मौसम बदलते ही बढ़ा आई फ्लू का खतरा, नेत्र रोग विशेषज्ञ मनीषा सिंह ने दी बचाव की सलाह बदलते मौसम के साथ फैल रहे आई फ्लू से बचाव के लिए नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मनीषा सिंह ने जरूरी सावधानियां, स्वच्छता और सही इलाज के तौर-तरीके साझा किए हैं। जौनपुर में मौसम बदलते ही आंखों में संक्रमण और आई फ्लू के मामलों में तेजी से उछाल दर्ज किया जा रहा है। इस संक्रामक बीमारी की चपेट में परिवार का कोई एक सदस्य आते ही बाकी लोगों में भी इसका प्रसार होने का बड़ा जोखिम बन जाता है। लोगों में आंखें लाल होना, तेज खुजली, दर्द और लगातार पानी निकलने जैसी तकलीफें सामने आ रही हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा सिंह के मुताबिक थोड़ी सी सतर्कता और सफाई अपनाकर आंखों को इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लक्षणों को कतई नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सीय परामर्श लें, क्योंकि शुरुआती लापरवाही आंखों के लिए भारी परेशानी खड़ी कर सकती है। संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा सिंह के अनुसार आई फ्लू के फैलाव पर लगाम लगाने के लिए नियमित तौर पर साबुन से हाथ धोना और सैनिटाइजर का प्रयोग करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जो लोग इस संक्रमण से जूझ रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से प्रोटेक्टिव चश्मा पहनना चाहिए। प्रोटेक्टिव चश्मा लगाने से मरीज बार-बार सीधे अपनी आंखों को छूने से बचता है, जिससे संक्रमण उंगलियों के जरिए दूसरी सतहों तक नहीं पहुंचता। इसके अलावा घर के भीतर इस्तेमाल होने वाले रुमाल, तौलिए या कपड़े किसी दूसरे के साथ साझा न करने की सख्त सलाह दी गई है। अगर परिवार में किसी एक व्यक्ति को यह समस्या हुई है, तो बाकी सदस्यों में इसके फैलने की पूरी आशंका बनी रहती है। इसलिए घर के भीतर नियमित स्वच्छता और बार-बार हैंड वॉश करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श आई ड्रॉप डालने की भूल न करें इलाज के तौर-तरीकों को लेकर डॉ. मनीषा सिंह ने कड़ी हिदायत दी है कि लोग मेडिकल स्टोर से सीधे दवा खरीदकर अपनी आंखों में न डालें। केवल विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही सुझाई गई दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही कई लोग दूसरों की इस्तेमाल की हुई आई ड्रॉप यह सोचकर डाल लेते हैं कि उससे दूसरे को राहत मिली थी, लेकिन ऐसी गलती आंखों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। डॉ. मनीषा सिंह ने स्पष्ट किया कि आई फ्लू मुख्य रूप से बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण की वजह से होता है। अगर संक्रमण बैक्टीरियल प्रकृति का है, तो डॉक्टर द्वारा जांच के बाद लिखी गई एंटीबायोटिक आई ड्रॉप के सही इस्तेमाल से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। आई ड्रॉप की एक्सपायरी और व्यक्तिगत स्वच्छता के नियम दवा के सही रख-रखाव को लेकर डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि कोई भी आई ड्रॉप जब एक बार खुल जाती है, तो उसे अधिकतम एक महीने तक ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए। ढक्कन खुलने के एक महीने बाद उस ड्रॉप का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। महिलाओं को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे किसी का भी इस्तेमाल किया हुआ काजल कतई शेयर न करें। वहीं भीड़भाड़ वाली या सार्वजनिक जगहों पर जाने वाले नागरिकों को संक्रमित व्यक्तियों से हाथ मिलाने से परहेज करने और अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता का पूरा ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है। इसका आप पर असर बदलते मौसम में आई फ्लू का बढ़ता प्रसार हर वर्ग के लोगों के दैनिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतों को सीधे प्रभावित करता है। • भारत में: मौसम में बदलाव के दौरान देश भर के विभिन्न हिस्सों में कंजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़ते हैं। आम नागरिकों को हाथ धोने, सैनिटाइजर के इस्तेमाल और व्यक्तिगत कपड़े अलग रखने की आदत डालनी चाहिए। • जौनपुर में: स्थानीय स्तर पर इस संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। क्षेत्र के निवासियों को लक्षण दिखते ही सरकारी या निजी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। • दवाइयों के इस्तेमाल पर: बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदने पर रोक लगाने की जरूरत है। किसी भी खुली हुई आई ड्रॉप का इस्तेमाल 30 दिन पूरे होते ही बंद कर देना चाहिए। • पारिवारिक स्तर पर: घर में एक सदस्य के बीमार पड़ते ही संक्रमण पूरे परिवार में फैल सकता है। परिवार के सदस्यों को तौलिया, रुमाल और काजल जैसी वस्तुएं कतई साझा नहीं करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ आई फ्लू के फैलने के मुख्य कारण मौसमी बदलाव और साफ-सफाई में बरती जाने वाली सामान्य लापरवाहियां हैं, जिनकी वजह से संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। • सीधा कारण: यह बीमारी मुख्य रूप से बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण की वजह से आंखों में सूजन और पानी आने का कारण बनती है। संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले स्राव के संपर्क में आने से यह दूसरों तक पहुंचती है। • फैलाव के कारक: संक्रमण से ग्रस्त व्यक्ति द्वारा बार-बार आंखों को छूना और फिर उन्हीं हाथों से साझा तौलिया, रुमाल या अन्य सतहों को छूना इसे तेजी से फैलाता है। स्वच्छता और हैंड वॉश की कमी संक्रमण चक्र को और तेज कर देती है। • दवा से जुड़ी गलतियां: बिना चिकित्सकीय सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लेना या दूसरों की आई ड्रॉप का इस्तेमाल करना उपचार में बाधा डालता है। इसके अलावा एक महीने से ज्यादा समय से खुली आई ड्रॉप का इस्तेमाल भी आंखों के लिए हानिकारक साबित होता है। सवाल-जवाब 1. आई फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं? आंखें लाल होना, लगातार पानी आना, तेज खुजली और दर्द होना आई फ्लू के मुख्य लक्षण हैं। 2. संक्रमित व्यक्ति को प्रोटेक्टिव चश्मा क्यों लगाना चाहिए? प्रोटेक्टिव चश्मा लगाने से मरीज बार-बार अपनी आंखों को हाथ से नहीं छूता, जिससे संक्रमण दूसरों तक फैलने से रुकता है। 3. आई फ्लू होने पर क्या सीधे मेडिकल स्टोर से ड्रॉप खरीद सकते हैं? नहीं, सीधे मेडिकल स्टोर से दवा नहीं लेनी चाहिए बल्कि डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही सुझाई गई दवा का उपयोग करना चाहिए। 4. खुली हुई आई ड्रॉप को कितने समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है? आई ड्रॉप की शीशी खुलने के बाद उसे अधिकतम एक महीने तक ही इस्तेमाल किया जा सकता है। 5. आई फ्लू मुख्य रूप से किन कारणों से होता है? डॉ. मनीषा सिंह के अनुसार आई फ्लू मुख्य रूप से बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण होता है। 6. घर में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए क्या सावधानियां रखनी चाहिए? बार-बार हाथ धोने, सैनिटाइजर लगाने और किसी का इस्तेमाल किया हुआ रुमाल या तौलिया साझा न करने की सलाह दी गई है। https://trendkia.com/health/mausama-badalate-hi-barha-eye-flu-ka-khatara-netra-roga-visheshajna-manisha-singh-ne-di-bachava-ki-salaha-55374 TrendKia — Har trend, sabse pehle.