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  "type": "article",
  "title": "नींद में तकिए पर लार के निशान सामान्य आदत हैं या किसी बीमारी की चेतावनी?",
  "summary": "रात को सोते समय कभी-कभार मुंह से लार गिरना भले ही आम बात हो, लेकिन रोजाना अत्यधिक लार बहना, खर्राटे और सांस रुकना स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।",
  "content": "सुबह सोकर उठने के बाद तकिए पर लार की नमी या गीले निशान देखना कई लोगों के लिए एक असहज अनुभव होता है। अक्सर लोग इसे केवल गहरी नींद का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब कोई व्यक्ति करवट लेकर सोता है या अनजाने में उसका मुंह खुला रह जाता है, तब कभी-कभार हल्की लार बाहर आना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया हो सकती है। फिर भी, यदि यह सिलसिला लगभग हर रात दोहराया जा रहा हो और मुंह से निकलने वाली लार की मात्रा बहुत अधिक हो, तो इसे केवल एक साधारण आदत मानकर छोड़ देना स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। नियमित रूप से लार का बहना शरीर के भीतर छिपी किसी अन्य चिकित्सीय परेशानी की ओर इशारा कर सकता है।\n\nचिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सोते समय मुंह से लगातार तरल निकलने का कारण केवल सोने का गलत तरीका ही नहीं होता। इसके पीछे नाक का पुराना अवरोध, रात भर मुंह से सांस लेने की विवशता या श्वसन और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी अन्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसी स्थिति सामने आने पर घबराहट में पड़ने के बजाय इस शारीरिक प्रतिक्रिया के मूल कारणों को समझना आवश्यक है, ताकि सही समय पर डॉक्टरी परामर्श लेकर उचित समाधान किया जा सके।\n\nसोते वक्त मुंह से लार बाहर क्यों आने लगती है?\nजब मनुष्य जाग रहा होता है, तब मुंह में बनने वाली लार को वह स्वाभाविक और अनैच्छिक रूप से समय-समय पर निगलता रहता है। इसके विपरीत जब हम गहरी नींद में चले जाते हैं, तब शरीर की निगलने की यह स्वाभाविक प्रक्रिया काफी धीमी पड़ जाती है। इस सुस्त गति के कारण मुंह में लगातार उत्पादित होने वाली लार पूरी तरह और तुरंत अंदर नहीं जा पाती। यदि उसी दौरान व्यक्ति का मुंह थोड़ा भी खुला रह जाए, तो वह अतिरिक्त लार गुरुत्वाकर्षण के कारण होंठों से बाहर रिसने लगती है।\n\nइसमें व्यक्ति के सोने की मुद्रा भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पेट के बल या किसी एक करवट होकर सोने की स्थिति में मुंह का एक कोना नीचे की तरफ झुक जाता है, जिससे मुंह के भीतर रुका हुआ तरल सीधे तकिए पर गिरने लगता है। इसके अतिरिक्त कुछ व्यक्तियों के शरीर में लार ग्रंथियां सामान्य से अधिक सक्रिय होती हैं, जिसके कारण अत्यधिक लार बनती है। वहीं कई बार चेहरे की मांसपेशियों पर समुचित नियंत्रण न रह पाने अथवा उनकी शिथिलता के कारण भी सोते समय लार को मुंह के भीतर रोके रखना संभव नहीं हो पाता। यदि ऐसा कभी-कभार ही होता है और दिनचर्या में कोई अन्य शारीरिक असहजता महसूस नहीं होती, तो आमतौर पर किसी विशेष चिंता की जरूरत नहीं होती। परंतु जब यह प्रतिदिन का नियम बन जाए अथवा अन्य असहज करने वाले लक्षणों के साथ प्रकट हो, तब इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता होती है।\n\nकिन शारीरिक वजहों से बढ़ जाती है लार गिरने की यह दिक्कत?\nअत्यधिक लार बहने की समस्या को कई प्रमुख चिकित्सीय और शारीरिक कारक तीव्र कर सकते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है।\n\nमौसम में बदलाव, सामान्य सर्दी-जुकाम, मौसमी एलर्जी अथवा साइनस में सूजन के कारण अक्सर नाक के अंदरूनी मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते हैं। जब व्यक्ति नाक से सामान्य रूप से हवा अंदर खींचने में असमर्थ हो जाता है, तो शरीर ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए अपने आप मुंह से सांस लेना शुरू कर देता है। रात भर मुंह खुला रहने से लार का बाहर टपकना अत्यंत सहज हो जाता है। जिन लोगों की नाक अक्सर बंद रहती है और वे रात भर खुले मुंह से सांस खींचते हैं, उन्हें सबसे पहले अपनी नाक की रुकावट और श्वसन मार्ग के मूल कारण की जांच करानी चाहिए।\n\nरात में सोते समय बहुत तेज आवाज में खर्राटे लेना अथवा नींद में बार-बार सांस का प्रवाह कुछ सेकंड के लिए थम जाना एक गंभीर विकार की निशानी हो सकता है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नामक स्थिति में श्वसन मार्ग बार-बार संकरा हो जाता है या पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच जाता है। इस विकार से पीड़ित लोग पर्याप्त हवा पाने के लिए मजबूरी में मुंह खोलकर सांस लेते हैं, जिसके कारण लार का बाहर गिरना बहुत बढ़ जाता है। यदि लार बहने के साथ-साथ तेज खर्राटों की आवाज आती हो, रात में अचानक सांस रुकने से हड़बड़ाकर आंख खुलती हो, अथवा पूरी रात सोने के बावजूद दिन के समय अत्यधिक थकान और अत्यधिक नींद का अहसास बना रहता हो, तो बिना देर किए स्लीप विशेषज्ञ अथवा योग्य चिकित्सक से जांच कराना बेहद जरूरी है।\n\nमुंह में बनने वाली लार को सही ढंग से गले के नीचे न उतार पाने के कारण भी वह मुंह के अंदर इकट्ठी होकर बाहर बहने लगती है। यह स्थिति कई बार तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियों अथवा चेहरे, जीभ और जबड़े की मांसपेशियों में कमजोरी आने से पैदा होती है। ऐसे रोगियों में लार के टपकने को केवल एक सामान्य समस्या मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि शरीर में दिख रहे अन्य संकेतों पर भी गंभीरता से गौर करना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि चेहरे के किसी एक हिस्से में मांसपेशियों का ढीलापन महसूस हो, साफ बोलने या शब्दों के उच्चारण में अचानक लड़खड़ाहट आए, भोजन या पानी निगलने में कठिनाई का सामना करना पड़े, अथवा व्यक्ति के चलने-फिरने के संतुलन और शारीरिक चाल में कोई नया बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।\n\nरात में लार बहने की परेशानी को नियंत्रित करने के जरूरी उपाय\nसोते समय लार गिरने की आवृत्ति को कम करने के लिए सबसे पहला कदम यह निर्धारित करना है कि इसका वास्तविक कारण क्या है। यदि नाक लंबे समय से बंद रहती है, तो ईएनटी विशेषज्ञ से मिलकर एलर्जी, नेजल पॉलिप्स या अन्य श्वसन संक्रमण की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर समस्या के आधार पर उपयुक्त नेजल स्प्रे या दवाएं निर्धारित करेंगे। कभी भी बिना डॉक्टरी पर्चे के स्वयं दवाएं लेने से बचना चाहिए।\n\nसोने की शारीरिक मुद्रा में बदलाव करना भी कई व्यक्तियों के लिए बेहद प्रभावी सिद्ध होता है। यदि आप निरंतर एक ही करवट या पेट के बल सोने के आदी हैं और उसी दौरान लार बाहर गिरती है, तो पीठ के बल सीधा सोने का प्रयास करें। पीठ के बल लेटने से गुरुत्वाकर्षण के कारण लार बाहर बहने के बजाय गले की नली की ओर सामान्य रूप से बनी रहती है।\n\nजिन लोगों को अत्यधिक खर्राटों और स्लीप एपनिया की आशंका हो, उन्हें स्लीप स्टडी करवाकर बीमारी की पुष्टि करानी चाहिए। स्थिति स्पष्ट होने पर चिकित्सक निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव अथवा अन्य आवश्यक उपचार पद्धतियों की सलाह देते हैं, जिससे सांस का रास्ता खुला रहता है और मुंह बंद रखकर सोने में सहायता मिलती है।\n\nछोटे बच्चों के मामले में, यदि उनका मुंह सोते समय लगातार खुला रहता है और वे नाक से सांस लेने में कठिनाई महसूस करते हैं, तो गले के पिछले हिस्से में मौजूद बढ़े हुए एडिनॉइड्स ऊतकों की जांच कराई जानी चाहिए। समय पर पहचान होने से बच्चों के चेहरे के विकास और नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ने से रोका जा सकता है।\n\nनिष्कर्षतः, कभी-कभार सोते समय थोड़ी लार गिरना सामान्य हो सकता है, लेकिन हर रात अत्यधिक मात्रा में लार बहना, लगातार खर्राटे, सांस उखड़ना, निगलने में रुकावट या चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना सेहत के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nसोते समय अत्यधिक लार बहने की समस्या को पहचानकर पाठक समय रहते गंभीर सांस और तंत्रिका विकारों से अपना बचाव कर सकते हैं।\n\n• दैनिक नींद की गुणवत्ता: मुंह से सांस लेने की आदत से सुबह गला सूखने और दिन भर भारीपन महसूस हो सकता है। नाक की रुकावट दूर करने से रात की नींद गहरी होगी और दिन में काम पर ध्यान केंद्रित करना आसान रहेगा।\n• स्लीप एपनिया की समय पर पहचान: भारी खर्राटों और लार गिरने के संयोग को पहचानकर समय पर जांच कराना संभव होता है। इससे रात में सांस रुकने के कारण दिल और रक्तचाप पर पड़ने वाले दबाव को समय रहते रोका जा सकता है।\n• मुद्रा में बदलाव के आसान उपाय: करवट या पेट के बल सोने के बजाय पीठ के बल सोने की आदत तकिए पर लार बहने की समस्या को तुरंत कम कर सकती है। इसके लिए किसी अतिरिक्त खर्च के बिना केवल सोने के तकिए की ऊंचाई और शरीर की स्थिति को संतुलित करना होता है।\n• बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी: यदि घर में छोटे बच्चे रात भर मुंह खोलकर सोते हैं और लार गिराते हैं, तो माता-पिता समय पर एडिनॉइड्स की जांच करा सकते हैं। इससे बच्चों के चेहरे के जबड़े के सही विकास और श्वसन क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nनींद के दौरान मुंह से लार का बाहर निकलना शारीरिक क्रियाओं की सुस्ती, श्वसन मार्ग की रुकावट और मांसपेशियों के शिथिल होने की संयुक्त प्रक्रिया के कारण होता है।\n\n• निगलने की सुस्त शारीरिक गति: गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क की निगलने की अनैच्छिक प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप मुंह में बनने वाली लार तुरंत गले में नहीं उतरती और यदि होंठ खुले हों तो बाहर रिसने लगती है।\n• नाक के श्वसन मार्ग का अवरोध: सर्दी, जुकाम, साइनस संक्रमण या मौसमी एलर्जी के कारण जब नाक के मार्ग में सूजन आ जाती है, तो सांस लेने के लिए मुंह खोलना पड़ता है। खुले मुंह की स्थिति लार को मुंह के भीतर रोके रखने में असमर्थ हो जाती है।\n• वायुमार्ग का संकुचन और स्लीप एपनिया: ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में गले की मांसपेशियां ढीली होकर सांस की नली को संकरा या बंद कर देती हैं। इससे मरीज को जोर-जोर से खर्राटे लेने पड़ते हैं और मुंह से हवा खींचने के दौरान लार बाहर टपकने लगती है।\n• मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र की कमजोरी: चेहरे और जबड़े की पेशियों पर शिथिलता आने या तंत्रिका तंत्र संबंधी असामान्यताओं के कारण होंठ पूरी तरह बंद नहीं रह पाते। लार को नियंत्रित करने वाली क्षमता घटने से तरल मुंह के किनारों से बह जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोते समय मुंह से लार निकलना किन परिस्थितियों में सामान्य माना जाता है?\nयदि ऐसा कभी-कभार ही होता है, खासकर जब आप करवट लेकर सो रहे हों और कोई अन्य शारीरिक परेशानी न हो, तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है।\n\n2. क्या बंद नाक के कारण सोते समय लार बहने की समस्या बढ़ सकती है?\nहां, सर्दी, साइनस या एलर्जी से नाक बंद होने पर व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है, जिससे मुंह खुला रहने पर लार बाहर टपकने लगती है।\n\n3. लार टपकने के साथ तेज खर्राटे किस गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं?\nयह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है, जिसमें नींद के दौरान सांस की नली बार-बार संकरी या अवरुद्ध हो जाती है।\n\n4. सोने की किस मुद्रा से लार बहने की समस्या को कम किया जा सकता है?\nपीठ के बल सीधा सोने से गुरुत्वाकर्षण के कारण लार बाहर गिरने के बजाय गले की ओर स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।\n\n5. मुंह से लार गिरने पर तुरंत डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?\nयदि लार बहने के साथ चेहरे के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने या निगलने में कठिनाई, या तेज खर्राटे और सांस रुकने के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।\n\n6. बच्चों में लगातार मुंह खुला रहने और लार बहने का क्या कारण हो सकता है?\nबच्चों में नाक से सांस लेने में कठिनाई और लार बहना बढ़े हुए एडिनॉइड्स ऊतकों की वजह से हो सकता है, जिसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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