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  "type": "article",
  "title": "लंबी उम्र के सामाजिक ताने-बाने को नया आकार देने वाली लॉरा कारस्टेंसन स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी से हटेंगी पीछे",
  "summary": "लगभग दो दशकों तक स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी का नेतृत्व करने के बाद निदेशक लॉरा कारस्टेंसन अपना पद छोड़ रही हैं। उन्होंने लंबी उम्र को केवल जीवन की अवधि नहीं, बल्कि समाज और जीवन की गुणवत्ता में बदलाव का अवसर बताया है।",
  "content": "स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी की संस्थापक निदेशक और स्टेनफोर्ड में मनोविज्ञान तथा फेयरलेग एस. डिकिंसन जूनियर प्रोफेसर इन पब्लिक पॉलिसी लॉरा कारस्टेंसन लगभग दो दशकों के कार्यकाल के बाद इस गर्मी में अपना नेतृत्व पद छोड़ रही हैं। 2007 में इस संस्थान की स्थापना के बाद से कारस्टेंसन ने जीवन प्रत्याशा को लेकर वैश्विक नजरिए में बुनियादी बदलाव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि लंबी उम्र का मतलब केवल जैविक जीवनकाल बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा समाज तैयार करना है जो हर उम्र में लोगों को स्वस्थ, उद्देश्यपूर्ण और आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम बना सके।\n\n \n\nदीर्घायु अनुसंधान से जुड़ी शुरुआती भ्रांतियों को दूर करना\n\n2007 में जब स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी की शुरुआत हुई थी, तब इस विषय को लेकर आम जनता के बीच कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई थीं। लॉरा कारस्टेंसन ने यह स्पष्ट करने में काफी समय दिया कि इस केंद्र का उद्देश्य केवल जैविक उम्र बढ़ाना नहीं है। शुरुआत में कई लोगों को लगता था कि यह संस्थान भी मेथुसेलाह फाउंडेशन जैसी संस्थाओं की तरह काम करेगा जो उम्र बढ़ाने पर ध्यान देती हैं। हालांकि कारस्टेंसन ने स्पष्ट किया कि 20वीं सदी के दौरान ही मानव जीवन प्रत्याशा लगभग दोगुनी हो चुकी थी। इसलिए केंद्र का मुख्य उद्देश्य जीवन को और लंबा करना नहीं, बल्कि इस नई जनसांख्यिकीय स्थिति के अनुसार आधुनिक समाज को ढालना था।\n\n एक अन्य भ्रांति यह थी कि दीर्घायु शब्द केवल बुढ़ापे का ही एक पर्याय है या यह केंद्र केवल बुजुर्गों पर केंद्रित है। कारस्टेंसन ने बार-बार जोर देकर कहा कि दीर्घायु का सीधा संबंध जीवन की अवधि से है, न कि केवल बुढ़ापे से। यद्यपि केंद्र बुजुर्ग आबादी की जरूरतों पर गहरा ध्यान देता है, लेकिन कारस्टेंसन का मानना है कि लंबी उम्र का प्रभाव जीवन के हर चरण पर पड़ता है। वृद्धावस्था में सामने आने वाली शारीरिक, आर्थिक और मानसिक समस्याओं की जड़ें जीवन के शुरुआती दौर में ही छिपी होती हैं। इसी कारण से केंद्र का मुख्य लक्ष्य लंबी जीवन प्रत्याशा का उपयोग सभी उम्र के लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में करना रहा है।\n\n इस व्यापक दृष्टिकोण को लागू करने के लिए 2019 में कारस्टेंसन के नेतृत्व में न्यू मैप ऑफ लाइफ पहल शुरू की गई थी। इस योजना का मकसद दुनिया भर में तेजी से बढ़ती जीवन प्रत्याशा के जवाब में पारंपरिक जीवन चक्र को नए सिरे से डिजाइन करना था। पिछले कुछ वर्षों में इस संस्थान ने लगभग 40 पोस्टडॉकटोरल फेलो तैयार किए हैं, जिन्हें विभिन्न अकादमिक क्षेत्रों के शिक्षकों ने मार्गदर्शन दिया है। इन शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया है कि लंबी उम्र कैसे अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और सामाजिक संरचनाओं को बदल रही है। लगभग 20 वर्षों के नेतृत्व के बाद कारस्टेंसन अब अपने इस पद को छोड़कर स्टेनफोर्ड में अध्यापन के साथ-साथ एक नए शोध प्रोजेक्ट पर काम करेंगी।\n\n \n\nजैविक स्थिरता और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में बदलाव की गुंजाइश\n\nपिछले दो दशकों में दीर्घायु विज्ञान के विकास पर प्रकाश डालते हुए कारस्टेंसन बताती हैं कि इस क्षेत्र में जन जागरूकता काफी बढ़ी है। पिछले कई हजार वर्षों में मानव की आनुवंशिक और शारीरिक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में कोई खास बदलाव नहीं आया है। आज के इंसान जैविक रूप से अपने पूर्वजों के समान ही हैं। जो बड़ा बदलाव आया है, वह है जीवन की अवधि में वृद्धि, जो सामाजिक, पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य सुधारों के कारण संभव हुई है। यह अंतर दर्शाता है कि भले ही मानव जेनेटिक्स स्थिर रहे हों, लेकिन हमारा पर्यावरण काफी परिवर्तनशील है।\n\n उम्र बढ़ने के अनुभव में सुधार की यही संभावना कारस्टेंसन की आशावादिता का मुख्य आधार है। चूंकि स्वच्छता, चिकित्सा, श्रम सुरक्षा और पोषण में ऐतिहासिक सुधारों ने मानव जीवनकाल को बढ़ाया है, इसलिए भविष्य में किए जाने वाले प्रयास इस बात को और बेहतर बना सकते हैं कि लोग कैसे बूढ़े होते हैं। कारस्टेंसन को पूरा विश्वास है कि आधुनिक समाज ऐसे सामाजिक और भौतिक परिवेश का निर्माण कर सकता है जहां अधिकांश लोग 100 वर्षों तक स्वस्थ और समृद्ध जीवन जी सकें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह स्वीकार करना होगा कि इंसान का भविष्य केवल जैविक भाग्य पर नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे पर निर्भर करता है।\n\n \n\nसिंगापुर के क्वीनस्टाउन हेल्थ डिस्ट्रिक्ट से मिलते व्यावहारिक सबक\n\nसैद्धांतिक ढांचे को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का एक अनूठा प्रयोग इस समय सिंगापुर में चल रहा है, जहां कारस्टेंसन हेल्थ डिस्ट्रिक्ट ऑफ सिंगापुर की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद में शामिल हैं। वहां की सरकार ने वैज्ञानिकों और योजनाकारों की एक टीम को क्वीनस्टाउन हेल्थ डिस्ट्रिक्ट डिजाइन करने की छूट दी है। यह एक ऐसा आवासीय समुदाय है जिसे 'न्यू मैप ऑफ लाइफ' के सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना में लंबी अवधि के स्वास्थ्य, पीढ़ियों के बीच सामाजिक जुड़ाव, वित्तीय सुरक्षा और नियमित शारीरिक व्यायाम को सीधे तौर पर पड़ोस के नक्शे में शामिल किया गया है।\n\n क्वीनस्टाउन हेल्थ डिस्ट्रिक्ट यह साबित करने के लिए एक मजबूत मॉडल पेश करता है कि कैसे सामाजिक और भौतिक डिजाइन लंबी उम्र में जीवन की गुणवत्ता सुधार सकते हैं। उदाहरण के लिए, वहां ऐसे पार्क और खेल के मैदान बनाए गए हैं जहां बच्चों के लिए झूले और बुजुर्गों के लिए बैलेंस बीम एक साथ लगाए गए हैं। यह साझा स्थान अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों को आपस में मिलने-जुलने का अवसर प्रदान करता है। अंतरराष्ट्रीय सलाहकार सिंगापुर की इस त्वरित कार्यप्रणाली से काफी प्रभावित होते हैं। सिंगापुर का छोटा आकार और केंद्रित शासन तंत्र उसे त्वरित नीतियां लागू करने की सुविधा देता है। लगभग एक दशक पहले जब सरकार ने देखा कि नागरिक सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त बचत नहीं कर रहे हैं, तो उसने तुरंत नियम बदलकर सभी के लिए सेवानिवृत्ति खातों में योगदान बढ़ाना अनिवार्य कर दिया था।\n\n \n\nअमेरिका की दीर्घायु संबंधी नीतियों का मूल्यांकन\n\nजब अमेरिका द्वारा दीर्घायु के सिद्धांतों को अपनाने की बात आती है, तो कारस्टेंसन देश के प्रयासों को C-ग्रेड देती हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह अकादमिक ग्रेड इनफ्लेशन से अच्छी तरह वाकिफ हैं। अमेरिका में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे और दीर्घायु सुधार के लिए बहुत कम कदम उठाए हैं। सिंगापुर के विपरीत, जहां सरकार तेजी से नीतियां लागू कर सकती है या शहरी इलाकों को नए सिरे से डिजाइन कर सकती है, अमेरिका का विकेंद्रीकृत ढांचा त्वरित राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू करने में बाधा बनता है।\n\n हालांकि, सरकारी ढिलाई के बावजूद कारस्टेंसन का कहना है कि सार्वजनिक निवेश की कमी ने निजी क्षेत्र में बड़े नवाचारों को जन्म दिया है। अमेरिका में कई नए व्यावसायिक उद्योग सामने आए हैं जो लंबी उम्र में सहयोग देने के लिए नए उत्पाद, वित्तीय साधन और स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। कारस्टेंसन निजी क्षेत्र की इस ऊर्जा को वैश्विक समाधानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। वैश्विक स्तर पर वह मानती हैं कि विभिन्न देशों से आने वाले अलग-अलग दृष्टिकोणों का अपना महत्व है, जहां सिंगापुर जैसी सार्वजनिक नीति की गतिशीलता और अमेरिका जैसी निजी क्षेत्र की बाजार संचालित तकनीक एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं।\n\n \n\nव्यावसायिक विस्तार, बाजार के जोखिम और परोपकारी निवेश की कमी\n\nजैसे-जैसे दीर्घायु का मुद्दा आम जनता के बीच लोकप्रिय हुआ है, इसमें अरबों डॉलर का व्यावसायिक निवेश आया है। हालांकि कारस्टेंसन इस बात पर चिंता व्यक्त करती हैं कि यह पैसा कहां खर्च हो रहा है। अधिकांश निजी पूंजी केवल इस बात पर लगाई जा रही है कि व्यक्तिगत रूप से लोगों की उम्र कैसे बढ़ाई जाए। इसके विपरीत, इस बात के लिए परोपकारी निवेश की भारी कमी है कि जीवन लंबा होने पर लोग बेहतर जीवन कैसे जिएं। उनका मानना है कि समाज इस बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव के बीच बिना किसी ठोस योजना के आगे बढ़ रहा है और सामाजिक जीवन संरचनाओं को बदलने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं कर रहा है।\n\n इसके अलावा दीर्घायु के इस व्यावसायिक उछाल ने बाजार में कई अप्रमाणित दावों और उत्पादों को जन्म दिया है। विज्ञापनों के जरिए ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं जो उम्र को रोकने या पलटने का झूठा दावा करते हैं। कारस्टेंसन चेतावनी देती हैं कि ऐसे विक्रेताओं की मौजूदगी के कारण आम उपभोक्ताओं के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा दावा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है और कौन सा फर्जी है। बिना ठोस जन जागरूकता और स्पष्ट मानकों के, यह भ्रम दीर्घायु अनुसंधान के वास्तविक वैज्ञानिक वैज्ञानिक योगदान को नुकसान पहुंचा सकता है।\n\n \n\nव्यक्तिगत बदलाव की योजना और शैक्षणिक अभियानों का विस्तार\n\nयह रेखांकित करते हुए कि जीवन में बदलाव लंबी उम्र का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं, कारस्टेंसन अपनी आगामी सबैटिकल की तैयारी कर रही हैं। अपने नए शोध और अध्यापन में पूरी तरह जुटने से पहले वह अपने पेशेवर व्यस्तताओं से एक ब्रेक लेना चाहती हैं। इस दौरान वह अपने बगीचे की देखभाल करने, घर पर समय बिताने, धूप में बैठने, पैदल टहलने और पाइलेट्स सीखने पर ध्यान देंगी। उनका लक्ष्य एक स्वस्थ व्यक्तिगत जीवनशैली स्थापित करना है जिसके इर्द-गिर्द वह अपने भविष्य के कामकाज को व्यवस्थित कर सकेंगी।\n\n अपनी सबैटिकल के दौरान कारस्टेंसन 'द फंडामेंटल्स ऑफ लॉन्गेविटी' नाम से एक ऑनलाइन कोर्स भी तैयार करेंगी। यह पाठ्यक्रम स्टेनफोर्ड परिसर से दूर दुनिया भर के लोगों के लिए उपलब्ध होगा। इसमें मानव जीवन विस्तार के इतिहास और एक स्वस्थ व बेहतर जीवन बनाने की संभावनाओं को समझाया जाएगा। कारस्टेंसन का कहना है कि यदि समाज ने काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति के तौर-तरीकों में बदलाव नहीं किया, तो भविष्य में एक बड़ा जनसांख्यिकीय संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि वर्तमान पीढ़ी के पास इतिहास में पहली बार जीवन सुधारने का एक अभूतपूर्व अवसर है और इसे तुरंत लागू करना शुरू किया जाना चाहिए। इच्छुक पाठक स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी की वेबसाइट पर जाकर अनुसंधान पहलों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nदीर्घायु अनुसंधान में प्रगति से आम नागरिकों को लंबी उम्र के साथ बेहतर स्वास्थ्य, वित्तीय स्थिरता और सक्रिय जीवन बनाए रखने के व्यावहारिक रास्ते मिलते हैं।\n\n• वित्तीय नियोजन: औसत जीवनकाल बढ़ने के कारण पारंपरिक सेवानिवृत्ति मॉडल अब पर्याप्त नहीं हैं। लोगों को कई दशकों के लिए बचत योजनाएं बनाने और लंबी अवधि तक काम करने की तैयारी करनी होगी।\n\n• स्वास्थ्य सुरक्षा: वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि बुढ़ापे की सेहत युवाओं में अपनाई गई जीवनशैली पर निर्भर करती है। दैनिक व्यायाम और नियमित जांच की आदतें आने वाले दशकों के लिए शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाती हैं।\n\n• सामुदायिक जीवन: आधुनिक शहरी नियोजन में सभी उम्र के लोगों के लिए साझा स्थान बनाए जा रहे हैं। नागरिक अपने क्षेत्रों में सुलभ पार्कों, टहलने के रास्तों और बहु-पीढ़ी सामुदायिक केंद्रों की मांग कर सकते हैं।\n\n• उपभोक्ता जागरूकता: दीर्घायु बाजार के विस्तार से अप्रमाणित एंटी-एजिंग उत्पादों की भरमार हो गई है। किसी भी महंगे सप्लीमेंट या इलाज को अपनाने से पहले लोगों को वैज्ञानिक सलाह जरूर लेनी चाहिए।\n\n• सतत शिक्षा: लंबे कामकाजी जीवन में सफल रहने के लिए नए कौशल सीखना अनिवार्य हो गया है। ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के जरिए नई जानकारियां सीखकर लोग बदलती अर्थव्यवस्था के अनुकूल बने रह सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदीर्घायु अनुसंधान की आवश्यकता इसलिए पैदा हुई क्योंकि 20वीं सदी के दौरान वैश्विक जीवन प्रत्याशा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। छोटे जीवनकाल के लिए बनाए गए सामाजिक ढांचे, स्वास्थ्य प्रणालियां और सेवानिवृत्ति नियम आधुनिक समाज की जरूरतों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे।\n\n• जीवन प्रत्याशा में ऐतिहासिक वृद्धि: जनस्वास्थ्य में सुधार, स्वच्छता, बेहतर पोषण और चिकित्सा तकनीकों से पिछले सौ वर्षों में इंसानी जीवनकाल में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई।\n\n• संस्थागत प्रणालियों पर दबाव: पेंशन योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार नीतियां कम उम्र के आधार पर तैयार की गई थीं, जिससे आज वित्तीय और सामाजिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं।\n\n• जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान: शुरुआती दौर में केवल उम्र बढ़ाने पर ध्यान दिया गया, स्वास्थ्य पर नहीं। वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि बीमारी और आर्थिक तंगी के साथ लंबा जीवन बिताना समाज पर बोझ बढ़ाता है।\n\n• पर्यावरणीय सुधारों की भूमिका: वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित किया कि इंसानी जेनेटिक्स स्थिर रहे हैं, जबकि पर्यावरण और जीवनशैली में सुधार ने जीवनकाल बढ़ाया है। इस खोज ने सामुदायिक सुधारों को प्रेरित किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लॉरा कारस्टेंसन स्टेनफोर्ड सेंटर ऑन लॉन्गेविटी के निदेशक पद से क्यों हट रही हैं?\nलॉरा कारस्टेंसन लगभग दो दशकों तक संस्थापक निदेशक रहने के बाद इस गर्मी में पद छोड़ रही हैं ताकि वह नए शोध प्रोजेक्ट, अध्यापन और एक नए ऑनलाइन कोर्स पर काम कर सकें।\n\n2. दीर्घायु और उम्र बढ़ने (एजिंग) के बीच मुख्य अंतर क्या है?\nकारस्टेंसन के अनुसार दीर्घायु जीवन की कुल अवधि का मापदंड है, जबकि उम्र बढ़ना एक जैविक प्रक्रिया है जो हजारों वर्षों से काफी हद तक अपरिवर्तित रही है।\n\n3. सिंगापुर का क्वीनस्टाउन हेल्थ डिस्ट्रिक्ट दीर्घायु के सिद्धांतों को कैसे लागू कर रहा है?\nसिंगापुर ने क्वीनस्टाउन में बच्चों के लिए झूले और बुजुर्गों के लिए संतुलन बीम जैसे साझा पार्क बनाए हैं ताकि विभिन्न पीढ़ियों के बीच स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव बढ़े।\n\n4. कारस्टेंसन ने अमेरिका की दीर्घायु नीतियों को क्या ग्रेड दिया है?\nकारस्टेंसन ने अमेरिका को C-ग्रेड दिया है क्योंकि वहां की सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए सीमित कदम उठाए हैं, हालांकि उन्होंने निजी क्षेत्र के नवाचारों की सराहना की।\n\n5. दीर्घायु में व्यावसायिक निवेश को लेकर क्या चिंताएं व्यक्त की गई हैं?\nउन्होंने चिंता जताई कि अधिकांश धन केवल व्यक्तिगत उम्र बढ़ाने और अप्रमाणित उत्पादों पर खर्च हो रहा है, जबकि जीवन की गुणवत्ता सुधारने वाले सामाजिक कार्यों में निवेश कम है।\n\n6. कारस्टेंसन अपनी सबैटिकल के दौरान किस मुख्य परियोजना पर काम करेंगी?\nसबैटिकल के दौरान वह गार्डनिंग और पाइलेट्स जैसी गतिविधियों के साथ 'द फंडामेंटल्स ऑफ लॉन्गेविटी' नामक एक वैश्विक ऑनलाइन कोर्स तैयार करेंगी।\n\nप्रेरणा और सबक\nलॉरा कारस्टेंसन की दो दशकों की यात्रा यह सिखाती है कि कैसे सामाजिक चुनौतियों को नए नजरिए से देखकर बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं और करियर के चरणों को बेहतर बनाया जा सकता है।\n\n• मूल मान्यताओं को बदलना: लंबी उम्र को बुढ़ापे की समस्या मानने के बजाय कारस्टेंसन ने इसे जीवन के हर पड़ाव का अवसर बनाया। दृष्टिकोण बदलने से ही नए समाधान निकलते हैं।\n\n• विभिन्न विषयों का समन्वय: 'न्यू मैप ऑफ लाइफ' ने मनोविज्ञान, जननीति और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़कर सफलता पाई। जटिल समस्याओं के लिए विविध ज्ञान क्षेत्रों का मिलन जरूरी है।\n\n• बाजार के भ्रामक दावों से दूरी: उन्होंने हमेशा वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी और अप्रमाणित उत्पादों से बचने की सलाह दी। टिकाऊ साख ठोस अनुसंधान से ही बनती है।\n\n• संतुलित जीवन शैली का निर्माण: अपने पद को छोड़कर सबैटिकल लेने का उनका फैसला दिखाता है कि करियर के हर नए चरण में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और प्राथमिकताओं को स्थान देना चाहिए।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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