर में खुशबू को लंबे समय तक हवा में रोके रखने के लिए फ्थैलेट्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह पानी की पैकेज्ड बोतलों के निर्माण और स्टोरेज के दौरान प्लास्टिक के सूक्ष्म अंश पानी में घुल जाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्लास्टिक कटिंग बोर्ड से क्या नुकसान हो सकता है?\nसब्जियां काटते समय चाकू के घर्षण से प्लास्टिक कटिंग बोर्ड पर खरोंचें पड़ती हैं, जिससे माइक्रोप्लास्टिक के बारीक कण भोजन में मिलकर शरीर में पहुंच सकते हैं।\n\n2. प्लास्टिक कटिंग बोर्ड का सुरक्षित विकल्प क्या है?\nगहरी खरोंचों वाले प्लास्टिक बोर्ड की जगह अच्छी गुणवत्ता का लकड़ी का बोर्ड इस्तेमाल करना चाहिए, जिसे सूखा और साफ रखना जरूरी है।\n\n3. गर्म पानी में प्लास्टिक टी-बैग डालने से क्या होता है?\n2019 के एक अध्ययन के अनुसार 95 डिग्री सेल्सियस पानी में प्लास्टिक टी-बैग डालने पर अरबों माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पानी में घुल जाते हैं।\n\n4. नॉन-स्टिक बर्तन कब बदल देने चाहिए?\nजब नॉन-स्टिक पैन की कोटिंग उखड़ जाए या उस पर खरोंच आ जाए तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए, क्योंकि इसकी कोटिंग में पीएफएएस केमिकल होता है।\n\n5. बोतलबंद पानी में कितने माइक्रोप्लास्टिक पाए गए हैं?\n2024 के एक अध्ययन के मुताबिक बोतलबंद पानी के एक लीटर में औसतन लगभग 2.4 लाख माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पाए गए हैं।\n\n6. बर्तन धोने वाले सिंथेटिक स्पंज का पर्यावरण पर क्या असर होता है?\nबर्तन मांजते समय घिसने से सिंथेटिक स्पंज से प्लास्टिक के सूक्ष्म कण निकलकर पानी में बह जाते हैं, जो नालियों के जरिए जलस्रोतों को प्रदूषित करते हैं।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-15",
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