नींद में अचानक आने वाले झटके क्या किसी बीमारी का संकेत हैं या सामान्य प्रक्रिया? सोते समय शरीर में अचानक झटका लगने की समस्या को मेडिकल भाषा में हिप्निक जर्क कहा जाता है। जानिए इसके होने के पीछे के मुख्य कारण और यह किन परिस्थितियों में गंभीर हो सकता है। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप गहरी नींद में जाने ही वाले हों और अचानक आपको ऐसा महसूस हो जैसे आप किसी ऊंचे स्थान से नीचे गिर रहे हैं। इसके साथ ही शरीर में एक जोरदार झटका लगता है, आपके हाथ-पैर अचानक हरकत में आ जाते हैं और आपकी आंखें एकदम से खुल जाती हैं। यह अनुभव काफी लोगों को होता है और चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे हाइपनिक जर्क या स्लीप स्टार्ट के नाम से जाना जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तब घटित होती है जब हमारा शरीर पूरी तरह से जागने की अवस्था से धीरे-धीरे नींद की शुरुआती अवस्था में प्रवेश कर रहा होता है। हालांकि इस प्रकार के झटकों को महसूस करने के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या यह किसी अंदरूनी बीमारी का शुरुआती संकेत है या फिर एक सामान्य शारीरिक क्रिया। इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ. जयदीप बंसल, प्रधान निदेशक एवं एचओडी न्यूरोलॉजी, फोर्टिस, शालीमार बाग ने बताया है कि यह स्थिति सामान्य है या किसी विकार का लक्षण। चिकित्सक की राय और इसके पीछे की प्रक्रिया विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर मामलों में इस तरह के शारीरिक झटके पूरी तरह से सामान्य होते हैं और इनसे किसी गंभीर बीमारी का कोई संबंध नहीं होता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर सोते वक्त इस तरह की हरकतें क्यों होती हैं। जब हमारा मस्तिष्क जागने की स्थिति से नींद की अवस्था की तरफ बढ़ रहा होता है, तो कभी-कभी मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच तालमेल में गड़बड़ होने के कारण गलत सिग्नल प्रवाहित हो जाता है। ऐसी स्थिति में दिमाग उस हल्के कंपन को ऊंचाई से नीचे गिरने का संकेत समझ लेता है और शरीर को तुरंत बचाने या जगाने के लिए मांसपेशियों को अचानक झटका दे देता है। किन कारणों से बढ़ जाते हैं ऐसे झटके सामान्य तौर पर होने वाले ये झटके कुछ खास आदतों या शारीरिक स्थितियों के कारण अधिक बार महसूस होने लगते हैं। यदि आपकी नींद पूरी नहीं हो पा रही है या आपका दैनिक स्लीप साइकल पूरी तरह से बिगड़ चुका है, तो यह समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा अत्यधिक मानसिक तनाव, किसी प्रकार की चिंता या दिनभर की भारी थकान भी इसका एक बड़ा कारण बनती है। शाम के समय अत्यधिक मात्रा में चाय, कॉफी या अन्य कैफीनयुक्त पदार्थों का सेवन करने से भी शरीर सक्रिय रहता है। रात को सोने से ठीक पहले स्मार्टफोन, लैपटॉप या अन्य स्क्रीनों का अधिक उपयोग करना इस स्थिति को और अधिक बढ़ावा देता है। देर रात तक जागने की आदत और अनियमित समय पर सोना भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल है। कब इस समस्या को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज यदि इस तरह के झटके बहुत कभी-कभार ही महसूस होते हैं, तो इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं होती है। लेकिन यदि ये झटके बहुत अधिक बार आने लगे हैं और हर रात आपकी नींद बार-बार टूट जाती है, जिसके परिणामस्वरूप आपको पूरे दिनभर गंभीर थकान, मानसिक चिड़चिड़ापन या नींद की भारी कमी महसूस होती है, तो इसके वास्तविक कारण का पता लगाना बेहद जरूरी हो जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में बार-बार होने वाली ये अनैच्छिक हरकतें दौरे पड़ने, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम, पीरियोडिक लिम्ब मूवमेंट डिसऑर्डर या अन्य कई तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती हैं। डॉक्टर से संपर्क करने के आवश्यक लक्षण यदि सोते समय आने वाले इन झटकों के साथ-साथ चक्कर आने की समस्या, जीभ कट जाने की घटना, पेशाब पर नियंत्रण न रहने की स्थिति, नींद से उठने के बाद भ्रम की स्थिति या याददाश्त में गड़बड़ दिखाई दे, तो बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा यदि दिन के समय भी बिना सोए अचानक शरीर में झटके महसूस होने लगें, तब भी चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य हो जाता है। झटकों की समस्या से बचने के लिए क्या उपाय अपनाएं इस तरह की समस्याओं से बचाव के लिए जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव करना फायदेमंद होता है। रोजाना एक ही निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालें। अपने शरीर के लिए हर दिन सात से आठ घंटे की पूरी और गहरी नींद सुनिश्चित करें। शाम छह बजे के बाद चाय, कॉफी और किसी भी प्रकार के एनर्जी ड्रिंक के सेवन से पूरी तरह बचें। रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले अपने मोबाइल फोन और अन्य स्क्रीनों का इस्तेमाल बंद कर दें। इसके अलावा रात को बिस्तर पर जाने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग, गहरी सांस लेने के व्यायाम या अन्य रिलैक्सेशन तकनीकों का अभ्यास करें। इसका आप पर असर नींद के दौरान अचानक आने वाले झटकों और नींद की गुणवत्ता का सीधा असर आपकी दिनभर की कार्यक्षमता और मानसिक सेहत पर पड़ता है। • भारत में: अनियमित जीवनशैली और अत्यधिक स्क्रीन समय के कारण यह समस्या आम होती जा रही है, जो युवाओं में तनाव और थकान बढ़ा रही है। • दैनिक जीवन पर प्रभाव: रोजाना पर्याप्त नींद न मिलने से काम पर फोकस कम होता है और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। • समय पर सुधार: सोने के समय में अनुशासन रखकर और कैफीन कम करके इस परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। • चिकित्सकीय सलाह: यदि यह समस्या लगातार बनी रहे और रोजमर्रा की नींद में बाधा डाले, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। ऐसा क्यों हुआ सोते समय अचानक झटके लगने की यह घटना मुख्य रूप से मस्तिष्क की तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली और नींद के शुरुआती चरणों में होने वाले बदलावों से जुड़ी होती है। • मस्तिष्क का सिग्नल: जब शरीर जागने की स्थिति से विश्राम अवस्था में जाता है, तो मांसपेशियां शिथिल होती हैं जिसे दिमाग गलत संकेत के रूप में समझ लेता है। • तनाव और थकान: अत्यधिक शारीरिक थकान, मानसिक चिंता और अनियमित दिनचर्या इस प्राकृतिक प्रक्रिया को और अधिक तीव्र कर देती है। • कैफीन का असर: शाम या रात के वक्त अत्यधिक चाय और कॉफी पीने से तंत्रिका तंत्र उत्तेजित रहता है, जिससे झटके आने की संभावना बढ़ जाती है। • स्क्रीन का प्रभाव: सोने से ठीक पहले मोबाइल या लैपटॉप की नीली रोशनी के संपर्क में रहने से मस्तिष्क का स्लीप साइकल गड़बड़ा जाता है। सवाल-जवाब 1. सोते समय अचानक आने वाले झटके को मेडिकल भाषा में क्या कहते हैं? इसे मेडिकल भाषा में हिप्निक जर्क या स्लीप स्टार्ट कहा जाता है। 2. यह समस्या आमतौर पर कब होती है? यह तब होती है जब हमारा शरीर जागने की अवस्था से नींद की अवस्था में प्रवेश कर रहा होता है। 3. क्या नींद के ये झटके किसी बीमारी का संकेत होते हैं? ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह सामान्य होते हैं और किसी बीमारी का संकेत नहीं होते हैं। 4. किन कारणों से यह समस्या बढ़ जाती है? नींद पूरी न होने, तनाव, अत्यधिक कैफीन लेने और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करने से यह बढ़ जाती है। 5. इस बारे में जानकारी किस डॉक्टर ने दी है? इस बारे में डॉ. जयदीप बंसल, प्रधान निदेशक एवं एचओडी न्यूरोलॉजी, फोर्टिस, शालीमार बाग ने जानकारी दी है। 6. किन लक्षणों के बाद डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए? चक्कर आने, बेहोशी, जीभ कटने या पेशाब पर नियंत्रण न रहने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। https://trendkia.com/health/ninda-men-achanaka-ane-vale-jhatake-kya-kisi-bimari-ka-snketa-hain-ya-samanya-prakriya-57317 TrendKia — Har trend, sabse pehle.