# मानसून में बीमारियों से बचना है तो आयुष मंत्रालय की इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

> आयुष मंत्रालय ने मानसून के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस मौसम में संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई, खानपान और पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/monsoon-mein-bimariyon-se-bachna-hai-to-aayush-mantralaya-ki-in-zaroori-baaton-ka-rakhein-dhyan-11016 · **Language:** Hindi
**Tags:** मानसून स्वास्थ्य, आयुष मंत्रालय, मौसमी बीमारियां, बरसात की सावधानियां, आयुर्वेदिक उपाय, स्वास्थ्य टिप्स

मानसून का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें तो लेकर आता ही है, साथ ही यह बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए भी एकदम अनुकूल समय होता है। इस दौरान सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, त्वचा की दिक्कतें और पेट के संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि, अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ बहुत ही सामान्य और आसान आदतों को शामिल करके इन तमाम मौसमी बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षित रहा जा सकता है। आयुष मंत्रालय ने भी बरसात के इस सीजन में साफ-सफाई पर विशेष जोर देने की सलाह दी है।

## हाथों की स्वच्छता है सबसे पहला बचाव
बारिश के दिनों में संक्रमण से बचने का सबसे पहला और असरदार तरीका यह है कि अपने हाथों को बार-बार साबुन और साफ पानी से धोया जाए। जब भी आप बाहर से घर लौटें, कुछ खाने या खाना बनाने बैठें, या फिर शौचालय का इस्तेमाल करें, तो हाथों की सफाई जरूर करें। गंदे हाथों के जरिए कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस आसानी से हमारे शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।

## गीले कपड़ों और जूतों से दूरी
बरसात में भीग जाने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े या जूते पहने रहना त्वचा के लिए मुसीबत बन सकता है, जिससे फंगल इंफेक्शन और गंभीर खुजली जैसी परेशानियां हो सकती हैं। जैसे ही घर पहुंचें, तुरंत सूखे और साफ कपड़े पहनें तथा अपने पैरों को अच्छी तरह धोकर पोंछ लें। खासतौर पर पैरों की उंगलियों के बीच की नमी को पूरी तरह सुखाना बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी भी नमी फंगस को तेजी से बढ़ाने का काम करती है।

## घर के आसपास जलभराव न होने दें
बारिश के मौसम में घर के आसपास या छत पर पानी का जमा होना मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल स्थिति बनाता है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी पानी इकट्ठा न हो पाए। इसके अलावा, अपने घर के कूड़ेदान को हमेशा ढककर रखें और कचरे का समय पर निपटान करें ताकि मक्खी-मच्छरों और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप कम से कम हो सके।

## खांसी और जुकाम के लिए घरेलू उपाय
मौसम बदलने की वजह से अगर आपको हल्की खांसी या गले में खराश महसूस हो रही है, तो भरपूर आराम करें और अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें। आयुष मंत्रालय के सुझाव के मुताबिक, हल्दी मिला हुआ गर्म दूध, अदरक और तुलसी का गुनगुना काढ़ा, नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करना और भाप लेना गले को राहत देने में काफी असरदार साबित होता है। हालांकि, अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहती है, तेज बुखार चढ़ता है या सांस लेने में दिक्कत होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

## खानपान और साफ पानी का रखें खास ख्याल
मानसून के दौरान बाहर का खुला हुआ या काफी देर से रखा हुआ खाना खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। हमेशा ताजा और घर का बना हुआ अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही ग्रहण करें और केवल उबला हुआ या शुद्ध साफ पानी ही पिएँ। इसके अलावा, किसी भी फल या सब्जी को इस्तेमाल में लाने से पहले उन्हें पानी से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का जोखिम टाला जा सके।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** मानसून के दौरान दूषित पानी और नमी के कारण होने वाले संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई और खानपान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें।

## सवाल-जवाब

### 1. मानसून में किन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
इस मौसम में सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, त्वचा के फंगल इंफेक्शन और पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

### 2. आयुष मंत्रालय मानसून में किस बात पर जोर देता है?
आयुष मंत्रालय मानसून के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह देता है।

### 3. पैरों को सूखा रखना क्यों जरूरी है?
पैरों में नमी बने रहने से फंगस के बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे त्वचा पर इंफेक्शन और खुजली हो सकती है।

### 4. गले की खराश के लिए क्या घरेलू उपाय बताए गए हैं?
हल्दी वाला गर्म दूध, अदरक-तुलसी का काढ़ा, नमक के पानी से गरारे और भाप लेना गले को आराम पहुँचाता है।

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