# बिहार में नेपाल की बाढ़ के बाद मंडराया मछली खाने का खतरा, प्रशासन की सख्त चेतावनी

> नेपाल में आई बाढ़ के कारण बिहार की नदियों में पहुंची अनजान और अजीबोगरीब मछलियों को खाने से लोग बीमार पड़ने लगे हैं। प्रशासन ने स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए ऐसी मछलियों के सेवन पर रोक लगा दी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/nepala-ki-barha-ke-bada-mndaraya-machhali-khane-ka-khatara-prashasana-ki-chetavani-25768 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिहार बाढ़, बगहा मछली खतरा, गोपालगंज गंडक नदी, मत्स्य विभाग बिहार, चांदनी कुमारी

बिहार की कई नदियों में नेपाल से आए बाढ़ के पानी के कारण जलीय जीवों की आवाजाही में बड़ा बदलाव आया है। तेज बहाव के साथ विभिन्न जलस्रोतों की मछलियां नए इलाकों तक पहुंच रही हैं, जिन्हें लेकर स्वास्थ्य और प्रशासन ने गंभीर चिंता जताई है। पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में बाढ़ के पानी में तैरती मिली अनोखी और अज्ञात किस्म की मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार पड़ने की घटना सामने आई है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है और बाढ़ के दौरान मिलने वाली किसी भी अनजान मछली से दूर रहने की हिदायत दी है।

## मत्स्य विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देश
बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि बाढ़ के पानी के साथ बहकर आने वाली किसी भी अपरिचित मछली को न तो पकड़ा जाए और न ही खरीदा या खाया जाए। इसी तरह का परामर्श बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मत्स्य प्रभाग की तरफ से भी सार्वजनिक हित में प्रसारित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक विभागीय स्तर पर ऐसी मछलियों की प्रजाति और उनकी सुरक्षा की मु मुकम्मल पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक उनका सेवन करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है।

## बाढ़ के पानी में क्यों खतरनाक हो जाती हैं मछलियां
विभागीय विशेषज्ञों के अनुसार, जब भारी बाढ़ आती है तो तालाबों, झीलों और नदियों की मछलियां उफान के कारण अपने प्राकृतिक ठिकानों से बहुत दूर निकल जाती हैं। इस दौरान उनके मार्ग में गंदे नाले, कचरा, मृत जीव-जंतु और दूषित जल आता है, जिससे वे हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की चपेट में आ सकती हैं। यही वजह है कि बाढ़ के पानी से मिलने वाली हर मछली को खाने योग्य सुरक्षित मान लेना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। जब तक जलस्तर सामान्य नहीं होता और नदियां अपनी पुरानी स्थिति में नहीं लौटतीं, तब तक प्रभावित क्षेत्रों से पकड़ी गई मछलियों के सेवन से बचना ही समझदारी है।

## बीमार पड़ने पर इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
यदि किसी व्यक्ति ने अनजाने में बाढ़ के पानी से निकाली गई मछली का सेवन कर लिया है और उसे उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन, चक्कर आना, तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें महसूस हो रही हैं, तो उसे बिल्कुल भी टालना नहीं चाहिए। ऐसे किसी भी लक्षण के प्रकट होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है ताकि समय पर उचित इलाज मिल सके।

## गोपालगंज में गंडक नदी का बढ़ा जलस्तर और बड़ी मछलियां
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से गंडक नदी का जलस्तर काफी ऊपर चला गया, जिसके परिणामस्वरुप गोपालगंज के इलाकों में भी भारी-भरकम मछलियां बहकर आ गईं। स्थानीय मछुआरों के मुताबिक इन मछलियों का वजन पंद्रह किलो से लेकर पचास किलो से भी ज्यादा दर्ज किया गया। इस दौरान बराली यानी वालैगो कैटफिश, ग्रास कार्प, गोइटा यानी गूंच और रोहू जैसी मछलियां बड़ी संख्या में देखी गईं। तेज बहाव के कारण इनमें से कई मछलियां पकड़े जाने से पहले ही मृत हो चुकी थीं। मंगलपुर घाट पर मछलियों का भारी जखीरा इकट्ठा हुआ, जिन्हें बाद में पश्चिम बंगाल के बाजारों में भेजने की बात सामने आई। इससे स्थानीय मछुआरों को कुछ समय के लिए आर्थिक लाभ जरूर मिला, लेकिन गंडक नदी का उग्र रूप अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है।

## प्रशासन की मुस्तैदी और अफवाहों से दूरी की अपील
खतरे को भांपते हुए गोपालगंज प्रशासन ने छोटी नावों के संचालन पर रोक लगा दी है और लोगों को नदी के किनारों के नजदीक जाने से सख्त मना किया है। इसके अलावा बाढ़ के पानी के साथ लकड़ी और रसोई गैस सिलेंडर जैसी वस्तुएं बहकर आने की खबरें भी मिली हैं। नदी में मानव शव बहने की कुछ स्थानीय अफवाहों के बाद प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने व्यापक खोज अभियान चलाया, लेकिन ऐसी किसी भी बात की पुष्टि नहीं हुई। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी अनजान जलीय जीव की खुद से पहचान करने का जोखिम न उठाएं। यदि मछली की सुरक्षा को लेकर कोई भी संदेह है, तो उसे खाने के बजाय तुरंत मत्स्य विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

## इसका आप पर असर
बिहार में बाढ़ के पानी के साथ आई अनजान मछलियों के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।

- **भारत में:** बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आम नागरिकों को किसी भी अपरिचित या बहकर आई मछली को खाने से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि फूड पॉइजनिंग और संक्रमण से बचाव हो सके।
- **बिहार में:** पश्चिम चंपारण और गोपालगंज समेत गंडक व अन्य नदियों के पास रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए छोटी नौकाओं के प्रयोग से बचना चाहिए और नदी के करीब नहीं जाना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. बिहार में बाढ़ के बाद किस प्रकार की मछलियों को खाने से मना किया गया है?
प्रशासन ने बाढ़ के पानी के साथ बहकर आने वाली और स्थानीय लोगों द्वारा पहचानी न जाने वाली सभी अनजान मछलियों को खाने से मना किया है।

### 2. बगहा में प्रशासन की तरफ से किसने चेतावनी जारी की है?
बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी ने लोगों को बाढ़ के पानी की मछलियां खाने से बचने की अपील की है।

### 3. गोपालगंज में गंडक नदी के पानी के साथ कितनी बड़ी मछलियां आई हैं?
स्थानीय मछुआरों के अनुसार गोपालगंज में आई मछलियों का वजन पंद्रह किलो से लेकर पचास किलो से अधिक तक दर्ज किया गया है।

### 4. बाढ़ की मछलियां खाने से क्या स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

### 5. गोपालगंज प्रशासन ने नदी के पास जाने को लेकर क्या कदम उठाया है?
प्रशासन ने गंडक नदी में छोटे नावों के परिचालन पर रोक लगा दी है और लोगों को नदी के पास जाने से चेतावनी दी है।

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