# मोतियाबिंद की सर्जरी सिर्फ सर्दियों में ही होती है या किसी भी मौसम में संभव, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

> मोतियाबिंद के ऑपरेशन को लेकर लोगों के मन में कई तरह के भ्रम हैं, जिनमें ठंड के मौसम को सबसे उपयुक्त मानना भी शामिल है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक चिकित्सा तकनीक के कारण यह सर्जरी सालभर में कभी भी कराई जा सकती है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/motiyabinda-ki-sarjari-sirpha-sardiyon-men-hi-hoti-hai-ya-kisi-bhi-mausama-men-snbhava-janie-kya-kahate-hain-dr-aneesh-prakash-51666 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोतियाबिंद, नेत्र रोग, डॉ अनीश प्रकाश, बेगूसराय स्वास्थ्य, आंखों की सर्जरी, स्वास्थ्य भ्रम, कैटरेक्ट ऑपरेशन

बेगूसराय जिले से लेकर देश के तमाम ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग आंखों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें एक बड़ी आबादी उन मरीजों की है जिन्हें मोतियाबिंद या अन्य नेत्र विकारों के कारण कम दिखाई देता है या दिखना बिल्कुल बंद हो गया है। समय रहते यदि उचित उपचार और मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवा लिया जाए, तो आंखों की खोई हुई रोशनी को आसानी से वापस पाया जा सकता है। इस तरह के नेत्र रोगों के इलाज के लिए कई प्रकार के विशेष चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए जाते हैं, जहां बेहद कम खर्च में या फिर बिल्कुल मुफ्त में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि, मोतियाबिंद की सर्जरी के सही समय और मौसम को लेकर समाज में लोगों की अपनी अलग मान्यताएं और समझ जुड़ी हुई हैं। आम तौर पर लोगों के बीच यह पुरानी धारणा प्रचलित है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन केवल ठंड के मौसम में ही करवाना चाहिए। इस विषय की पूरी सच्चाई जानने के लिए बेगूसराय में पिछले 15 वर्षों से भी अधिक समय से मरीजों की आंखों का इलाज कर रहे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीश प्रकाश से विस्तार से चर्चा की गई, जिन्होंने आंखों के ऑपरेशन से जुड़े इस आम भ्रम को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

 

## सर्दियों में सर्जरी कराने की पुरानी परंपरा के व्यावहारिक कारण
 नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीश प्रकाश ने बताया कि सर्दियों के मौसम में ही आंखों की सर्जरी करवाने की यह धारणा काफी पुरानी है। इसके पीछे कुछ खास व्यावहारिक कारण भी जुड़े हुए हैं, लेकिन इस बात को पूरी तरह सच नहीं माना जा सकता कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सिर्फ और सिर्फ ठंड के दिनों में ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंखों के ऑपरेशन के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जिसमें आंख में दवा या पानी डालने के नियमों का पालन करना, नहाना और आंख को सीधे छूने से बचना शामिल है। इसके विपरीत, यदि गर्मी के मौसम में ऑपरेशन कराया जाए और घर में बिजली अथवा पंखे की उचित व्यवस्था न हो, तो शरीर से पसीना आना स्वाभाविक है। यह पसीना माथे से बहकर सीधे आंखों तक पहुंच सकता है, जो सर्जरी के बाद की नाजुक स्थिति में आंखों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

 

## संक्रमण के जोखिम और मौसम का सीधा संबंध
 डॉक्टर ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पसीना आंखों में जाने पर संक्रमण का एक संभावित और बड़ा स्रोत बन सकता है, खासकर तब जब ऑपरेशन के तुरंत बाद आंख की साफ-सफाई और देखभाल में किसी प्रकार की कोताही बरती जाए। दूसरी ओर, सर्दियों के मौसम में शरीर से पसीना अपेक्षाकृत बहुत कम निकलता है। तापमान कम होने के कारण हवा में बैक्टीरिया के पनपने और उनकी वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी काफी हद तक कम हो जाती हैं। इन सर्दियों की मौसमी परिस्थितियों के कारण ऑपरेशन के बाद किसी भी तरह के संक्रमण के जोखिम को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, ठंड के दिनों में मरीज के लिए ऑपरेशन के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक नहाने के दौरान आंखों में पानी जाने से बचना भी काफी आसान हो जाता है, जिससे रिकवरी प्रक्रिया सुरक्षित हो जाती है।

 

## ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सहूलियत
 डॉ. अनीश प्रकाश ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बीच ठंड के मौसम में ही आंखों का ऑपरेशन करवाने का यह चलन और भी अधिक देखने को मिलता है। गर्मियों के दिनों में घरों में पंखे, कूलिंग सिस्टम और साफ-सफाई की पर्याप्त सुविधाएं न होने पर मरीज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि ठंड के मौसम में ऐसी बुनियादी दिक्कतें अपेक्षाकृत बहुत कम होती हैं। हालांकि, डॉक्टर की इस बात का कतई यह अर्थ नहीं है कि गर्मी के दिनों में आंखों का ऑपरेशन बिल्कुल नहीं कराया जा सकता है। आज के समय में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और उन्नत तकनीकों के आ जाने के कारण मोतियाबिंद की सर्जरी साल के किसी भी महीने में आसानी से की जा सकती है। मरीज की आंखों की मौजूदा स्थिति, उसकी उम्र और शरीर में डायबिटीज तथा ब्लड प्रेशर जैसी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

 

## भ्रम और हकीकत की असली तस्वीर
 विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के मौसम में ऑपरेशन कराने को लेकर समाज में बनी यह धारणा पूरी तरह से कोई निराधार भ्रम भी नहीं है और न ही इसे किसी प्रकार का अनिवार्य मेडिकल नियम माना जा सकता है। असल और व्यावहारिक बात केवल इतनी सी है कि ऑपरेशन के बाद आंखों की सही देखभाल करना, साफ-सफाई बनाए रखना और डॉक्टर के बताए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना गरीब मरीजों के लिए ठंड के दिनों में थोड़ा आसान हो जाता है। यही एक मुख्य वजह है कि इस तरह के दावों को पूरी तरह सच मानने के बजाय आधी हकीकत और आधा फसाना की श्रेणी में ही देखा जाना चाहिए। चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में मौसम से ज्यादा मरीज की शारीरिक स्थिति और उचित चिकित्सकीय देखरेख मायने रखती है।

## इसका आप पर असर
मोतियाबिंद के इलाज को लेकर सही जानकारी होने से मरीजों को सर्दियों का इंतजार किए बिना समय पर अपनी आंखों का सफल ऑपरेशन करवाने में मदद मिलती है।

- **समय की बचत:** **मोतियाबिंद के मरीजों को अब सर्दी के मौसम का लंबा इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।** आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से यह सर्जरी वर्ष के किसी भी समय सुरक्षित रूप से पूरी की जा सकती है।
- **संक्रमण से बचाव:** **ऑपरेशन के बाद गर्मियों में पसीने से विशेष सावधानी रखनी जरूरी होती है।** उचित साफ-सफाई और पंखे-कूलर की सही व्यवस्था न होने पर पसीना आंखों में जाकर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
- **आर्थिक और ग्रामीण वर्ग:** **कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए सर्दियों में देखभाल करना थोड़ा आसान हो जाता है।** संसाधनों की कमी वाले परिवारों को मौसम की अनुकूलता के कारण रिकवरी के दौरान कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- **डॉक्टर की सलाह:** **मरीज की उम्र, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियां मौसम से अधिक महत्वपूर्ण होती हैं।** सर्जरी का निर्णय डॉक्टर द्वारा आंखों की वास्तविक जांच और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर लिया जाना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
मोतियाबिंद के ऑपरेशन को लेकर समाज में सर्दियों को प्राथमिकता देने के पीछे मुख्य रूप से मौसम की अनुकूलता और पसीने से होने वाले संक्रमण से जुड़े व्यावहारिक कारण हैं।

- **पसीने की समस्या:** **गर्मी के मौसम में अधिक पसीना आने के कारण आंखों में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।** यदि ऑपरेशन के बाद पसीना बहकर आंख में चला जाए तो हीलिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
- **पारंपरिक आदतें:** **ग्रामीण और संसाधनहीन परिवारों में सर्दियों के दौरान रिकवरी करना अधिक सुविधाजनक माना जाता है।** ठंडे तापमान में बैक्टीरिया की वृद्धि धीमी रहती है और नहते समय पानी से बचाव करना आसान होता है।
- **आधुनिक तकनीक:** **चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के कारण अब सालभर सुरक्षित सर्जरी संभव है।** आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वच्छता प्रबंधों ने मौसम की सीमाओं को समाप्त कर दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा माना जाता है?
आम तौर पर लोगों में ठंड के मौसम को सबसे अच्छा मानने की पुरानी धारणा है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा में यह सर्जरी सालभर कभी भी कराई जा सकती है।

### 2. गर्मी के मौसम में मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने से क्या नुकसान हो सकता है?
गर्मी में अत्यधिक पसीना आने के कारण यदि पसीना आंखों में चला जाए, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, खासकर यदि साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए।

### 3. सर्दियों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाना क्यों फायदेमंद माना जाता है?
ठंड में पसीना कम आता है, तापमान कम होने से बैक्टीरिया की वृद्धि कम होती है और मरीज के लिए नहाते समय आंखों में पानी जाने से बचना आसान होता है।

### 4. क्या ग्रामीण इलाकों में लोग सिर्फ ठंड के दिनों में ही ऑपरेशन करवाते हैं?
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में ठंड के दौरान ऑपरेशन कराने की धारणा अधिक देखने को मिलती है क्योंकि तब गर्मी की तुलना में प्रबंधन आसान होता है।

### 5. मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए डॉक्टर किस बात को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं?
डॉक्टर मरीज की आंखों की मौजूदा स्थिति, उसकी उम्र, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के साथ डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।

### 6. बेगूसराय में मोतियाबिंद के इलाज को लेकर जानकारी किसने दी है?
इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां बेगूसराय के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीश प्रकाश ने साझा की हैं।

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