मेवों की तासीर समझकर तय करें खाने का सही वक्त और नियम सूखे मेवे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनकी अलग तासीर के चलते सही समय और तरीके से सेवन करना ही सेहत के लिए फायदेमंद रहता है। सूखे मेवे शरीर को जरूरी पोषण देने वाले तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक फैट्स, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। हालांकि सभी मेवों की तासीर एक जैसी नहीं होती, इस वजह से बदलते मौसम और शरीर की निजी जरूरतों के मुताबिक इनका चुनाव करना सेहत के लिहाज से अधिक गुणकारी रहता है। अलग-अलग मेवों की प्रकृति, उनके सेवन का उचित समय और सही प्रक्रिया का ध्यान रखकर ही इनके लाभ पूरी तरह हासिल किए जा सकते हैं। बादाम और अखरोट के फायदे और नियम बादाम की प्रकृति हल्की गर्म मानी जाती है। इसे रातभर पानी में भिगोकर अगली सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा तरीका माना गया है। भीगे हुए बादाम को पचाना पाचन तंत्र के लिए काफी आसान होता है और यह दिमाग तथा दिल की तंदुरुस्ती के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है। अखरोट की बात करें तो इसकी तासीर गर्म होती है, जिससे सर्दियों के दिनों में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। सुबह के नाश्ते में या फिर शाम के वक्त 2 से 4 अखरोट खाने से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती है और मस्तिष्क भी चुस्त व सक्रिय बना रहता है। काजू और पिस्ता का संतुलित सेवन काजू की तासीर गर्म प्रकृति की होती है, जिसके चलते इसे हमेशा सीमित अनुपात में ही खाना चाहिए। दिन के समय या सुबह नाश्ते के विकल्प के तौर पर 4 से 5 काजू खाए जा सकते हैं। गर्मी के मौसम में अधिक मात्रा में काजू के सेवन से परहेज रखने की सलाह दी जाती है। पिस्ता की तासीर संतुलित मानी जाती है, इसलिए इसे साल के किसी भी मौसम में बेझिझक आहार में शामिल किया जा सकता है। सुबह अथवा शाम के समय हल्के स्नैक के रूप में पिस्ता खाना आंखों की रोशनी और दिल की सेहत दोनों के लिए बढ़िया माना जाता है। किशमिश और सूखी अंजीर के पाचन लाभ किशमिश की प्रकृति हल्की गर्म होती है। इसे रात के समय पानी में भिगोकर सुबह के पहर खाना सबसे ज्यादा मुफीद रहता है। भीगी हुई किशमिश शरीर में आयरन की कमी की भरपाई करने में मदद करती है और पाचन प्रक्रिया को भी दुरुस्त रखती है। सूखी अंजीर भी गर्म तासीर वाली मानी जाती है। अंजीर को भी रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाना बेहतर उपाय है। उच्च फाइबर युक्त होने के कारण अंजीर पेट साफ रखने और कब्ज की दिक्कत से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है। छुहारे, खजूर और मखाने की विशेषताएं छुहारे की तासीर काफी गर्म मानी जाती है, जिस कारण इसका उपयोग मुख्य रूप से ठंड के मौसम में किया जाता है। दूध के साथ छुहारे का सेवन करने से शरीर को भरपूर ताकत और जरूरी गर्माहट प्राप्त होती है। खजूर भी गर्म तासीर का होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के लिए जाना जाता है। सुबह के नाश्ते में अथवा शाम के समय 2 से 3 खजूर खाए जा सकते हैं, विशेष रूप से सर्दियों में इसका सेवन अधिक उपयोगी रहता है। मखाने की तासीर अन्य मेवों के उलट ठंडी मानी जाती है। इसे हल्का भूनकर या फिर दूध में पकाकर खाया जा सकता है। मखाना हर मौसम में खाया जा सकता है और यह शारीरिक वजन को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है। सूखे मेवे खाने के बुनियादी नियम अधिकांश सूखे मेवों को पानी में भिगोकर खाना पाचन तंत्र के लिए अधिक अनुकूल साबित होता है। दिन की शुरुआत में यानी सुबह का वक्त मेवों के सेवन के लिए सबसे मुफीद माना गया है। एक ही समय में बहुत अधिक मात्रा में सूखे मेवे खाने से बचना जरूरी है। हमेशा मौसम और अपने शरीर की जरूरत को ध्यान में रखकर ही इनका चयन करें। इसके अलावा भरपूर मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए, ताकि फाइबर से भरपूर मेवे पेट में आसानी से पच सकें। इसका आप पर असर मौसम और तासीर के हिसाब से सूखे मेवे चुनकर खाने से पाचन सुधरता है और पेट की गर्मी या कब्ज से बचा जा सकता है। • खानपान की आदत: सुबह खाली पेट बादाम, अंजीर और किशमिश भिगोकर खाने से शरीर को पूरा पोषण मिलता है। इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता और पोषक तत्व आसानी से अवशोषित होते हैं। • मात्रा का नियंत्रण: काजू, अखरोट और खजूर जैसे गर्म तासीर वाले मेवे दिन में 2 से 5 की तय सीमा में ही खाएं। अनियंत्रित मात्रा में खाने से गर्मियों में शरीर में गर्मी या बेचैनी हो सकती है। • मौसम का ध्यान: छुहारे और अधिक अखरोट का सेवन मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम तक ही सीमित रखें। गर्मियों के दिनों में मखाना और संतुलित तासीर वाले पिस्ता को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प है। • पानी की खपत: सूखे मेवों में प्रचुर फाइबर होने के कारण दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। सही मात्रा में पानी पीने से आंतों में सूखापन नहीं होता और कब्ज से राहत बनी रहती है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक आहार विज्ञान में प्रत्येक खाद्य सामग्री की तासीर को शरीर के तापमान और पाचन क्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है। मेवों के अलग-अलग पोषक संघटक शरीर में भिन्न प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं। • पोषक तत्वों की सघनता: सूखे मेवों में वसा, प्रोटीन और खनिज बेहद सघन रूप में मौजूद रहते हैं। सघन संरचना के चलते पाचन तंत्र को इन्हें तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिससे शरीर में ताप पैदा होता है। • भिगोने का वैज्ञानिक प्रभाव: पानी में भिगोने से मेवों की सतही गर्मी शांत होती है और उनका पाचन सुगम बनता है। इस प्रक्रिया से फाइबर नरम पड़ जाता है और आंतें बिना किसी अड़चन के पोषक तत्वों को सोख पाती हैं। • जलवायु और शारीरिक अनुकूलन: सर्दियों में शरीर को तापमान बनाए रखने के लिए गर्म मेवों की जरूरत होती है। वहीं गर्मियों में अधिक गर्म तासीर वाली चीजें खाने से पाचन विकार या त्वचा संबंधी समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती है। सवाल-जवाब 1. बादाम को खाने का सबसे अच्छा तरीका और समय क्या है? बादाम को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा माना जाता है, जिससे यह आसानी से पचता है। 2. सर्दियों में किन सूखे मेवों का सेवन विशेष रूप से फायदेमंद होता है? अखरोट, खजूर और छुहारे की तासीर गर्म होती है, इसलिए सर्दियों के मौसम में इनका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है। 3. दिनभर में कितने काजू खाने की सलाह दी जाती है? काजू की तासीर गर्म होती है, इसलिए सुबह या दिन में नाश्ते के रूप में केवल 4 से 5 काजू खाने चाहिए। 4. कब्ज की समस्या में कौन सा ड्राई फ्रूट राहत दे सकता है? सूखी अंजीर फाइबर से भरपूर होती है और इसे रातभर भिगोकर सुबह खाने से कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है। 5. किस सूखे मेवे की तासीर ठंडी होती है? मखाने की तासीर ठंडी मानी जाती है और इसे भूनकर या दूध के साथ हर मौसम में खाया जा सकता है। 6. सूखे मेवे खाते समय पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है? ड्राई फ्रूट्स में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, इसलिए पर्याप्त पानी पीने से ये आसानी से पच जाते हैं। https://trendkia.com/health/mevon-ki-tasira-samajhakara-taya-karen-khane-ka-sahi-vakta-aura-niyama-42284 TrendKia — Har trend, sabse pehle.