# नोएडा फोर्टिस की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता ने बताए दिमागी सेहत के महत्वपूर्ण संकेत, जानें क्यों दिल जितनी जरूरी है ब्रेन केयर

> लोग अक्सर दिल की सेहत पर ध्यान देते हैं लेकिन दिमाग की अनदेखी कर देते हैं, जिससे स्ट्रोक और याददाश्त घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि सही जीवनशैली अपनाकर और शुरुआती लक्षणों को पहचानकर दिमाग को कैसे सेहतमंद रखा जाए।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/noida-fortis-ki-nyurolojista-dr-neha-pandita-ne-batae-dimagi-sehata-ke-mahatvapurna-snketa-janen-kyon-dila-jitani-jaruri-hai-brena-15155 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिमागी सेहत, ब्रेन केयर, न्यूरोलॉजी, डॉ नेहा पंडिता, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा, याददाश्त, स्ट्रोक लक्षण

आम तौर पर लोग अपने हृदय को तंदुरुस्त रखने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। सुबह की सैर पर जाना, भोजन में तेल-घी की मात्रा सीमित रखना, नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना, ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना और समय-समय पर डॉक्टर से पूरे शरीर का हेल्थ चेकअप कराना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन जब बात मस्तिष्क की सेहत की आती है, तो ज्यादातर लोग इसके प्रति बेपरवाह नजर आते हैं। अमूमन दिमाग के स्वास्थ्य पर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक कि कोई गंभीर चिकित्सीय स्थिति पैदा न हो जाए। जब किसी व्यक्ति को स्ट्रोक का दौरा पड़ता है, हाथों में कंपन शुरू होता है, याददाश्त तेजी से कमजोर होने लगती है या बोलने में रुकावट आने लगती है, तब लोग न्यूरोलॉजिस्ट का रुख करते हैं। वास्तविकता यह है कि शरीर के अन्य अंगों की तरह हमारे मस्तिष्क को भी नियमित देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है।

## शुरुआती शारीरिक बदलावों को अनदेखा करने की भूल
मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं और उनके शुरुआती लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में पार्किंसंस डिजीज एवं मूवमेंट डिसऑर्डर्स की सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट एवं क्लिनिकल लीड डॉक्टर नेहा पंडिता का कहना है कि अस्पताल में ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं जो महीनों से भूलने की आदत का सामना कर रहे होते हैं। वे इन लक्षणों को बढ़ती उम्र का स्वाभाविक परिणाम मानकर टालते रहते हैं। इसके अलावा कई मरीज ऐसे भी आते हैं जिन्हें चलते समय शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी होती है या जिनके हाथों में बारीक कंपन महसूस होता है। लोग अक्सर इन प्राथमिक बदलावों को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे स्थिति बाद में और अधिक जटिल हो जाती है।

## हृदय को नुकसान पहुंचाने वाली आदतें दिमाग पर भी डालती हैं बुरा असर
मस्तिष्क कभी भी अचानक खराब नहीं होता, बल्कि वह समय रहते छोटे-छोटे संकेतों के माध्यम से सचेत करता है। आवश्यकता केवल उन शारीरिक चेतावनियों को समय पर पहचानने की होती है। मानव शरीर में दिल और दिमाग का संबंध बेहद गहरा और अनूठा है। जो कारक हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, वही कारक मस्तिष्क के लिए भी उतने ही हानिकारक सिद्ध होते हैं। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रहता है, जिनकी शुगर नियंत्रित नहीं रहती, शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होता है या जो लोग धूम्रपान की लत से ग्रस्त हैं, उनमें केवल दिल का दौरा पड़ने का ही जोखिम नहीं होता। ऐसे व्यक्तियों में स्ट्रोक आने और याददाश्त से जुड़ी गंभीर बीमारियों के पनपने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।

## आधुनिक जीवनशैली और युवाओं में घटती एकाग्रता
डिजिटल युग में हमारी दैनिक आदतें भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं। सुबह सोकर उठते ही सबसे पहले मोबाइल स्क्रीन देखना, दफ्तर में घंटों कंप्यूटर के सामने बिना ब्रेक लिए बैठना, पर्याप्त और गहरी नींद न लेना, मानसिक तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधियों का न के बराबर होना दिमाग को खोखला बना रहा है। आज के समय में बड़ी संख्या में युवा मरीज न्यूरोलॉजिस्ट के पास यह शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि वे चीजें जल्दी भूल जाते हैं और काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। चिकित्सकीय जांच में अक्सर कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आती, लेकिन उनकी अस्त-व्यस्त दिनचर्या से यह स्पष्ट हो जाता है कि उनके मस्तिष्क को विश्राम और रिकवरी का अवसर ही नहीं मिल पा रहा है।

## दवाओं से अधिक कारगार है संतुलित जीवनशैली
जब मरीज डॉक्टरों से दिमाग को तेज और स्वस्थ रखने के लिए दवाइयों के बारे में पूछते हैं, तो विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि मस्तिष्क के लिए सबसे अच्छी औषधि कोई गोली नहीं बल्कि एक अनुशासित जीवनशैली है। मस्तिष्क को सक्रिय रखने के लिए रोजाना थोड़ी देर पैदल चलना, कम से कम सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना, नई कलाएं या भाषाएं सीखना, किताबें पढ़ना, परिजनों और दोस्तों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना, संगीत सुनना तथा तनाव प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है। हमारा मस्तिष्क एक मांसपेशी की तरह काम करता है, इसका जितना सही और सकारात्मक उपयोग किया जाएगा, इसकी कार्यक्षमता उतनी ही बेहतर होती जाएगी।

## कब किसी विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें?
साधारण भूलने की आदत और किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बीच अंतर को समझना बहुत जरूरी है। कभी-कभार घर या गाड़ी की चाबी रखकर भूल जाना अथवा किसी परिचित का नाम याद करने में कुछ सेकंड का समय लगना पूरी तरह से सामान्य है। हालांकि, यदि भूलने की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हो, दिनचर्या के सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगे हों, भाषा का प्रयोग करने, चलने या शरीर का संतुलन बनाए रखने में बदलाव महसूस हो, तो इसे केवल बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए।

## इसका आप पर असर
**पाठकों पर प्रभाव:**

- **भारत में:** डिजिटल जीवनशैली और तनाव के कारण युवाओं में घटती एकाग्रता को रोकने के लिए नियमित नींद और स्क्रीन-टाइम कम करने की सख्त जरूरत है।
- **नोएडा/एनसीआर में:** स्थानीय निवासी फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में विशेषज्ञों से न्यूरोलॉजिकल जांच और मूवमेंट डिसऑर्डर परामर्श ले सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दिमाग की सेहत के लिए कौन-कौन से शुरुआती लक्षण खतरनाक हो सकते हैं?
याददाश्त का लगातार कमजोर होना, हाथों में कंपन, चलते समय संतुलन बिगड़ना और बोलने में तकलीफ होना शुरुआती लक्षण हो सकते हैं जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।

### 2. क्या दिल की बीमारियां दिमाग पर भी असर डालती हैं?
हां, हाई ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित शुगर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान से दिल के साथ-साथ स्ट्रोक और याददाश्त घटने का खतरा बढ़ जाता है।

### 3. स्क्रीन टाइम और मोबाइल का दिमागी सेहत पर क्या असर पड़ता है?
लगातार स्क्रीन के सामने रहने और सुबह उठते ही मोबाइल देखने से दिमाग को आराम नहीं मिलता, जिससे एकाग्रता में कमी और भूलने की समस्या होती है।

### 4. दिमाग को स्वस्थ और तेज रखने के लिए क्या करना चाहिए?
रोजाना सैर करना, पर्याप्त नींद लेना, नई चीजें सीखना, किताबें पढ़ना, परिवार के साथ समय बिताना और तनाव कम करना दिमाग को सक्रिय रखता है।

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