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  "type": "article",
  "title": "मधुमेह के मरीजों के लिए शराब का सेवन कितना घातक, लिवर विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार सरीन ने दी चेतावनी",
  "summary": "लिवर विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार सरीन के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब का सेवन बेहद खतरनाक है। शराब पीने से लिवर कैंसर का खतरा बढ़ता है और पैंक्रियाज पर भी बुरा असर पड़ता है।",
  "content": "शराब का सेवन किसी भी इंसान के शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता है, जिसका सबसे पहला और गंभीर असर लिवर पर पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक मदिरा का सेवन करता है, तो फैटी लिवर की समस्या से होते हुए यह बीमारी धीरे-धीरे लिवर सिरोसिस और अंत में लिवर कैंसर का रूप ले सकती है। एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति को भी शराब से केवल शारीरिक नुकसान ही मिलते हैं। वहीं दूसरी ओर, यदि किसी को मधुमेह यानी डायबिटीज जैसी कोई गंभीर बीमारी है, तो शराब का यह शौक उनके पैंक्रियाज यानी अग्नाशय को भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे शरीर के भीतर इंसुलिन के निर्माण की प्राकृतिक क्षमता पर सीधा और बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि क्या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को शराब का सेवन करना चाहिए या नहीं, और यदि वे ऐसा कर रहे हैं, तो क्या इसके लिए कोई सुरक्षित सीमा तय है?\n\n \n\nलिवर कैंसर और शराब के सेवन का संबंध\n प्रसिद्ध लिवर स्पेशलिस्ट डॉक्टर शिव कुमार सरीन ने अपनी पुस्तक ओन योर बॉडी में इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आने वाले 40 से 80 वर्ष की उम्र के कुल 504,546 लोगों पर एक बहुत बड़ा शोध किया गया था। इस बड़े अध्ययन में यह बात सामने आई कि लिवर कैंसर का सीधा और गहरा संबंध हेपेटाइटिस-बी और सी के संक्रमण से होता है। इसके अलावा, शोध में यह भी पाया गया कि यदि कोई व्यक्ति प्रति वर्ष 20 गैलन शराब का सेवन करता है, तो विभिन्न आयु वर्ग जैसे 50 से 59 वर्ष, 60 से 69 वर्ष और 70 से 80 वर्ष के लोगों में कैंसर होने का खतरा क्रमशः 6 प्रतिशत, 8 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।\n\n \n\nकैंसर और गंभीर बीमारियों का बढ़ता जोखिम\n अन्य चिकित्सा शोधों से भी इस बात की पुष्टि होती है, जिनमें हेल्थ 2000 और फिनरिस्क 1992-2012 जैसे बड़े डेटाबेस शामिल हैं। इन अध्ययनों के आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही शराब पीने से हृदय रोगों का खतरा कुछ हद तक कम होता हुआ दिखाई दे, लेकिन इसका सीधा संबंध पीने की मात्रा के हिसाब से एडवांस्ड लिवर डिजीज और कैंसर के जोखिमों से हमेशा बना रहता है। असल में, शराब के अंदर पाया जाने वाला एक रासायनिक अंश जिसे एसीटैल्डिहाइड कहा जाता है, वह लिवर के साथ-साथ मुंह की कैविटी, फूड पाइप, पेट, पैनक्रियाज, प्रोस्टेट और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाने का प्रमुख कारक बनता है। इसलिए चिकित्सा विशेषज्ञों का यही कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को शराब से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।\n\n \n\nशराब की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं\n डॉक्टर सरीन ने अपनी किताब में बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि डायबिटीज के मरीजों सहित किसी भी आम इंसान के लिए भी शराब पीने की कोई भी सुरक्षित सीमा निर्धारित नहीं है। इसके बावजूद, यदि कोई डायबिटीज का मरीज नियमित रूप से शराब का सेवन करता है, तो यह उसके शरीर के लिए किसी घाव पर नमक छिड़कने जैसा साबित होता है। इस प्रकार की गंभीर लापरवाही के कारण शरीर में फैटी लिवर और लिवर फाइब्रोटिक जैसी जटिल समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसके साथ ही, समय बीतने के साथ-साथ व्यक्ति को हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी जकड़ सकती है।\n\n \n\nब्लड शुगर और हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा\n यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं और इसके बावजूद शराब का सेवन जारी रखते हैं, तो आपको यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि इससे आपके शरीर का ब्लड शुगर स्तर भी पूरी तरह असंतुलित हो सकता है। विशेष रूप से वे लोग जो इंसुलिन का उपयोग करते हैं या फिर अन्य विशेष दवाइयां लेते हैं, उनके लिए शराब पीना अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है। शराब के प्रभाव से ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। हैरानी की बात यह है कि शरीर में यह खतरनाक स्थिति शराब पीने के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पैदा हो सकती है। यही कारण है कि डॉक्टरों द्वारा डायबिटीज के मरीजों को शराब का सेवन न करने की सख्त सलाह दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश शराब पीता भी है, तो उसे अपनी वर्तमान दवाओं, ब्लड शुगर के स्तर और अपने लिवर की संपूर्ण स्थिति को ध्यान में रखते हुए तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nडायबिटीज के मरीजों के लिए शराब का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है और इससे लिवर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।\n\n• भारत में: डायबिटीज के सभी मरीजों को अपने खानपान और जीवनशैली में तुरंत सुधार करने की सलाह दी जाती है। शराब के नियमित सेवन से पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचता है और इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है।\n\n• स्वास्थ्य सुरक्षा: शराब पीने से ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से गिर सकता है जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। यह स्थिति शराब पीने के कई घंटे बाद भी पैदा हो सकती है।\n\n• लिवर की सेहत: अधिक शराब पीने से फैटी लिवर फाइब्रोसिस और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं। इससे बचने के लिए किसी भी सुरक्षित सीमा की उम्मीद न रखें और डॉक्टर से परामर्श करें।\n\n• दवाओं का असर: इंसुलिन या अन्य दवाइयां ले रहे मरीजों के लिए शराब का सेवन और भी अधिक घातक हो जाता है। ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टर की देखरेख में अपनी दिनचर्या तय करनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nशराब के सेवन से शरीर में कई प्रकार के गंभीर शारीरिक बदलाव होते हैं जो कैंसर और अन्य बीमारियों को जन्म देते हैं। यह प्रक्रिया वैज्ञानिक तथ्यों और बड़े स्वास्थ्य शोधों पर आधारित है।\n\n• रासायनिक प्रभाव: शराब के भीतर पाया जाने वाला एसीटैल्डिहाइड नामक रसायन लिवर, पैंक्रियाज और पेट समेत शरीर के कई अंगों में कैंसर के जोखिम को तेजी से बढ़ाता है।\n\n• शोध के आंकड़े: बड़े चिकित्सा अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि प्रति वर्ष 20 गैलन तक शराब पीने से उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर कैंसर का खतरा 6 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।\n\n• इंसुलिन पर असर: डायबिटीज के मरीजों में पैंक्रियाज पहले से कमजोर होता है, और शराब उस पर अतिरिक्त दबाव डालकर इंसुलिन बनाने की क्षमता को पूरी तरह प्रभावित करती है।\n\n• लिवर की क्षति: लंबे समय तक मदिरा पीने से लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे फैटी लिवर सिरोसिस और अंत में फाइब्रोटिक समस्याएं पैदा होती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा है?\nडॉक्टर शिव कुमार सरीन के अनुसार, डायबिटीज के रोगियों सहित किसी भी व्यक्ति के लिए शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा नहीं होती है।\n\n2. शराब पीने से डायबिटीज के मरीजों में कौन सी गंभीर समस्या हो सकती है?\nशराब पीने से पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचता है और ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से कम होने यानी हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम बढ़ जाता है।\n\n3. शराब का कौन सा अंश कैंसर का खतरा बढ़ाता है?\nशराब का ही एक रासायनिक अंश एसीटैल्डिहाइड लिवर, मुंह, पेट, पैनक्रियाज और प्रोस्टेट में कैंसर के खतरे को बढ़ाने का काम करता है।\n\n4. कितने लोगों पर किए गए शोध में लिवर कैंसर और शराब के संबंध का पता चला?\nलगभग 504,546 लोगों पर किए गए एक बड़े रिसर्च में लिवर कैंसर और शराब के सेवन के बीच गहरा संबंध पाया गया है।\n\n5. किन उम्र के लोगों पर शराब का सबसे ज्यादा असर रिसर्च में देखा गया?\nशोध में 50 से 80 वर्ष की आयु के लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें उम्र के साथ कैंसर का खतरा 6 से 30 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ पाया गया।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-18",
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