मुंह के छालों को न करें नजरअंदाज, डॉ. संजय काला से जानें ओरल कैंसर के 5 बड़े चेतावनी संकेत अगर आपके मुंह का छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो यह सामान्य समस्या नहीं बल्कि ओरल कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने इस घातक बीमारी के 5 प्रमुख लक्षण साझा किए हैं ताकि समय रहते इसका पता लगाया जा सके। मुंह में छाले होना एक बेहद आम समस्या है, जिसे अक्सर लोग बहुत ही सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब भी मुंह के अंदर कोई घाव या छाला होता है, तो ज्यादातर लोग या तो घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं या फिर किसी नजदीकी मेडिकल स्टोर से कोई साधारण दवा लेकर उसके खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतजार करते हैं। लेकिन यदि आपके मुंह का यह छाला लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो इस स्थिति को हल्के में लेना आपके स्वास्थ्य पर बहुत भारी पड़ सकता है। विशेष रूप से उन लोगों को बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है जो नियमित रूप से गुटखा, खैनी, सिगरेट या शराब का सेवन करते हैं। ऐसे लोगों के लिए मुंह के भीतर होने वाला कोई भी छोटा बदलाव या असामान्य लक्षण खतरे की घंटी हो सकता है। यह बदलाव ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कानपुर के प्रसिद्ध जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला बताते हैं कि तंबाकू और शराब का अत्यधिक सेवन करने वाले लोगों में मुंह के कैंसर का खतरा अन्य लोगों की तुलना में बहुत अधिक होता है। शुरुआत में इस गंभीर बीमारी के लक्षण बेहद मामूली और दर्द रहित होते हैं, जिसके कारण लोग इन्हें आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। डॉ. संजय काला के अनुसार, यदि समय रहते इस बीमारी की जांच करा ली जाए, तो शुरुआती दौर में ही इसका पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीज के इलाज के परिणाम बेहद सकारात्मक और बेहतर हो सकते हैं। दो हफ्ते से अधिक समय तक रहने वाले छालों का खतरा सामान्य तौर पर होने वाले मुंह के छाले, जो पेट की गड़बड़ी या गलती से जीभ कट जाने के कारण होते हैं, वे कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर आपके मुंह या जीभ पर कोई ऐसा छाला है जो दो हफ्ते से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। यदि कोई छाला बार-बार एक ही स्थान पर दोबारा बन रहा है या फिर उस घाव का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को इस तरह के पुराने छालों को सामान्य समझने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस और मुंह का कम खुलना गुटखा, सुपारी और खैनी का लगातार सेवन करने से मुंह के अंदर मौजूद मुलायम ऊतक यानी टिशू धीरे-धीरे बहुत सख्त और कड़े होने लगते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहा जाता है। इस बीमारी के कारण मुंह के अंदर लचीलापन खत्म हो जाता है और धीरे-धीरे व्यक्ति का मुंह पूरा खुलना बंद हो जाता है। शुरुआती दौर में मरीज को केवल पान या गुटखा चबाने में थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे यह समस्या बढ़ती है, वैसे-वैसे सामान्य भोजन करने, खाना निगलने और साफ बोलने में भी गंभीर कठिनाई होने लगती है। यदि आपको अपने मुंह के खुलने की क्षमता में थोड़ी भी कमी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। सफेद और लाल रंग के चकत्तों को न करें नजरअंदाज गालों के अंदरूनी हिस्से, मसूड़ों या फिर जीभ के ऊपर लाल या सफेद रंग के पैच यानी चकत्ते दिखाई देना भी एक बेहद गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है। चिकित्सा की भाषा में सफेद चकत्तों को ल्यूकोप्लाकिया कहा जाता है और लाल चकत्तों को एरिथ्रोप्लाकिया के नाम से जाना जाता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि मुंह में दिखने वाला हर सफेद या लाल चकत्ता कैंसर ही हो, लेकिन इनमें से कुछ चकत्ते भविष्य में कैंसर का रूप ले सकते हैं। इसलिए, मुंह के भीतर होने वाले ऐसे किसी भी रंग के बदलाव की समय पर जांच कराना बेहद आवश्यक है। तीखा खाने पर जलन और मुंह में लगातार संवेदनशीलता जब भी आप कोई तीखा, मसालेदार या चटपटा खाना खाते हैं और आपके मुंह में बहुत तेज जलन होने लगती है, या फिर मुंह के किसी खास हिस्से में लगातार दर्द और संवेदनशीलता बनी रहती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि यह समस्या लगातार बनी हुई है और घरेलू उपायों से भी ठीक नहीं हो रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके अपने मुंह के अंदरूनी हिस्से की गहन जांच करानी चाहिए। कई बार लोग तंबाकू छोड़ देते हैं, लेकिन इसके बावजूद यदि ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में पूरी जानकारी देना बेहद जरूरी होता है। बिना वजह खून आना और खाना निगलने में कठिनाई ओरल कैंसर के कुछ अन्य और अधिक गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं, जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। जैसे कि मुंह से बिना किसी स्पष्ट कारण या चोट के खून आना, जीभ या मसूड़ों में लगातार दर्द बने रहना, अचानक आवाज में भारीपन या बदलाव आ जाना, या फिर खाना निगलने में अचानक से तेज दर्द या रुकावट महसूस होना। इसके अतिरिक्त, यदि आपको अपनी गर्दन में कोई गांठ या सूजन महसूस होती है, या मुंह के किसी विशेष हिस्से में लगातार सुन्नपन का अहसास होता है, तो यह भी बेहद खतरनाक संकेत हो सकते हैं जिनकी तुरंत जांच की जानी चाहिए। डॉ. संजय काला की सलाह: खुद करें जांच और रहें सुरक्षित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला के अनुसार, जो लोग तंबाकू, सिगरेट या शराब का नियमित रूप से सेवन करते हैं, उन्हें समय-समय पर खुद भी अपने मुंह की जांच करनी चाहिए। इसके लिए वे शीशे के सामने खड़े होकर रोशनी में अपने गालों के अंदरूनी हिस्से, जीभ के ऊपर और नीचे के भाग, मसूड़ों तथा तालू को ध्यान से देख सकते हैं। यदि इस दौरान किसी भी तरह का असामान्य घाव, सफेद-लाल चकत्ता, सख्तपन या सूजन नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर बायोप्सी या अन्य महत्वपूर्ण जांच करवा सकते हैं। डॉ. संजय काला स्पष्ट रूप से बताते हैं कि मुंह में छाला होने का यह मतलब कतई नहीं है कि आपको कैंसर ही है। लेकिन दो सप्ताह से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाला कोई भी घाव निश्चित रूप से डॉक्टरी जांच की मांग करता है। तंबाकू और शराब का पूरी तरह से परित्याग करना ही मुंह के कैंसर से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। इसका आप पर असर मुंह के कैंसर के लक्षणों की पहचान करने से शुरुआती चरण में ही इस गंभीर बीमारी का इलाज संभव हो सकता है, जिससे मरीजों की जान बचाई जा सकती है। • भारत में: तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों का सेवन करने वाले करोड़ों नागरिकों को अपने मुंह के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। समय पर लक्षणों को पहचान कर वे कैंसर जैसी घातक स्थिति से खुद को बचा सकते हैं। • कानपुर में: कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में गुटखा व तंबाकू के अत्यधिक उपभोग को देखते हुए स्थानीय निवासियों को डॉ. संजय काला की इस सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसी भी असामान्य लक्षण के दिखने पर तुरंत जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज या नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ मुंह के कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से तंबाकू, गुटखा और अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होती है, जो मुंह के संवेदनशील ऊतकों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। • हानिकारक रसायनों का प्रभाव: गुटखा और सिगरेट में मौजूद जहरीले तत्व मुंह के अंदरूनी हिस्से की त्वचा को लगातार प्रभावित करते हैं। इससे कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं जो धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेती हैं। • लक्षणों की अनदेखी: अधिकांश लोग मुंह के छालों को पेट की गर्मी या सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस कारण बीमारी का पता बहुत देर से चलता है जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। • नियमित जांच का अभाव: लोगों में मुंह की नियमित जांच करने की आदत नहीं होती है। शीशे के सामने खड़े होकर खुद जांच करने से शुरुआती बदलावों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। सवाल-जवाब 1. मुंह का छाला कब कैंसर का रूप ले सकता है? यदि कोई छाला दो हफ्ते से अधिक समय तक ठीक नहीं होता है या एक ही जगह बार-बार होता है, तो वह कैंसर का संकेत हो सकता है। 2. ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस क्या है? तंबाकू और गुटखे के सेवन से मुंह के अंदरूनी ऊतकों का सख्त हो जाना ही ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस है, जिससे मुंह का खुलना कम हो जाता है। 3. ल्यूकोप्लाकिया और एरिथ्रोप्लाकिया क्या होते हैं? ये मुंह के अंदर होने वाले सफेद (ल्यूकोप्लाकिया) और लाल (एरिथ्रोप्लाकिया) रंग के चकत्ते हैं, जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकते हैं। 4. मुंह के कैंसर से बचने का सबसे प्रभावी उपाय क्या है? तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब का पूरी तरह से त्याग करना ही इससे बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है। https://trendkia.com/health/munha-ke-chhalon-ko-na-karen-najaraandaja-dr-sanjay-kala-se-janen-orala-kainsara-ke-5-bare-chetavani-snketa-31543 TrendKia — Har trend, sabse pehle.