मवेशियों में आफरा की समस्या हो सकती है खतरनाक, जानिए पेट फूलने की वजह, लक्षण और बचाव के आसान तरीके पशुओं में चारे के अचानक बदलाव और दूषित खानपान से आफरा की गंभीर समस्या हो सकती है। जानिए इसके लक्षण, प्राथमिक उपचार और बचाव के आसान तरीके। पशुपालकों के लिए मवेशियों का सही खानपान केवल दूध उत्पादन और उनकी सामान्य सेहत से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे उनकी जान से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला है। चारे में अचानक बदलाव करने, दूषित पानी पिलाने या सड़ा-गला चारा देने से पशुओं में आफरा यानी ब्लोट की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। जब पशु के पेट में गैस का दबाव बहुत बढ़ जाता है और समय पर उचित इलाज नहीं मिलता, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सक विनोद चौधरी के मुताबिक, पशुपालकों को अपने मवेशियों के आहार और दैनिक देखभाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचाव किया जा सके। पेट में गैस जमने के मुख्य कारण और लक्षण पशु चिकित्सक विनोद चौधरी के अनुसार, जब पशुओं को लगातार सिर्फ सूखा चारा दिया जा रहा हो और अचानक बड़ी मात्रा में हरा चारा दे दिया जाए, तो आफरा होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा फफूंद लगा या बासी चारा खिलाने, दूषित पानी पिलाने, कुपोषण, कब्ज और पाचन शक्ति कमजोर होने की वजह से भी पेट में गैस रुकने लगती है। कठिन काम या अधिक परिश्रम करने के तुरंत बाद पशु को बहुत ठंडा पानी पिलाना भी उसके पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है। आफरा होने पर पशु के पेट में गैस तेजी से जमा होने लगती है, जिससे विशेष रूप से उसका बाईं तरफ का पेट असामान्य रूप से फूल जाता है। यदि बाईं तरफ फूले हुए हिस्से पर हल्के हाथ से थपकी दी जाए, तो अंदर से ढोल जैसी खाली आवाज सुनाई देती है। जैसे-जैसे पेट के अंदर गैस का दबाव बढ़ता है, फेफड़ों पर दबाव पड़ने लगता है और पशु को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है। ऐसी स्थिति में पशु अपने नथुने फैलाकर और मुंह खोलकर जोर-जोर से सांस लेने की कोशिश करता है। बेचैनी के कारण वह बार-बार उठता और बैठता है, और कई मामलों में उसके मुंह से झाग तथा अत्यधिक लार गिरने लगती है। आफरा होने पर तुरंत क्या करें प्राथमिक उपचार यदि मवेशी में आफरा के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कुछ प्राथमिक उपाय करके उसे राहत दी जा सकती है। पशु चिकित्सक विनोद चौधरी बताते हैं कि आफरा की स्थिति में पशु को पकड़कर धीरे-धीरे टहलाना चाहिए। चलने-फिरने से पेट में फंसी गैस को बाहर निकलने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पशु के बाईं तरफ के पेट पर हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। एक अन्य प्रभावकारी तरीका यह है कि पशु को इस तरह खड़ा रखा जाए जिससे उसके शरीर का अगला हिस्सा यानी धड़ थोड़ा ऊंचा रहे। धड़ ऊंचा रहने से सीने और फेफड़ों पर पेट की गैस का दबाव कम होता है, जिससे पशु को सांस लेने में तुरंत सहूलियत महसूस होती है। अंधविश्वास से बचें और केवल डॉक्टर से कराएं इलाज स्थिति बिगड़ने पर पेट में अत्यधिक जमा गैस को बाहर निकालने के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। हालांकि पशुपालकों को यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि पेट में छेद करके गैस निकालने जैसी जोखिम भरी प्रक्रिया केवल किसी अनुभवी और योग्य पशु चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए। यदि कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति गलत तरीके से पेट में छेद करता है, तो इससे पशु के आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंच सकता है और उसकी जान जा सकती है। पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने स्पष्ट सलाह दी है कि मवेशियों में बीमारी या आफरा होने पर केरोसिन तेल सुंघाने अथवा जादू-टोना जैसे अंधविश्वासी और वैज्ञानिक प्रमाण रहित घरेलू तरीकों से पूरी तरह बचना चाहिए। इस तरह के टोटकों में समय बर्बाद करने से पशु की हालत बिगड़ जाती है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या दिखते ही बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर सही उपचार शुरू कराना चाहिए। पशुओं को आफरा से बचाने के लिए जरूरी सावधानियां आफरा जैसी घातक बीमारी से बचाव का सबसे उत्तम तरीका सही आहार प्रबंधन है। पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने मवेशियों के दाने और चारे में अचानक कोई बदलाव न करें। जब भी चारे में बदलाव करना हो, तो इसे धीरे-धीरे कई दिनों के अंतराल पर करें। हमेशा हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर ही पशुओं को खिलाएं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलती रहे। पशुओं को कभी भी सड़ा-गला, बासी या फफूंद लगा चारा न दें और उन्हें हमेशा साफ पानी ही उपलब्ध कराएं। इसके अलावा, पशु चिकित्सक की परामर्श के अनुसार पशु आहार में उचित मात्रा में खनिज लवण मिश्रण यानी मिनरल मिक्सचर जरूर शामिल करें। नियमित निगरानी और बेहतर खानपान से मवेशियों को आफरा से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका आप पर असर पशुपालकों और किसानों के लिए: • भारत भर में: पशु आहार में अचानक बदलाव न करके और सूखे व हरे चारे का संतुलन बनाकर मवेशियों को जानलेवा आफरा बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। • स्थानीय स्तर पर: आफरा के लक्षण दिखते ही अंधविश्वास की बजाय योग्य पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करने से पशु की जान बचाई जा सकती है और बड़े आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है। सवाल-जवाब 1. पशुओं में आफरा (ब्लोट) क्यों होता है? चारे में अचानक बदलाव करने, सूखे चारे के बाद एकदम बहुत सारा हरा चारा देने, बासी या फफूंद लगा चारा खिलाने और दूषित पानी पिलाने से पेट में गैस जमा होकर आफरा होता है। 2. पशु में आफरा होने का सबसे प्रमुख लक्षण क्या है? पशु के बाईं तरफ का पेट असामान्य रूप से फूल जाता है और उस पर हल्की थपकी देने पर ढोल जैसी खाली आवाज आती है। इसके अलावा मुंह से झाग गिरना और सांस लेने में तकलीफ होना भी मुख्य लक्षण हैं। 3. आफरा होने पर तुरंत कौन सा प्राथमिक उपचार करना चाहिए? पशु को पकड़कर धीरे-धीरे टहलाना चाहिए, उसके बाईं तरफ के पेट पर हल्की मालिश करनी चाहिए और उसके शरीर के अगले हिस्से (धड़) को थोड़ा ऊंचा करके खड़ा रखना चाहिए। 4. क्या आफरा के इलाज के लिए केरोसिन सुंघाना या टोटके करना सही है? बिल्कुल नहीं। केरोसिन सुंघाने या जादू-टोने जैसे अंधविश्वासी उपायों से पशु की स्थिति और बिगड़ सकती है। किसी भी समस्या पर तुरंत योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। 5. भविष्य में आफरा से बचाव के लिए आहार में क्या सावधानियां बरतें? हमेशा हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर दें, चारे-दाने में बदलाव धीरे-धीरे करें, कभी भी सड़ा-गला चारा न दें और डॉक्टर की सलाह से आहार में मिनरल मिक्सचर (खनिज लवण) शामिल करें। https://trendkia.com/health/maveshiyon-men-aphara-ki-samasya-ho-sakati-hai-khataranaka-janie-peta-phulane-ki-vajaha-lakshana-aura-bachava-ke-asana-tarike-19359 TrendKia — Har trend, sabse pehle.