क्रैश डाइट से 15 दिन में घटाया 20 किलो वजन, महिला शिकार हुई गंभीर मस्तिष्क विकार और संतुलन की समस्या की चीन में 15 दिनों तक केवल पानी पीकर 20 किलो वजन घटाने वाली महिला को गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और वर्निके एन्सेफैलोपैथी नामक मस्तिष्क विकार हो गया है। विशेषज्ञों ने अत्यधिक उपवास के जानलेवा खतरों के प्रति आगाह किया है। वजन कम करने की होड़ में आजकल लोग तेजी से परिणाम देने वाले तरीकों और क्रैश डाइट की तरफ भाग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहे कई तरह के फास्टिंग ट्रेंड्स बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के अपनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चीन की पारंपरिक 'बिगू' (Bigu) डाइट चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें लंबे समय तक भोजन का पूरी तरह त्याग करके केवल पानी के सहारे रहा जाता है। हाल ही में चीन की एक 31 वर्षीय महिला का मामला सामने आया है, जिसने इस तरीके से 15 दिनों तक केवल पानी पीकर लगभग 20 किलो वजन तो कम कर लिया, लेकिन इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह साबित हुए। अत्यधिक उपवास के कारण महिला की याददाश्त कमजोर हो गई और उसका शारीरिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे वर्निके एन्सेफैलोपैथी (Wernicke's encephalopathy) से पीड़ित पाया, जो शरीर में विटामिन B1 यानी थायमिन की अत्यधिक कमी के कारण होने वाला एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार है। फरीदाबाद स्थित सेक्टर 20 के यशार्थ अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव चौधरी के अनुसार, बिना डॉक्टरी देखरेख के इस तरह का जल उपवास शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। 15 दिनों में 20 किलो वजन घटने का वैज्ञानिक सच सामान्य परिस्थितियों में 15 दिनों के भीतर 20 किलो वजन कम होना किसी भी लिहाज से स्वस्थ या सामान्य शारीरिक प्रक्रिया नहीं है। जब शरीर को लंबे समय तक भोजन के माध्यम से ऊर्जा नहीं मिलती, तो वह सबसे पहले यकृत और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन के भंडार का उपयोग करता है। जब ग्लाइकोजन पूरी तरह समाप्त हो जाता है, तब शरीर ऊर्जा की पूर्ति के लिए वसा के साथ-साथ मांसपेशियों के लीन टिश्यूज को तेजी से तोड़ना शुरू कर देता है। वैज्ञानिक अध्ययनों और शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि 5 से 20 दिनों तक किए जाने वाले कड़े उपवास के दौरान जो वजन घटता है, उसमें केवल वसा यानी फैट कम नहीं होता। इसमें शरीर का पानी, ग्लाइकोजन, मांसपेशियां और लीन मास भारी मात्रा में नष्ट होते हैं। इसलिए तराजू पर वजन का तेजी से गिरना सेहत में सुधार का नहीं, बल्कि शरीर के अंदरूनी क्षय का संकेत होता है। पोषक तत्वों और थायमिन की कमी से मस्तिष्क पर खतरा यद्यपि पानी जीवन के लिए अनिवार्य है, लेकिन यह शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति अकेले नहीं कर सकता। भोजन के बिना लंबे समय तक रहने से शरीर में प्रोटीन, आवश्यक विटामिन और खनिजों की अत्यधिक कमी हो जाती है। इनमें से विटामिन B1 अथवा थायमिन की कमी मस्तिष्क के कामकाज को सीधे प्रभावित करती है। वर्निके एन्सेफैलोपैथी एक ऐसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक भ्रम, एकाग्रता में कमी, याददाश्त का धुंधला होना, शरीर का संतुलन बिगड़ना और आंखों की असामान्य गतियों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चिकित्सा इतिहास में अत्यधिक फास्टिंग के बाद मरीजों में इस प्रकार के न्यूरोलॉजिकल नुकसान के अनेक मामले दर्ज किए गए हैं। पेंगुइन जैसी चाल और न्यूरोलॉजिकल संतुलन की खराबी चीन के इस मामले में चिकित्सकों ने पाया कि पीड़ित महिला की चाल किसी पेंगुइन की तरह डगमगाती हुई हो गई थी। यह कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि थायमिन की कमी और मस्तिष्क विकार ने शरीर के तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल सिस्टम) और मोटर कॉर्डिनेशन पर कितना गंभीर प्रभाव डाला है। जब मस्तिष्क का संतुलन बनाए रखने वाला हिस्सा सही तरीके से संदेश नहीं भेज पाता, तो व्यक्ति सामान्य रूप से सीधे कदम नहीं बढ़ा पाता और उसके चलने की शैली पूरी तरह बिगड़ जाती है। इस प्रकार के संकेतों को शुरुआती स्तर पर पहचानना बेहद जरूरी होता है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का दिल और ब्लड प्रेशर पर असर लंबे समय तक अन्न का सेवन न करने से शरीर के भीतर पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन पूरी तरह गड़बड़ा जाता है। इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे हृदय की धड़कन, मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका संकेतों के संचालन के लिए आवश्यक होते हैं। जब इनका स्तर तेजी से गिरता है, तो व्यक्ति को अत्यधिक शारीरिक कमजोरी, चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन और हृदय की धड़कन में अनियमियतता (अतालता) महसूस हो सकती है। गंभीर मामलों में यह कार्डियक अरेस्ट या दिल की विफलता का कारण भी बन सकता है। इसके अतिरिक्त, निरंतर वाटर फास्टिंग से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति बेहोश होकर गिर सकता है। फास्टिंग के बाद री-फीडिंग सिंड्रोम का गंभीर जोखिम चिकित्सकों के अनुसार, लंबे उपवास के दौरान जितना खतरा भूखे रहने से होता है, उससे कहीं अधिक खतरा उपवास समाप्त करते समय अचानक भारी भोजन करने से होता है। इसे चिकित्सा विज्ञान में री-फीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) कहा जाता है। जब कई दिनों तक भूखे रहने के बाद अचानक कार्बोहाइड्रेट या भारी भोजन खाया जाता है, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इंसुलिन का यह अचानक उछाल रक्त में मौजूद फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम को तेजी से कोशिकाओं के अंदर खींच लेता है। इसके परिणामस्वरूप रक्तप्रवाह में इन इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर अचानक शून्य के करीब पहुंच जाता है, जो हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क के संचालन को ठप्प कर सकता है। इसलिए लंबे उपवास को हमेशा डॉक्टरी परामर्श और विशेष आहार तालिका के तहत ही धीरे-धीरे खत्म करना चाहिए। सुरक्षित और स्थायी वजन घटाने का सही तरीका स्वस्थ तरीके से वजन कम करने का लक्ष्य तेजी से वजन घटाना कभी नहीं होना चाहिए। वास्तविक और टिकाऊ वजन घटाने का अर्थ है शरीर पर जमा अतिरिक्त वसा को कम करना, मांसपेशियों को सुरक्षित रखना और शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करना। इसके लिए संतुलित कैलोरी इनटेक, पर्याप्त प्रोटीन, ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा, प्रचुर मात्रा में पानी और नियमित शारीरिक व्यायाम का संयोजन सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। यदि किसी चिकित्सीय कारण से तेजी से वजन घटाने की आवश्यकता हो भी, तो इसे हमेशा किसी योग्य चिकित्सक या पंजीकृत डाइटिशियन की प्रत्यक्ष देखरेख में ही किया जाना चाहिए। केवल पानी के भरोसे 15 दिनों तक रहकर वजन घटाने का प्रयास जानलेवा साबित हो सकता है। इसका आप पर असर भारत में पाठकों के लिए: सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे बिना डॉक्टरी सलाह वाले वाटर फास्टिंग या अत्यधिक क्रैश डाइट को अपनाने से बचें, क्योंकि यह याददाश्त और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। दैनिक जीवन में: सुरक्षित और सही वजन घटाने के लिए हमेशा संतुलित आहार, प्रोटीन और व्यायाम का सहारा लें तथा किसी भी कड़े उपवास से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श करें। सवाल-जवाब 1. चीन की महिला को 15 दिन पानी पीकर रहने से क्या समस्या हुई? महिला ने 15 दिनों में 20 किलो वजन तो कम कर लिया, लेकिन विटामिन B1 की कमी से उसे वर्निके एन्सेफैलोपैथी नामक मस्तिष्क विकार, याददाश्त में कमी और चलने में पेंगुइन जैसी लंगड़ाहट की गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या हो गई। 2. वर्निके एन्सेफैलोपैथी बीमारी क्या होती है? यह शरीर में विटामिन B1 (थायमिन) की गंभीर कमी से होने वाला मस्तिष्क विकार है, जिसमें व्यक्ति को भ्रम, याददाश्त में परेशानी, आंखों की असामान्य गति और चलने में संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण होते हैं। 3. री-फीडिंग सिंड्रोम क्या है और यह क्यों खतरनाक है? लंबे उपवास के बाद अचानक ज्यादा खाना खाने पर इंसुलिन तेजी से बढ़ता है, जिससे शरीर के जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कोशिकाओं में चले जाते हैं। इससे दिल, दिमाग और फेफड़ों पर जानलेवा असर पड़ सकता है। 4. वजन घटाने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है? सुरक्षित वजन घटाने के लिए संतुलित कैलोरी, प्रोटीन, सब्जियां, फल, भरपूर पानी और नियमित शारीरिक व्यायाम जरूरी है। तेजी से वजन घटाना हो तो हमेशा डॉक्टर या डाइटिशियन की निगरानी में ही करें। https://trendkia.com/health/kraisha-daita-se-15-dina-men-ghataya-20-kg-vajana-mahila-shikara-hui-gnbhira-mastishka-vikara-aura-sntulana-ki-samasya-ki-22351 TrendKia — Har trend, sabse pehle.