# मानसून में कान की सफाई करने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जानिए क्यों खतरनाक है कॉटन बड्स का इस्तेमाल

> बरसात के मौसम में कान की खूंटी निकालने के लिए कॉटन बड्स या नुकीली चीजों का उपयोग कान की नली को नुकसान पहुंचा सकता है और गंभीर फंगल इंफेक्शन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कान के प्राकृतिक सेल्फ-क्लीनिंग तंत्र में बाधा डालने के बजाय केवल बाहरी हिस्से की सफाई करनी चाहिए।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/manasuna-men-kana-ki-saphai-karane-ki-jaldabaji-para-sakati-hai-bhari-janie-kyon-khataranaka-hai-cotton-buds-ka-istemala-21704 · **Language:** Hindi
**Tags:** कान की सफाई, मानसून केयर, स्वास्थ्य टिप्स, कॉटन बड्स खतरा, ईएनटी देखभाल, फंगल इंफेक्शन

बरसात के दिनों में वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे कान से जुड़ी समस्याएं और संक्रमण के मामले तेजी से सामने आते हैं। अक्सर लोग कान में जमा मैल यानी खूंटी को गंदगी समझ लेते हैं और उसे तुरंत बाहर निकालने की कोशिश करने लगते हैं। इसके लिए कॉटन बड्स, माचिस की तीली, हेयरपिन या सेफ्टी पिन जैसी नुकीली चीजों का सहारा लिया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मानसून के दौरान कान के अंदर ऐसी वस्तुएं डालना अत्यंत जोखिमभरा हो सकता है। इससे कान की अंदरूनी त्वचा छिल सकती है और बहरेपन या गंभीर इंफेक्शन का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

## कान का मैल कोई गंदगी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है
कान में बनने वाला मैल, जिसे डॉक्टरी भाषा में सेरुमेन (Cerumen) कहा जाता है, वास्तव में शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली है। डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, यह मैल कान के अंदरूनी हिस्से की संवेदनशील त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे सूखने या फटने से बचाता है। इसके अलावा, यह बाहरी धूल-मिट्टी, सूक्ष्म कणों और हानिकारक जीवाणुओं को कान के पर्दे तक जाने से रोकता है। कान में एक स्वचालित सफाई व्यवस्था होती है, जिसके तहत जब हम खाना चबाते हैं या बात करते हैं, तो जबड़े की हरकतों से पुराना मैल अपने आप धीरे-धीरे बाहर की ओर खिसक जाता है। इसलिए कान के अंदर गहराई तक किसी भी साधन को डालकर सफाई करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती।

## कॉटन बड्स और नुकीली चीजों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम
जब भी कोई व्यक्ति कॉटन बड या तीली को कान के अंदर डालता है, तो मैल बाहर आने के बजाय और अधिक गहराई में धकेल दिया जाता है। इससे कान के पर्दे (Eardrum) के पास मैल का कड़ा जमाव बन सकता है, जिससे कान बंद होने या कम सुनाई देने की शिकायत हो जाती है। इसके अलावा, कान की अंदरूनी नली बेहद संवेदनशील होती है। थोड़ी सी भी लापरवाही या ज्यादा जोर लगाने पर वहां की पतली त्वचा पर खरोंच आ सकती है। गंभीर मामलों में कॉटन बड का सीधा दबाव कान के पर्दे को फाड़ भी सकता है, जिसके इलाज में लंबा समय लग सकता है।

## मानसून में फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा
हवा में अधिक नमी होने के कारण बरसात के दिनों में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं। यदि कान कुरेदने के कारण अंदरूनी त्वचा पर हल्की सी भी खरोंच आ जाती है, तो वातावरण की नमी और पसीने के संपर्क में आकर वहां तुरंत फंगल इंफेक्शन (Otomycosis) हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को कान में अत्यधिक खुजली, असहनीय दर्द, भारीपन महसूस होना, कान बंद होना और पानी या मवाद जैसा रिसाव होने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

## सुरक्षित सफाई और सावधानियां
बारिश के मौसम में कानों को बेवजह छूने या कुरेदने से पूरी तरह बचना चाहिए। नहाने या बारिश में भीगने के बाद यदि कान में पानी चला जाए, तो कान के बाहरी हिस्से (पिन्ना) को एक साफ, सूखे और मुलायम तौलिए से धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना कान में कभी भी सरसों का तेल, गरम पानी, या कोई अनधिकृत ड्रॉप्स न डालें। यदि कान में लगातार खुजली, दर्द, कम सुनाई देना या रिसाव की समस्या बनी रहे, तो बिना देर किए ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से संपर्क करके ही जांच करानी चाहिए।

## इसका आप पर असर
**पाठकों के लिए महत्वपूर्ण:**

- **भारत में:** बारिश के मौसम में कानों को अंदर से साफ करने के लिए माचिस की तीली या कॉटन बड्स न डालें, ऐसा करने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- **दैनिक देखभाल में:** नहाने या बारिश में भीगने के बाद सिर्फ कान के बाहरी हिस्से को साफ कपड़े से सुखाएं और कोई भी तेल या दवा बिना डॉक्टरी सलाह के कान में न डालें।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या मानसून के दौरान कान में कॉटन बड्स का इस्तेमाल सुरक्षित है?
नहीं, मानसून के दौरान नमी ज्यादा होने से कान की अंदरूनी त्वचा संवेदनशील होती है। कॉटन बड्स से मैल अंदर धकेला जा सकता है और खरोंच लगने पर फंगल इंफेक्शन का जोखिम बढ़ता है।

### 2. कान में जमने वाले मैल का प्राकृतिक कार्य क्या होता है?
कान का मैल (सेरुमेन) अंदर की त्वचा को सूखने से बचाता है और धूल-मिट्टी तथा कीटाणुओं को कान के पर्दे तक पहुँचने से रोकता है।

### 3. कान में फंगल इंफेक्शन के मुख्य लक्षण क्या हैं?
कान में लगातार खुजली होना, तेज दर्द, भारीपन या कान बंद महसूस होना, पानी या पस जैसा रिसाव होना और कम सुनाई देना फंगल इंफेक्शन के मुख्य लक्षण हैं।

### 4. नहाने के बाद कान को सुरक्षित तरीके से कैसे साफ करना चाहिए?
नहाने के बाद केवल कान के बाहरी हिस्से (पिन्ना) को साफ और मुलायम तौलिए से धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। कान के अंदर कोई चीज नहीं डालनी चाहिए।

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