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  "type": "article",
  "title": "क्रॉनिक बीमारियों में हर फल-सब्जी नहीं होती सुरक्षित, जानिए सेहत के अनुसार क्या खाएं और क्या छोड़ें",
  "summary": "किडनी, लिवर, थायराइड, यूरिक एसिड, डायबिटीज और हृदय रोगों में फल-सब्जियों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। अमृता हॉस्पिटल के विशेषज्ञ ने बताया कि किस बीमारी में क्या खाना फायदेमंद है और किन चीजों से परहेज जरूरी है।",
  "content": "स्वस्थ जीवनशैली के लिए दैनिक खानपान में ताजे फल और हरी सब्जियों को बेहद जरूरी माना जाता है। आम धारणा यही होती है कि फल और सब्जियां प्राकृतिक होने के कारण हमेशा स्वास्थ्यवर्धक ही साबित होती हैं। हालांकि, जब कोई व्यक्ति किडनी, लिवर, थायराइड, बढ़े हुए यूरिक एसिड, डायबिटीज या हृदय से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा हो, तब यह सामान्य नियम लागू नहीं होता। ऐसी चिकित्सकीय स्थितियों में अनजाने में खाई गई कुछ सब्जियां या फल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। बीमारी की प्रकृति और आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली के अनुसार विशिष्ट पोषक तत्वों को सीमित करने अथवा पूरी तरह छोड़ने की जरूरत पड़ती है। अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. संजय रैना ने विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में फल और सब्जियों के चयन को लेकर महत्वपूर्ण चिकित्सीय दिशा-निर्देश साझा किए हैं।\n\nगुर्दे की बीमारी में पोटैशियम पर नियंत्रण रखना क्यों जरूरी है\nजब किसी व्यक्ति के गुर्दे या किडनी की कार्यप्रणाली कमजोर होने लगती है, तो वे रक्त से अतिरिक्त खनिजों को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते। ऐसी स्थिति में शरीर के भीतर पोटैशियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, जो हृदय गति और मांसपेशियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. संजय रैना के अनुसार, जिन फलों और सब्जियों में पोटैशियम की अधिक मात्रा मौजूद होती है, उनका सेवन मरीजों को तुरंत कम या सीमित कर देना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, केला और पालक पोटैशियम से भरपूर होते हैं, इसलिए किडनी की समस्या में इनसे परहेज करना आवश्यक होता है। इसके विपरीत, कम पोटैशियम वाली सब्जियों का चयन किया जा सकता है, जैसे कि फूलगोभी। वहीं यदि गुर्दे के मरीज फलों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो सेब एक सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इसमें पोटैशियम की मात्रा काफी कम पाई जाती है।\n\nलिवर के रोग और सिरोसिस की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियां\nलिवर से संबंधित विकारों में अत्यधिक मिठास या शर्करा का सेवन बेहद नुकसानदेह साबित होता है। जब लिवर पहले से ही अस्वस्थ हो, तो अतिरिक्त शुगर उसके मेटाबॉलिज्म पर भारी दबाव डालती है। ऐसे में प्राकृतिक मिठास वाले फलों से भी दूरी बनाना जरूरी हो जाता है। पके हुए आम में फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, और इसका सेवन लिवर की खराबी को और अधिक गंभीर बना सकता है। इसलिए उच्च फ्रुक्टोज और अधिक शुगर वाले फलों तथा सब्जियों का सेवन कम से कम किया जाना चाहिए।\n\nजब लिवर की बीमारी बढ़कर सिरोसिस के एडवांस चरण में पहुंच जाती है, तो खानपान का प्रबंधन और भी अधिक संवेदनशील हो जाता है। सिरोसिस के मरीजों को अपनी डाइट में कोई भी छोटा या बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर और डाइटिशियन की राय अनिवार्य रूप से लेनी चाहिए। इसके साथ ही, इस स्थिति में कच्ची अंकुरित दालों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कच्ची अंकुरित दालों में रोगाणुओं के पनपने का खतरा रहता है, जिससे शरीर में गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन फैल सकता है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है।\n\nथायराइड की समस्या में कच्ची क्रूसिफेरस सब्जियों से क्यों बचें\nथायराइड ग्रंथि के असंतुलन से पीड़ित लोगों को भी अपनी रसोई में सब्जियों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना पड़ता है। डॉ. संजय रैना स्पष्ट करते हैं कि कुछ सब्जियों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की आयोडीन को सोखने की प्राकृतिक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। कच्ची फूलगोभी और कच्ची पत्ता गोभी इस श्रेणी में मुख्य रूप से शामिल हैं। यदि इन्हें कच्चा खाया जाए, तो थायराइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज में बाधा उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि इन्हें आहार से पूरी तरह बाहर निकाल दिया जाए। यदि फूलगोभी और पत्ता गोभी को आंच पर अच्छी तरह से पकाकर खाया जाए, तो इनसे कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। मुख्य नियम यही है कि इन्हें सलाद के रूप में कच्चा खाने से पूरी तरह बचना चाहिए।\n\nयूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में विटामिन-C का महत्व\nशरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन के कारण जब यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, तो इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं, जिससे असहनीय दर्द, सूजन और गठिया की समस्या पैदा हो जाती है। यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया में विटामिन-C एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. संजय रैना के मुताबिक, ऐसे मरीजों को खट्टे फलों और साइट्रस खाद्य पदार्थों को अपनी दैनिक डाइट में शामिल करना चाहिए। संतरा, नींबू और खट्टी बेरीज शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन-C प्रदान करते हैं। यह पोषक तत्व रक्त में यूरिक एसिड के स्तर को कम करने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है।\n\nडायबिटीज में फ्रूट जूस और उच्च फ्रुक्टोज वाले फलों का परहेज\nडायबिटीज के मरीजों के शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। इस कारण ऐसे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचना जरूरी होता है जो रक्त में शुगर की मात्रा को अचानक बढ़ा दें। बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद फ्रूट जूस और अत्यधिक फ्रुक्टोज वाले फल इस दृष्टि से विशेष रूप से नुकसानदायक होते हैं। पका हुआ आम, केला, अंगूर और चीकू जैसे फलों में फ्रुक्टोज की मात्रा अत्यधिक होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इनका सेवन या तो पूरी तरह टालना चाहिए या बेहद सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसके बजाय, संतरा, सेब, पपीता और अमरूद जैसे फलों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, जो शुगर को तेजी से बढ़ाए बिना जरूरी पोषण प्रदान करते हैं।\n\nहृदय स्वास्थ्य के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स का महत्व और फैट से बचाव\nहृदय रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए डाइट में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करना बहुत लाभकारी होता है। डॉ. संजय रैना के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए जामुन, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन किया जाना चाहिए।\n\nदूसरी ओर, हृदय रोगियों को उच्च शुगर और अत्यधिक फैट वाली चीजों से पूरी तरह सावधान रहना चाहिए। आलू और शकरकंद जैसी हाई शुगर कंटेंट वाली सब्जियां सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए, क्योंकि इनसे शुगर का स्तर बढ़ सकता है जो अंततः दिल की तकलीफों को बढ़ा देता है। इसके अतिरिक्त, आहार में वसा या फैट्स की मात्रा को घटाना या नियंत्रित करना अनिवार्य है, क्योंकि फैट रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है, जो धमनियों में रुकावट पैदा कर हृदय की समस्याओं को अधिक गंभीर बना सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nविभिन्न क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बिना सोचे-समझे हर फल या सब्जी खाने से बचना चाहिए, क्योंकि गलत खानपान अंगों को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा सकता है।\n\n• किडनी मरीजों के लिए: उच्च पोटैशियम वाले फल और सब्जियां जैसे केला और पालक सीमित करें, जबकि सेब और फूलगोभी का सेवन करें। इससे रक्त में पोटैशियम का स्तर नियंत्रित रहेगा और हृदय पर पड़ने वाले दबाव से बचाव होगा।\n• लिवर और सिरोसिस पीड़ितों के लिए: पके आम जैसे अधिक फ्रुक्टोज वाले फलों और कच्ची अंकुरित दालों से पूरी तरह परहेज रखें। यह सावधानी लिवर की क्षति को बढ़ने से रोकेगी और गंभीर संक्रमण से सुरक्षित रखेगी।\n• थायराइड असंतुलन में: फूलगोभी और पत्ता गोभी को कभी भी कच्चा या सलाद के रूप में न खाएं, बल्कि अच्छी तरह पकाकर ही इस्तेमाल करें। ऐसा करने से शरीर की आयोडीन सोखने की क्षमता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।\n• यूरिक एसिड की समस्या में: संतरा, नींबू और खट्टी बेरीज जैसे विटामिन-C युक्त खाद्य पदार्थों को दैनिक खानपान में जोड़ें। इससे जोड़ों में जमा यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद मिलेगी और दर्द में राहत रहेगी।\n• डायबिटीज और हार्ट रोगियों के लिए: बाजार के पैकेज्ड फ्रूट जूस, पके आम, चीकू, आलू, शकरकंद और ज्यादा फैट वाली चीजों से सख्त दूरी बनाएं। इसके स्थान पर पपीता, अमरूद, जामुन और संतरा खाएं ताकि शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nक्रॉनिक बीमारियों में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की मेटाबॉलिक और फिल्ट्रेशन क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिसके कारण कुछ सामान्य पोषक तत्व भी जहर की तरह काम करने लगते हैं। जब अंग किसी विशेष यौगिक को संसाधित या बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं, तो उनका संचय गंभीर संकट पैदा करता है।\n\n• अंगों की घटी हुई कार्यक्षमता: किडनी के कमजोर होने पर पोटैशियम बाहर नहीं निकल पाता, जबकि लिवर के अस्वस्थ होने पर वह अतिरिक्त फ्रुक्टोज और फैट को पचाने में असमर्थ हो जाता है। यही जैविक अक्षमता आहार में बदलाव की प्राथमिक वजह बनती है।\n• पोषक तत्वों का विपरीत प्रभाव: क्रूसिफेरस सब्जियों में मौजूद घटक कच्चे रूप में आयोडीन अवशोषण को अवरुद्ध करते हैं, और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियां रक्त शर्करा को अचानक बढ़ा देती हैं। पकाने या परहेज करने से ये रासायनिक अड़चनें दूर हो जाती हैं।\n• चिकित्सीय निगरानी की अनिवार्यता: बीमारी जब सिरोसिस या एडवांस स्टेज पर पहुंचती है, तो रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने से कच्चे अंकुरित अनाज भी जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञों की सलाह के बिना खानपान बदलना खतरनाक माना जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किडनी की बीमारी में कौन से फल और सब्जियां खाने से बचना चाहिए?\nकिडनी की समस्या में उच्च पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों जैसे केला और पालक से बचना चाहिए, क्योंकि कमजोर किडनी अतिरिक्त पोटैशियम बाहर नहीं निकाल पाती।\n\n2. किडनी के मरीजों के लिए कौन से फल और सब्जियां सुरक्षित हैं?\nकम पोटैशियम वाली सब्जियां जैसे फूलगोभी और फल के रूप में सेब खाना किडनी के मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है।\n\n3. लिवर के मरीजों और सिरोसिस में क्या परहेज रखना चाहिए?\nलिवर के मरीजों को अधिक फ्रुक्टोज वाले पके आम और ज्यादा शुगर वाली चीजों से बचना चाहिए। सिरोसिस में संक्रमण के खतरे के कारण कच्ची अंकुरित दालें नहीं खानी चाहिए।\n\n4. थायराइड की समस्या में फूलगोभी और पत्ता गोभी कैसे खानी चाहिए?\nथायराइड में इन्हें कभी भी कच्चा नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये आयोडीन सोखने की क्षमता घटाती हैं, लेकिन अच्छी तरह पकाकर खाने से कोई नुकसान नहीं होता।\n\n5. यूरिक एसिड को कम करने के लिए कौन से फल मददगार हैं?\nविटामिन-C से भरपूर खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू और खट्टी बेरीज यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं।\n\n6. डायबिटीज के मरीजों को कौन से फल नहीं खाने चाहिए और क्या खा सकते हैं?\nडायबिटीज में पके आम, केला, अंगूर, चीकू और पैकेज्ड फ्रूट जूस से बचना चाहिए, जबकि संतरा, सेब, पपीता और अमरूद खाए जा सकते हैं।\n\n7. हार्ट के मरीजों को अपनी डाइट में क्या शामिल और क्या कम करना चाहिए?\nहार्ट मरीजों को जामुन, संतरा और नींबू जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स लेने चाहिए, जबकि आलू, शकरकंद और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले फैट्स से परहेज करना चाहिए।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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