मिर्जापुर में तेजी से बढ़ रहे वायरल फीवर के मामले, 270 से अधिक मरीज रोजाना अस्पताल पहुंचे मिर्जापुर जिले के मंडलीय अस्पताल में रोजाना 270 से ज्यादा मरीज बुखार और सर्दी-जुकाम से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लापरवाही न बरतने और खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वायरल फीवर का प्रकोप बेहद तेजी से बढ़ रहा है। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण आम लोग बड़े पैमाने पर मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुखार में लापरवाही बरतने के कारण एक युवक अपनी जान तक गंवा चुका है। इसके बावजूद लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर सीधे मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। जिले में स्थित मंडलीय अस्पताल की स्थिति देखें तो यहां हर दिन 270 से ज्यादा मरीज केवल बुखार, सर्दी और जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मरीजों की इस भारी भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। मंडलीय अस्पताल के फिजिशियन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुनील कुमार सिंह ने नागरिकों को वायरल फीवर से सतर्क रहने, सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है। स्वाइन फ्लू और वायरल फीवर के मिलते-जुलते लक्षण मौसम परिवर्तन के इस दौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वायरल फीवर के लक्षणों को पहचानना और समय पर उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है। डॉ. सुनील कुमार सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि मिर्जापुर जिले में फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, आम जनता को यह समझना होगा कि स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल फीवर के लक्षण काफी हद तक एक जैसे ही होते हैं। इनमें मरीज को तेज बुखार, सर्दी, जुकाम, लगातार खांसी आना और सांस फूलने जैसी परेशानियां महसूस होती हैं। लक्षण समान होने के कारण कई बार लोग बीमारी को साधारण मानकर अनदेखा कर देते हैं। डॉक्टर का स्पष्ट कहना है कि इन दोनों स्थितियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, इसलिए किसी भी प्रकार की शारीरिक असहजता महसूस होने पर इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें और सुरक्षात्मक उपाय तुरंत शुरू कर दें। मास्क का उपयोग और हाथों की नियमित सफाई संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और बचाव के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर मास्क का नियमित प्रयोग वायरल बीमारियों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। जब भी आप घर से बाहर निकलें या भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में जाएं, मास्क अवश्य पहनें। इसके अलावा, अज्ञात या दूषित सतहों को अनावश्यक रूप से छूने से बचें। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना काल के दौरान जिस तरह से बार-बार और सही तरीके से हाथ धोने (हैंड वॉश) के नियम सिखाए गए थे, उनका पालन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। जब भी आप बाहर से घूमकर या काम करके घर लौटें, तो सबसे पहले अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। भोजन करने या चेहरे को छूने से पहले हाथ धोना बेहद जरूरी है, ताकि कीटाणु शरीर के भीतर न पहुंच सकें। खान-पान का परहेज और प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ बीमारी से बचाव और शरीर को मजबूत बनाए रखने में खान-पान की भूमिका सबसे अहम होती है। मौसमी उतार-चढ़ाव के दौरान खान-पान में जरा सी भी लापरवाही पेट और शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टर सुनील कुमार सिंह ने सलाह दी है कि इस मौसम में अत्यधिक ठंडी चीजों के सेवन से बचना चाहिए। वातावरण में कभी अचानक बारिश होने और फिर तेज धूप निकलने से ठंडा-गरम का प्रभाव पड़ता है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। बाजार में बिकने वाले खुले या कटे हुए फलों का सेवन बिल्कुल न करें। इसके साथ ही खुले स्थानों पर रखे गए खाद्य पदार्थ जिन पर धूल-धक्कड़ और मक्खियां बैठती हैं, जैसे समोसा और चाट, उनसे पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। इसके विपरीत, आहार में ताजे फलों का सेवन बढ़ाएं। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ पीएं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध होने वाले ओआरएस (ORS) के घोल का नियमित सेवन करें, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे। जलजमाव पर रोक और डेंगू-स्वाइन फ्लू से बचाव बारिश का मौसम बीतने या रुक-रुक कर होने वाली वर्षा के बाद डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बारिश के बाद वातावरण में नमी की वजह से डेंगू के मच्छर पनपने लगते हैं। ऐसे में यदि घर के अंदर या आसपास कहीं भी पानी जमा है, तो उसकी तुरंत सफाई करवाएं। घर में लगे कूलरों की विशेष जांच करें और उनमें जमा पुराना पानी खाली करके सफाई करें। कूलरों में पानी रुका रहने से उनमें मच्छरों के लावा पनपने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यदि नागरिक इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सावधानियों का पालन करते हैं, तो वे न केवल मौसमी वायरल फीवर से बल्कि डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे से भी खुद को और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। खुद से दवा लेने का जोखिम और चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता वायरल फीवर के दौरान सबसे बड़ी भूल बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी की दवाइयां खरीदकर खाना है। डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कड़ी चेतावनी दी है कि बुखार आने पर बगैर डॉक्टरी परामर्श के खुद से मेडिसिन लेना स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकता है। गलत दवाइयों के सेवन से शरीर में साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं या बीमारी और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती है। यदि आपको या परिवार के किसी सदस्य को बुखार, जुकाम या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। मिर्जापुर के नागरिक मंडलीय अस्पताल, स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में जाकर डॉक्टर को दिखाएं। वहां उचित जांच कराने के बाद ही डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें। सही समय पर सही इलाज ही आपको बीमारियों से सुरक्षित रख सकता है। इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मौसमी बदलाव के कारण वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है। • उत्तर प्रदेश में: राज्य के विभिन्न जिलों में बदलते मौसम के बीच अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। सही समय पर परामर्श न लेने से लोगों को गंभीर शारीरिक और आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। • मिर्जापुर में: जिले के मंडलीय अस्पताल तथा स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी और पीएचसी) पर प्रतिदिन 270 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। लापरवाही बरतने पर जानलेवा स्थिति बन सकती है, इसलिए स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सवाल-जवाब 1. मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में रोजाना कितने मरीज आ रहे हैं? मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 270 से अधिक मरीज बुखार, सर्दी और जुकाम से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। 2. क्या मिर्जापुर में स्वाइन फ्लू के मामले दर्ज किए गए हैं? वर्तमान में मिर्जापुर में स्वाइन फ्लू के मामले नहीं मिले हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू और वायरल फीवर के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। 3. वायरल फीवर से बचाव के लिए कौन-सी शारीरिक सावधानियां जरूरी हैं? भीड़-भाड़ वाली जगह पर मास्क का उपयोग करना, बाहर से लौटने पर कोरोना काल की तरह अच्छी तरह हाथ धोना और अस्वच्छ सतहों को न छूना बेहद आवश्यक है। 4. खान-पान को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? बाजार में खुले या कटे हुए फल, धूल भरे समोसे या चाट न खाएं। ताजे फल, प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ और ओआरएस के घोल का सेवन करें। 5. बुखार आने पर क्या खुद दवा लेनी चाहिए? बिल्कुल नहीं। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से मेडिकल स्टोर से दवा लेना नुकसानदेह हो सकता है। मरीज को नजदीकी पीएचसी, सीएचसी या मंडलीय अस्पताल में जांच करानी चाहिए। 6. डेंगू से बचाव के लिए घरों में क्या कदम उठाएं? बारिश के मौसम के बाद घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और कूलरों की नियमित सफाई करें ताकि मच्छर न पनप सकें। https://trendkia.com/health/mirzapur-men-teji-se-barha-rahe-vayarala-phivara-ke-mamale-270-se-adhika-marija-rojana-aspatala-pahunche-23442 TrendKia — Har trend, sabse pehle.