# मिस्टर ग्रीन जैसे स्टोर पर बिक रहे पेप्टाइड्स की जांच में खुलासा, शीशियों में नहीं मिले सक्रिय तत्व

> दुकानों पर स्वास्थ्य और वजन घटाने के दावों के साथ बिक रहे पेप्टाइड्स की स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई है। कई नमूनों में दावा किए गए सक्रिय तत्व पूरी तरह से नदारद मिले हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/mr-green-jaise-new-york-stora-se-kharide-gae-peptaidsa-ki-laiba-jancha-men-nikala-nakali-samana-32460 · **Language:** Hindi
**Tags:** पेप्टाइड्स, लैब जांच, स्वास्थ्य धोखाधड़ी, मिस्टर ग्रीन, एफडीए, पूरक आहार, दवा सुरक्षा

स्वास्थ्य, वजन घटाने और शारीरिक रिकवरी के दावों के साथ सोशल मीडिया पर छाए पेप्टाइड्स अब आम दुकानों में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। न्यू यॉर्क शहर के मिस्टर ग्रीन नामक स्टोर से हासिल किए गए चार अलग-अलग तरह के पेप्टाइड्स की प्रयोगशाला जांच कराई गई। इसके लिए कुल 376.20 डॉलर का भुगतान किया गया था। दुकान के कर्मचारी ने इन शीशियों को बिना किसी लेबल वाले साधारण कागज के थैले में पैक करके दे दिया था। इन चार शीशियों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए दवाएं होने का दावा किया गया था। इनमें कम कामेच्छा के इलाज के लिए PT-141, मांसपेशियों की रिकवरी और चोट ठीक करने के लिए BPC-157, कोशिकीय मरम्मत के लिए NAD+ और वजन घटाने के लिए प्रयोग की जाने वाली रेटाट्रूटाइड शामिल थी। हालांकि, स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण के बाद जो परिणाम सामने आए, उन्होंने इन उत्पादों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

## प्रयोगशाला विश्लेषण और चौंकाने वाले नतीजे
इन पेप्टाइड शीशियों को विस्तृत जांच के लिए ऑस्टिन स्थित फिनरिक नामक स्टार्टअप के पास भेजा गया। फिनरिक एक ऐसी संस्था है जो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं और आम उपभोक्ताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करती है। यह कंपनी उत्पादों की शुद्धता, उनमें हानिकारक तत्वों की मौजूदगी और लेबल पर लिखी मात्रा का सत्यापन करती है। कुछ हफ्तों के बाद जब प्रयोगशाला से परिणाम आए, तो उनमें एक राहत की बात यह थी कि नमूनों में भारी धातुओं और एंडोटॉक्सिन का स्तर कम था। इसका अर्थ यह था कि ये शीशियां सीधे तौर पर जहरीली या तुरंत नुकसान पहुंचाने वाली नहीं थीं। लेकिन इसके साथ ही एक बेहद चिंताजनक खबर भी सामने आई कि इन शीशियों में वास्तव में कोई पेप्टाइड मौजूद ही नहीं था।

प्रयोगशाला द्वारा प्रत्येक पदार्थ की जांच करने पर पता चला कि शीशियों के अंदर उनके लेबल पर दर्ज सक्रिय तत्व बिल्कुल भी नहीं थे। उदाहरण के लिए, BPC-157 के रूप में बेची जा रही शीशी में BPC-157 का एक भी कण नहीं पाया गया। इस तरह के नकारात्मक नतीजों से दो मुख्य संभावनाएं जताई गईं। पहली संभावना यह है कि इन शीशियों पर गलत लेबल लगाए गए थे। दूसरी संभावना यह है कि निर्माण के समय इनमें सही सामग्री मौजूद रही होगी, लेकिन बाद में वे पूरी तरह से खराब हो गईं। पेप्टाइड्स तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए लगातार रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता होती है। अनुचित भंडारण और बिना तापमान नियंत्रण के रखने से इनके सक्रिय घटक पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

## उत्पादकों और परीक्षण करने वाली लैब्स का पक्ष
फिनरिक के लिए परीक्षण करने वाली मुख्य प्रयोगशाला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्को क्रॉस ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रक्रिया काफी सीधी होती है। मार्को क्रॉस ने कहा कि उनकी लैब केवल लेबल दावों का विश्लेषण करती है, जिसके तहत ग्राहक द्वारा भेजे गए नमूने का एक मानक के साथ मिलान करके सही यौगिक की पुष्टि की जाती है। हालांकि, नमूनों में सक्रिय तत्व न मिलने के बाद यह सटीक रूप से बता पाना मुश्किल है कि उन शीशियों के अंदर वास्तव में क्या भरा हुआ था।

दूसरी ओर, फिनरिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राफेल मैजोयर ने बताया कि जांच किए गए नमूने पूरी तरह से बेकार या निष्प्रभावी साबित हुए हैं। राफेल मैजोयर के अनुसार, पिछले तीन महीनों में इस तरह के परिणाम मिलने की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि उनका मानना है कि कंपनी का दायरा बढ़ने से अधिक नमूनों की जांच हो रही है, लेकिन इसके पीछे टर्नकी सेवाओं का तेजी से बढ़ना भी एक बड़ा कारण है। टर्नकी सेवाएं किसी भी व्यक्ति को बहुत आसानी से पेप्टाइड व्यवसाय शुरू करने की सुविधा देती हैं। राफेल मैजोयर ने बताया कि आज बाजार में ऐसे कई नए ब्रांड उभर रहे हैं जो एक ही मुख्य आपूर्तिकर्ता से घटिया सामान हासिल करते हैं, जिससे कई ब्रांडों के तहत एक जैसा खराब उत्पाद बिकने लगता है।

## अन्य विक्रेताओं और ब्रांडों की जांच में आई गड़बड़ी
दुकानों से खरीदे गए पेप्टाइड्स के परीक्षण में गड़बड़ी मिलने का यह इकलौता मामला नहीं है। पेप्टाइड क्रिटिक नामक रिसर्च पेप्टाइड विक्रेता निर्देशिका के संस्थापक जेफ कोल्हौन ने भी इसी तरह की जांच कराई थी। जेफ कोल्हौन ने मिस्टर ग्रीन की दुकान के पास ही स्थित स्मोकर्स वर्ल्ड नामक एक दुकान से आईएनडीआर लैब्स द्वारा बनाए गए पेप्टाइड्स खरीदे थे। उन्होंने रेटाट्रूटाइड की दो शीशियां और NAD+ की दो शीशियां खरीदकर उन्हें टेक्सास स्थित एनालिटिकल फॉर्मूलाशंस प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा।

टेक्सास की इस स्वतंत्र प्रयोगशाला ने अपने विश्लेषण में बताया कि वे शीशियों में मौजूद पदार्थों की सकारात्मक पहचान नहीं कर सके। इसका सीधा मतलब यह है कि या तो उत्पाद अत्यधिक दूषित थे या फिर वे इस हद तक खराब हो चुके थे कि उनके भीतर के घटकों को समझना संभव नहीं रह गया था। जेफ कोल्हौन ने जानकारी दी कि कई शोध पेप्टाइड विक्रेताओं को भी बिक्री से पहले अपने उत्पादों का परीक्षण करते समय ऐसे ही परिणाम मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब विक्रेता उत्पादों के बैच परीक्षण को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं, तो उपभोक्ताओं के लिए जोखिम बहुत अधिक बढ़ जाता है।

आईएनडीआर लैब्स से जब इस संबंध में जवाब मांगा गया तो कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके तुरंत बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट तक सार्वजनिक पहुंच को सीमित कर दिया और लॉगिन की व्यवस्था लागू कर दी। इससे पहले कंपनी ने अपने विश्लेषण प्रमाण पत्रों की सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी थी। आईएनडीआर लैब्स का दावा था कि उनके प्रमाण पत्र वैंगार्ड लेबोरेटरी द्वारा जारी किए गए थे, लेकिन वैंगार्ड लेबोरेटरी के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज जारी किया था।

## 3 अरब डॉलर का उभरता उद्योग और कानूनी खामियां
गड़बड़ियों के बावजूद यह उद्योग बेहद तेजी से फल-फूल रहा है। वित्तीय बाजार के विश्लेषकों का अनुमान है कि इस उद्योग का मूल्यांकन लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर और प्रसिद्ध पॉडकास्टर जो रोगन जैसी हस्तियों के समर्थन से पेप्टाइड्स की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है। हालांकि इनमें से कुछ पेप्टाइड्स जैसे इंसुलिन और GLP-1 दवाएं स्वीकृत श्रेणी में आती हैं, लेकिन बाजार में बिकने वाले अधिकांश चर्चित पेप्टाइड्स को मानक दवा स्वीकृति प्रक्रिया से नहीं गुजारा गया है।

दुकानों पर बिकने वाले पेप्टाइड्स के डिब्बों पर अक्सर केवल शोध उपयोग के लिए का बोर्ड लगा होता है। विक्रेता इस शब्दावली का उपयोग कानूनी देनदारी से बचने के लिए करते हैं। लेकिन जैसा कि प्रयोगशाला जांच से साबित होता है, शीशियों के अंदर क्या है इसकी कोई गारंटी नहीं होती। अमेरिका में इन्हें इंसानी सेवन के लिए बेचना कानूनी रूप से सही नहीं है क्योंकि इनके स्वास्थ्य लाभों के वैज्ञानिक प्रमाण बेहद कम हैं। इसके बावजूद हिम और मोची जैसे बड़े टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म भी पेप्टाइड्स की विस्तृत श्रृंखला बेचने की तैयारी कर रहे हैं।

## स्वास्थ्य जोखिम और विशेषज्ञों की चेतावनी
लुइसियाना स्थित गैर-लाभकारी संगठन अमेरिकन्स फॉर सेफ एंड इफेक्टिव मेडिसिन्स के कार्यकारी और अनुभवी फार्मासिस्ट फ्रेड मिल्स ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। फ्रेड मिल्स का मानना है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA को ऐसे काले बाजारों को तुरंत बंद करने की आवश्यकता है। वे लगातार लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी सुविधा स्टोर या अनधिकृत दुकान से पेप्टाइड खरीदने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

फार्मास्यूटिकल नियामक अनुपालन मामलों के विशेषज्ञ और वकील दर्शन कुलकर्णी ने बताया कि पारंपरिक दवा बिक्री उद्योग में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए जाते हैं। इनमें दृश्य निरीक्षण, बारकोडिंग और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी शामिल होती है। दर्शन कुलकर्णी ने कहा कि किसी छोटी दुकान पर उत्पाद बेचने वाले व्यक्ति को इन कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों की कोई जानकारी नहीं होती। यदि किसी शीशी में केवल नमक का पानी या सादा जल भरा हो तो उपभोक्ता का केवल पैसा बर्बाद होता है, लेकिन यदि उसमें कोई गलत सामग्री या मिलावटी रसायन मिला हो तो यह जानलेवा हो सकता है। उदाहरण के लिए, ब्रोंक्स में एक बिना लाइसेंस वाले मेडिकल स्पा में पेप्टाइड इंजेक्शन लेने के बाद एक महिला की मृत्यु हो चुकी है।

## नियामक प्रवर्तन और वर्तमान स्थिति
इस पूरे मामले पर FDA के एक प्रवक्ता ने बताया कि एजेंसी उन कंपनियों को चेतावनी जारी करती है जो केवल शोध उद्देश्यों के लिए या इंसान के सेवन के लिए नहीं लिखे उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं को बेचती हैं। इसके अलावा झूठे दावे करने वाली टेलीहेल्थ कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाती है। हालांकि, जब मिस्टर ग्रीन जैसी भौतिक दुकानों के खिलाफ की गई विशिष्ट कार्रवाई के बारे में सवाल पूछे गए, तो FDA की ओर से कोई सीधा उत्तर नहीं दिया गया।

हालांकि कुछ मामलों में सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। इस साल की शुरुआत में इंडियाना के साउथ बैंड में एक व्यक्ति को छह साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह व्यक्ति शोध के नाम पर चीन से अवैध रूप से पेप्टाइड्स आयात कर रहा था, जिनमें बाद में स्टेरॉयड की मिलावट पाई गई थी। वकील दर्शन कुलकर्णी का मानना है कि प्रवर्तन कार्रवाइयों की कमी का एक कारण यह सोच भी है कि बहुत अधिक नियमन से नवाचार बाधित होता है और मरीजों को स्वयं अपने उत्पादों का चयन करने की छूट मिलनी चाहिए। इस बीच, मिस्टर ग्रीन स्टोर ने अपनी खिड़की से पेप्टाइड का बड़ा मेन्यू हटा दिया है, लेकिन काउंटर के पास छोटा मेन्यू रखकर पेप्टाइड्स की बिक्री अब भी जारी रखी है।

## इसका आप पर असर
दुकानों से खरीदे जाने वाले अनधिकृत पेप्टाइड्स और सप्लीमेंट्स में कोई सक्रिय तत्व न होने से उपभोक्ताओं की सेहत और जेब दोनों पर सीधा असर पड़ता है।

- **आर्थिक नुकसान:** काउंटर पर बिकने वाले पेप्टाइड्स बिना किसी गारंटी के सैकड़ों डॉलर में बेचे जा रहे हैं। इन्हें खरीदने वाले लोगों का पैसा पूरी तरह से पानी में बह जाता है।
- **स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम:** खराब या गलत लेबल वाले पेप्टाइड्स में अज्ञात रसायन या मिलावट हो सकती है। इनका सेवन करने से जानलेवा साइड इफेक्ट्स और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
- **फर्जी विज्ञापनों का जाल:** सोशल मीडिया पर मिलने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दुकानों से ऐसे उत्पाद खरीदना खतरनाक हो सकता है।
- **नियामक चेतावनी:** रिसर्च यूज ओनली लिखे उत्पादों का सेवन इंसानों के लिए कानूनी और सुरक्षित नहीं है। उपभोक्ता केवल प्रमाणित मेडिकल दुकानों और डॉक्टर के पर्चे पर ही दवाएं खरीदें।

## ऐसा क्यों हुआ
दुकानों में बिकने वाले पेप्टाइड्स की गुणवत्ता में भारी गिरावट और उनमें सक्रिय तत्वों की कमी के पीछे कई बड़े कारण मौजूद हैं।

- **लापरवाह आपूर्ति श्रृंखला:** टर्नकी सेवाएं आम लोगों को बिना किसी अनुभव के पेप्टाइड ब्रांड शुरू करने की अनुमति देती हैं। ये सभी ब्रांड एक ही घटिया आपूर्तिकर्ता से माल प्राप्त करते हैं।
- **भंडारण और तापमान नियंत्रण का अभाव:** पेप्टाइड्स को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता होती है। आम दुकानों में अनुचित तापमान के कारण इनके सक्रिय तत्व नष्ट हो जाते हैं।
- **कानूनी खामियों का फायदा:** उत्पादक अपने डिब्बों पर रिसर्च यूज़ ओनली लिखकर कानूनी देनदारी से बचने का प्रयास करते हैं, जिससे बिक्री बिना कड़े नियमों के जारी रहती है।
- **बैच टेस्टिंग का अभाव:** अधिकांश विक्रेता लागत बचाने के लिए प्रयोगशाला में बैच टेस्टिंग नहीं कराते, जिससे खराब और मिलावटी सामान सीधे ग्राहकों तक पहुंच जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मिस्टर ग्रीन स्टोर से खरीदे गए पेप्टाइड्स की जांच में क्या निकला?
प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि शीशियों के अंदर उनके लेबल पर दर्ज BPC-157 या रेटाट्रूटाइड जैसे सक्रिय तत्व बिल्कुल मौजूद नहीं थे।

### 2. क्या इन शीशियों में कोई जहरीले या हानिकारक तत्व थे?
नमूनों में भारी धातुओं और एंडोटॉक्सिन का स्तर कम पाया गया, जिसका अर्थ है कि वे तुरंत जहरीले नहीं थे, लेकिन वे पूरी तरह से बेअसर और निष्क्रिय थे।

### 3. पेप्टाइड्स खराब क्यों हो जाते हैं?
पेप्टाइड्स तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। उन्हें रेफ्रिजरेशन की जरूरत होती है और अनुचित भंडारण से उनके सक्रिय घटक पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

### 4. दुकानदार कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए क्या करते हैं?
दुकानदार अपने उत्पादों पर केवल शोध उपयोग के लिए (Research use only) का बोर्ड लगाकर कानूनी देनदारी से बचने की कोशिश करते हैं।

### 5. आईएनडीआर लैब्स के प्रमाण पत्रों का क्या सच सामने आया?
आईएनडीआर लैब्स ने वैंगार्ड लेबोरेटरी द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने का दावा किया था, लेकिन वैंगार्ड ने ऐसा कोई भी दस्तावेज जारी करने से साफ इनकार कर दिया।

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