# नाड़ी देखकर बीमारी पकड़ लेते हैं गोंडा के यह वैद्य, जड़ी-बूटियों के भरोसे बलरामपुर-बहराइच तक से आ रहे मरीज

> गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बिना किसी अस्पताल के, अपने घर पर ही नाड़ी परीक्षण और जड़ी-बूटियों से इलाज करते हैं, जिनके पास बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच से भी रोज मरीज पहुंचते हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/nari-dekhakara-bimari-pakara-lete-hain-gonda-ke-yaha-vaidya-jari-butiyon-ke-bharose-balrampur-bahraich-taka-se-a-rahe-marija-28716 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोंडा वैद्य, आयुर्वेदिक इलाज, जड़ी बूटी उपचार, नाड़ी परीक्षण, जोड़ों का दर्द, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य

गोंडा जिले में एक ऐसे वैद्य हैं जिनके पास न कोई बड़ा अस्पताल है, न कोई महंगी जांच मशीन, फिर भी उनके दरवाजे पर रोज सुबह से मरीजों की भीड़ लग जाती है। नाम है वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति, जो सालों से सिर्फ पारंपरिक आयुर्वेद और घर की बनाई जड़ी-बूटियों के सहारे लोगों की तकलीफ दूर कर रहे हैं। खास बात यह है कि इलाज कराने सिर्फ गोंडा के लोग नहीं आते, बल्कि बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे पड़ोसी जिलों से भी मरीज रोजाना यहां पहुंचते हैं, यानी उनकी पहचान अब जिले की सीमा से बाहर तक फैल चुकी है।

## घर को ही बना लिया इलाज केंद्र
प्रजापति के पास इलाज के लिए न कोई बड़ा अस्पताल है, न कोई आधुनिक सेंटर, वह बरसों से अपने घर पर बैठकर ही मरीजों को देखते आ रहे हैं। उनकी जांच का तरीका आज के डॉक्टरों से बिल्कुल अलग है, वह पहले मरीज की नाड़ी थामकर बीमारी भांपने की कोशिश करते हैं और उसके बाद ही यह तय करते हैं कि किस जड़ी-बूटी की जरूरत है। यह हुनर उन्हें किसी मेडिकल कॉलेज ने नहीं, बल्कि वैद्यों के अपने पारंपरिक समाज ने सिखाया है, जहां यह ज्ञान बरसों से गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है।

## घर पर ही तैयार होती हैं दर्जनों औषधियां
उनके घर में ही कई तरह की आयुर्वेदिक औषधियां और हर्बल पाउडर बनाए जाते हैं। इनमें जंगली शतावर, बेल की गिरी का चूर्ण, करेले का पाउडर, नीम की पत्ती और छाल से बना चूर्ण, अश्वगंधा, जराकुश और तुलसी पंचांग जैसी सामग्री शामिल है। हर मरीज को यह औषधियां एक जैसी नहीं, बल्कि उसकी बीमारी और शरीर की स्थिति देखकर अलग-अलग मात्रा और तरीके से दी जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पुरानी आयुर्वेदिक किताबों में बताया गया है।

## जोड़ों के दर्द से सर्दी-खांसी तक, सबसे ज्यादा भीड़ किनकी
प्रजापति बताते हैं कि उनके पास सबसे ज्यादा जोड़ों के दर्द, पेट से जुड़ी दिक्कतों, त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम और शरीर की सामान्य कमजोरी के मरीज पहुंचते हैं, यानी ज्यादातर वही परेशानियां जिनमें लोग महंगे इलाज से पहले घरेलू और पारंपरिक नुस्खे आजमाना चाहते हैं। उनका कहना है कि आयुर्वेदिक तरीके से कई मरीजों को राहत मिल जाती है, लेकिन वह इसे हर बीमारी का इलाज नहीं मानते, इसलिए बीमारी गंभीर दिखते ही मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास भेज देते हैं ताकि देरी की वजह से नुकसान न हो।

## चार जिलों से जुड़ा भरोसे का रिश्ता
गोंडा के अलावा बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और आसपास के कई इलाकों से लोग सिर्फ इस भरोसे पर यहां पहुंचते हैं कि पुरानी पद्धति से उन्हें राहत मिल सकती है। बड़े अस्पतालों और आधुनिक मशीनों के इस दौर में भी जड़ी-बूटियों और नाड़ी परीक्षण पर टिका यह यकीन कम नहीं हुआ है, यही वजह है कि इस छोटे से घरेलू इलाज केंद्र पर मरीजों की आवाजाही रोज बनी रहती है।

## इसका आप पर असर
अगर आप जोड़ों के दर्द, त्वचा रोग या सर्दी-खांसी जैसी आम परेशानी से जूझ रहे हैं, तो यह खबर बताती है कि महंगे इलाज के अलावा भी विकल्प मौजूद हैं, बशर्ते बीमारी गंभीर न हो।

- **भारत में:** ग्रामीण और छोटे कस्बों में अब भी बड़ी संख्या में लोग महंगे अस्पतालों की जगह सस्ते और पारंपरिक इलाज को पहली पसंद बनाते हैं। ऐसे में आम बीमारियों के लिए भरोसेमंद पारंपरिक वैद्यों तक पहुंच बनाए रखना कई परिवारों के लिए राहत की बात है।
- **गोंडा में:** गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच के मरीजों को अपने ही इलाके में बिना बड़े अस्पताल गए इलाज मिल रहा है। इससे इलाज पर आने-जाने का खर्च और समय दोनों बचता है।
- **सावधानी जरूरी:** वैद्य खुद मानते हैं कि गंभीर बीमारी में डॉक्टर की जांच जरूरी है। मरीजों को शुरुआत में लक्षण पहचानकर यह तय करना चाहिए कि घरेलू इलाज कब तक ठीक है और डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी हो जाता है।
- **जड़ी-बूटी चुनने में सतर्कता:** अश्वगंधा, नीम, करेला जैसी औषधियां आम हैं, लेकिन मात्रा और तरीका हर मरीज के लिए अलग होता है। बिना जानकारी के खुद से मात्रा तय करने के बजाय अनुभवी वैद्य या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. गोंडा के इस वैद्य का नाम क्या है?
इनका नाम वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति है।

### 2. वह मरीजों की बीमारी कैसे पहचानते हैं?
वह मरीज की नाड़ी थामकर बीमारी का अंदाजा लगाते हैं और उसी हिसाब से जड़ी-बूटी तय करते हैं।

### 3. उनके पास किन जिलों से मरीज आते हैं?
गोंडा के अलावा बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे जिलों से रोजाना मरीज आते हैं।

### 4. वह कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां तैयार करते हैं?
जंगली शतावर, बेल की गिरी का चूर्ण, करेले का पाउडर, नीम की पत्ती और छाल का चूर्ण, अश्वगंधा, जराकुश और तुलसी पंचांग जैसी औषधियां तैयार करते हैं।

### 5. उनके पास सबसे ज्यादा किन बीमारियों के मरीज आते हैं?
सबसे ज्यादा जोड़ों के दर्द, पेट की परेशानी, त्वचा रोग, सर्दी-खांसी और सामान्य कमजोरी के मरीज आते हैं।

### 6. क्या वह हर बीमारी का इलाज करते हैं?
नहीं, गंभीर बीमारी होने पर वह मरीजों को तुरंत डॉक्टर से जांच कराने की सलाह देते हैं।

## प्रेरणा और सबक
बिना किसी बड़े अस्पताल या संसाधन के भी भरोसा कैसे कमाया जा सकता है, वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति की कहानी इसकी अच्छी मिसाल है।

- **परंपरा को जिंदा रखना:** उन्होंने अपने समाज से मिली विद्या को छोड़ा नहीं, बल्कि उसी को अपने काम का आधार बनाया।
- **सीमित संसाधनों में भी सेवा:** बड़े अस्पताल या मशीन के बिना भी अपने घर से सालों तक लोगों की मदद करते रहना दिखाता है कि इच्छाशक्ति संसाधनों से बड़ी होती है।
- **ईमानदारी से काम की सीमा बताना:** हर बीमारी को ठीक करने का दावा करने की बजाय गंभीर मामलों में डॉक्टर के पास भेजना जिम्मेदार व्यवहार की सीख देता है।
- **निरंतरता से बना भरोसा:** बरसों तक एक ही तरीके से, एक ही जगह सेवा देने से चार जिलों के लोगों का भरोसा जीता जा सकता है, यही उनकी कहानी सिखाती है।

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